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सोमवार, 17 सितंबर 2018

याेग करेगा आपकी हड्डियां मजबूत- याेग गुरू सुनील सिंह

हमारे शरीर काे हर उम्र में एक खास देखभाल की जरूरत हाेती है। आजकल बहुत सारे लाेग घुटनाें के दर्द के कारण परेशान हैं। अगर समय रहते हम  ध्यान दें ताे इस असाध्य दर्द से मुक्ति पा सकते हैं। याेग में इसका बहुत बेहतर उपाय बताया गया है। अमूमन 40 वर्ष पूरे होने के साथ साथ हमारे शरीर  की मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और साथ ही हड्डियां कमजोर। इस उम्र में ऑस्टियोपोरेसिस होने का खतरा बढ़ जाता है और हल्की सी चोट से भी हड्डी टूटने का डर बना रहता है।  मगर घबराने की जरूरत नहीं यदि आप इन योगासानों को अपनी दिनचर्या में अपना लेंगे तो यह आपकी हड्डियों को कमजोर नहीं होने देंगे।
चक्रासन
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को घुटने से मोड़ें जिससे एड़ी हिप्स को छुए और पंजे जमीन पर हों। अब गहरी सांस लेते हुए कंधे, कमर और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इस प्रक्रिया के दौरान गहरी सांस लें और छोड़ें। फिर हिप्स से लेकर कंधे तक के भाग को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें। कुछ क्षण बाद नीचे आ जाएं और सांसे सामान्य कर लें।
वृक्षासन
पेड़ की तरह तनकर खड़े हो जाइए। शरीर का भार अपने पैरों पर डाल दीजिए और दाएं पैर को मोड़िये। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइये। दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में लाइये। अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइये और बाएं पैर के तलवे को जमीन की ओर दबाइये। सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइये। सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिये। 20 मिनट तक इस स्थिति में रुके रहें।
पद्मासन
जमीन पर बैठ जाएं। दायां पैर मोड़ें और दाएं पैर को बाईं जांघ के ऊपर कूल्हों के पास रखें। ध्यान रहे दाईं एड़ी से पेट के निचले बाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। बायां पैर मोड़ें तथा बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। यहां भी बाइंर् एड़ी से पेट के निचले दाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। हाथों को ज्ञानमुद्रा में घुटनों के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधी रखें। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़े। कम से कम 10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।
भुजंगासन
पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे रखें। दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ पल इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।
उत्कटासन
सबसे पहले पंजों के सहारे जमीन पर बैठ जाएं। हाथों को आगे की तरफ फैलाएं और उंगलियों को सीधा रखें। गला एकदम सीधा होना चाहिए। अब आप कुर्सी की पोजीशन में आ चुके हैं। 10 मिनट कतक इस मुद्रा में बने रहें।
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सोमवार, 30 अप्रैल 2018

याेग चर्चा-40 के बाद हड्डियां को बनाएं मजबूत- डा. दीपिका शर्मा


उम्र के 40 वर्ष पूरे होने के साथ साथ हमारे शरीर के  मसल्स ढीले होने लगते हैं और साथ ही हड्डियां कमजोर। इस उम्र में ऑस्टियोपोरेसिस होने का खतरा बढ़ जाता है और हल्की सी चोट से भी हड्डी टूटने का डर बना रहता है।  मगर घबराने की जरूरत नहीं यदि आप इन योगासानों को अपनी दिनचर्या में अपना लेंगें तो यह आपकी हड्डियों को कमजोर नहीं होने देंगें।
चक्रासन
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को घुटने से मोड़ें जिससे एड़ी हिप्स को छुए और पंजे जमीन पर हों। अब गहरी सांस लेते हुए कंधे, कमर और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इस प्रक्रिया के दौरान गहरी सांस लें और छोड़ें। फिर हिप्स से लेकर कंधे तक के भाग को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें। कुछ क्षण बाद नीचे आ जाएं और सांसे सामान्य कर लें।
वृक्षासन
पेड़ की तरह तनकर खड़े हो जाइए। शरीर का भार अपने पैरों पर डाल दीजिए और दाएं पैर को मोड़िये। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइये। दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में लाइये। अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइये और बाएं पैर के तलवे को जमीन की ओर दबाइये। सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइये। सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिये। 20 मिनट तक इस स्थिति में रुके रहें।
पद्मासन
जमीन पर बैठ जाएं। दायां पैर मोड़ेंऔर दाएं पैर को बाईं जांघ के ऊपर कूल्हों के पास रखें। ध्यान रहे दाईं एड़ी से पेट के निचले बाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। बायां पैर मोड़ें तथा बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। यहां भी र्बाइं एड़ी से पेट के निचले दाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। हाथों को ज्ञानमुद्रा में घुटनों के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधी रखें। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़े। कम से कम 10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।
भुजंगासन
पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे रखें। दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ पल इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।
उत्कटासन
सबसे पहले पंजों के सहारे जमीन पर बैठ जाएं। हाथों को आगे की तरफ फैलाएं और उंगलियों को सीधा रखें। गला एकदम सीधा होना चाहिए। अब आप कुर्सी की पोजीशन में आ चुके हैं। 10 मिनट कतक इस मुद्रा में बने रहें।

बुधवार, 17 मई 2017

योग की युक्ति से पाएं दर्द से मुक्ति


 दिनभर घर का कामकाज करने के बाद एड़ी में आने वाली दरार और उसमें दर्द के कारण परेशानी बढ़ जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ घरेलू उपाय आजमाएं।
एड़ी में दर्द 
mainaparajita@gmail.com
कसरत करें -  पैरो की उंगलियो को पॉइंट करने की कसरत में आपको केवल अपनी टांग उठानी है और अपने पैरों को तब तक घुमाना है जब तक इनकी उँगलियाँ नीचे की और पॉइंट नहीं करने लगे फिर आप थोड़ी देर का ब्रेक लेकर एक बार फिर दूसरे पैर के साथ इस क्रिया को दोहराएं। इस से आपके पैर की मसल्स में खिंचाव बनता है और एड़ी में दर्द  से  राहत मिलती है।
गेंद वाला व्यायाम -  इसके अलावा पै
र केे नीचे गेंद को घुमाकर भी व्यायाम कर सकते है। यह एक मसाज की तरह आपके लिए काम करता ह।ै आप किसी हलकी या टेनिस वाली गेंद लेकर इसे अपने पैर के नीचे तीन मिनट तक घुमाएँ और फिर अपने दूसरे पैर के साथ भी ऐसा ही करें। इस से आपको आपके पैर और एड़ी के दर्द  में बड़ी राहत मिलेगी।
शोर्ट फुलिंग करें - शोर्ट फुलिंग कसरत को  आप बड़ी आसानी से कर सकते है इसके लिए आपको केवल जूते खोलकर अपने पैरो की उँगलियों को नीचे की और खींचकर अपने पैर के ऑर्च को सिकोड़ना होता है इस से भी आपके पेरों की मसल्स को आराम मिलता है और आपके एड़ी में दर्द को इस से  आराम मिलता है।
एक्युप्रेशर की मदद लें - एक्युप्रेशर तकनीक का उपयोग करते हुए भी आप अपने पैरो में रक्तसंचार को सामान्य कर सकते है और एड़ी में दर्द  से आराम पा सकते है
गर्म पानी से सिकाई - गर्म पानी से अपने पैरों को सेंकने से भी राहत मिल सकती है।
 “काफ स्ट्रेचेज”  करें -  दीवार के सामने सीधे खड़े हो जाएँ और अपने हाथों को दीवार पर रखें और एडियो को फर्श पर रखें फिर धीरे धीरे आगे की ओर स्ट्रेच करें और फिर शुरुआती स्थिति में वापिस आ जाएँ।
आराम फरमाएं -किसी ऊँची जगह पर बैठकर आराम फरमाएं और कोई अपनी पसंद का गाना सुनते हुए अपने पैरो को लटका कर गोल गोल घुमाएँ और अपने पैरो की उंगलियो को अपनी तरफ खीचे और बाद में उसकी विपरीत दिशा में घुमाएँ।
चेहरे की चर्बी दूर करने और  डबल चिन से निजात के लिए आसान क्रियाएं
डा दीपिका शर्मा कहती हैं कुछ लोग चेहरे की चर्बी से बहुत परेशान रहते हैं। उनकी इस समस्या का निदान योगासनों से भी किया जा सकता है।  
लॉयन फेस एक्सरसाइज करने के लिए मुंह जितना खोल सकते हैं खोलें, सांस बाहर छोड़ें। आंखें जितनी खोल सकें खोलें। दो से तीन मिनट तक इसी अवस्था में रहें। इसके बाद सामान्य मुद्रा में आकर गहरी लंबी सांस लें। जीभ बाहर निकालें। गर्दन को नीचे झुकाते हुए जीभ को अपने सीने से लगाने की कोशिश करें।
च्वगिंम, लौंग, इलायची, सौंफ में से किसी भी एक चीज को मुंह में डालकर 5 से 10 मिनट तक चबाते रहें। यह बहुत अच्छा व्यायाम है।ऽ गर्दन को क्लॉकवाइज और फिर एंटी क्लॉकवाइज घुमाएं। इस एक्सरसाइज को करने से फैशियल फैट से छुटकारा मिलता है। इसे रोज 10 बार करें।
गहरी सांस लें और मुंह में इतनी हवा भरे, जैसे गुब्बारा फुलाने के लिए मुंह में हवा भरते हैं। पांच सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें। अब पांच सेकंड तक दाएं गाल को दबाएं और फिर बाएं गाल को। फिर सामान्य मुद्रा में आ जाएं। इस प्रक्रिया को पांच से आठ बार दोहराएं।
अपने होठों को मछली के आकार का बनाते हुए दोनो दिशाओं पर अपने होठो को घुमायें और इस प्रक्रिया को 10 सेकेंड तक यूं ही रहने दें। इससे भी डबल चिन और चेहरे की चर्बी से निजात मिलती है।

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

प्राकृतिक उपायों से कीजिए दर्द दूर- रेनु दत्त


जब कभी दर्द होता है या चोट लगती है तो सबसे पहले दिमाग में यह बात आती है कि इस दर्द को दूर करने के लिए गर्म पैक लगाएं या ठंडा पैक। आइस पैक और हीटींग पैड पाॅवरफुल दवा नहीं है लेकिन फिर भी यह सबसे सस्ता और आसानी से उपलब्ध उपाय है। यह एक नैचुरल तरीका है।
यदि आम भाषा में बात की जाए तो आइस पैक चोट के लिए होता है और हीट पैक मसल्स के लिए होता है। जब किसी चोट के कारण हमारे टिशू में जलन, रेडनेस, सूजन हो जाती हैं तो उस समय आइस पैक लगाया जाता है।  गर्म पैक मसल्स, तनाव और पुराने दर्द के लिए होता है।  जैसे कि बैक पेन, नेक पेन या नर्वस सिस्टम और दिमाग को शांत करता है।
यदि आपको पहले से ही गर्म लग रहा है तो उस समय गर्म पैक आपकी मदद नहीं करेगा और यदि आपको पहले से ही ठंड लग रही है तो उस समय कोल्ड पैक स्थिति को और बिगाड़ेगा।  गलत पैक लगा लेने के कारण उसके दुष्परिणाम भी झेलने पड़ते हैं।
यह जानने के लिए कि हमें कब कौन सा पैक लगाना है उसके लिए हमें दर्द के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। हम यहां पर कुछ जानकारी दे रहे हैं।
ऐसी समस्याएं जोकि लंबे समय से चल रही हों या क्रोनिक हों या जोकि छः सप्ताह से ज्यादा चल रही हों। उदाहरण के लिए आर्थराईट्स जिसकी वजह से कारटिलेज खराब होती हैं।  ऐसी समस्या के लिए गर्म पैक ट्रीटमंेट की जरूरत होती है जिससे कि ज्वाईंट स्टिफनेस कम होती है और मसल्स रिलेक्स होते हैं।
आईस पैक ऐसे दर्द के लिए ठीक रहता है जोकि जलन को कम करता है।  सिर दर्द में नर्व और दिमाग की ब्लड वेस्लस में दर्द बढ़ता है।  इसको आईस पैक लगा कर नंबनेस के द्वारा कम किया जा सकता है।
नेक स्पैज्म में अधिकतर लोग ठंडा पैक लगाने की गलती करते हैं जिससे कि दर्द कम होने की बजाय बढ़ जाता है।  इसलिए इस दर्द को कम करने के लिए गर्म पैक लगाएं।
यदि आपके मसल्स खिंच जाते हैं या नसों में चोट लग जाती है तो पहले ठंडा पैक लगा कर जलन और दर्द को नंब किया जा सकता है।  जब जलन कम हो जाती है तो आपके मसल्स अकड़ सकते हैं।  ऐसे में उन्हें हल्का करने के लिए हीट पैक का इस्तेमाल करें।
जब आपके ज्वाईंट्स खिंच जाते हैं या फट जाते हैं तो पहले उस पर कोल्ड पैक लगाएं जिससे कि जलन और दर्द में कमी आए।  जब जलन बिल्कुल भी न रहे तो हौट पैक लगाएं जिससे कि अकड़ाहट कम हो।
ठंड में पैर सूज जाएं तो एपस्म साल्ट को सेंधा नमक को गर्म पानी में मिलाकर पैर की सिकाई करं। यह साल्ट एंटी इन्फ्लैमटरी होता है। जो सूजन को कम करने और दर्द में राहत पहुंचाता हैं। इसमें मैग्नीशियम सल्फेट भी होता है जो मांसपेशियों के दर्द में राहत पहुंचाता है। इसमें मैग्नीशियम सल्फेट भी होता है जो मांसपेशयों के दर्द से दूर करता है। थके हुए पैरों को आराम पहुंचाने के लिए एक टब में दो लीटर पानी डालकर उसमें आधा कम नमक मिला दें। ध्यान दें पानी ज्यादा गर्म न हो। पैरों को टब में कम से कम 20 मिनट तक रखें।

  •  ठंडी सिकाई करते समय ध्यान दें
  •  आइस बैग को 20 से ज्यादा बार प्रभावित स्थान पर न लगाएं। 10 मिनट तक सिकाई के बाद 2 मिनट का ब्रेक लें। मसल्स में दर्द, खिंचाव, सूजन और त्वचा छिल जाने पर ठंडी सिकाई दें।
  • गर्म सिकाई 
  •  अगर डायबिटीज है या ब्लडसर्कुलेशन संबधी कोई बीमारी हे तो गर्म सिकाई न करें।
  •  अगर दर्द किसी पुरानी चोट का हो तो गर्म सिकाई मदद करती है।
  •  पुरानी चोट का ब्लड सर्कुलेशन से की जाए तो गर्म सिकाई से फिर से शुरू हो जाता ह। इससे मसल्स का दर्द दूर होता है।
  •  ध्यान दें - सूजन होने पर तुरंत पैक न लगाएं। पहले ठंडा पैक के बाद में गर्म पैक दें।
  •  5 मिनट से अधिक गर्म पैक न हो।
  •  एक बार इस्तेमाल करके पानी को फेंक दें, उसे दोबारा से इस्तेमाल न करें।
  •  बहुत गर्म पैक न लगाएं।

Special Post

बारिश के माैसम में बात करेंगे फैशन की - डा. अनुजा भट्ट

रिमझिम फुहार हाे और पार्टी करने का मन हाे  खाने पीने का सब बंदोबस्त हाे ताे बस एक सवाल परेशान कर देता है । आज पहने क्या। ताे दाेस्ताें जब मा...