आधुनिक लाइफस्टाइल ब्लॉग: फैशन, संस्कृति, कहानियों और संस्मरणों का अनूठा संगमआज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और उन छोटी-छोटी खुशियों को भूल जाते हैं जो हमारे जीवन को असल मायने में खूबसूरत बनाती हैं। लाइफस्टाइल का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि हम क्या पहनते हैं या हम कहाँ घूमते हैं, बल्कि इसका गहरा संबंध हमारी सोच, हमारे साहित्य और हमारी विरासत से भी है। यदि आप भी एक ऐसे मंच की तलाश में हैं जहाँ आधुनिकता और परंपरा का एक खूबसूरत संतुलन देखने को मिले, तो यह आपके लिए है।
मैं अपराजिता - रिश्ते नाते लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मैं अपराजिता - रिश्ते नाते लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, 15 जुलाई 2024
मेरी यादें- हरकाली देवी हरेला सावन और शिव परिवार- डा. अनुजा भट्ट
मैं तो अपनी यादों में बार
बार गोते लगाती हूं और मुझे आनंद आता है। इस बार बचपन की उन यादों में पापा और मैं
बैठे हैं। अपने बगीचे से मिट्टी ले आए हैं और अब उस मिट्टी को पापा साफ कर रहे
हैं। उसे चिकना कर रहे हैं। पास में लकड़ी की टहनियां हैं जिनको भी साफ कर एकसार
कर लिया गया है। रूई भी रखी गई है। डिकारे बनने वाले हैं। जिसमें शिव परिवार
बनेगा।
कुमाऊँनी जीवन में
भित्तिचित्रों के अतिरिक्त भी अपनी धार्मिक आस्था के आयामों को मिट्टी और रूई के
सहारे कलात्मक रुप से निखारा जाता हैं। जिसके लिए अलग अलग नाम है। डिकारे भी ऐसा
ही है। क्या है डिकारे... डिकारे शब्द का शाब्दिक अर्थ है - प्राकृतिक वस्तुओं का
प्रयोग कर प्रतिमा गढ़ना। स्थानीय भाषा में अव्यवसायिक लोगों द्वारा बनायी गयी
विभिन्न देवताओं की अनगढ़ परन्तु संतुलित एवं चारु प्रतिमाओं को डिकारे कहा जाता
हैं। डिकारों को मिट्टी से जब बनाया जाता है तो इन्हें आग में पकाया नहीं जाता न
ही सांचों का प्रयोग किया जाता है। मिट्टी के अतिरिक्त भी प्राकृतिक वस्तुओं जैसे
केले के तने, भृंगराज आदि से जो भी आकृतियाँ बनाई जाती हैं, उन्हें भी डिकारे संबोधन ही दिया जाता है।
पापा डिकारे बनाने में तल्लीन हैं। मिट्टी में
रूई को भी मिलाया गया है। सबसे पहले लकड़ी
का एक तख्ता सा है जिसपर यह बनाए जाएंगे। पापा ने तीन हिस्सों में मिट्टी के गोले
बना लिए हैं और अब आकृति बननी हैं। सभी भगवान बैठे हुए ही बनाए जाएंगें इसलिए
ढांचा एक सा ही है। शिव की जटा और गणेश की सूंड बनाने में पापा को कमाल हासिल हैं।
थोड़ी देर पहले जो मिट्टी थी वह अब ईश्वर का आकार ले चुकी है और अप उसमें रंग भरने
की बारी है। मेरा कौतूहल मुझे छेड़छाड़ करने से रोक नहीं रहा है। पापा ने मुझे भी
मिट्टी दे दी है। कोमल हाथ मिट्टी से खेल रहे हैं । सूखने के लिए पापा ने अब उनको हल्की धूप में रख दिया
है। अब सूखने के बाद उस पर चावल का घोल
डाला जाएगा। घोल मां मे तैयार कर दिया है। सूखने के बाद यह हलके पीले रंग के हो गए हैं। डिकारे में शिव
को नीलवर्ण और पार्वती को श्वेतवर्ण से रंगा गया है। रंग भरने में दीदी भी पापा की
मदद कर रही है। देखते ही देखते शिव परिवार सजधज कर खड़ा हो गया है। पापा ने
डिकारों में जिस शिव परिवार को बनाया
है उसमें चन्द्रमा से शोभित जटाजूटधारी
शिव, त्रिशूल एवं नागधारण किये अपनी अद्धार्ंगिनी गौरी के साथ हैं।
गणेश भी हैं। चूहा मैंने बना ही लिया। पापा ने बताया पहले ये रंग किलमोड़े के फूल, अखरोट व पांगर के छिलकों से तथा विभिन्न वनस्पतियों के रस के
सम्मिश्रण से तैयार किया जाता है।
कला के प्रति मेरे पापा का भी रूझान रहा पर वह
इसे प्रकट नहीं करते है। मां हो या मौसी दोनों के एपण पर ध्यान देते। जब वह पढ़ाई
के लिए नैनीताल अपने भाई (बुआ के बेटे के यहां रहे) के यहां रहे तो डिगारे वही
बनाते थे। ऐसा ताई जी ने मुझे बताया।
कुमाऊं में हरेला से ही
श्रावण या सावन माह तथा वर्षा ऋतु का आरंभ माना जाता है। इस दिन प्रकृति पूजन का
विधान है। हरेला का अर्थ है "हरित दिवस",
और इस क्षेत्र में कृषि
-आधारित समुदाय इसे अत्यधिक शुभ मानते हैं,
क्योंकि यह उनके खेतों में
बुवाई चक्र की शुरुआत का प्रतीक है। हरेला पर्व से नौ दिन पहले ही घर में मिट्टी
या फिर बांस की टोकरी में हरेला बोया जाता है। जिसे रिंगाल कहते हैं।
क्या होता है रिंगाल? ( रिंगाल बांस की प्रजाति का एक पौधा होता है, जिसे बौना बांस भी कहते हैं. यह बहुत बारीक होता है और इससे काम
करना बहुत मुश्किल होता है. आजकल इससे बहुत सुंदर क्राफ्ट का सामान बनाया जा रहा है।) फिर नौ दिनों तक इस पात्र को
सींचा जाता है। दसवें दिन इस पात्रा में उगे पौधों को काट दिया जाता है।
पुराणों में कथा है कि शिव की
अर्धांगिनी सती ने अपने आप से खिन्न होकर हरे अनाज वाले पौधों को अपना रुप देकर
पुनः गौरा रुप में जन्म लिया। इस कारण ही सम्भवतः शिव विवाह के इस अवसर पर अन्न के
हरे पौधों से शिव पार्वती का पूजन सम्पन्न किया जाता है।
हरेला की परम्परा के अनुसार
अनाज ११ दिन पूर्व एपण से लिखी किंरगाल की टोकरी में बोया जाता है। हरेला बोने के
लिए पाँच या सात प्रकार के बीज जिनमें कोहूँ,
जौ, सरसों, मक्का, गहत, भट्ट तथा उड़द की दाल कौड़ी,
झूमरा, धान, मास आदि मोटा अनाज सम्मिलित हैं,
लिये जाते हैं। यह अनाज पाँच
या सात की विषम संख्या में ही प्रायः बोये जाते हैं। बीजों को बोने के लिए
मंत्रोंच्चार के बीच शंखध्वनि की जाती है। इस अवसर पर हरकाली देवी की आराधना की
जाती है।
संक्रान्ति के अवसर पर इन
अन्न के पौधों को काटकर देवताओं के चरणों में अर्पित किया जाता है। हरेला पुरुष
अपनी टोपियों में, कान में तथा महिलाएँ बालों में लगाती हैं। घर के प्रवेश द्वार
में इन अन्न के पौधों को गोबर की सहायता से चिपका दिया जाता है।
मान्यता है ये रस्म निभाने से परिवार में
सुख-समृद्धि बनी रहती है। हरेला जितना
बड़ा होगा, किसान को उसकी फसल में उतना ही ज्यादा लाभ मिलेगा।
जी रया ...
जागी रया ....
ये दिन ये बार भेटनै रया...
गंग कै बालू छन जाण क रया....
घ्वाड क सिंघउन जाण क रया....
दूब क जास झाड है जौ....
पाती जस फूल है जौ.....
हिमालय क ह्यूं छन जाण क रया
....
लाख दुति लाख हरेल है जन....
लाग हरयाव...लाग बग्वाव...
जी रे...जाग रे... बच रे..
दूब जौ पली जे..... फूल जौ
खिल जे..
स्याव जस बुध्दि.....शेर जस
तरान ह जौ..
सब बच रया......खुश रया...!
यै दिन यै मास भेंटन
रैया....!
उत्तराखंडी लोक पर्व हरेला की
आपको सपरिवार बधाई व शुभकामनाएं!
बुधवार, 10 मई 2017
हर रिश्ते की नई कहानी
पति-पत्नी के बीच के रिश्ते सहमति और असहमति के बीच ही मजबूत होते हैं। लेकिन लड़ाई-झगड़ा, गृहक्लेश, मनमुटाव रिश्ते की नींव को कमजोर करता है।
हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है। बात जब पति-पत्नी के रिश्ते की हो तो इस मर्यादा को जानना-समझना ज्यादा जरूरी है क्योंकि यह दोनों ही परिवार की धुरी है। इन दोनों की ट्यूनिंग जितनी अच्छी होगी परिवार की समस्याओं का हल भी उतनी ही जल्दी होगा। अगर आपकी सोच समझ मिलती हैं फिर आप कितनी भी कठनाईयों से क्यों न घिरे,ं बाहर जरूर निकल आएंगे। हम यहां कुछ ऐसे बिंदुओं को लेकर चर्चा कर रहे हैं जिसको लेकर आमतौर पर पति-पत्नी में झगड़ा या बहस होती है।
नहीं होगी लड़ाई
बहुत से जोड़े यह कहते हैं कि हमारे बीच कभी लड़ाई नहीं होती। ऐसे जोड़ों से बातचीत करें या उनके परिवार के साथ समय बिताएं तब यह राज समझ में आता है कि आखिर इतना बढ़िया सामंजस्य कैसे संभव है। दरअसल ऐसे जोड़े अपने वैचारिक मतभेद को कभी इतना नहीं बढ़ाते कि वह झगड़े तक पहुंच जाए। अगर कोशिश समझने की और उस पर अमल करने की हो तो रिश्ते मजबूत भी होते हैं और परिवार में खुशहाली का माहौल भी बना रहता है। समय का अभाव- बहुत बार तकरार का मुख्य कारण ही होता है कि साथी एक दूसरे को समय नहीं देते। जब हम एक दूसरे के साथ समय ही नहीं बिताएंगे तो उसकी खुशी और उसकी तकलीफ को कैसे जान सकेंगे। समय बिताने का मतलब यह नहीं कि आप घंटों साथ रहें यह संभव भी नहीं है। लेकिन कुछ समय साथ अवश्य रहें। चाहे आपके वैवाहिक जीवन को कितना भी समय क्यों नहीं बीत गया है अपना साथ साह्चर्य हमेशा महसूस करें। यह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना महत्वपूर्ण आपके लिए आफिस की मीटिंग। जैसे मीटिंग के समय आप फोन बंद कर देते हैं वैसे ही कुछ समय सिर्फ अपनी बातचीत के लिए निकालें। अन्यथा विवाद भी बढ़ेगा और दूरी भी।
रिश्तों को बराबर का सम्मान- रिश्तेदारी किसी भी पक्ष की हो उसे दोनों को निभाना है। लेन देन में एक निश्चित रकम तय हो जो सभी के लिए निभा पाना आसान हो। बहुत बार रिश्ते इसीलिए खराब हो जाते हैं क्योंकि या तो हम किसी से बहुत उम्मीद लगा लेते हैं या कभी दूसरा पक्ष हमसे बहुत उम्मीद लगा लेता है। लेन देन साथ साथ चलता है। अगर कोई हमें उपहार देता है तो हमें भी उसे उपहार देना चाहिए। उपहार देना एक शिष्टाचार है दिखावा नहीं। अधिक्तर रिश्ते दिखावे या उम्मीद के पूरा न हो पाने के कारण टूटते हैं। पति पत्नी में कलह का एक प्रमुख कारण यह भी होता है।
पैसा
शादी चाहे पारंपरिक हो या पसंद की कुछ ऐसे मुद्दे जरूर होते हैं जिसमें पति-पत्नी की राय अलग होती है। इसकी वजह यह है कि दोनों अलग अलग परिवेश से आते हैं और उनका पालनपोषण भी अलग ढंग से होता है। यदि एक को पैसे की कमी रही हो और दूसरे ने कभी भी पैसे की कमी न देखी हो। यदि ऐसे दो व्यक्ति एक साथ आते हैं तो यह हो सकता है कि एक तो पैसे को सोच समझकर खर्च करे और दूसरा खुले हाथों से तो ऐसी स्थिति में दोनों का टकराव संभव है। ऐसे में समझदारी से काम लें। एक दूसरे को अपनी स्थिति समझाएं और मतभेद को आपसी बातचीत से सुलझाने का प्रयास करें।
मल्टी टासकिंग
वह समय याद कीजिए जब आप दोनों ने बैठकर एक साथ वक्त गुजारा है। अधिकतर जब हम आपस में बैठकर बात करते हैं तो हमारा ध्यान कई चीजों में भटका रहता है। कभी टीवी, कभी मोबाईल तो कभी इंटरनेट। हम बात करते हुए भी कभी फोन देख रहे होते हैं तो कभी कुछ और काम कर रहे होते हैं। यह बात करने का सही तरीका नहीं है। जब आप बात करें फोन का स्विच ऑफ करें और टीवी बंद करें। एक दूसरे की बात को ध्यान से सुनें तभी रास्ता निकलेंगा। चीजों को इग्नोर करने से समस्या बढ़ती है। अगर प्राब्लम है तो उसका सामना करें/हल निकालें। अगर आप सर्फिंग करते करते बात करना चाहते हैं तो इन सब बातों से आपका साथी खुद को उपे़िक्षत महसूस करता है।
यदि आपको भी ऐसा ही महसूस होता है तो आप अपनी बात रख सकते हैं कि जब ऐसी को बात चल रही हो तो फोन या नेट को बंद रखा जाना चाहिए और यदि आपकी यह रिक्वेस्ट नहीं सुनी जा रही हो तो बेहतर है कि अपनी बात को किसी दूसरे वक्त के लिए टाल दिया जाए।
सुख दुख, मान सम्मान, इच्छा अनिच्छा, लेन देन, आदर अनादर ये ऐसे शब्द हैं जिसमें आपकी जिंदगी छुपी है। इनको समझने की जरूरत है। अपने साथी से बहुत प्यार करें पर उसे स्पेस भी दें ताकि वह प्यार महसूस कर सकें। वह प्यार की गिरफ्त में न हो, प्यार में हो।
रविवार, 5 सितंबर 2010
रिश्तों को स्ट्रांग बनाने के छह फंडे
अनुजा भट्ट
शादी-प्यार, विश्वास, देखभाल और आदर पर आधारित होती है। अगर इनमें से कोई एक चीज गायब है तो समझिए शादी दिक्कत में है। क्या परफेक्ट मैरिज की परिभाषा तय की जा सकती है? मनोवैज्ञानिक डॉ. भावना बर्मी कहती हैं,आज के समय में परफेक्ट मैरिज जैसी कोई परिभाषा नहीं बनाई जा सकती। हर व्यक्ति के लिए इसके मायने भी अलग-अलग हैं। यह इस सोच पर निर्भर करता है कि कोई अच्छे दांपत्य जीवन के बारे में क्या सोचता है। हालांकि अच्छा दांपत्य जीवन 100 फीसदी संभव है। अगर इन बातों पर गौर किया जाए-
प्रतिबद्धता (कमिटमेंट)
किसी भी दांपत्य रिश्ते में एक-दूसरे के प्रति कमिटमेंट बेहद जरूरी है। इसके तहत दोनों पति-पत्नी को अपने रिश्ते के संबंध में एक साझा मूल्य और लक्ष्य की ओर बढ़ना होता है। आज जब समय की कमी है तो यह कौशल बेहद जरूरी है। संवाद का का मतलब यह नहीं कि आपसे पूछा जाए कि तुम्हारा दिन कैसे बीता। संवाद का मतलब है कि आपसी विचारों और भावनाओं को साझा करना। जोड़ों में यह बात स्वाभाविक तौर पर शुरू में नहीं भी आ सकती है लेकिन आपको इसकी ओर लगातार प्रयास करना होगा। एक बार शुरू कर दिया तो आपको इसमें आनंद आने लगेगा। बहस के दौरान धैर्य बनाए रखना, समझदारी से काम लेना और एक-दूसरे के प्रति सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।
बहस के दौरान आप एक-दूसरे का तर्क नहीं सुनते। हमेशा दूसरा तर्क तैयार रखते हैं। विवाद छोटी से लेकर बेहद बुनियादी चीजों को लेकर हो सकता है। जब भी आपको आपके पार्टनर से शिकायत हो उसे सही संवाद शैली में व्यक्त करना आना चाहिए। संकट के समय आप कैसे संवाद करेंगे, इस पर काफी कुछ निर्भर करता है। आप सही संवाद शैली का इस्तेमाल करते हैं तो आपके पार्टनर के साथ चाहे आपकी कितनी भी मतभिन्नता हो आप उससे जुड़ाव महसूस करेंगे। नकारात्मक मुद्दों पर ही स्वस्थ तरीके से बात हो सकती है।
समय दीजिये
आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में पति-पत्नी एक-दूसरे को दिए जाने वाले समय के मामले में समझौता कर लेते हैं। उन्हें लगता है नहीं भी दिया तो क्या है। पति-पत्नी के लिए बेहद जरूरी है कि वे एक-दूसरे के साथ समय बिताएं। आप साथ-साथ सप्ताहंत के काम करें, कोई फिल्म देखें, रोमांटिक डिनर करें, मूवी देखने जाएं। इस क्वालिटी टाइम से आप एक-दूसरे के प्रति ज्यादा संतोष और सुरक्षित महसूस करेंगे। काम और घर के बीच संतुलन बिताएं। बहुत से लोग दफ्तर में घर और घर में आफिस के बारे में सोचते रहते हैं। पति-पत्नी के रिश्ते में ख्रराब समय भी आता है। लेकिन ऐसी चीजों को हल्के में लेना भी सीखना चाहिए। विवादों को खींचने के बजाय उन्हें सुलझाना और कुछ चीजों को हंसी में उड़ाना बेहतर रहता है।
आदर और आजादी
जरूरी नहीं कि पति-पत्नी के शौक एक ही हों। एक ही दोस्त हों। पसंद-नापसंद भी एक हों। आजकल हम ज्यादा से ज्यादा पतियों को हाउस डैड की भूमिका में देख रहे हैं। अगर आप कोई चीज साथ-साथ कर रहे हैं तो उसमें भी एक-दूसरे को आजादी देने की पूरी गुंजाइश रखें। अगर दंपती अपनी दांपत्य जीवन को सुखी और लंबा बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध हैं तो वे मतभेदों के बावजूद बीच का रास्ता निकाल लेते हैं।
यौन नजदीकी और रोमांस
यौन नजदीकी और रोमांस किसी भी दांपत्य जीवन का ऑक्सीजन है। कई बार हम रिश्तों में बुरा वक्त गुजार रहे हों तो हम बेहद थकेऔर दुखी महसूस करते हैं। अपनी व्यस्त जिंदगी में इस संकेत को नजरअंदाज कर देते हैं। अचानक देखेंगे कि आपसे शारीरिक संपर्क की इच्छा कम होने लगी है।
आपको लग सकता है कि पार्टनर थका हुआ है या बरसों साथ रहने की वजह से यौनेच्छा में कमी आ गई है। ऐसे समय में हमें रोमांस की जरूरत होती है। ऐसे में पार्टनर का ध्यान आकर्षित करने का तरीका काम आ सकता है। मसलन कोई ऐसा ड्ेस पहनें जो आपका पार्टनर नोटिस करे। कोई छोटा सा उपहार ही दें,चाहे गुलाब का छोटा फूल हो, पत्नी को कोई अंगूठी । कैंडिल लाइट डिनर। वह करें जो आपके पार्टनर को अच्छा लगता है। याद रखें पति-पत्नी के रिश्ते में सेक्स को अहमियत न देना एक बड़ी दरार पैदा करना है, जिसे पाटना काफी मुश्किल होता है और कभी-कभी असंभव है। देह एक बड़ी सचाई है, इससे इनकार न करें।
रिश्ते में चुप्पी ठीक नहीं
मनोवैज्ञानिक समीर पारिख कहते हैं रिश्ते बनाने से ज्यादा कठिन रिश्ते निभाना है। किसी भी व्यक्ति के मन को जानना आसान नहीं है। रिश्ते में चुप्पी ठीक नहीं है। आप सोच रहे हैं कि काम के बोझ से साथी आपसे ज्यादा बात नहीं करता। लेकिन साथी कम बात कर रहा है या चुप्पी साधे हुए है तो यह ब्रेक-अप के संकेत हो सकते हैं। आप पाएंगी आप ही उसे कॉल कर रही हैं, जबकि वह ऑफिस में लोगों से मेल-जोल बढ़ाने में लगा है। वह आपको फोन नहीं क रता और यह भी नहीं बताता कि वह कहां हैं या घर कब पहुंचेगा। परस्पर संवाद के जरिए एक-दूसरे को समझा जा सकता है इसीलिए यदि आपके रिश्ते में संवादहीनता की स्थिति आ रही है तो संभल जाइए और संवाद की कोशिश कीजिए।
हो सकता है पहले लड़ाई या बहस हो पर संबंध में मौन सबसे खतरनाक है। संवादों से आप जान सकते हैं कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अगर संबंधों में खटास है तो पुरुष मुंह से ज्यादा कुछ नहीं कहता है। पुरुष इसलिए भी नहीं कहते हैं कि हो सकता है कि महिला को बुरा लगे या वह लड़ना-झगड़ना शुरू कर दे। मौखिक तौर पर संबंधों को तोड़ने में वे माहिर नहीं होते। लेकिन अगर सेक्स में अरुचि दिख रही है तो समझिए कि गड़बड़ शुरू हो गई है।
छोटी-छोटी बातें
जिन चीजों का पहले आपके जीवन में महत्व नहीं था, अब वे चीजें आपके बीच झगड़े और बहस का मुद्दा बन रही हैं। मसलन बिल कौन जमा करेगा। बाथरूम में कौन कितना समय बिताता है। या छोटे-मोटे सामान कौन लाएगा। अगर आप दोनों का मूड खराब है तो छोटी-छोटी बातें भी बवाल बन जाती हैं।
ऐसे में जरूरत इस बात की है कि आपस में काम बांट लें। ऐसे मौके पर किसी भी प्रकार की बहस से बचें क्योंकि बेवजह की बहस आपके रिश्तों में और खटास भर देगी। जहां तक हो सके छोटी-छोटी बातों को नजर अंदाज करें। साथ ही जिस बात से आपके साथी को गुस्सा आता है उस काम को न करने में ही भलाई है। अगर कोई पुरुष चाहे वह दुनिया का सबसे विनम्र और स्वीट व्यक्ति हो, बहस के बाद सॉरी नहीं कहेगा। रिश्तों मेंअहम को बीच में न लाएं। यदि आपका साथी आपसे बात नहीं कर रहा तो आप अपनी तरफ से पहल करें। आपकी बढ़ाया एक कदम आपके रिश्तों को नया जीवन दे सकता है।
समझ लीजिए बजने वाली है खतरे की घंटी
घर से भागे, दोस्तों में रमे
डॉ.अरुण कुमार
मनोवैज्ञानिक
संबंध टूटने से पहले जो संकेत दिखाई देते हैं, उसमें प्रमुख हैं पहला-एक-दूसरे के प्रति दिलचस्पी न लेना, भावनात्मक लगाव का कम होना। शारीरिक और भावनात्मक संपर्क में गिरावट दो ऐसे लक्षण हैं, जो कमजोर रिश्ते में गिरावट के सबसे आम संकेत हैं। आपकी जिंदगी में आपके पार्टनर की दिलचस्पी का कम होने का मतलब चीजें गलत दिशा में जाने लगी हैं। सोशल गेदरिंग, साथ में खाना खाना और लेट नाइट फिल्म देखना, वह सब जो आप पहले करते थे, अब कम होने लगा है। आपका पार्टनर यह सब साथ-साथ करने का विरोध करने लगा है। धीरे-धीरे वह आपकी जिंदगी में अपनी दिलचस्पी कम लेने लगा है। मसलन वह आपसे नहीं पूछेगा फलां चीज के बारे में क्या विचार है? या आज ऑफिस कैसा रहा? या तुमने अपना दिन कैसे बिताया।
कुछ शारीरिक लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं मसलन नींद न आना, बेचैनी रहना, रात को उठकर कोई काम करने लगना, फिल्म देखना, अकेलापन पसंद करना है। लोगों की भूख मर जाती है, खाना कम हो जाता है या फिर वह बहुत खाने लगता है। वह छोटी सी छोटी बात पर तूफान खड़ा करा करना। ऐसा लगता है कि वह लड़ने के मूड में है और बहाना तलाश रहा है।
खुद से पूछती हैं कई सवाल
डॉ. विनीता मेहरोत्रा झा
यह ऐसा सवाल है, जो महिलाएं अपने आप से पूछने से डरती हैं, जब तक कि असलियत उनके सामने न आ जाए। दांपत्य जीवन में संबंधों में कठिनाई का दौर शुरू होते ही महिलाओं के दिमाग में यह सवाल गूंजने लगता है। क्या वह अब भी मुझसे प्यार करता है? क्या मुझमें उसकी दिलचस्पी खत्म हो गई है? क्या उसका प्यार बांटने के लिए दूसरा भी है? वह रात-दिन इस सवालों में उलझीं रहती हैं।
दोस्तों की राय को नकारें नहीं
रचना सिंह
रिलेशनशिप काउंसलर
पारिवारिक सदस्य और दोस्त आपके रिश्तों में आ रही गड़बड़ी को सबसे पहले पहचान लेते हैं। चूंकि आप साथी के सकारात्मक चीजों में विश्वास करते हैं और लड़ाई-झगड़े से बचना चाहते हैं इसलिए इस निर्णय पर पहुंचने में देर हो जाती है। लेकिन परिवार के लोग और नजदीकी दोस्त बता देंगे कि गड़बड़ शुरू होने के संकेत मिलने लगे हैं। लेकिन उन्हें नकारने के बजाय सच्चाई को स्वीकार करना सीखें। इससे आपको संबंधों को पूरी तरह बिगड़ने से पहले सुधारने का मौका मिल जाएगा।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
Special Post
बारिश के माैसम में बात करेंगे फैशन की - डा. अनुजा भट्ट
रिमझिम फुहार हाे और पार्टी करने का मन हाे खाने पीने का सब बंदोबस्त हाे ताे बस एक सवाल परेशान कर देता है । आज पहने क्या। ताे दाेस्ताें जब मा...
-
(अब पहले की तरह किस्से कहानियों की कल्पनाएं हमें किसी रहस्यमय संसार में नहीं ले जाती क्योंकि हमारी दुनिया में ज्ञान, विज्ञान और समाज विज्...
-
मेरा संबंध मां दुर्गा से बहुत गहरा है। जहां से मैं हूं वह दुर्गा का मायका है। अब आप यह पता करें मां पार्वती मां दुर्गा का मायका कहां है। म...

