शनिवार, 14 अप्रैल 2018

#मैंअपराजिताकहानीप्रतियाेगिता 1

सुबह सुबह वह इसी साेच के साथ उठी कि आज से वह अपनी जिंदगी काे नया रंग देगी। पता नहीं ईश्वर ने कितना जीवन दिया है इसलिए वह अपने सपनाें काे हकीकत में बदलेंगी। रिया, मीना, प्रतीक और संज्ञान भी ताे है सब ने अपनी जिंदगी का एक टुकड़ा अपने लिए भी रखा है। अभी हाल ही में संज्ञान काे पुरस्कार मिलाऔर उसने कितने खूबसूरत तरीके से उसका जश्न मनाया। जबिक उसकी बीवी काे उसके इन सारे कामकाज में काेई दिलचस्पी नहीं। उसे ताे शायरी समझ ही नहीं आती। जाती थी ना पहले संज्ञान के साथ ध्यान हमेशा घड़ी में रहता था। पर संज्ञान ने शायरी का जुनीन न छाेड़ा और आज देखाे। और यह प्रतीक जब देखाे तब घर के कचरे में से कुछ न कुछ बनाता नजर आता। उसकी बीवी ने पानी की पुरानी बाेतल फैंक दी और वह उठा कर ले आया। उसकी बीवी काे कचरा पसंद नहीं और प्रतीक काे कचरा सहजने में मजा आता है। पुरानी बाेतल से उसने बहुत खूबसूरत पाट बनाए हैं । फेसबुक में कल उसकी पाेस्ट देखी हैरान हूं। बदला नहीं प्रतीक। रिया और मीना ने भी कहां बदला खुद का। रिया ताे वैसी ही बिंदास है नपहले डरती थी और न अब। हम कहते थे पुलिस में चले जा। पर वह पुलिस में ताे नहीं गई पर विधायक बन गई।हर समय लाेगाें से घिरी रहती है। शहर में उसका नाम है। बदनामी भी मिलती है। पर उसका अपना स्पेस ताे है ना। मीना के बारे में भी सुन ही लाे। उसकी एक अजीब सी आदत थी। दब भी सहेलियाें में झगड़ा हाेता ताे वह जिसने झगड़ा किया उसके साथ हाे लेती। उससे बार बार पूछती कि तूने एेसा किया क्याें। हम उससे नाराज हाेते। लेकिन वह चाेर की हमदर्द बन जाती। पिछले दिनाें एेेसे ही एक किताब पर नजर पड़ी अपराध के भीतर की तलछट लेखिका का नाम देखा मीना। तुरंत प्रकाशक काे फाेन करके मीना का नंबर मांगा।
इस एक महीने से मैं इसी पशाेपेश में हूं कि सबने अपना आकाश चुन लिया मैं ही अंधेरे में क्यूं रहूं। जुगनू ताे अंधेरे में ही टिंटिमाते है। कल रात कई जुगुनू मेरा आत्मविश्वास बढ़ा रहे थे.........


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अब कहानी का विस्तार आप दें। यही है प्रतियाेगिता

सुनहरा समय -मंजू सिंह


जीवन की भागदौड़ में कब ज़िन्दगी मुटठी की रेत की मानिंद हाथों से फिसल जाती है,पता ही नहीं चलता .घर बाहर की उलझनें ,बच्चो की ज़रूरतें,उनकी पढ़ाई,शादी और न जाने क्या-क्या ! यह सब करते बालों में कब सफेदी आ गयी,चेहरे की लकीरें कब गहरी हुईं और बूढी हड्डियों ने कब जवाब देना शुरू कर दिया, पता नहीं ! अपने मन की कब सुनी ,कब समझी ,कब की- याद नहीं .कभी घर और बच्चों के अलावा कुछ सूझा ही नहीं .
जी हाँ ! अधिकतर लोगों की यही कहानी होती है . हमारे देश में एक मध्यम वर्गीय परिवार में माता-पिता ऐसे ही ज़िन्दगी गुज़ार देते हैं और एक दिन आता है जब वे अपनी सभी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करने के बाद रिटायर हो जाते हैं .दफ्तर के लोग साठ वर्ष का होने पर जब गले में माला पहनाकर घर छोड़ने आते हैं तब एक परंपरा के अनुसार नाते-रिश्तेदारो को इकट्ठा कर दावत दी जाती है खूब नाच-गाना होता है .अच्छा लगता है कि चलो सब कामो से मुक्ति मिली आखिर कितने लोग होते हैं जिन्हें यह दिन देखना नसीब होता है.
अगले ही दिन एक खालीपन इंसान को घेरने लगता है.भीतर कहीं अपने बेकार हो जाने का एहसास सर उठाने लगता है.ऐसा लगता है जैसे आस –पास की हर नज़र घूर रही है .घर के एक फालतू सामान बन जाते हैं हम .एक अवसाद सा मन में घर करने लगता है .यही वह समय होता है जब हमे सँभलने की आवश्यकता होती है |
रिटायरमेंट के बाद का समय कैसे बिताये इसकी योजना बनाने की सोचें आप कोई निरर्थक सामान नहीं हैं .आपने अपना पूरा जीवन दिया है घर को और घर के सदस्यों को, अब बारी है आपकी .बचा हुआ जीवन सुख-चैन से अपने मन मुताबिक जीने की. आखिर ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा .अपनी कुछ धनराशि को अपने घूमने-फिरने के लिए अवश्य रखें यदि पति-पत्नी दोनों ही काम-काजी हों तो रिटायरमेंट आगे-पीछे होता है जब तक दोनों रिटायर न हो जाएँ तब तक छुटियों का भरपूर आनंद लें
अपनी दिनचर्या में सुबह शाम सैर और व्यायाम के लिए समय अवश्य निकालें याद रहे स्वस्थ्य हज़ार नियमित.अपनी दवा आदि के समय का ध्यान रखिये
अपने शौक जो आप अपनी व्यस्तता के चलते कभी पूरे नहीं कर पाए उनके विषय में सोचिये और समय निकालकर कुछ न कुछ अवश्य करिये.आप अपना बाग़बानी का शौक पूरा कर सकते हैं यदि जगह है तो कहने ही क्या घर की उगी ताज़ा सब्ज़ी का आनंद और स्वाद तो अलग होगा ही साथ ही आप मिलावटी नकली रंगी हुई सब्ज़ी खाने से भी बच जायेंगे।

यदि आप अपना पुस्तक-प्रेम निभाना चाहते हैं तो पढ़िए-कहते हैं की पुस्तक से अच्छा और सच्चा साथी और कोई नहीं होता पुस्तकें आपको दुनिया के कई नए स्थानों. की सैर कराएंगी और नए लोगों से भी मिलवाएंगी आप चाहें तो ह लिखने का शौक भी पूरा कर सकते हैं अपने मन की बात जो आप कभी न कह पाए हों अपनी कलम को कहने दीजिये न ! वैसे यदि आप टेक्नोलॉजी से परिचित हैं तो आपके लिए अन्य कई विकल्प खुल जाते हैं आप एंड्राइड के माध्यम से बहुत कुछ सीख या कर सकते हैं अपने पुराने मित्रों एवं सम्बन्धियों से एक बार फिर संपर्क साध सकते हैं यह काफी रोमांचक और प्रसन्नता देने वाला होगा . अपने बच्चों व्नातीपोतों से सीख सकते हैं .एक नयी दुनिया के द्वार खुल जायेंगे आपके लिए .
ज़िन्दगी की उलझनों और आपा-धापी में हमारे रिश्तों के धागे कुछ कमज़ोर पड़ जाते हैं लोगों की हमेशा यह शिकायत ही रहती है कि अब हम स्वार्थी हो गए हैं अपने में मगन रहनेवाले हो गए हैं किसी से कोई मतलब ही नहीं रखते....तो इन मीठे उलाहनों पर भी ध्यान देने और सब की शिकायत मिटने का अच्छा समय है अब आपके पास सबसे मिलिए जूलिये और पुराने समय कि यादें ताज़ा करिये सब के साथ मिलकर तीज-त्योहारों का आनंद लीजिये नाचते- गाते, हँसते- खेलते जीवन व्यतीत कीजिये उम्र बस एक नंबर है आप दिल से युवा महसूस करेंगे .स्वस्थ्य भी अच्छा रहेगा .
नयी पीढ़ी के लोगों के साथ विचारों कि कश- म- कश में उलझकर अपना और बच्चों का जीवन मुश्किल कर लेते हैं हम कभी-कभी .यदि आप उनकी सहूलियतों का ध्यान रखेंगे,उनकी भावनाओं को समझेंगे तो वे कभी आपसे विमुख न होंगे और जीवन आसान हो जायेगा .
एक अंतिम किन्तु आवश्यक बात,अपनी जमा-पूंजी में से कुछ बच्चों को अवश्य दें इससे आपसी प्यार और विश्वास बढ़ेगा,परंतु अपने लिए एक ऐसी राशि अवश्य रखें जिसके सहारे आपका शेष जीवन सरलता से बीत जाये और बच्चों को भी यह आशा रहे कि सेवा करेंगे तो मेवा मिलेगा ...अन्यथा न लें,ऐसी सोच प्रायः देखने को मिलती है वैसे इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि हम अपने बच्चों पर भरोसा न करें .उनपर पूरा भरोसा रखें.आपसी सहयोग से चलें और यह तो कदापि न समझें कि अब तो जीवन थोड़ा ही बचा है काट लेंगे जैसे-तैसे यह सोचकर बैठे रहेंगे कि अब तो बस कुछ ही दिन जीना है यूँही काटलें,बुढ़ापे में कैसा घूमना और कैसा आनंद .तो जीवन सिमटकर और छोटा तथा कठिन हो जायेगा .
जीवन जीने के लिए है जियो जीभर के .

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

उर्वशी बन सकती हैं मिसेज इंडिया


   लंदन में कलर्स टीवी और बैंड वर्क द्वारा आयोजित मिसेज इंडिया यूके 2018’ स्पर्धा के फाइनल राउंड में उर्वशी सालारिया चावला ने अपनी जगह बनाई है। इसका ग्रैंड फिनाले 15 अप्रैल को लंदन के हिल्टन टॉवर ब्रिज होटल में आयोजित किया जाएगा।
 यूनाइटेड किंगडम में रहने वाली एशियाई विवाहित महिलाओं के लिए मिसेज इंडिया यूके एक अनूठी सौंदर्य प्रतियोगिता है। इस साल इस प्रतियाेगिता में  उर्वशी सालारिया चावला ने भी हिस्सा लिया है।
काैन है उर्वशी
 उर्वशी मेकअप इंडस्ट्री की एक सफल उद्यमी हैं और भारत में एक ब्यूटी स्टूडियो का मालिक है।लंदन में एशियाई दुल्हनों के मेकअप की एक सम्मानित कलाकार हैं। पत्रकारिता में स्नातकविमानन उद्योग में काम कर चुकी एवं एक सौंदर्य ब्लॉगर उर्वशी सालारिया चावला फिलहाल ब्रिटेन में रहने वाली शादीशुदा एशियाई महिलाओं का बड़े प्लेटफार्म पर प्रतिनिधित्व करती हैं। शादी करने के बाद से उर्वशी सालारिया चावला चार वर्षों से लंदन में रह रही हैं। इतना ही नहींउर्वशी सालारिया चावला एक पर्यावरणविद् भी हैंजो जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाने में विश्वास रखती हैं। वह कई पौधरोपण अभियान का संचालन कर चुकी हैं और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ अर्थ आॅवर अभियान जैसे पर्यावरण संबंधी गतिविधियों से भी स्वयंसेवी के तौर पर जुड़ी हुई हैं। उर्वशी एक उद्देश्य के लिए सौंदर्य’ की अवधारणा में विश्वास करती हैं। वह मिसेज इंडिया यूके 2018’ स्पर्धा में 30 अन्य मल्टीटैलेंटेड फाइनलिस्ट के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगी।
क्या इस प्रतियाेगिता का उद्देश्य
 उल्लेखनीय है कि मिसेज इंडिया यूके’ प्रतियोगिता का मकसद एशियाई विवाहित महिलाओं को सशक्त बनाने  के हिसाब से किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर प्रदान कराना है। यह प्रतियोगिता अपने मेंटर्स की मदद से विदेशों में भारतीयों की विविध संस्कृतियों के बीच संबंधों को सीखनेआत्मविकासआत्मविश्वास और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रेरित करता है। उर्वशी और मिसेज इंडिया यूके’ प्रतियोगिता की अन्य सभी प्रतियोगी फिलहाल विभिन्न सलाहकारों के साथ गहन प्रशिक्षण के दौर से गुजर रही हैं।  इस प्रशिक्षण के दौरान इन प्रतिभागियों के लिए फिटनेसकैटवॉकएक्टिंगफोटोशूट जैसे कई सेशंस हैं।
क्या कहती हैं उर्वशी
 उर्वशी बताती है, ‘हमारे मेंटर्स ने हमारी इस प्रशिक्षण यात्रा के दौरान हर किसी की सहायता करने के साथ ही खुद पर ध्यान केंद्रित करने के टिप्स बताने  में मदद कर रहे हैं। इतना ही नहींवे ऑनलाइन सेशंस के माध्यम से भी हमें सलाह उपलब्ध करा रहे हैं।’ उल्लेखनीय है कि सुंदरता शारीरिक नहींमानसिक और दिल से होना चाहिए’ के सिद्धांत पर यकीन करने वाली उर्वशी ने हाल ही में मिसेज इंडिया यूके’ की उपटाइटल मिसेज इंडिया ग्लैमरस’ खिताब जीता है।

बेटे की चाहत- कमलेश आहूजा

माँ का नाम आते ही मन श्रद्धा और प्रेम से भर जाता है .वैसे तो माता पिता दोनों ही बच्चों के लिए अहम होते है ,किंतु कहीं ना कहीं माँ बच्चों के दिल के ज़्यादा क़रीब होती है ..,उनका दुःख दर्द बिना कहे ही भाँप लेती है.
मीना के बड़े बेटे रोहित की १२वी बोर्ड की परीक्षाएँ शुरू होने वाली थी ..रोहित पढ़ने में बहुत होशियार था ......हमेशा कक्षा में अव्वल आता था.इस बार तो उसने पूरे वर्ष बहुत मेहनत की थी ...वह इंजीनियर बनना चाहता था,ओर इसके लिए उसके पास मात्र एक ही विकल्प था कि १२वी बोर्ड की परीक्षा में उसके अच्छे अंक आएँ....क्योंकि उस समय प्रवेश परीक्षाओं का प्रावधान नहीं था .
सब कुछ ठीक चल रहा था ...परीक्षा शुरू होने में शेष दो दिन रह गए थे ...मीना बेटे के साथ बैठी थी,क्योंकि मीना ने भी रसायनशास्त्र में एम.एस सी. की थी तो बेटे को जहाँ कही दिक़्क़त होती ...वह मदद करती .अचानक पति के ऑफ़िस से फ़ोन आया कि उनकी तबियत बिगड़ गयी थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है .मीना को तो मानो काटो तो ख़ून नहीं ,ऐसी हालत हो गयी बेचारी की.बेटा भी घबरा गया और रोने लगा .बेटे को रोते देखकर ....मीना ने अपने आपको सम्भाला ओर रोहित को ढाँढस बँधाने लगी..."बेटा सब ठीक हो जाएगा.मैं हूँ ना,तुम केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो".रोहित की पूरी परीक्षा के दौरान मीना के पति के दो मेजर ऑपरेशन हुए ,उसका एक पांव घर में व एक अस्पताल में रहता ....पर उसने अपने आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया.....बड़े धैर्य के साथ दोनों बच्चों को अकेले सम्भाला.सदैव चेहरे पर मुस्कान लिए रहती ओर रोहित को भी प्रोत्साहित करती रहती.....परीक्षाएँ समाप्त हो गयी......मीना के पति भी सकुशल अस्पताल से घर आ गए .कुछ ही दिन में रोहित का रिज़ल्ट आ गया .....उसने अपने विद्यालय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान पाया साथ ही राज्य स्तर पर भी मेरिट में स्थान पाया...मीना और उसके पति तो ख़ुशी के मारे फूले नहीं समा रहे थे .... सब लोग बधाई दे रहे थे ......और सारा श्रेय रोहित को दे रहे थे।
रोहित के विद्यालय मे ऐसे बच्चों को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन रखा गया ,जिन्होंने १२वी बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करके विद्यालय का नाम रोशन किया था.अविभावको को भी बुलाया गया था .
मीना रोहित के साथ सबसे आगे की पंक्ति में बैठी थी. कार्यक्रम शुरू हुआ ....... कुछ औपचारिकतायों के बाद स्टेज पर रोहित को बुलाया गया .......प्रिन्सिपल व मुख्यअतिथि ने रोहित की पीठ थपथपाई ओर हाथ में माइक थमाते हुआ कहा ...."बेटा अपनी सफलता का श्रेय आप किसको देना चाहोगे..?" रोहित ने माइक हाथ में लिया.पहले थोड़ा नर्वस हो गया पर जल्दी ही उसने अपने को संभाल लिया और बोला- " मेरी सफलता के पीछे मेरी माँ का समर्पण है ....सब के लिए ये सामान्य सी बात हो, किंतु माँ के लिए वो समय किसी चुनौती से कम नहीं था .एक तरफ़ पापा का ऑपरेशन करवाना तो दूसरी ओर मेरी परीक्षा सुचारू रूप से सम्पन्न करवाना ....उस कठिन समय में भी उन्होंने अपना मनोबल बनाए रखा और मेरा भी उत्साह बनाए रखा.......जिसके पास ऐसी ममतामयी,धैर्यशाली माँ हो वो जीवन की हर कठिन से कठिन परीक्षा में सफल हो सकता है.मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि वो हर जन्म में मुझे ऐसी ही माँ दे........!! ".रोहित की आँखों में आँसू आ गए.वहाँ उपस्थित सभी अभिभावक भी रोहित की बातें सुनकर भावुक हो गए.
 कहानी से सीख-कठिन समय में यदि माता पिता अपना धैर्य बनाये रखते हैं और बच्चों को भी प्रोत्साहित करते रहते हैं, तो वह बच्चों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं. यही प्रेरणा उन्हें सफलता की ओर ले जाती है। और भविष्य के निर्माण में उनकी सहायक बनती है.यही इस कहानी का भाव है।

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

लाडो तूने खाना खाया की नहीं-डॉ शिल्पा जैन सुराणा

नेहा खाना बना कर किचन साफ कर ही रही थी कि सासु माँ ने आवाज़ दी'नेहा, नैना आ रही है, उसका भी खाना बना लो, और हाँ आरव के लिए खिचड़ी बना देना नेहा ने कहा है।' नेहा की सास ने कहा और चली गयी। सुबह से काम कर रही नेहा सोच ही रही थी कि काम कर के दस मिनट आराम कर लेती है, तभी उसकी ननंद का फ़ोन आ गया। नेहा की नंनद उसी शहर में रहती थी,तो जब भी उनका मन होता चली आती। नेहा को थोड़ी खीझ सी हुई, अब उसे सारी तैयारी दोबारा करनी पड़ेगी। कमरे में गयी तो देखा राहुल नैना दी को ले कर आने को तैयार हो रहे है। 'नेहा मै नैना को लेने जा रहा हूँ तुम उसका कमरा सही कर दो।' 'राहुल दीदी अगर आ ही रही है, तो सुबह ही बता देती, अभी मैने खाना बनाया है, अब फिर से सब करना पड़ेगा, पिछले 2 दिन से कामवाली भी नही आ रही।' 'नेहा कोई मेहमान थोड़ी ही आ रहा है, नैना ही तो है, वो कौन सा पचास पकवान खायेगी, दो तीन रोटी ही तो खायेगी, आटा लगा लो' राहुल कहते कहते बाहर निकल गए । 
आरोही भी स्कूल से आती ही होगी, उसे खाना भी तो खिलाना है। जल्दी जल्दी काम निपटाती हूँ, इन सब चक्करो में उसे ये भी याद नही रहा कि उसने सुबह से नाश्ता भी नही किया।' वो किचन से निकली कि नैना दी आ गयी, साथ मे उनका 2 साल का छोटा बेटा आरव भी था। 'अरे भाभी, आपने आरव की खिचड़ी तो बना दी। उसे बहुत भूख लगी है। पहले उसे खिलाती हूं।' "बहु खाना लगा दो' उसके सास ससुर आ गए थे। 'आयी मम्मी जी', वो किचन में गयी और सारा खाना डाईनिंग टेबल पर लगा दिया। Mummyyyyyyyy....आरोही आ गयी थी। उसने आरोही के कपड़े बदले और उसे खाना खिलाने लगी। 'अरे भाई, पेट मे बहुत चूहे दौड़ रहे है, कोई खाना भी खिलायेगा या नही' राहुल पेट पर हाथ फिरा कर बोले। आती हूँ, बस 2 मिनट, आरोही को खाना खिलाते हुए नेहा ने आवाज़ दी। 'भाभी, आरव खिचड़ी खा ही नही रहा, ऐसा करो कि इसका उपमा बना दो, वैसे भी आपके हाथ का उपमा बहुत ही टेस्टी होता है।' 'दीदी आप भी खाना खा लो, राहुल भी खा रहे है।' नही भाभी, अभी बिल्कुल इच्छा नही है। थोड़ी देर में खाऊँगी।'- नैना ने कहा। नेहा ने आरव के लिए उपमा बनाया। नेहा ने घड़ी पर नजर डाली, 2.30 बज रहे थे।
 आज तो मजा ही आ गया, खाना बहुत लाजवाब था, देखो पनीर की सारी सब्जी मैंने ही चट कर दी। 'भाभी देखो न भैया को, भैया आपको पता है न, मुझे भाभी के हाथ की बनी पनीर की सब्जी कितनी पसंद है, कम से कम मेरे लिए तो छोड़ देते।' नैना ने कहा 'अरे भाई sorry मै तो भूल ही गया था, चलो कोई नही, नेहा तुम्हारे लिए फिर से बना देगी।' राहुल ने नेहा की तरफ देखा। नेहा को गुस्सा आया पर वो चाह कर भी कुछ भी नही बोली, किचन में गयी और सब्जी बनाने लगी। 'मम्मी देखो न आरव ने मेरे सारे खिलोने ले लिए' आरोही नेहा की साड़ी का पल्लू खीचते हुए बोली। 'वो तुम्हारा छोटा भाई है ना, मिल कर खेलो' नेहा ने कहा। आरोही चली गई। "भाभी, बहुत जोरो से भूख लग रही है, मेरी सब्जी बन गयी क्या?' हां दीदी, अभी आयी' नेहा ने कहा। अभी वो नैना को खाना परोस कर आई ही थी कि सासु माँ की आवाज़ आयी, नेहा नेहा...। 'अरे बहु सुनो, वो जयपुर वाले चाचाजी का फ़ोन आया है, वो और उनका परिवार एक शादी में उदयपुर आया हुआ है, तो शाम को वो खाना खाने आ रहे है, तैयारी कर लेना, सिर्फ 6 लोग है, ऐसा करो कोई भी 2 सब्जी, रोटी, औऱ चावल दाल बना लेना, याद है पिछली बार आये थे तो तुम्हारे हाथ का संदेश उन्हें कितना पसंद आया, संदेश भी बना लेना। राहुल को कहना वो बाजार से समोसे भी ले आएगा। वो लोग 6.30 बजे तक पहुंच जाएंगे।ऐसा करो वो नई क्रोकरी जो दीवाली पर राहुल के आफिस से मिली थी, निकाल लेना, अच्छी दिखेगी। 
'मम्मी जी, ऐसा करिये न आप एक सब्जी बना दीजिये। मै उतने दूसरी तैयारी करती हूँ।' 'बना तो देती, पर आज सर में बहुत दर्द हो रहा है, वैसे भी ज्यादा तो कुछ करना नही।' इतना कह कर सासु जी सीधे अपने कमरे में चली गयी। भाभी, मेरा ब्लू कलर वाला सूट नही दिख रहा, आपने कही प्रेस वाले को तो नही दे दिया।- नैना ने पूछा 'वही तो है आपकी अलमारी में' 'अरे नही मिल रहा' रुको मै आती हूँ, नेहा ने कहा। अभी वो नैना को सूट दे कर आयी थी, आरोही रोते हुए बोली मम्मी मुझे नींद आ रही है, चलो न। नेहा ने घड़ी में देखा 4.30 बज रहे थे। उसने आज सुबह से कुछ भी नही खाया था। 'चलो न मम्मी' वो आरोही को सुलाने के लिये उसके पास लेट गयी। कब उसकी आंख लग गयी उसे पता ही नही चला। अचानक से वो उठी घड़ी में 6 बज रहे थे, अरे उसे तो अभी सारी तैयारियां करनी है।वो हड़बड़ा के उठी और सीधा किचन की तरफ गयी। यकायक उसकी स्पीड डबल हो गयी। एक तरफ सब्जी के लिए कड़ाही चढ़ाई। दूसरी तरफ दूध। 6.30 बज गए थे, चाचाजी और उनका परिवार आ गया था। सासु माँ किचन में गयी, देखा नेहा अभी भी खाना बना रही थी। 'अभी तक खाना नही बना,वो लोग आ गए है। ' वो....मम्मी जी आँख लग गयी थी, तो थोड़ा देर हो गयी।' ' जब पता है घर पर मेहमान आने वाले है तो सोना जरूरी था क्या? सासु माँ के चेहरे पर गुस्सा साफ झलक रहा था। चलो मैं नाश्ता ले जाती हूँ, शर्बत बना दो, और समोसे एक प्लेट में डाल दो। 'समोसे'...नेहा को जल्दी जल्दी में याद ही नही रहा कि उसे राहुल को समोसे लाने के लिए कहना है।
 सासु माँ का पारा चढ़ गया, इतने में चाचाजी भी रसोई में आ चुकी थी। 'देखो पद्मा, आजकल की बहुओ को, एक काम भी सही से नही होता। सिर्फ रसोई का काम तो देखना है, बाकी झाड़ू पोछे के लिए कामवाली आती है, हमारे जमाने मे तो हम अपने वक़्त दस काम एक साथ करते थे, सब हाथ से करते थे, मजाल है कोई गलती हो जाये।' 'कोई बात नही दीदी, वैसे भी शादी में बहुत तला फला खा लिया, समोसे की क्या जरूरत।' नेहा नजर झुकाये खड़ी थी। काम ख़त्म कर उसने क्रोकरी सेट निकाला और साफ किया, औऱ डाईनिंग टेबल पर रख दिया पूरे घर मे आरव आरोही ने खिलौने बिखेर रखे थे, उसने साफ किये। 'अरे बहु 8 बजने वाले है, खाना कब लगाओगी।' नेहा की सास ने आवाज़ दी। 'बस मम्मी जी, लग गया।' ये आजकल की बहुए भी ना, अभी भी मम्मी जी चाची जी से उसकी बुराई किये जा रही थी। सब खाना खाने बैठ गए। उसने सबको खाना परोसा। फिर आरोही को भी खाना खिलाया। 'अरे भाभी, थोड़ा हमारे साथ भी बात कर लो, हम भी बड़ी दूर से आपसे मिलने आये है।' चाचाजी की बेटी नव्या ने मुस्कुराते हुए कहा। वो अभी 2 मिनट बैठी ही थी कि सासु जी बोल पड़ी, बातें तो होती ही रहेगी, पहले देख लो मेहमानों को कुछ चाहिए तो नही। वो फिर से खातिरदारी में लग गयी। 10 बजे मेहमानों ने विदा ली। राहुल उन्हें स्टेशन छोड़ने गए। वो फिर से साफ सफाई में जुट गई। काम खत्म होते होते 11 बज गए। आरोही नींद के लिए रो रही थी, वो आरोही को सुलाने गयी, उसे सुलाते सुलाते न जाने क्यों उसकी आँखों से न जाने क्यों एक आंसू की लकीर बह आयी, वो सुबह से काम कर रही है, सबको सबकी चिंता है, पर किसी ने एक बार भी उससे नही पूछा कि तुमने खाना खाया या नही। घर मे बहुये सबकी देखभाल करती है, तो क्या सबकी जिम्मेदारी नही उसकी भी खुशियो का ख्याल रखे। वो सब करती है बदले में क्या चाहती है सिर्फ और सिर्फ प्यार और थोड़ी सी इज़्ज़त। उसकी आँखों मे नींद आ रही थी और सामने आ रहा था उसकी माँ का चेहरा जो उससे पूछ रहा था, " मेरी लाड़ो, तूने खाना खाया या नही....!!!"

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

मास्टरपीस पुनीता- डा. अनुजा भट्ट

 
ताे जैसा कि मैंने कल बताया कि हमारे जीजाजी  और हम सब सहेलियां उसे  मास्टरपीस कहती थीं। परेशान हाेकर जीजाजी ने उसके हाथाें में पैसा देना बंद कर दिया। वह बहुत बेचैन रहने लगी। एक दिन मुझे कहीजाना था ताे मैंने साेचा इसे भी साथ ले लूं। मैं यह जानती थी  कि हमारी इस मास्टरपीस का आबजर्वेशन बहुत मार्के का है। और मुझे उस मीटिंग में एेसे ही जने की जरूरत थी। वह तैयार हाे गई। मैंने कहा, इतना सुंदर सूट है, दुप्पटा ताे ले ले। कहने लगी, पता नहीं, कहा रखा है। फिर बाेली, वैसे भी काैन आजकल दुप्पटा पहन रहा है। मैंने उसे टाेकते हुए कहा, दुप्पटा ही तेरी इस ड्रेस की शान है। कहने लगी,  नहीं मिल रहा ना। पहले की बात हाेती ताे मैं कल ही खरीद लेती एक सूट। तेरे साथ बिजनेस मीटिंग में जा रही हूं... मैंने तेज सास छाेड़ते हुए कहा उफ्फ... ये ना...
 रास्ते भर उससे बात करते हुए लगा कि वह बहुत परेशान है। कहने लगी अब बता ना डुग्गी एेसे कहीं हाेता है।   तभी मैंने कहा सब कुछ बेच दे। वैसे भी वक्त पर तुझकाे कुछ मिलता नहीं है। मेरा ध्यान बार- बार उसकी सूट पर था। लेकिन वह ताे मेरी बात पर सीरियस हाे गई। पर कैसे बेचूं डुग्गी।  मैंने भी कहा सेल में बेच दे। तुझे ताे कीमत पता ही है उसी हिसाब से बेच दे।  पर क्या क्या बेचेगी तू। पता नहीं क्या क्या खरीद लेती है।  सब बेच दूंगी। वह बुदबुदाई।
1-2 दिन बाद जीजा जी का फाेन आया। कहने लगे डुग्गी इसकाे क्या हाे गया।  सारी अलमारी से कपड़े निकाल लिए हैं। खाने पीने की काेई व्यवस्था नहीं है। कुछ बता भी नहीं रही। मैंने कहा आप सब .यहां आ जाएं। हमारे साथ डिनर कर लें या बाहर से मंगा लें। धन्यवाद, तुम्हारे साथ डिनर फिर कभी.. बाहर से ही आर्डर करता हूं। खैर हमारी इस मास्टर पीस ने अपनी साड़ियाें काे बाहर निकाला उनकाे प्रेस करवाया और फिर अखबार के जरिए सारी साेसायटी में पम्पलेट डलवा दिये।  मुझे भी संडे काे आने का बुलावा आया। मैं हैरान थी उसके पास कलेक्शन बुहत शानदार था।  ब्रिकी बहुत अच्छी हुई। लाेग उससे जानने के बेताब थे कि वह इतना सुंदर कलेक्शन कहां से लाई। वह और भी चीजें खरीदना चाहते थे। तय हुआ हर महीने वह सेल लगाएगी। साड़ी सूट चप्पल जूते आर्टीफिशियल गहने सब कुछ उसके पास था। मेरे साथ मेरी कुछ और सहेलियां भी गई थी  जाे हमारे उस मास्टरपीस काे देखना चाहती थी। पर वह भी वहां जाकर खरीददार बन गई। आज मेरी वही दाेस्त मास्टरपीस नाम से ही प्रदर्शनी लगाती है। देश विदेश घूमती है। लेकिन अब उसने अपना नियम बना लिया है वह खादी ही पहनती है और खरीदती है। कहती है इस से मुझे कंफ्यूजन नहीं हाेता आज क्या पहनूं। उसके पास खादी के खूबसूरत कुर्ते हैं। साड़ी पहनना उसने छाेड़ दिया। खरीदती वह आज भी है ।  उसका घर अब एक कलात्मक घर में तब्दील हाे गया है।

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

डार्लिंग पुनीता - डा. अनुजा भट्ट

         
 पुनीता ही है नाम उसका। लेकिन हम सहेलियां उसे पुनीता न कहकर मास्टर पीस कहते हैं।  इसकी वजह है उसका घर। आप भी अगर उसके घर गए तो लगेगा कि यह घर है या स्टोर। रसोई से लेकर उसके घर का हर कमरा स्टोर में तब्दील हो  गया है।  वह बहुत शौकीन है जो चीज उसे पसंद आ जाए वह उसे लेकर ही रहेगी।  खाने में कुछ  पसंद आ जाए तो न जाने कितने डब्बे पैक करा लेगी। सब्जी से पूरा फ्रिज भरा रहेगा फिर भी घूम आउंगी कहकर साथ हो लेगी और फिर इतनी सब्जी ले लेगी जो खुद उठा के न  ले जा सके। फिर अपनी मेड को फोन करके बुलाएगी। कंजूस इतनी कि मेड को गिनकर 3 रोटी देगी। एक दिन मैंने कहा पेट भर खाना तो दे दिया कर। कहने लगी ज्यादा खाएगी तो काम कैसे करेगी? ज्यादा खाने से नींद आती है।  खुद  भी  इन दिनों खाना छोड़ा है हर रोज फल खाती है। सारी सब्जियां सड़ती है और फिर कूड़े दान में  चली जाती हैं। साड़ियां इतनी है कि खुद गिन नहीं पाएगी। पर जैसे ही सेल का बोर्ड दिखेगा उसे पांव वहीं रुक जाएंगे।  कुछ समय पहले  दिमाग में वास्तु का इतना ज्यादा असर था कि उसने अपने  पूरे घर का रिनोवेशन करा दिया। कुछ दिन तो तो ठीक रहा पर फिर से उसे बेचैनी होने लगी उसने फिर से अपना घर बनवाया लेकिन आज भी उसको अपना घर पसंद नहीं।  उसे जो चीज पहले बहुत पसंद आती है  फिर वह उसे नापसंद करने लगती है। अपने पहनावे को लेकर भी उसका यही रवैया है। अगर उसने अपनी पसंद की साड़ी पहनी हो और उसे कोई टोक दे तो वह उसे दोबारा नहीं पहनेगी। यही वजह है कि अब  उसके पति ने उसके हाथ में पैसा देना बंद कर दिया है।
 उसकी यही आदत अब उसके बच्चों में भी आ गई है और वह कोई निर्णय नहीं ले पाते। उनके घर  में 4 कमरे हैं वहां आपको 4 टीवी मिलेंगे। 2 फ्रिज, कई तरह के जूते,चप्पल, 4  मोटर सायकिल , 2 गाडियां। अब पूछिए 4 टीवी क्यों? कभी किसी को अपने कमरे में देखने का मन हो सकता है। उसका  कहना है। पर आपको जानकर अचंभा होगा कि उनके घर में टीवी कोई नहीं देखता।  सबके सब कंप्यूटर में लगे रहते हैं।  आजकल हमारी पुनीता को भी कंप्यूटर का चस्का लगा है। वह कंप्यूटर में गेम खेलती है।  घर में सबके पास लेपटॉप है फिर  भी कंप्यूटर 3 है जिसमें 2 खराब हैं। पुराने जमाने का म्यूजिक सिस्टम भी  रखा है। पुनीता के पास अपनी गाड़ी है पर उसे चलाना नहीं आता और ड्राइवर के साथ जाना उसे पसंद नहीं । पति के आफिस से कैब आती है जो ले भी जाती है और छोड़ भी जाती है। इसके बावजूद उनके घर में एक गाड़ी और आनेवाली है,बेटे के लिए। पुरानी गाड़ी बेटे को पसंद नहीं है।  बेटे की कोई फरमाइश नहीं है पर पुनीता  की जिद है कि उसका बेटा पुरानी गाड़ी नहीं  चलाएगा। अब बताइए पुनीता के पति यानी  हमारे जीजाजी क्या करें । वह जब उसे आवाज देते हैं  तो डार्लिंग कहते है पर बुदबुदाते हैं तो मास्टरपीस।

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