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गुरुवार, 19 जुलाई 2018

भगवान गणेश क्यों खाते हैं मोदक- रेनु दत्त

भगवान गणेश की मूर्तियों एवं चित्रों में उनके साथ उनका वाहन और उनका प्रिय भोजन मोदक जरूर होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सबसे आसान तरीका है मोदक का भोग। गणेश जी को सबसे प्रिय मोदक है। गणेश जी का मोदक प्रिय होना भी उनकी बुद्धिमानी का परिचय है । गणेश जी का एक दांत परशुराम जी से युद्ध में टूट गया था। इससे अन्य\nचीजों को खाने में गणेश जी को तकलीफ होती है, क्योंकि उन्हें चबाना पड़ता है। मोदक काफी मुलायम होता है जिससे इसे चबाना नहीं पड़ता है। यह मुंह में जाते ही घुल जाता है और इसका मीठा स्वाद मन को आनंदित कर देता है ।भगवान गणेश को मोदक इसलिए भी पसंद हो सकता है कि मोदक प्रसन्नता प्रदान करने वाला मिष्टान है। मोदक के शब्दों पर गौर करें तो मोद का अर्थ होता है हर्ष यानी खुशी। भगवान गणेश को शास्त्रों में मंगलकारी एवं सदैव प्रसन्न रहने वाला देवता कहा गया है। वह कभी किसी चिंता में नहीं पड़ते। इसका कारण संभवत: मोदक है क्योंकि यह गणेश जी को हमेशा प्रसन्न रखता है। मोदक के इसी गुण के कारण गणेश जी सभी मिष्टानों में मोदक को अधिक पसंद करते हैंपद्म पुराण के सृष्टि खंड में गणेश जी को मोदक प्रिय होने की जो कथा मिलती है उसके अनुसार मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है। देवताओं ने एक दिव्य मोदक माता पार्वती को दिया। गणेश जी ने मोदक के गुणों का वर्णन माता पार्वती से सुना तो मोदक खाने की इच्छा बढ़ गयी। अपनी चतुराई से गणेश जी ने माता से मोदक प्राप्त कर लिया। गणेश जी को मोदक इतना पसंद आया कि उस दिन से गणेश मोदक प्रिय बन गये। यजुर्वेद के अनुसार गणेश जी परब्रह्म स्वरूप हैं। लड्डू को गौर से देखेंगे तो उसका आकार ब्रह्माण्ड के समान है। गणेश जी के हाथों में लड्डू का होना यह भी दर्शाता है कि गणेश जी ने ब्रह्माण्ड को धारण कर रखा है। \

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

जब वो मिले मुझे पहली बार- प्यार की सिहरन आज भी वैसी ही है- ममता त्रिपाठी



 मैं छत पर बैठी थी. अचानक मां की आवाज आई ममता ओ ममता जरा नीचे तो आना.मैंने कहा क्या है मां. उन्होंने कहा पापा कुछ फोटो लाये हैं... शादी के लिए.. लड़कों को देख लो। मैंने कहा नहीं देखना मां. आप और पापा जब देखो सब मुझे घर से भगाना चाहते हैं, इस घर से.. मैंने गुस्से और दुःख से बोला। ए लड़की पता नहीं किस युग में जी रही है। लोग यहां लड़कों के साथ घूम रही हैं, पिक्चर देख रही हैं एक ये महारानी है कि फोटो ही नहीं देख रही.. चिढ़ते हुए मां पिताजी से यह सब बातें कह रही थीं। जबकि मुझे बिल्कुल पसंद नहीं था शादी करना। कौन दूसरे के घर जाए..जब भी कोई कहता पांडे जी बिटिया की शादी कबकर रहे हो। उस आदमी को न जाने मैं कितनी गाली देती।  अंततः एक लड़का मम्मी पापा के पसंद आ गया। जो दिल्ली में नौकरी करते थे। लेकिन मुझे  फोटो दिखाए कौन..
 मां रोज कहती लेकिन मैं हमेशा मना कर देती .मां ने कहा मत करो शादी जब बूढी हो जाओगी तब कौन करेगा तुमसे शादी.. पिताजी ने दफ्तर जाते हुए संकेत करते हुए कहा बेटी मेज पर तुम्हारे लिए कोई गिफ्ट रखा है। देख लेना. मैं खुशी खुशी मेज के पास गई वहां लिफाफे में एक फोटो थी एक लड़के की। पहले सोचा छोड़ो नहीं देखते। फिर सोचा देख लेने से ही शादी थोड़े ना हो जाएगी। मैंने कांपते हाथों से तस्वीर उठाई और लड़के के देखा। लड़का तो अच्छा है पर नाक थोड़े पकोड़े जैसी थी। मां भी मेरे पीछे खड़ी थी और बोली यही लड़का पसंद किया है हमने तेरे लिए। बस तुम्हारी स्वीकृति चाहिए। मां का उदास चेहरा देखकर मैंने हां कर दी। और दोनो परिवार छोटे मोटे रस्म करते हुए रिश्ते में बंध गए। धीरे धीरे हमारी फोन पर बात होने लगी। हम 5 या 10 मिनट बात करते थे लेकिन हमने एक दूसरे के प्रत्यक्ष नहीं देखा था। देखते देखते हमारी शादी का दिन भी आ गया। एक तरफ घर वालो से जुदाई का दुःख और दूसरी तरफ इनसे मिलने का अहसास, देखने का अहसास यह कैसे दिखते होंगे....
 शाम के समय नियत समय पर बरात आ गई. मन में अजीब सी घबराहट थी. जयमाला का समय भी आ गया था। मन में घबराहट थी. मैं शर्माते हुए गई तब इनका पहला दीदार हुआ। अच्छे खासे हट्टे कट्टे पर नाक पकौड़ा जैसी ही.. तब ही मैंने इनको पहली बार देखा। फेरों के वक्त जब इन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर ऱखा तो थोड़ा अजीब तो लगा पर साथ ही लगा कितना प्यारा अहसास है अपनेपन का। हम दोनो एक दूसरे को बीच बीच में देख लेते। बहुत अच्छा अहसास होता..
आज हमारी शादी को 11 साल हो गए हैं और 3 बच्चे हैं। जब भी हम वह पहले मिलन का अहसास याद करते हैं तो लगता है कल ही की तो बात है यह बहुत अच्छे जीवनसाथी हैं। और यह पहले वाला अहसास आज भी है।

सोमवार, 16 जुलाई 2018

जब मिले वो पहली बार- पिया की बेकरारी-सविता शुक्ला




हमारी अरेंज मैरिज है। शादी से पहले हम दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे को नहीं देखा था। हम दोनों ने सिर्फ एक दूसरे की फोटो  देखी थी। शादी में भी रिश्तेदारों के बीच हमारी बातचीत नहीं हो पायी थी।  दो दिन ससुराल में रह कर मैं मायके आ गयी थी। फिर शुभ दिन देखकर पति मुझे मायके से  विदा कराने आए। मैं ने उन्हें दूर से ही देख लिया। पर वो मुझे नहीं देख पाए। उनके घर में आते ही सब लोग सेवा सत्कार मे लग गए। नया दामाद पहली बार घर आए थे।  आवभगत में कोई किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहता था। इस तरह दो तीन घंटे बीत गए। सब लोगों ने उन्हें कहा,"अब आप थोड़ी देर आराम कर लीजिए। सफर में थक गए होगें।"  वो रूम में अकेले थे, मैं चुपके से उनके पास गयी। पर्दे के पीछे से उनको देख ही रही थी कि उनकी नजर मुझ पर गई। मुझे देखते ही गुस्से में अपनी घड़ी की तरफ इशारा करते हुए बोले," देखो पूरे तीन घंटे हो गए मुझे यहाँ आए हुए और तुम अभी मेरे पास आयी हो। मैं तुम से मिलने के लिए बेकरार था। हर पल मेरी आँखें तुम्हें खोज रही थी। मैं अपनी  नई नवेली बीवी से मिलने को बेताब हूँ और तुम घर मे छुपी बैठी हो। अब तो मेरा मन कर रहा था कि लाज शरम छोड़कर खुद ही घर के अंदर जाऊँ और तुम्हें ढूंढ निकालूँ।" उनकी इस अनोखी अदा पर मैं मन ही मन फिदा हो गयी। पर संकोचवश सिर्फ इतना ही कह पाई,"घर के बड़ों के सामने आपके पास आने में मुझे लज्जा आ रही थी।" मेरी बात सुनकर पतिदेव का गुस्सा एक मिनट में ही छू मंतर हो गया। हमें आज भी जब वो हमारी पहली मुलाकात याद आती है, होंठों पर मुस्कुराहट आ ही जाती है।


रविवार, 15 जुलाई 2018

जब पहली बार मिले- पिया तोह से नैना लागे रे- सुरभि शर्मा

 
       
  कितनी भी पढ़ी लिखी हो, कितनी भी आत्मविश्वासी हो पर शादी की बात जब चलती है और लड़कियों को सिलेक्ट करने के जो पैमाने हैं वो मन में खलबली तो मचा ही देते हैं तो कुछ यूँ है मेरी कहानी जब पहली बार हम मिले -

   पापाजी (ससुरजी) इनके मौसा जी, और मामाजी देखने आए और हर तरह से आश्वस्त कर नेग पकड़ा दिया गया था पर फ़ाइनल बात तो अभी लड़के के हामी पर टिकी हुई थी |इसके बाद तीन महीने तक कोई खबर नहीं अचानक से फिर एक दिन फोन आया लड़का छुट्टी लेकर आ रहा है, आप लोग भी लड़की ले के आइए उस समय मेरी बी ऐड की काउन्सिलइंग़ चल रही थी और वाराणसी  मे  मई - जून की गर्मी में आपको बाहर निकलना पड़े तो आप भले स्नो व्हाइट क्यों न हो पर आपके चेहरे को काली मैया का स्वरूप लेने से कोई रोक नहीं सकता और मध्यमवर्गीय शहर से हूँ इसलिए ब्यूटी पार्लर की सेवाओं के प्रति इतनी सजग नहीं थी | खैर पहुंची वहाँ जहाँ ये देखने दिखाने का कार्यक्रम था |शाम में ये लोग आए मैंने पर्पल साड़ी पहनी थी, और ये साहब भी पर्पल शर्ट में ही पधारे थे और सर ऐसे नीचे झुका के बैठे थे जैसे ये मुझे नहीं मैं इन्हें देखने आयी हूँ 😋😋फिर दौर शुरू हुआ परिवार वालों के सवाल जवाब का जिसमें सवाल करते करते मुझसे एक क्वेश्चन किया गया "do you like a joint family or single family?" 
       बिना सोचे समझे मेरे मुँह से निकला" both" सबको संयुक्त परिवार के उत्तर की आशा होगी इसलिए सब मुझे हैरान होकर देख रहे थे 😋😋और इन्होनें इस जवाब पर मुस्कुराते हुए आँखें उठा कर मुझे देखा और मेरी नजर भी उसी समय मिल गयी इनसे बस और क्या - - - पिया तोह से नैना लागे रे!!!! 😊😊

            फिर कहने को अकेला छोड़ा गया पर कुछ ससुराली रिश्तेदार साथ में आकर बैठ गए अच्छा तो नहीं लग रहा था पर कुछ कर नहीं सकती थी वैसे तो बहुत चालाक नहीं हूँ पर उस दिन पता नहीं दिमाग कहाँ से इतना चल रहा था 😋😋english language को उस दिन पहली बार मैंने मन ही मन इतना धन्यवाद दिया और बातें शुरू हुई जिसको सुनना है सुनो पर समझ तो सिर्फ हम दोनों ही रहे थे 🙂 
     तो अलमोस्ट सब कुछ फ़ाइनल पर बिहार की एक खासियत है 80%शादियाँ बिना तमाशे के नहीं होती तो मैं कहाँ से बचती पर फाइनलई अगले दिन सगाई की अंगूठी मेरी अंगुलियों में थी और आउटफिट फिर से मैचिंग थे मैं पिंक लहंगा ये पिंक शर्ट और ये मिक्स एंड मैच आज तक चला आ रहा है हमारी प्लानिंग नहीं रहती पर ज्यादातर तैयार होने के बाद हम देखते हैं कि हमने मैचिंग कलर पहना हुआ है, और हमेशा हमारी मैचिंग ईश्वर ऐसे ही बनाए रखें 🙏🙏

                                     

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'me too' (मैं भी)-खयालात- सदन झा

आजकल वैश्विक स्तर पर 'me too' (मैं भी) अभियान चल रहा है। लड़कियां, महिलाएं, यौन अल्पसंख्यक तथा यौनउत्पीड़ित पुरुष हर कोई अपने साथ...