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सोमवार, 3 अगस्त 2026

बारिश के माैसम में बात करेंगे फैशन की - डा. अनुजा भट्ट

पीच शेड पीच एक ऐसा कलर है जो डार्क और लाइट हर तरह के टोन के साथ मैच करता है

रिमझिम फुहार हाे और पार्टी करने का मन हाे  खाने पीने का सब बंदोबस्त हाे ताे बस एक सवाल परेशान कर देता है । आज पहने क्या। ताे दाेस्ताें जब माैसम में इतनी ताजगी हाे और हरियाली बिखरी हो तो ग्रीन कलर फ्रेशनेस का प्रतीक मान लेने में हर्ज ही क्या है। यह वैसे भी मॉनसून के लिए परफेक्ट माना जाता है। साथ ही हर तरह के कॉप्लेक्शन पर यह कलर सूट करता है। अगर आपको वॉर्म टोन वाले कलर्स ज्यादा पसंद हैं तो आप मस्टर्ड ग्रीन, खाकी और डार्क ग्रीन के शेड्स पहन सकती हैं और अगर कूल टोन वाले कलर्स पसंद हैं तो ब्राइट ग्रीन या पैरट ग्रीन कलर के ऑप्शन्स पर जाएं। वाइट या येलो जैसे ब्राइट कलर्स के साथ भी आप ग्रीन को मिलाकर पहन सकती हैं।
पीच शेड पीच एक ऐसा कलर है जो डार्क और लाइट हर तरह के टोन के साथ मैच करता है और मॉनसून के लिहाज से एक क्लासिक शेड है। वैसे तो इस कलर को हर तरह के स्टाइल वाले कपड़ों में पहन सकती हैं लेकिन चूंकि इन दिनों बेल स्लीव्स का फैशन जोरों पर है लिहाजा आप पीच कलर का बेल स्लीव टॉप या शॉर्ट ड्रेस ट्राई कर सकती हैं। साथ ही अपनी ही ड्रेस को हाइलाइट करने के लिए इसे अच्छी तरह से अक्सेसराइज करना न भूलें।
चॉकलेट ब्राउन की बात करूं तो एक वक्त था जब चॉकलेट ब्राउन को सिर्फ ट्रेंच कोट या बूट्स के कलर के तौर पर ही देखा जाता था लेकिन आज के समय में यह कलर यूथ को काफी पसंद आ रहा है। खासकर अगर आप मॉनसून के सीजन में किसी पार्टी में जा रही हैं तो चॉकलेट ब्राउन कलर की मैक्सी पार्टी ड्रेस आपके लिए क्लासी ऑप्शन है।
मॉनसून के दौरान मरून कलर की मैक्सी ड्रेस, जंपसूट, ऑफ शोल्डर टॉप, रफल्स टॉप, कोल्ड शोल्डर टॉप और ड्रेसेज के साथ शॉर्ट ड्रेसेज की भी मांग बढ़ गई है। चूंकि आजकल लोग फैशन में एक्सपेरिमेंट करना ज्यादा पसंद करते हैं लिहाजा आप भी चाहें तो अपने कंफर्ट के हिसाब से चेंज कर सकती हैं।
 तो आपकी क्या राय है।  इस तरह के ढ़ेर सारे आप्शंस के लिए आप हमारे फेसबुक ग्रुप में क्लिक कर सकते हैं।   
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शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

रानी अहिल्याबाई की कल्पना से बुनी गई महेश्वरी साड़ी-डा. अनुजा भट्ट


महेश्वर मध्यप्रदेश के जिला खरगौन का यह सबसे चर्चित शहर है। खरगौन से इसकी दूरी मात्र 56 किलोमीटर है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर अपने बहुत ही सुंदर व भव्य घाट तथा महेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं जिनमे से राजराजेश्वर मंदिर प्रमुख है। आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्य यहीं हुआ था।

पुराणों के अनुसार यह शहर हैहयवंशी राजा सहस्रार्जुन की राजधानी रहा है। सहस्रार्जुन का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने रावण को पराजित किया था और खुद सहस्रार्जुन का वध भगवान परशुराम ने किया था। उनके वध के पीछे कारण यह था कि वह ऋषि जमदग्नि को प्रताड़ित करते थे। कालांतर में यह शहर महान देवी अहिल्याबाई होल्कर की भी राजधानी रहा है। होल्कर वंश की महान् शासक देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इसी के साथ उनकी कलात्मक सोच माहेश्वर साड़ी के रूप में हम सभी के दिल में। इन साड़ियों के पीछे दिलचस्प किंवदंती रानी अहिल्याबाई होल्कर की है, जिन्होंने मालवा और सूरत के विभिन्न शिल्पकारों और कारीगरों को 9 गज की एक विशेष साड़ी बनाने का आदेश दिया, जिसे उन्होंने ही डिजाइन किया था। बाद में इस तरह की साड़ी माहेश्वरी साड़ी के रूप में जानी जाने लगी। ये साड़ियाँ महल में आने वाले शाही रिश्तेदारों और मेहमानों के लिए एक विशेष उपहार मानी जाती थीं। बाद में सन 1767 के आसपास रानी ने कुटीर उद्योग के रूप में इस साड़ी का विस्तार किया।


प्रेरणा के स्रोत

मध्य प्रदेश के किलों की भव्यता और उनके डिज़ाइन ने महेश्वरी साड़ी पर तकनीक, बुनाई और रूपांकनों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इनमें से कुछ लोकप्रिय डिज़ाइनों में मैट पैटर्न शामिल है, जिसे 'चट्टाई' पैटर्न के रूप में भी जाना जाता है, साथ ही 'चमेली का फूल' भी शामिल है जो चमेली फूल से प्रेरित है। कोई 'ईंट' पैटर्न भी देख सकता है जो मूल रूप से एक ईंट है और 'हीरा' है, जो एक वास्तविक हीरा है।

माहेश्वरी साड़ी फैब्रिक

माहेश्वरी साड़ी की खूबी यह है कि इस शैली के अंतर्गत प्रत्येक प्रकार की साड़ी का अपना एक नाम या एक शब्द होता है, जो इसकी विशिष्टता को दर्शाता है। साड़ियाँ या तो बीच में सादी होती हैं और उत्कृष्ट रूप से डिज़ाइन किए गए बॉर्डर वाली होती हैं, या विभिन्न विविधताओं में चेक और धारियाँ होती हैं। इसकी 5 प्रमुख श्रेणियां हैं, जिनके नाम हैं 'चंद्रकला, बैंगनी चंद्रकला, चंद्रतारा, बेली और पारबी। चंद्रकला और बैंगनी चंद्रकला सादे प्रकार की हैं, जबकि चंद्रतारा, बेली और पारबी धारीदार या चेक वाली तकनीक के अंतर्गत आती हैं।

प्रारंभ में, महेश्वरी साड़ी को डिज़ाइन करने के लिए रंगों की एक सीमित श्रृंखला का उपयोग किया जाता था, जो मुख्य रूप से लाल, मैरून, काले, हरे और बैंगनी रंग के होते थे। हालाँकि, भारतीय फैशन में आधुनिकीकरण और प्रयोग के साथ, सोने और चांदी के धागों के उपयोग के साथ-साथ हल्के रंगों को भी महत्व दिया जा रहा है। चूँकि माहेश्वरी साड़ी सिल्क और कॉटन दोनों में उपलब्ध है, इसलिए इसे कैज़ुअल और फॉर्मल दोनों तरह के आयोजनों में पहना जा सकता है। यह साड़ी वजन में काफी हल्की होने के कारण हर मौसम के लिए उपयुक्त है।

इसके रखरखाव के लिए पहली बार ड्राई क्लीनिंग के लिए भेजना सबसे अच्छा है, जिसके बाद इसे या तो हाथ से धोया जा सकता है या हल्के डिटर्जेंट के साथ मशीन में धोया जा सकता है। याद रहे, इन साड़ियों को धोने के लिए हमेशा ठंडे पानी का उपयोग करना चाहिए। महेश्वरी साड़ी का बॉर्डर रिवर्सेबल होता है इसलिए इसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है।

तो कैसी लगी महेश्वरी साड़ी की कहानी....

शुक्रवार, 26 जुलाई 2024

साड़ी का भी ख्याल रखिए- डा. अनुजा भट्ट


बहुत बार हम मंहगी साड़ी खरीद लेते हैं पर उसके रखरखाव के बारे में नहीं जानते इस कारण साड़ी खराब भी हाे जाती है और उससे ज्यादा हमारी भावनाएं आहत हाेती है। साड़ी के साथ महिलाओं का गहरा लगाव हाेता है। इसलिए मैंने साेचा कि आपसे इस बारे में थाेड़ी बातचीत की जाए। हमारे पास ऐसे प्राेडक्ट है जाे आपकी उलझन सुलझा सकते हैं।
साड़ी की गुणवत्ता बनाए रखना उसकी लंबी इम्र सुनिश्चित करने और जटिल डिज़ाइन को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
1. साड़ी को हाथ से धोएं:साड़ियों को हल्के डिटर्जेंट और ठंडे पानी का उपयोग करके हाथ से धोना चाहिए। गर्म पानी या कठोर डिटर्जेंट का उपयोग करने से बचें क्योंकि वे कपड़े और डिज़ाइन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

2. साड़ी को बहुत अधिक देर तक भिगोकर न रखें क्योंकि इससे उसका रंग उड़ सकता है और वह फीकी पड़ सकती है।

3. सीधी धूप से बचाएं: साड़ियों को छाया में सुखाना चाहिए और सीधी धूप से दूर रखना चाहिए क्योंकि धूप के संपर्क में आने से रंग फीका पड़ सकता है।

4. कम तापमान पर इस्त्री करें: साड़ी को कम तापमान पर इस्त्री करें ताकि कपड़े और डिज़ाइन को नुकसान न पहुंचे। डिज़ाइन पर सीधे इस्त्री करने से बचें क्योंकि इससे वे फट सकते हैं या छिल सकते हैं।

5. साड़ी को सही तरीके से स्टोर करें: साड़ी को ठंडी, सूखी जगह पर सीधी धूप से दूर रखें। साड़ी को प्लास्टिक की थैलियों में रखने से बचें क्योंकि वे कपड़े को सांस लेने नहीं देती हैं। इसके बजाय, साड़ी को सूती या मलमल के बैग में रखें।

6. साड़ी को सावधानी से संभालें: कलमकारी साड़ियों को सावधानी से संभालना चाहिए क्योंकि डिज़ाइन नाज़ुक होते हैं और आसानी से खराब हो सकते हैं। साड़ी पहनते समय उसे खींचने या खींचने से बचें।

हमारे पास आर्गनाइजर हैं आप खरीद सकते हैं। विवरण इस प्रकार है-
CM में आयाम: - लंबाई (45) x चौड़ाई (35) x ऊंचाई (18) CM | इंच में आयाम: लंबाई (17.71) x चौड़ाई (13.77) x ऊंचाई (7.08) इंच
पैकेज में शामिल: 4 बड़े साड़ी कवर; मटीरियल: कॉटन हवा पार होने योग्य फ़ैब्रिक.
क्लियर विजिबिलिटी और इंस्टेंट लुक के लिए पारदर्शी फ्रंट विंडो.
लंबे जीवन उच्च गुणवत्ता वाली साड़ी कवर बैग आपकी महंगी और पसंदीदा साड़ियों को व्यवस्थित करने में मदद करता है।
धूल, नमी और पतंगों से अपनी पसंदीदा सिल्क/कॉटन साड़ी को रोकें।
कॉटन साड़ी कवर: सोल साड़ी कवर / बैग उच्च गुणवत्ता वाले 250 GSM टिकाऊ कॉटन मटीरियल से बना है. यह कपड़े का है ताकि आप गंदे होने पर धोने के बाद इसका उपयोग कर सकें। कपास सामग्री प्लास्टिक और भंडारण उद्देश्य के लिए गैर बुना जैसी अन्य सामग्री पर अत्यधिक बेहतर है। मटीरियल सॉफ्ट है और यह आपकी कीमती साड़ी, ड्रेस, लहंगा और अन्य ऑउटफिट की सुरक्षा करता है।
क्लोज़र और स्टिचिंग: ये साड़ी कवर मेटल रनर के साथ ज़िप क्लोज़र के साथ आता है। बैग की सिलाई प्रशिक्षित महिलाओं के साथ की जाती है।
साइज़ और मात्रा: बैग 16 X 14 इंच का है और पैकेज में कुल 12 यूनिट कवर है।
देखभाल: साड़ी बैग धोने योग्य और पुन: प्रयोज्य हैं इसलिए नियमित भंडारण उपयोग के लिए आपको कुछ समय बाद कवर धोने की आवश्यकता होती है। हल्के डिटर्जेंट का उपयोग करें और गर्म पानी का उपयोग न करें। धोने के बाद कृपया बैग को आयरन करें ताकि यह फ्रेश लुक में आए।


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गुरुवार, 25 जुलाई 2024

कलमकारी साड़ी और आपका स्टाइल- डॉ अनुजा भट्ट


जब भी हम साड़ी या कोई ड्रेस पहनते हैं ताे सबसे पहले यह सवाल जरूर आता है कि इसके साथ क्या अच्छा लगेगा। खासकर अगर आप काेई कलात्मक साड़ी पहन रही हाें ताे। आज मैं आपकाे कलमकारी साड़ी के साथ आप पर कौन सा स्टाइल जचेंगा इस पर बात करूंगी। सच कहूं तो कलमकारी साड़ी को स्टाइल करना एक मज़ेदार और रचनात्मक प्रक्रिया हो सकती है, क्योंकि ये साड़ियाँ एक्सेसरीज़ के लिए बहुत सारे विकल्प प्रदान करती हैं ।


 आभूषण: कलमकारी साड़ियाँ अक्सर काफी रंगीन और इसके डिजाइन बहुत सघन हाेते हैं इसलिए हलके आभूषण पहनें । आप लुक को पूरा करने के लिए छोटे झुमके या स्टड, एक साधारण हार और एक कंगन या चूड़ी पहन सकती हैं। वैकल्पिक रूप से, आप अपने पहनावे में झुमके या पारंपरिक दक्षिण भारतीय आभूषण भी पहन सकते हैं।

फुटवियर: कलमकारी साड़ी के साथ आप कई तरह के फुटवियर पहन सकती हैं। आजकल डिजाइनर जूतियां बहुत पसंद की जा रही हैं। इसमें राजस्थानी से लेकर पंजाबी तक के कई डिजाइन मिल जाते हैं। इसे माेजरी भी कहते हैं। इसके अलावा स्लाइडर में भी ट्रेंड में है। ज्यादातर फ्लैट-हील, बैकलेस और ओपने टो होते हैं. इस तरह की चप्पल पहनने में बेहद हल्की और दिखने में काफी अट्रैक्टिव होती हैं. स्लाइडर कैजुअल और अट्रैक्टिव लूक देने में मदद करते हैं. हील्स साड़ी काे खास बना देती है। हाई-हील होने के कारण इस तरह के फुटवियर आपको लंबा दिखाने में मदद करते हैं. हालांकि हील्स पहनने में उतने आरामदायक नहीं होते पर पहने जाने पर ये आपके आउटफिट को काफी खूबसूरत बना सकते हैं.

 मेकअप- आप ब्लश, न्यूट्रल लिप कलर और हलका आई मेकअप कर सकती हैं। मेकअप से पहले अपने चेहरे पर मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। इससे आपके चेहरे पर मेकअप का पर्फेक्ट लुक आता है। मॉइश्चराइजर से आपकी त्वचा सॉफ्ट और चमकदार भी बनती है। मॉइश्चराइजर लगाने से पहले चेहरे को पहले अच्छे से साफ जरूर करें। इसके बाद ही मेकअप के आगे के स्टेप्स अपनाएं।
दूसरे स्टेप में सही बेस का प्रयोग करना जरूरी है। इसके लिए आप लाइट फाउन्डेशन, सीसी या बीबीसी क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं। आजकल मार्किट में इस तरह की कई क्रीम मौजूद है, जिसे लगाने पर एकदम नेचुरल लुक आता है। इसे अपने चेहरे पर ब्यूटी ब्लेंडर की मदद से लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि अगर आप किसी गर्म या नमी वाली जगह पर रहती हैं तो हेवी फाउंडेशन का यूज करने से बचें। चेहरे पर हो रहे डार्क सर्कल्स, दाग-धब्बे या पिंपल्स को प्राइमर और कंसीलर लगाकर छुपाया जा सकता है। कंसीलर और प्राइमर को अपने स्किन के टोन से हल्का लाइटर लें। अगर आप किसी ऐसी जगह जा रहे हैं जहां आपको काफी लंबे समय तक रहना है तो इन दोनों का इस्तेमाल करना काफी अच्छा रहेगा।
लाइट मेकअप के लिए फेस टोन का कॉम्पैक्ट लगाना भी जरूरी है। इसके इस्तेमाल से आपका चेहरा नेचुरल लुक का लगता है। इसके अलावा अगर आप ब्लश लगाना पसंद करती हैं तो ज्यादा चमकदार या डार्क रंग का ब्लश का इस्तेमाल न करें। हल्के रंग के ब्लश से लाइट मेकअप लगता है। ध्यान रहे कि ब्लश को सिर्फ चेहरे के एक चीकबोन्स से दूसरे तरफ के चीकबोन्स तक लगाना है। इसके अलावा गर्दन, माथे और नाक के नथुने पर भी आप इसे हल्का सा लगा सकती हैं।
मेकअप में सबसे अहम स्टेप आई मेकअप माना जाता है। आईशैडो, आइ लाइनर और काजल लगाने से आंखों की सुंदरता और बढ़ती है। हालांकि, जब आप लाइट मेकअप कर रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आईशैडो के कलर हल्के या न्यूड हो। आजकल बाजारों या ऑनलाइन में आपको आसानी से न्यूड कलर के शैड्स मिल सकते हैं. वहीं, आई लाइनर थोड़ा पतला लगाएं। इससे आपकी आंखे काफी आकर्षक लगेंगी। इसके बाद आंखों पर भी पतला काजल लगाएं. मस्कारा का इस्तेमाल न करें, इससे लाइट की बजाए हैवी लुक लगेगा।
लाइट मेकअप के दौरान डार्क कलर की लिपिस्टिक लगाने की बजाए लाइट शैड या न्यूड शैड की लिपिस्टिक का इस्तेमाल करें। इससे आपका चेहरा काफी अच्छा निखरेगा। अगर आप लिपिस्टिक लगाना पसंद नहीं करती हैं तो लिप ग्लॉस भी लगा सकती हैं, इससे आपके होंठ नेचुरल लगेंगे।
 हेयरस्टाइल: अपनी व्यक्तिगत पसंद और अवसर के आधार पर, आप अपने बालों को कई तरह से स्टाइल कर सकते हैं। एक साधारण लो बन या साइड ब्रेड आपके लुक में एक खूबसूरत टच जोड़ सकता है। आप अपने बालों को ढीले कर्ल या लहरों में भी खुला छोड़ सकती हैं ताकि अधिक कैज़ुअल लुक मिल सके।
ब्लाउज़: आप अपनी कलमकारी साड़ी के साथ जो ब्लाउज़ पहनती हैं, वह प्लेन और डिजाइनर दाेनाे हाे सकते हैं।

हमारे सभी उत्पादों को देखने के लिए हमारे फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप से जुड़िए।
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शनिवार, 20 जुलाई 2024

आपको भी पसंद हैं ना तांत साड़ियां- डा. अनुजा भट्ट

यह मैं कोई अनोखी बात नहीं कह रही हूं कि भारत विविधता भरा देश है बोली भाषा खानपान सब कुछ अलग-अलग है। हम सब इस बात के जानते हैं। लेकिन हम महसूस तब करते हैं जब हम आपस में अलग अलग लोगों से मिलते हैं। चीजों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को महसूस करते हैं। मसलन खानपान तो अलग है ही, खाने और पकाने का तरीका भी अलग अलग है। पहनने का तरीका भी अलग है। हम किसी भी चीज को किसी भी तरह पहन खा लेते हैं अगर हम उन सब तथ्य और सूचनाओं से अंजान हैं। कभी कभी बड़ी बेवकूफी भी कर जाते हैं जैसे किसी आध्यात्मिक मोटिफ न पहचान कर हम उसे अपनी डाइनिंग टेबल के कवर पर सजा देते हैं। जैसा कि आप जानते ही हैं कि मैं पिछले 4 सालें से फैशन और कला पर काम कर रही हूं और आनलाइन प्रोडक्ट खरीदती बेचती और बनवाती हूं। इस दौरान कला कलाकार क्राफ्ट से जुड़े लोगों से संपर्क हुआ और बहुत सारी जानकारियां हासिल हुई। सच कहूं तो बहुत आनंद आ रहा है। मैं सोचा कि क्यों न यह जानकारियां आपसे साझा करूं। आप इन सूचनाओं को और सटीक भी बना सकते हैं।

आज मैं बात कर रही हूं तांत साड़ी की। भारत के बंगाल राज्य में मुख्य रूप से  पहनी जाने वाली तांत साड़ियां आज पूरी दुनिया में पहनी जा रही हैं। मेरे विदेश में रह रहे मित्र अक्सर इस तरह की साड़ियां मुझसे मंगवाते रहते हैं। अगर अपने देश की बात करूं तो यह भारतीय उपमहाद्वीप में गर्म और आर्द्र जलवायु के लिए सबसे आरामदायक साड़ी मानी जाती है।

तांत शब्द का अर्थ बंगाल में हथकरघा है जो सूती साड़ियों और धोती आदि जैसे अन्य वस्त्र बुनता है। बंगाल के बुनाई के इतिहास 15 वीं शताब्दी से माना जा सकता है। पहली बार शांतिपुर में हथकरघा लगा  और वहाँ से यह अन्य स्थानों तक फैल गया। 16वीं-18वीं शताब्दी के दौरान मुगल शासन के दौरान भी बुनाई की कला फलती-फूलती रही। बुनाई की प्रक्रिया में कार्यरत लोगों ने इसके लिए प्रशिक्षण भी लिया। और मुगल दस्तकारों से जामदानी बुनाई सीखी। 

  बुनाई की यह प्रक्रिया ब्रिटिश शासन से लेकर बंगाल विभाजन तक जारी रही और बुनाई की प्रक्रिया में निरंतर सुधार होता रहा। बंगाल विभाजन के बाद, बांग्लादेश से हिंदू बुनकर भारत चले आए और बुनकरों को तांत साड़ी की पारंपरिक बुनाई शैली से परिचित कराया।

 

 इस समय यह साड़ियां सबसे ज्यादा भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के नदिया ज़िले में शांतिपुर  और फुलिया  और हुगली जिले में धानीखली बेगलपुर और अटपुर में बन रही हैं। साड़ियों के नाम भी इससे जुड़ गए हैं बुनाई की "फुलिया तंगेल" शैली शांतिपुर और फुलिया में आए प्रवासी तंगेल बुनकरों की देन है। इन साड़ियों में भारी बॉर्डर, फूलों के डिज़ाइन और कई पैस्ले और कलात्मक रूपांकनों की झलक मिलती है। इसका पल्लू और बार्डर ही इसकी विशेषता है। इसे फ्लोरल, पैस्ले और अन्य डिजाइन के साथ बुना जाता है।

बनती कैसे हैं साड़ियां-तांत साड़ी कपास से बनी होती है, जो अन्य साड़ियों की तुलना में बेहतरीन ड्रेप होती है। इस छह गज की साड़ी को बनने में 6-7 दिन लगते हैं। तांत साड़ी की कीमत अलग-अलग प्रकार की तांत साड़ियों और बुनाई प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए कपड़े और रूपांकनों के साथ भिन्न हो सकती है।

 तांत साड़ी की बुनाई की प्रक्रिया मिलों से कपास के धागों के बंडलों को साफ करने से शुरू होती है। फिर उन्हें धूप में सुखाया जाता है, ब्लीच किया जाता है, फिर से सुखाया जाता है और अंत में उन्हें उबलते रंगीन पानी में डुबोकर रंगा जाता है। एक बार डुबाने के बाद, उन्हें और मजबूत और महीन कपड़े में बदलने के लिए स्टार्च किया जाता है। कपड़े के धागों को बुनाई करघे में डालने के लिए बांस के ड्रम का भी इस्तेमाल किया जाता है।

 प्रत्येक तांत साड़ी के शरीर, पल्लू और बॉर्डर पर एक अनूठा पैटर्न होता है। ये पैटर्न एक कलाकार द्वारा बनाए जाते हैं, जो फिर नरम कार्डबोर्ड को छेदता है और उन पर डिज़ाइन को स्थानांतरित करता है। फिर कार्डबोर्ड को करघे से लटका दिया जाता है। एक बार यह सेट-अप हो जाने के बाद, बुनाई की प्रक्रिया शुरू होने के लिए तैयार हो जाती है। सबसे छोटी तांत साड़ियों को 10-12 घंटों में बुना जा सकता है। अधिक जटिल रूपांकनों वाली साड़ी को पूरा होने में संभवतः पाँच या छह दिन लग सकते हैं।

कैसे पहनें- बंगाली तांत साड़ी को स्टाइल करना आसान और अधिक सुविधाजनक है। कॉटन तांत साड़ी के साथ एक क्लासी ब्लाउज हमेशा सहजता से जंचता है। आप अपने लुक के ग्लैमर को बढ़ाने के लिए क्रॉप टॉप, बोट नेक ब्लाउज, हॉल्टर नेक या ट्यूब ब्लाउज भी ट्राई कर सकती हैं।

एक आकर्षक एक्सेसरी तांत साड़ी के लिए जरूरी है। ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी हमेशा सबसे अच्छी लगती है, चाहे वह कैजुअल इवेंट हो या कोई बड़ा इवेंट। याद रखें, कम ही ज़्यादा है, इसलिए हमेशा किसी भी लुक को ग्रेस और ग्लोरी के साथ उभारने के लिए सिंपल ज्वेलरी ही चुनें। अपने एथनिक लुक को पूरा करने के लिए क्लच बैग जोड़ें।

 साड़ी का रखरखाव 

  •  तांत साड़ियां वजन में हल्की और कुछ हद तक पारदर्शी होती हैं, यही कारण है कि उन्हें धोने में उचित देखभाल की आवश्यकता होती है।
  • इन साड़ियों को धोने से पहले इन्हें ठंडे पानी में सेंधा नमक मिलाकर भिगो दें। यह तकनीक रंग को फीका होने से बचाती है।
  • तांत साड़ियों को धोने के लिए हल्के डिटर्जेंट का उपयोग करने का प्रयास करें ताकि कोई भी रसायन इन साड़ियों की बनावट को नुकसान न पहुंचा सके।
  • अपनी सूती तांत साड़ी की कुरकुरापन और कठोरता बनाए रखने के लिए धोते समय स्टार्च का उपयोग करने पर विचार करें।
  • एक बार धुल जाने के बाद साड़ी को छायादार जगह पर लटका दें और पूरी तरह सूखने दें।
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कापीराइट अनुजा भट्ट

 

शनिवार, 6 जुलाई 2024

क्या आप धार्मिक फैशन के बारे में जानते हैं-डा. अनुजा भट्ट


मैं इन दिनाें महसूस कर रही हूं कि धर्म और धार्मिक आस्थाएं अब फैशन के जरिए एक नया तरह के ट्रेंड सेट कर रही हैं। खुद मेरे पास भी इस तरह के बहुत से प्रोडक्ट हैं जिसे लाेग खरीदते रहते हैं। यह ज्यादा कीमत से लेकर मामूली कीमत में भी मिल जाते हैं। गायत्री मंत्र ताे अब हर जगह मिल जाता है। सिक्के से लेकर साड़ी दुप्ट्टा, हाेम डेकाेर और आभूषण में भी। नामी गिरामी कंपनियां भी इसे बना और बेच रही हैं । सिलेब्रिटी पुलकित सम्राट से लेका नीता अंबान जैसी कई सिलेब्रिटी अपने पहनावे में धार्मिक मंत्र दर्शन काे महत्व दे रही हैं। यह कितना बाैद्धिक है कितना आध्यात्मिक और कितना व्यवसायिक यह कहना जल्दबाजी हाेगी। पर जिस तरह से पुलकित ने शादी में मिंट ग्रीन कलर की शेरवानी पहनी थी और जिस पर गायत्री मंत्र लिखा था उसी के साथ उन्हाेंने शेरवानी के साथ मैचिंग कलर की धोती, स्टोल और पगड़ी भी पहनी थी । शेरवानी को कॉम्प्लीमेंट करने के लिए उन्होंने मोतियों की माला नहीं, बल्कि ग्रीन स्टोन का हार चुना। हाथों में रिंग और कानों में डायमंड स्टड के साथ पहना। आने वाली इस तरह उन्होंने दूल्हों को एक्सपेरिमेंट करने के काफी सारे ऑप्शन्स दिए। वहीं नीता अंबानी ने अपने बेटे अनंत अंबानी की शादी में एक शानदार लाल रेशमी बनारसी साड़ी पहनी थी, जिस पर बारीक सोने की ज़री का काम और पक्षियों की आकृतियाँ बनी हुई थीं। हालाँकि यह पहनावा पहले से ही आकर्षक था, लेकिन असली आकर्षण तब सामने आया जब उन्होंने पल्लू दिखाया जिसपर सोने में कढ़ाई करके पवित्र गायत्री मंत्र लिखा हुआ था। मुझे लगता है अब इस धार्मिक आस्थाएं भी बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। जिसे हम खरीद रहे हैं। कुछ मंत्र बहुत पापुलर हाे गए हैं। रचनात्मकता का यह प्रयाेग बहुत संजीदा भी है। लेकिन यहां संजीदगी गायब है। मेरा नजरिया है सृजन का विस्तार हाेना चाहिए। पर इस विस्तार के साथ कुछ गाइडलाइंस भी हाेनी चाहिए। यह सब बहुत पवित्र मंत्र हैं। हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र को महामंत्र भी कहा जाता है। मान्यता है कि दुनिया की पहली पुस्तक ऋग्वेद की शुरुआत इसी मंत्र से होती है। ब्रह्मा जी ने चार वेदों की रचना से पहले इस मंत्र की रचना की थी। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। इसका पहला अर्थ है: हम पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का ध्यान करते हैं। हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की तरफ चलने के लिए परमात्मा अपने तेज से हमें प्रेरित करे। दूसरा अर्थ है: उस दुःखनाशक, तेजस्वी, पापनाशक, प्राणस्वरूप, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में परमात्मा प्रेरित करे। तीसरा अर्थ है: ॐ: सर्वरक्षक परमात्मा, भू: प्राणों से प्यारा, भुव: दुख विनाशक, स्व: सुखस्वरूप है, तत्: उस, सवितु: उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक, वरेण्य: वरने योग्य, भर्गो: शुद्ध विज्ञान स्वरूप का, देवस्य: देव के, धीमहि: हम ध्यान करें, धियो: बुद्धि को, यो: जो, न: हमारी, प्रचोदयात्: शुभ कार्यों में प्रेरित करें। एक पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि विश्‍वामित्र ने इस मंत्र के बल पर ही एक नई सृष्टि का निर्माण किया था। इसी से पता चलता है कि यह मंत्र कितना शक्तिशाली है। ऐसा कहा जाता है कि इसके हर अक्षर के उच्चारण से एक देवता का आह्वान होता है। जब भी इस तरह का पहनावा पहनें ताे याद रखें कि गायत्री मंत्र स्नान करके पहनें। वस्त्र गंदा न हाे। आप इस मंत्र काे धारण करते हैं ताे इसकी पवित्रता का भी ख्याल रखें। पहनने से पहले साेचे आपने क्या पहना है उसका महत्व क्या है। बिना विचारे कुछ भी न पहने। किसी भी चीज काे खरीदते समय भी अगर नहीं पता है तो दुकानदार से पूछिए यह क्या लिखा है इसका अर्थ क्या है। मेरा मानना है धार्मिक शिक्षा मंत्र वाले परिधान और आभूषण काे पहनने वाले की उस पर आस्था भी हाेनी चाहिए। आप क्या कहते हैं.

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

कपड़ों के हैं रंग निराले, कुछ चमकीले कुछ है सादे

 डा. अनुजा भट्ट

 जब भी हम कपड़ा खरीदने का मन बनाएं तो उससे पहले उसके बारे में जानकारी ले लें। आनलाइन शापिंग में आपके लिए यह बहुत जरूरी है।  क्योंकि यहां आप कपड़े को छूकर नहीं देख सकते। आपके पास फोटो का आप्शन है।

#https://www.facebook.com/APARAJITA-ORGANISATION-1447701708871014/


आज आपके लिए पेश कर रहा है फेब्रिक के बारे में जानकारियां...

आज हम फ्रेबिक के बारे में बात करेंगे।

बात की शुरूआत कॉटन से..

·            कॉटन( Cotton)

 जिसे हिंदी में सूती कहते हैं। यह कपास से बनाया जाता है। इस पौधें में रूई निकलती है जिससे सूत काता जाता है और इससे धागा बनता है । सूत से ही सूती शब्द बना है। यह हजारों सालों से उपयोग में लाया जा रहा है . सूती कपड़ा बहुत आरामदायक होता है .यह दुनिया भर में सबसे अधिक पसंद किये जाने वाला कपड़ा है . इसमें किसी केमिकल का उपयोग नहीं होता अतः स्किन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता है . एलर्जी या रेशेज होने की संभावना बहुत कम होती है .

कई प्रकार के कपड़े जैसे कैलिको , डेनिम , ड्रिल , टेरी टोवलिंग . कैम्ब्रिक , गेबरडीन , पापलीन , वेलवेट आदि कॉटन से बनाये जाते हैं . इसके अलावा कॉटन के साथ अन्य फेब्रिक को मिलकर कॉटन ब्लेंड फेब्रिक जैसे कॉटन लिनन , कॉटन ट्वील , कॉटन जर्सी , कॉटन साटिन आदि कपड़े बनाये जाते हैं .

·          पोलीकॉटन ( Policotton)

यह प्राकृतिक कॉटन तथा सिंथेटिक पोलिस्टर यार्न को मिलाकर बनाया जाता है . कपड़े के उपयोग किये जाने के अनुसार कॉटन और पोलिस्टर की मात्रा में भारी फेरबदल हो सकता है . पोली कॉटन कपड़ा पतला और वजन में हल्का होता है और बहुत मजबूत होता है . ये लम्बे समय तक ख़राब नही होता .इस कपड़े में सूती कपड़े का आराम और सिंथेटिक कपड़े की मजबूती दोनों का लाभ मिल जाता है . इसके कुछ उदहारण में लिमा कॉटन , पोपलिन , मुस्लिन , पनामा , कैनवास आदि शामिल हैं ये कपड़े मजबूत होने के साथ ही इनमे जल्दी सिलवट नहीं पड़ती , हवा लगती है , इस पर इस्त्री करना आसान होता है , यह सिकुड़ता नहीं है , कॉटन से सस्ता होता है , ज्यादा बार धोया जा सकता है .

·          लिनन – Linen

अलसी के पौधे से मिलने वाला रेशा Fiber लिनन कहलाता है . इस फाइबर से बने कपड़े बहुत आरामदायक और मजबूत होते हैं . लचीलापन कम होने के कारण तह लगाकर बार बार इस्त्री करने से इसके रेशे टूट सकते है . लिनन से पहनने के कपड़ों के अलावा , कई प्रकार के उत्पाद बनाये जाते हैं जैसे परदे , सोफा कवर , जैकेट , टेबल क्लॉथ , बिस्तर और उसके कवर , तौलिये आदि .  इसका उपयोग जैकेट की आंतरिक परत के लिए भी किया जाता है, इसलिए नाम "अस्तर" है।

 

·         रेशम , सिल्क – Silk

सिल्क दुनिया का सबसे ज्यादा चमकीला और सुन्दर प्राकृतिक रेशा है . यह रेशम के कीड़े द्वारा बनाया जाता है . रेशम के धागे से कपड़े बनाना आसन नहीं है इसमें बहुत मेहनत लगती है इसलिए सिल्क से बने कपड़े बहुत महंगे होते हैं .सिल्क से बने कपड़े बहुत मुलायम , चमकदार और शाही होते हैं. रेशन का प्राकृतिक धागा हाइपो एलेर्जेनिक होता है यानि इसे पहनने से एलर्जी नहीं होती .सिल्क से बने कई फेब्रिक जैसे शिफोन , जोर्जट , ओर्गेन्जा , टसर , क्रेप , साटिन आदि दुनिया भर में बहुत पसंद किये जाते हैं . सिल्क से कपड़े दिखने में मुलायम भले ही हों लेकिन मजबूती मे कम नहीं होते हैं .

 

·         क्रेप – Crep

क्रेप शब्द फ्रेंच भाषा में क्रीपर से बना है जिसका मतलब सिलवट वाला होता है . क्रेप कपड़ा की विशेषता यही होती है कि इसकी सतह खुरदरी होती है . छूने पर यह कपड़ा दानेदार महसूस होता है ।यह किसी भी फाइबर से बना हों सकता है  अगर सिल्क से बना हो तो इसे क्रेप सिल्क कहते हैं और यदि कॉटन से बना हो तो इसे कॉटन क्रेप कहते है . सिल्क से बना क्रेप चमकदार होता है . क्रेप प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह के धागों से बनाया जा सकता है . पोलिस्टर क्रेप बहुत कॉमन है और बहुत किफायती भी है .सिंथेटिक क्रेप की देखभाल अपेक्षाकृत आसान होती है . इसमें जल्दी से सिलवटें नहीं पड़ती इसलिए पहनना आसान होता है वजन में यह हल्का होता है इससे बने कपडे बहुत पसंद किये जाते हैं . क्रेप कपड़े का उपयोग कपड़े बनाने के लिए किया जा सकता है, जैसे  सूट, ब्लाउज, पैंट, और बहुत कुछ। Crêpe घर की सजावट में  जैसे पर्दे और तकिए के कवर के लिए भी इसका उपयोग होता है ।

 

·         लाईक्रा – Licra

यह कपड़ा इलास्टेन नामक मेटेरिअल से बना होता है जो इन्सान द्वारा विकसित किया गया कृत्रिम फाइबर है . इलास्टेन को spandx के नाम से भी जाना जाता है . इससे स्पोर्ट्स वेयर , स्विम वेयर . अंडर गारमेंट्स आदि बनाये जाते हैं .

इसे कितनी भी बार खींचें यह लौटकर पुनः अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाता है . यह वजन में हल्का , मुलायम और चिकनी सतह वाला होता है . इसे किसी अन्य रेशे के साथ मिलाकर कपड़ा बनाया जा सकता है . यह धूप , पसीने या डीटरजेंट से ख़राब नहीं होता है

उपयोग के हिसाब से लाईक्रा की मात्रा कम या ज्यादा करके कपडे बनाये जाते हैं . बाजार में लाइक्रा के नाम से बिकने वाले फैशनेबल कपड़ों में लाइक्रा की मात्रा सिर्फ 2 – 3 % ही होती है . स्पोर्ट्स वेयर बनाने के लिए लाईक्रा की मात्रा 25 – 30 % तक रखी जाती है

·            पोलिस्टर – Polyester

पोलिस्टर एक मानव निर्मित सिंथेटिक फाइबर है जो कोयला और पेट्रोलियम जैसे पेट्रोकेमिकल से बनाया जाता है ।यह कपड़ा बहुत मजबूत और नर्म होता है . इसमें जल्दी सिलवटें नहीं पड़ती . इसे दूसरे रेशे के साथ बुना जा सकता है. इन कपड़ों में ना तो हवा लगती है और ना ही इनमे सोखने की ताकत होती है . ये कपड़े पहनने से असहज और चिपचिपा महसूस होता है . जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती है उन्हें यह कपड़ा पहनने से एलर्जी हो सकती है . इसके अलावा यह कपड़ा तुरंत आग पकड़ लेता है . रसोई घर में ये कपड़े पहनना सुरक्षित नहीं होता है .

 

 

·          रेयोन या विस्कोस – Reyon Viscose

रेयान को ही विस्कोस भी कहते हैं . यह फेब्रिक सेल्युलोस फाइबर से बनता है जो लकड़ी में पाया जाता है . रेयान सस्ता , नर्म , हवा पास होने वाला , किसी दूसरे रेशे के साथ बुना जा सकने वाला , और आसानी से रंग चढ़ाये जा सकने वाला फेब्रिक है . इसे ड्राई क्लीन करवाना पड़ता है क्योकि धोने से यह ख़राब हो जाता है .

यह खिंच कर ढीला हो जाता है और वापस अपनी अवस्था में नहीं आता कपड़ा बहुत मजबूत नहीं होता और गीला होने से कमजोर हो जाता है . परदे या होम फर्निशिंग में काम नहीं आता . दाग धब्बे जल्दी लग जाते हैं .

दूसरे रेशे के साथ मिलाकर बनाया कपड़ा सस्ता पड़ने के कारण इसका  बहुत  उपयोग होता है .विस्कोस(Viscose) विस्कोस एक अर्ध-सिंथेटिक प्रकार का रेयान फैब्रिक है जो लकड़ी के गूदे से बना होता है, जो रेशम के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। यह रेशम जैसा कपड़ा है और यह आकर्षक है इसका उपयोग कपड़ों की वस्तुओं जैसे कि ब्लाउज, कपड़े और जैकेट के लिए किया जाता है, और कालीन बनाने के लिए भी।

 

·          वेलवेट – Velvet

यह विशेष प्रकार की बुनाई से बनाया गया कपडा होता है जिसमे एक विशेष प्रकार का शाही लुक आता है . यह किसी विशेष रेशे से नहीं बनता बल्कि यह कपड़ा बनाने का एक तरीका है . अलग कपड़े के उपयोग किये जाने से इसे अलग नाम से पुकारा जाता है जैसे मार्बल वेलवेट , शिमर , प्लश , कॉटन वेलवेट , ब्रोकेड वेलवेट , क्रश्ड वेलवेट आदि

यह प्राकृतिक रेशे जैसे कॉटन , वूल , लिनन , रेशम तथा कृत्रिम रेशे जैसे रेयोन , पोलिस्टर आदि किसी से भी बनाया जा सकता है . यह सर्दी के मौसम में अच्छा रहता है क्योकि इसकी मोटाई अधिक होती है .पहनने के कपड़ों के अलावा वेलवेट से तकिया कवर , सोफा कवर , पर्दे आदि भी बनाये जाते हैं जो बहुत अच्छा look देते हैं . इसलिए दुनिया भर में बहुत पसंद किये जाते हैं . वेलवेट के गुण उसे बनाने में प्रयुक्त रेशे पर निर्भर होते है .

 

·          जोर्जट – Georgette

यह नायलॉन और पोलिस्टर को मिलाकर बनाया जाता है . महिलाओं को यह बहुत पसंद आता है क्योंकि यह हल्का , नर्म होता है और शानदार दीखता है . पहले इसे सिल्क से बनाया जाता था लेकिन अब सभी प्रकार के रेशे से बनाया जाता है . यह कम चमकीला होता है सामान्यतया चटक रंग में नहीं होता है , थोड़ा खिंच सकता है . यह यार्न में ट्विस्ट डालकर बनाया जाता है . यह एक प्रकार का क्रेप है ।

 

·          शिफोन – Chiffon

पहले शिफोन सिल्क से बनाया जाता था अब नायलोन तथा पॉलिस्टर से भी बनाया जाता है . पोलिस्टर शिफोन आने के बाद यह किफायती और मजबूत होने से बहुत लोकप्रिय हो गया है . यह कपडा पारदर्शक होता है . डेलिकेट होने के कारण इसे धोते वक्त ध्यान रखना पड़ता है . इसे ड्राई क्लीन करवाना अच्छा रहता है . यह नाजुक होने के कारण जल्दी उघड़ सकता है , यह जोर्जट से ज्यादा नर्म और चमकदार होता है .शिफॉन इतना फिसलता है कि सिलाई करना मुश्किल हो जाता है। कुछ टेलर कपड़ा सिलने के लिए कागज लगाते हैं ताकि सिलाई सही तरीके से हो सके . बाद में ध्यान से कागज निकाल दिया जाता है

 

·          कैनवस canvas

एक सादा-बुना कपड़ा है जो आमतौर पर भारी सूती धागे से बना होता है और कुछ हद तक, लिनन यार्न से। कैनवस कपड़े टिकाऊ, मजबूत होते हैं। सिंथेटिक फाइबर के साथ कपास सम्मिश्रण करके, कैनवास पानी प्रतिरोधी या यहां तक कि जलरोधी बन सकता है, जिससे यह एक आउटडोर कपड़े बन सकता है।  कैनवस एक अत्यंत टिकाऊ सादा-बुना कपड़ा है जिसका उपयोग नाव की पाल, टेंट, मार्के, बैकपैक्स, शेल्टर बनाने के लिए किया जाता है, तेल चित्रकला के लिए एक सहायक के रूप में और अन्य वस्तुओं के लिए, जिसके लिए एबंट की आवश्यकता होती है, साथ ही हैंडबैग, जैकेट और जूते।

 

·          कश्मीरी kasmeri / मेरिनो ऊन(Merino Wool)

एक प्रकार का ऊन का कपड़ा है जिसे कश्मीरी बकरियों और पश्मीना बकरियों से बनाया जाता है। कश्मीरी एक प्राकृतिक फाइबर है जो अपने अत्यंत नरम अहसास के लिए जाना जाता है। तंतु बहुत महीन और नाजुक होते हैं, स्पर्श करने पर एक रेशमी कपड़े की तरह महसूस होता है।  अक्सर कश्मीरी को ऊन के मिश्रण में बनाया जाता है और अन्य प्रकार के ऊन के साथ मिलाया जाता है, जैसे मेरिनो। मेरिनो ऊन एक प्रकार का ऊन है जो मेरिनो भेड़ के कोट से इकट्ठा किया जाता है। मेरिनो ऊन को एक शानदार फाइबर माना जाता है और इसका उपयोग अक्सर मोजे और बाहरी कपड़ों के लिए किया जाता है।

·           जर्सी (Jersey)

एक नरम स्ट्रेचबल बुना हुआ कपड़ा है जो मूल रूप से ऊन से बनाया गया था। आज कपास, कपास मिश्रणों और सिंथेटिक फाइबर से भी जर्सी बनाई जाती है। स्वेटशर्ट या बेड शीट  बनाने में इसका उपयोग होता है।

 

·          शनील sanel

शनील का कपड़ा नरम  होता है। यह भी एक बुना हुआ कपड़ा है जो विभिन्न प्रकार के विभिन्न रेशों से बनाया जा सकता है, जिसमें कपास, रेशम, ऊन और रेयान शामिल हैं।

 

·          दमस्क(Damask)

एक प्रतिवर्ती, जेकक्वार्ड-पैटर्न वाला कपड़ा है, जिसका अर्थ है कि पैटर्न कपड़े पर बुना हुआ है,  यह प्रिंट में भी बनता है । कपड़े का डिज़ाइन बुनाई के माध्यम से बनाया गया है, जो दो अलग-अलग बुनाई तकनीकों का एक संयोजन है। दमस्क पैटर्न या तो बहु-रंगीन या एकल रंग का हो सकता है। रेशम, लिनन, कपास, ऊन, या सिंथेटिक फाइबर, जैसे रेयान जैसे विभिन्न वस्त्रों से कई प्रकार के दमस्क बनाए जा सकते हैं।

·          गिंगहम(Gingham)

एक सूती कपड़ा है, जिसे एक चेक पैटर्न बनाने के लिए एक सादी बुनाई का उपयोग किया जाता है। गिंगहैम आमतौर पर दो-रंग का पैटर्न है,  लाल और सफेद या नीला और सफेद ।  पैटर्न विभिन्न आकारों में आ सकते हैं। Gingham पैटर्न प्रतिवर्ती है और दोनों तरफ समान दिखाई देता है। इसकी कम लागत और उत्पादन में आसानी के कारण गिंघम एक लोकप्रिय कपड़ा है।

 

·          साटन(Satin)

साटन बुनाई एक लोचदार, चमकदार, मुलायम कपड़ा  है। साटन कपड़ा एक तरफ नरम, चमकदार और दूसकी तरफ सादा। यह साटन बुनाई तकनीक का एक परिणाम है।

 

·          स्वेड(Suede)

एक प्रकार का चमड़ा है जिसे जानवरों की खाल के नीचे से बनाया जाता है, जो इसे नरम सतह देता है। स्वेड आमतौर पर भेड़ के बच्चे से बनाया जाता है, लेकिन यह अन्य प्रकार के जानवरों से भी बनाया जाता है, जिसमें बकरी, सुअर, बछड़े, और हिरण शामिल हैं। इसका उपयोग जूते, जैकेट और सहायक उपकरण के लिए किया जाता है, जैसे बेल्ट और बैग।

 

·         तफ़ता(Taffeta)

एक  सादा बुना हुआ कपड़ा है, जो रेशम के अलावा पॉलिएस्टर, नायलॉन, एसीटेट या अन्य सिंथेटिक फाइबर के साथ भी बुना जा सकता है। तफ़ता कपड़े में आमतौर पर चमक होती है।  तफ़ता वजन में हल्का है इससे अस्तर कपड़ा बनता है।

 

·         (Toile) टॉइल

यह शब्द फ्रेंच का है। जिसका मलब है फ्रैब्रिक। यह  एक विशिष्ट प्रकार का लिनन है जो एक एक रंग में  बनता है आमतौर पर काले, नीले, या लाल रंग में। यद्यपि शब्द टॉइल का मतलब फ्रेंच में फैब्रिक है,  1700 के दशक में फ्रांस में इसने लोकप्रियता हासिल की। टॉयल डिज़ाइन गैर-फैब्रिक आइटम जैसे वॉलपेपर और फाइन चाइना के लिए लोकप्रिय हैं।  सका उपयोग भी घर की सजावट के लिए होता है।

 

·          ट्वीड(Tweed)

एक मोटा बुना हुआ कपड़ा होता है जिसे आमतौर पर ऊन से बनाया जाता है। एक सादे बुनाई या टवील बुनाई का उपयोग करके इसे बुना जा सकता है। यह एक अत्यंत गर्म,  मोटा और सख्त होता है। ऊन के ट्वीड को अक्सर  विभिन्न रंगों के धागों का उपयोग करके बुना जाता है। ट्वीड सूट और जैकेट के लिए बहुत लोकप्रिय है,  शिकारी लोग इस तरह के कपड़े को बहुत पसंद करते थे।

 

·          टवील(Twill)

टवील तीन प्रमुख प्रकार के कपड़ा बुना जाता है। कपड़े अपारदर्शी, मोटा और टिकाऊ है। ट्विल कपड़े शायद ही कभी  प्रिंट होते हैं, हालांकि कई रंगों के यार्न का उपयोग ट्वीड और हाउंडस्टूथ जैसे डिजाइनों को प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।  इसका उपयोग डेनिम,  और बेड लिनेन के लिए किया जाता है।

 

 

·          मलमल(Muslin)

मलमल एक ढीला-ढाला सूती कपड़ा है। यह सादे बुनाई तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है, जिसका अर्थ है कि एक एकल यार्न यार्न बारी-बारी से और एक ही ताना यार्न के नीचे।

 

·         25) ऑर्गेज़ा Organza

मूल रूप से रेशम से बनाया गया था।  सिंथेटिक फाइबर, मुख्य रूप से पॉलिएस्टर और नायलॉन से भी बनाया जा सकता है। ऑर्गेना को पूरे कपड़े में बहुत छोटे छेद ही उसकी विशेषता है,  ऑर्गेज़ा शादी के गाउन बनाने के लिए बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि  इसमें एक झिलमिलाहट का अहसास होता है।

 

·         26) लेस(Lace)

फीता यार्न या धागे से बना एक नाजुक कपड़ा है, जो विभिन्न तरीकों  से बनाया जाता है मूल रूप से रेशम और लिनन से बनाया गया था, लेकिन आज सूती धागे और सिंथेटिक फाइबर दोनों का उपयोग किया जाता है। फीता एक सजावटी कपड़ा है जिसका उपयोग घर की सजावट की वस्तुओं को उभारने के लिए किया जाता है।

 

·         27) चमड़ा(Leather)

जिसे जानवरों की खाल या खाल से बनाया जाता है और अलग-अलग तरह के जानवरों और विभिन्न उपचार तकनीकों के परिणामस्वरूप अलग-अलग चमड़े निकलते हैं। जबकि काउहेड चमड़े के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे लोकप्रिय पशु त्वचा है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत चमड़े का उत्पादन होता है, लगभग किसी भी जानवर को चमड़े में बनाया जा सकता है, मगरमच्छ से लेकर सूअर तक। चमड़ा एक टिकाऊ, शिकन प्रतिरोधी कपड़े है, और यह जानवरों के प्रकार, ग्रेड और उपचार के आधार पर कई अलग-अलग लग रहा है और महसूस कर सकता है।

·         28) मॉडल(Modal)

मोडल फैब्रिक एक अर्ध-सिंथेटिक फैब्रिक है जो पेड़ के गूदे से बना होता है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कपड़ों के लिए किया जाता है, जैसे अंडरवियर और पजामा, और घरेलू सामान, जैसे चादर और तौलिया। मोडल रेयान का एक रूप है, हालांकि यह रेयॉन की तुलना में थोड़ा अधिक टिकाऊ और लचीला है। मोडल को अक्सर कपास और स्पैन्डेक्स जैसे अन्य फाइबर के साथ मिश्रित किया जाता है। मोडल को एक नरम कपड़ा माना जाता है जो विस्कोस की तुलना में अधिक महंगा है।

·          शान्तांग (Shantung)

चीन के शेडोंग प्रांत में बनने वाला यह कपड़ा ऐतिहासिक रूप से रेशमी है। यह डुपियोनी के समान है। शान्तांग का उपयोग अक्सर दुल्हन के गाउन के लिए किया जाता है।

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