गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

लाडो तूने खाना खाया की नहीं-डॉ शिल्पा जैन सुराणा

नेहा खाना बना कर किचन साफ कर ही रही थी कि सासु माँ ने आवाज़ दी'नेहा, नैना आ रही है, उसका भी खाना बना लो, और हाँ आरव के लिए खिचड़ी बना देना नेहा ने कहा है।' नेहा की सास ने कहा और चली गयी। सुबह से काम कर रही नेहा सोच ही रही थी कि काम कर के दस मिनट आराम कर लेती है, तभी उसकी ननंद का फ़ोन आ गया। नेहा की नंनद उसी शहर में रहती थी,तो जब भी उनका मन होता चली आती। नेहा को थोड़ी खीझ सी हुई, अब उसे सारी तैयारी दोबारा करनी पड़ेगी। कमरे में गयी तो देखा राहुल नैना दी को ले कर आने को तैयार हो रहे है। 'नेहा मै नैना को लेने जा रहा हूँ तुम उसका कमरा सही कर दो।' 'राहुल दीदी अगर आ ही रही है, तो सुबह ही बता देती, अभी मैने खाना बनाया है, अब फिर से सब करना पड़ेगा, पिछले 2 दिन से कामवाली भी नही आ रही।' 'नेहा कोई मेहमान थोड़ी ही आ रहा है, नैना ही तो है, वो कौन सा पचास पकवान खायेगी, दो तीन रोटी ही तो खायेगी, आटा लगा लो' राहुल कहते कहते बाहर निकल गए । 
आरोही भी स्कूल से आती ही होगी, उसे खाना भी तो खिलाना है। जल्दी जल्दी काम निपटाती हूँ, इन सब चक्करो में उसे ये भी याद नही रहा कि उसने सुबह से नाश्ता भी नही किया।' वो किचन से निकली कि नैना दी आ गयी, साथ मे उनका 2 साल का छोटा बेटा आरव भी था। 'अरे भाभी, आपने आरव की खिचड़ी तो बना दी। उसे बहुत भूख लगी है। पहले उसे खिलाती हूं।' "बहु खाना लगा दो' उसके सास ससुर आ गए थे। 'आयी मम्मी जी', वो किचन में गयी और सारा खाना डाईनिंग टेबल पर लगा दिया। Mummyyyyyyyy....आरोही आ गयी थी। उसने आरोही के कपड़े बदले और उसे खाना खिलाने लगी। 'अरे भाई, पेट मे बहुत चूहे दौड़ रहे है, कोई खाना भी खिलायेगा या नही' राहुल पेट पर हाथ फिरा कर बोले। आती हूँ, बस 2 मिनट, आरोही को खाना खिलाते हुए नेहा ने आवाज़ दी। 'भाभी, आरव खिचड़ी खा ही नही रहा, ऐसा करो कि इसका उपमा बना दो, वैसे भी आपके हाथ का उपमा बहुत ही टेस्टी होता है।' 'दीदी आप भी खाना खा लो, राहुल भी खा रहे है।' नही भाभी, अभी बिल्कुल इच्छा नही है। थोड़ी देर में खाऊँगी।'- नैना ने कहा। नेहा ने आरव के लिए उपमा बनाया। नेहा ने घड़ी पर नजर डाली, 2.30 बज रहे थे।
 आज तो मजा ही आ गया, खाना बहुत लाजवाब था, देखो पनीर की सारी सब्जी मैंने ही चट कर दी। 'भाभी देखो न भैया को, भैया आपको पता है न, मुझे भाभी के हाथ की बनी पनीर की सब्जी कितनी पसंद है, कम से कम मेरे लिए तो छोड़ देते।' नैना ने कहा 'अरे भाई sorry मै तो भूल ही गया था, चलो कोई नही, नेहा तुम्हारे लिए फिर से बना देगी।' राहुल ने नेहा की तरफ देखा। नेहा को गुस्सा आया पर वो चाह कर भी कुछ भी नही बोली, किचन में गयी और सब्जी बनाने लगी। 'मम्मी देखो न आरव ने मेरे सारे खिलोने ले लिए' आरोही नेहा की साड़ी का पल्लू खीचते हुए बोली। 'वो तुम्हारा छोटा भाई है ना, मिल कर खेलो' नेहा ने कहा। आरोही चली गई। "भाभी, बहुत जोरो से भूख लग रही है, मेरी सब्जी बन गयी क्या?' हां दीदी, अभी आयी' नेहा ने कहा। अभी वो नैना को खाना परोस कर आई ही थी कि सासु माँ की आवाज़ आयी, नेहा नेहा...। 'अरे बहु सुनो, वो जयपुर वाले चाचाजी का फ़ोन आया है, वो और उनका परिवार एक शादी में उदयपुर आया हुआ है, तो शाम को वो खाना खाने आ रहे है, तैयारी कर लेना, सिर्फ 6 लोग है, ऐसा करो कोई भी 2 सब्जी, रोटी, औऱ चावल दाल बना लेना, याद है पिछली बार आये थे तो तुम्हारे हाथ का संदेश उन्हें कितना पसंद आया, संदेश भी बना लेना। राहुल को कहना वो बाजार से समोसे भी ले आएगा। वो लोग 6.30 बजे तक पहुंच जाएंगे।ऐसा करो वो नई क्रोकरी जो दीवाली पर राहुल के आफिस से मिली थी, निकाल लेना, अच्छी दिखेगी। 
'मम्मी जी, ऐसा करिये न आप एक सब्जी बना दीजिये। मै उतने दूसरी तैयारी करती हूँ।' 'बना तो देती, पर आज सर में बहुत दर्द हो रहा है, वैसे भी ज्यादा तो कुछ करना नही।' इतना कह कर सासु जी सीधे अपने कमरे में चली गयी। भाभी, मेरा ब्लू कलर वाला सूट नही दिख रहा, आपने कही प्रेस वाले को तो नही दे दिया।- नैना ने पूछा 'वही तो है आपकी अलमारी में' 'अरे नही मिल रहा' रुको मै आती हूँ, नेहा ने कहा। अभी वो नैना को सूट दे कर आयी थी, आरोही रोते हुए बोली मम्मी मुझे नींद आ रही है, चलो न। नेहा ने घड़ी में देखा 4.30 बज रहे थे। उसने आज सुबह से कुछ भी नही खाया था। 'चलो न मम्मी' वो आरोही को सुलाने के लिये उसके पास लेट गयी। कब उसकी आंख लग गयी उसे पता ही नही चला। अचानक से वो उठी घड़ी में 6 बज रहे थे, अरे उसे तो अभी सारी तैयारियां करनी है।वो हड़बड़ा के उठी और सीधा किचन की तरफ गयी। यकायक उसकी स्पीड डबल हो गयी। एक तरफ सब्जी के लिए कड़ाही चढ़ाई। दूसरी तरफ दूध। 6.30 बज गए थे, चाचाजी और उनका परिवार आ गया था। सासु माँ किचन में गयी, देखा नेहा अभी भी खाना बना रही थी। 'अभी तक खाना नही बना,वो लोग आ गए है। ' वो....मम्मी जी आँख लग गयी थी, तो थोड़ा देर हो गयी।' ' जब पता है घर पर मेहमान आने वाले है तो सोना जरूरी था क्या? सासु माँ के चेहरे पर गुस्सा साफ झलक रहा था। चलो मैं नाश्ता ले जाती हूँ, शर्बत बना दो, और समोसे एक प्लेट में डाल दो। 'समोसे'...नेहा को जल्दी जल्दी में याद ही नही रहा कि उसे राहुल को समोसे लाने के लिए कहना है।
 सासु माँ का पारा चढ़ गया, इतने में चाचाजी भी रसोई में आ चुकी थी। 'देखो पद्मा, आजकल की बहुओ को, एक काम भी सही से नही होता। सिर्फ रसोई का काम तो देखना है, बाकी झाड़ू पोछे के लिए कामवाली आती है, हमारे जमाने मे तो हम अपने वक़्त दस काम एक साथ करते थे, सब हाथ से करते थे, मजाल है कोई गलती हो जाये।' 'कोई बात नही दीदी, वैसे भी शादी में बहुत तला फला खा लिया, समोसे की क्या जरूरत।' नेहा नजर झुकाये खड़ी थी। काम ख़त्म कर उसने क्रोकरी सेट निकाला और साफ किया, औऱ डाईनिंग टेबल पर रख दिया पूरे घर मे आरव आरोही ने खिलौने बिखेर रखे थे, उसने साफ किये। 'अरे बहु 8 बजने वाले है, खाना कब लगाओगी।' नेहा की सास ने आवाज़ दी। 'बस मम्मी जी, लग गया।' ये आजकल की बहुए भी ना, अभी भी मम्मी जी चाची जी से उसकी बुराई किये जा रही थी। सब खाना खाने बैठ गए। उसने सबको खाना परोसा। फिर आरोही को भी खाना खिलाया। 'अरे भाभी, थोड़ा हमारे साथ भी बात कर लो, हम भी बड़ी दूर से आपसे मिलने आये है।' चाचाजी की बेटी नव्या ने मुस्कुराते हुए कहा। वो अभी 2 मिनट बैठी ही थी कि सासु जी बोल पड़ी, बातें तो होती ही रहेगी, पहले देख लो मेहमानों को कुछ चाहिए तो नही। वो फिर से खातिरदारी में लग गयी। 10 बजे मेहमानों ने विदा ली। राहुल उन्हें स्टेशन छोड़ने गए। वो फिर से साफ सफाई में जुट गई। काम खत्म होते होते 11 बज गए। आरोही नींद के लिए रो रही थी, वो आरोही को सुलाने गयी, उसे सुलाते सुलाते न जाने क्यों उसकी आँखों से न जाने क्यों एक आंसू की लकीर बह आयी, वो सुबह से काम कर रही है, सबको सबकी चिंता है, पर किसी ने एक बार भी उससे नही पूछा कि तुमने खाना खाया या नही। घर मे बहुये सबकी देखभाल करती है, तो क्या सबकी जिम्मेदारी नही उसकी भी खुशियो का ख्याल रखे। वो सब करती है बदले में क्या चाहती है सिर्फ और सिर्फ प्यार और थोड़ी सी इज़्ज़त। उसकी आँखों मे नींद आ रही थी और सामने आ रहा था उसकी माँ का चेहरा जो उससे पूछ रहा था, " मेरी लाड़ो, तूने खाना खाया या नही....!!!"


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