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मंगलवार, 1 जनवरी 2019

परीक्षा की तैयारी और आपका खानपान

परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है और बच्चों में घबराहट व तनाव का स्तर कई गुणा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक परीक्षा में अच्छा परफॉर्म करने के लिए इस तनाव से भरे लाइफ स्टाइल को बदलने और खान-पान की आदतों को सुधारने की जरूरत है, क्योंकि घबराहट व तनाव में पढ़ने से परीक्षा परिणाम अनुकूल की बजाय प्रतिकूल होने की अधिक आशंका होती है। आपके बच्चे को पर्याप्त पोषण मिले, तनाव का सामना उसे कम-से-कम करना पड़े और वह अपनी परीक्षा में अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन दे सके, इसके लिए जरूरी है कि एक मां के रूप में आप अपनी भूमिका सही तरीके से निभाएं।
तनाव कर सकता है पस्त
परीक्षा के दौरान बच्चे लगभग 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते हैं, जल्दी से सिलेबस खत्म कर अधिक से अधिक रिवीजन करने के दबाव में लगातार जागते रहते हैं और आराम भी नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप उनका स्ट्रेस लेवल इतना अधिक बढ़ जाता है कि वे लंबे समय तक पढ़ते तो रहते हैं, लेकिन एकाग्रता कम होने की वजह से पढ़ा हुआ याद नहीं रख पाते। अंतत: परीक्षा में अच्छा न कर पाने के डर से हतोत्साहित होने लगते हैं। पढ़ाई के अत्यधिक तनाव का उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
क्या होगी परेशानी : बीएलकपूर अस्पताल में गैस्ट्रोइन्ट्रोलॉजी डिवीजन के प्रमुख डॉ़ दीप गोयल बताते हैं कि तनाव के कारण बच्चे को पेट से संबंधित कई बीमारियां हो सकती हैं, तनाव की वजह से पाचन प्रणाली तक रक्त का संचार अवरुद्ध होने लगता है, इससे डाइजेस्टिव सिस्टम तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता और न्यूट्रिएंट  समाहित करने की शरीर की क्षमता भी कम हो जाती है। शरीर का मेटाबॉलिज्म घटने लगता है।
क्या करें :
परीक्षा के दौरान सबसे जरूरी है कि बच्चे के खानपान व आराम का पूरा ध्यान रखा जाए, साथ ही बच्चे पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव न बनाएं, ताकि बच्चा तनावमुक्त होकर पढ़ाई कर सके।
बच्चे के लिए उपयुक्त भोजन
न्यूट्रीशन थेरेपिस्ट, नीरज मेहता के मुताबिक, पढ़ाई के दौरान सबसे अधिक दिमाग का इस्तेमाल होता है। यूं तो यह हमारे शरीर का सबसे छोटा अंग होता है लेकिन शरीर की कुल ऊर्जा का 20 प्रतिशत दिमाग द्वारा इस्तेमाल होता है। यदि पढ़ाई के दौरान लगातार ऊर्जा मिलती रहे तो दिमाग तंदुरुस्त व उत्साहवर्धक बना रहता है।
क्या है परेशानी
पर्याप्त ऊर्जा न मिलने की स्थिति में, बच्चा थका हुआ महसूस करता है, एकाग्रचित होकर पढ़ाई नहीं कर पाता, इसलिए तनाव में आ जाता है। तनाव की वजह से उसके शरीर का मेटाबॉलिज्म घटने लगता है, साथ ही कई अन्य तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए परीक्षा के दौरान बच्चे के खानपान का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।
क्या करें
  • दिन की शुरुआत हेल्दी नाश्ते से करनी चाहिए। आप बच्चे को नाश्ते में अंडा, पोहा, ओट्स, उपमा, इडली व खिचड़ी आदि दे सकते हैं, जिनमें ग्लाइसेमिक की मात्रा कम हो और शरीर को पर्याप्त ग्लूकोज मिलता रहे। अधिक तेल में बनने वाली चीजें जैसे कि पूरी, परांठे आदि से परहेज करें तो बेहतर होगा, क्योंकि इसे खाने से बच्चे को थकावट और नींद महसूस होने के कारण पढ़ाई में दिक्कत आ सकती है।
  • अधिक से अधिक आयरन व विटामिन बी युक्त पदार्थ दें, इनमें शारीरिक व मानसिक ऊर्जा बरकरार रखने की क्षमता होती है।
  • पालक में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। अनाज, अंडे तथा मेवों में विटामिन बी की भरपूर मात्रा होती है। बच्चे को पोषक तत्वों से भरपूर खाना दें।
  • परीक्षा के दौरान जंक फूड से परहेज कर आयरन, कैल्शियम, जिंक युक्त पौष्टिक भोजन ही दें।
  • कोशिश करें कि हर दो घंटे में बच्चा कुछ न कुछ हेल्दी खाता रहे। इस प्रकार शरीर में लगातार आवश्यक तत्वों की पूर्ति होती रहेगी और बच्चा लंबे समय तक पूरे उत्साह के साथ सचेत होकर पढ़ाई कर सकेगा।
कॉफी-चाय से करें परहेज
ज्यादातर बच्चे लंबे समय तक जागकर पढ़ने के लिए कॉफी व चाय पीते रहते हैं, लेकिन न्यट्रिशन थेरेपिस्ट बताते हैं कि कॉफी व चाय में मौजूद कैफीन में अस्थायी उत्तेजक तत्व होते हैं, जिसका असर बहुत जल्द ही खत्म हो जाता है। यह शरीर के ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करती है। शरीर में कैफीन की मात्रा अधिक होने से तनाव व घबराहट बढ़ सकती है।
क्या करें
  • परीक्षा के दौरान कॉफी के बजाय सीरेल्स वाला दूध पीना बेहतर होता है। इसके अतिरिक्त पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, क्योंकि डिहाइड्रेशन की वजह से एकाग्रता कम हो जाती है और शारीरिक ऊर्जा जल्दी ही खत्म होने लगती है।
  • खाने में ज्यादा से ज्यादा ताजे फल और सब्जियां बच्चों को दें, खासकर हरी सब्जियां जैसे पालक, लौकी, तोरी में शरीर व मस्तिष्क को तंदुरुस्त रखने के लिए आवश्यक तत्व होते हैं। स्टार्च वाली सब्जियां जैसे आलू, अरबी के सेवन से बचें, क्योंकि इनसे थकावट व नींद महसूस होती है। खाना बार-बार गर्म न करें, क्योंकि ऐसा करने से भोजन के सभी जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। बच्चे को ताजा खाना ही दें।
  • बादाम, सेब, अखरोट, किशमिश, अंगूर, संतरा, अंजीर, सोयाबीन व मछली में याददाश्त बढ़ाने की क्षमता होती है। इसके अतिरिक्त शहद, दूध और मेवों से मन व मस्तिष्क को शांति मिलती है।
  • मछली का सेवन करने से दिमाग तेज होता है। इसके अलावा फलों का ठंडा रायता खाने से स्फूर्ति आती है।
  • संतरा, केला और गाजर पढ़ने वाले बच्चों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। केला खाने से लंबे समय तक शारीरिक ऊर्जा बनी रहती है।
  • बच्चों को खाना धीरे-धीरे और पूरी तरह चबा कर खाने के लिए कहें।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

स्वस्थ आँखें हजार नियामत- डॉ. दीपिका शर्मा

आज के इलेक्ट्रानिक युग में सबसे ज्यादा स्वास्थ्य आँखों का प्रभावित होता है। छोटे छोटे बच्चों की आँखों में चश्मा चढ़ा होता है। जिनको पढ़ाई तो करनी ही है साथ ही टीवी, वीडियो गेम, कंप्यूटर, मोबाइल के कारण आँखें ज्यादा खराब होती है। कंप्यूटर पर लगातार काम करने के कारण आँखों में जो समस्या उत्पन्न होती है उसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम सीवीएस कहते हैं। जिसके लक्षण हैं आँखों में दर्द, सिरदर्द, ड्राई आँख, थकी और लाल आँखें, धुंधला और दो दिखाई देना,गर्दन और पीठ में दर्द आदि।

इससे बचने के उपाय

  • आँखों को बीच बीच में झपकाएं इससे आप आँखों की ड्राई समस्या से बचेंगे. 
  • बीच बीच में खिड़की के बाहर किसी दूर चीज पर नजर टिकाएं. फिर थोड़ी देर के लिए आखें बंद करें, इससे आराम मिलेगा. 
  • 20-20 का रूल अपनाएं- हर बीस मिनट पर आँखों को बीस फिट दूर रखी चीज पर 20 सैकेंड तक टिकाएं. 
  • कंप्यूटर का मानीटर आपसे 20 या 26 इंच की दूरी पर रहे। जिसकी स्क्रीन का ट़ॉप आई लेवल पर रहे. 
  • जो लोग कंप्यूटर पर जॉब नहीं करते वह भी मोबाइल पर गेम खेलने में अपना समय खर्च करते हैं। जबकि समझदारी इसी में है कि इसमें अपना कम से कम समय बिताएं. 
  • इन सबके अलावा आँखों का व्यायाम अवश्य करें। जैसे गर्दन स्थिर रखकर आँखों को ऊपर नीचे दाएं बाएं घुमाना. 
  • क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज 10 बार घुमाना 
  • नाक के टिप को देखना, फिर सामने देखना. 
  • पामिंग अवश्य करें.किसी आँखों के डाक्टर स सीखकर अवश्य करें. 
  • पेंसिल की टिप के पास लाना और जब एक के दे दिखाई दें तो दूर ले जाना. 
  • आँखों में ठंडे पानी के छींटे अवश्य मारने चाहिए. आँखों के स्वास्थ्य के लिए हरी सब्जियां और पीले फल अवश्य खाने चाहिए. 
  • बादाम भिगोकर खाने और काली मिर्च से आँखों के बहुत फायदा होता है। 
  • सौंफ, नारियल का बुरादा और मिश्री मिलाकर रख लें और एक चम्मच हर रोज खाएं, आराम मिलेगा. 
  • सुबह नंगे पांव घास में चलना भी फायदेमंद है. 
उपरोक्त सभी बातों को ध्यान में रखकर आप अपनी आँखों को स्वस्थ रख सकते हैं। ज्यादा समस्या होने पर आप आँखों के डाक्टर से परामर्श अवश्य लें।
डा. दीपिका शर्मा अपाेलाे  फेमिली क्लीनिक नौएडा, उत्तरप्रदेश, सेक्टर 110 में  फेमिली फिजिशियन हैं।
 सेहत से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के फेसबुक पेज में कर सकते हैं। अपनी सेहत संबंधी समस्या के लिए आप हमें मेल भी कर सकते हैं-
.mainaparajita@gmail.com

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

मेवे खाएं, भिगाेकर खाएं, सेहत बनाएं

ड्राईफ्रूट्स को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह दिमाग के लिए टॉनिक का काम करते हैं। लेकिन इनकाे खाने से पहले हमें काफी एहतियात बरतनी चाहिए। दरअसल,सूखे मेवों की तासीर गर्म होती है इसलिए इन्हें भिगोकर खाया जाना चाहिए। मेवों में उच्च मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है इसलिए ऐसे लोग जिन्हें किडनी रोग, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या पाचन संबंधी रोग हो वे इन्हें डॉक्टरी सलाह के बाद ही खाएं।
सूखे मेवे या ड्राईफ्रूट्स को भले ही स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, यह दिमाग के लिए टॉनिक का काम भी करता है, लेकिन क्‍या आपको पता है इसके नुकसान भी होते हैं।
सूखे मेवों की तासीर गर्म होती है इसलिए इन्हें भिगोकर खाया जाना चाहिए। किसी भी ड्राईफ्रूट को खाने से पहले इन्हें 6-8 घंटे पानी में भिगोकर रखना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि जिस पानी में आपने इन्हें भिगोया है उस पानी का प्रयोग दोबारा न करें क्योंकि इसमें छिलके की ऊपरी परत पर मौजूद दूषित कण शेष रह जाते हैं। मेवों से बने उत्पाद खाने की बजाय इन्हें ऐेस ही खाना चाहिए।
 बादाम
बादाम में कैल्शियम,विटामिन ई, विटामिन बी और फाइबर मौजूद होते है जिससे ये सेहत के लिए जितने अच्छे हैं ,वहीं इनका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि अधिक बादाम खाने से आपको कब्ज़ हो सकती है, इसलिए दिन में 5 बादाम से ज्य़ादा न खाएं।
बादाम से मोटापा भी बढ़ाता है। इसलिए बादाम का सीमित मात्रा में सेवन करें। बादाम मौजूद 65 प्रतिशत मोनोसेचुरेटिड फैट शरीर के बैड कोलेस्ट्रॉल को कमऔर अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। बादाम में विटामिन ई, विटामिन बी और फाइबर मौजूद होते हैं। कैल्शियम की अच्छी मात्रा होने की वजह से बादाम महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। बादाम को बिना छीले खाना चाहिए, क्योंकि इसके छिलकों में फ्लेवोनॉइड्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हृदय और रक्त धमनियों को सुरक्षित रखने में सहायक होता है।
. सूखी अंजीर
माेटापा कम करने में कारगर अंजीर चाहे भूख को नियंत्रित रखने में सहायक होती है लेकिन इसका अधिक सेवन जिगर के लिए हानिकारक हो सकता है। अंजीर बहुत गर्म होती है, इसलिए 5 दाने से ज्य़ादा न खाएं।  इसमें फाइबर और पोटैशियम की मात्रा ज़्यादा होती है। मोटे लोगों को सूखी अंजीर का सेवन करना चाहिए।यह उनका वज़न कम करने में भी सहायक होती है।
.पिस्ता-पिस्ता हृदय रोगियों के लिए बेहद लाभकारी है,यह विटामिन बी-6 का प्रमुख स्रोत है। डाइटिंग कर रही महिलाओं के लिए पिस्ता फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे पेट ज़्यादा देर तक भरा रहता है।लेकिन ज़्यादा पिस्ता खाने से आपको एसिडिटी की दिक्कत हो सकती है। पिस्ते में नमक होने की वजह से ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है।   इसमें विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं।  पिस्ते में नमक होने की वजह से हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के नुकसानदायक हाे सकता है।
किशमिश
यदि आपकी याददाश्त कमज़ोर हो गई है और आप भूलने लगते हैं तो किशमिश का सेवन बहुत बढ़िया है। इसे एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है, जो स्टैमिना बढ़ाता है। परंतु हमेशा इसका सेवन भिगोकर ही करना चाहिए। किशमिश के सेवन से पेट की कब्ज़ दूर होती है। इसे एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है, जो स्टैमिना बढ़ाता है।
काजू
काजू को ड्राय फ्रूट्स का राजा भी कहा जाता है। काजू को प्रोटीन,आयरन, फाइबर और मैगनीशियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। काजू का सेवन शरीर को ऊर्जा देने के साथ कई बीमारियों से हमारी रक्षा करता है। काजू ज्यादा न खाएं क्योंकि इससे आपके गले में खुश्की और खांसी हो सकती है और एसिडिटी की दिक्कत भी हो सकती है।
पीनट्स
पीनट्स में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। अगर पीनट्स को डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रखा जाए, तो ये छह महीने तक खराब नहीं होते। जिनको अस्थमा की दिक्कत है, वो प्रेग्नेंसी के समय पीनट्स न खाएं। पीनट्स भी गर्म होते हैं। ज्यादा खाने से आपको गर्मी की शिकायत हो सकती है।
अखराेट
अखरोट  में मौजूद फैट और पौष्टिक तत्व शरीर में इंसुलिन की मात्रा को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। एग्ज़ीमा और अस्थमा के रोगियों के लिए अखरोट फायदेमंद होता है। अखरोट से टाइप टू डाइबिटीज़ के रोगियों में हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है। अखरोट को 10 ग्राम से 20 ग्राम मात्रा में ही खाएं। अखरोट गरम व खुश्क प्रकृति का होता है।अखरोट पित्त प्रकृति वालों के लिए हानिकारक होता है।
साभार ओनली माई हेल्थ

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

ऐसे करें सूरजमुखी के बीज का खाने में इस्तेमाल, ये होंगे फायदे

सूरजमुखी एक वार्षिक पौधा है जिसकी ऊंचाई एक से तीन मीटर के बीच होती है. यह फूल दिखने में जितना प्यारा होता है उससे कहीं ज्यादा फायदेमंद इसके बीज होते हैं. कहने का मतलब यह है कि सूरजमुखी के बीज बहुत ही गुणकारी होते हैं. इसका सेवन बहुत ही सेहतमंद माना जाता है.

आइए हम बताते हैं आपको कि कैसे करें सूरजमुखी के बीज का इस्तेमाल और क्या होंगे इसे अपने खान-पान में शामिल करने के फायदे:

ये हैं सूरजमुखी बीज के फायदे:
- सूरजमुखी के बीज मिनरल्स से भरपूर होते हैं. इनके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं.
- इनमें मैग्निशियम और कॉपर भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इनमें पाया जाने वाला विटामिन E हड्डियों के दर्द में बहुत फायदेमंद है.
- इस बीज में मौजूद मैग्निशियम नसों को शांत रखने में मददगार है. इसके सेवन से स्ट्रेस, माइग्रेन जैसी शारीरिक समस्याएं दूर होती हैं.
- सूरजमुखी के बीज में पाया जाने वाला विटामिन E स्किन की चमक बढ़ाने में कारगर है. यह स्किन को UV rays से बचाता है.
- रोजाना एक चौथाई कप सूरजमुखी का बीज का सेवन दिल की बामारी से बचाता है. यह खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है.
- इतना ही नहीं बल्कि बीज के सेवन से गैस्ट्रिक, अल्सर, अस्थमा और स्किन प्रॉब्लम भी दूर हो सकती है.

कैसे करें अपने खान-पान में सूरजमुखी के बीज का इस्तेमाल:
- सलाद पर सूरजमुखी के बीज की गर्निशिंग की जा सकती है.
- आप इसे हल्का भूनकर भी इसे खा सकते हैं.
- दही में डालकर खाने से दही का स्वद भी बढ़िया हो जाता है.
- सैंडविच और पास्ता में इसे से डाला जा सकता है.
- इसे आटे में मिलाकर इसकी रोटी या पराठे खाने से जरूरी विटामिन्स शरीर को मिलती हैं
साभार 
 पकवानगलीडॉटइन से

सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

हर्ब्स फॉर हैल्थ-़डा.दीपिका शर्मा

भारत में हजाराें वर्षाें से स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जड़ी बूटियाें का प्रयाेग हाेता रहा है। आयुर्वेद विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सापद्धति है जिससे सिर्फ राेगाें का उपचार ही नहीं हाेता उनसे बचाव और दीर्घायु के लिए भी जडी बूटियाें का प्रयाेग किया जाता है। एलाेपेथी और हाेम्याेपेथी की बहुत सी दवाएं भी वनस्पतियाें से बनाई जाती है। तुलसी, अश्वगंधा, आंवला, अशाेक और मुलहठी एेसी ही जड़ी बूटियाें के नाम है।
तुलसी काे सर्वआेषधि माना जाता है।अल्सर और मुंह के अन्य संक्रमण में तुलसी की पत्तियां फायदेमंद साबित होती हैं। रोजाना तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है। दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है। नैचुरोपैथों द्वारा ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में तुलसी के पत्तों को सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया गया है।
 सिर के दर्द में तुलसी एक बढि़या दवा के तौर पर काम करती है। तुलसी का काढ़ा पीने से सिर के दर्द में आराम मिलता है। आंखों की जलन में तुलसी का अर्क बहुत कारगर साबित होता है। रात में रोजाना श्यामा तुलसी के अर्क को दो बूंद आंखों में डालना चाहिए।
श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत देता है।
तुलसी गुर्दे को मजबूत बनाती है। यदि किसी के गुर्दे में पथरी हो गई हो तो उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का नियमित सेवन करना चाहिए। छह महीने में फर्क दिखेगा।
तुलसी खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को घटाती है। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह खासी कारगर साबित होती है।
तुलसी की पत्तियों में तनाव काे कम करनेे के गुण भी पाए जाते हैं। हाल में हुए शोधों से पता चला है कि तुलसी तनाव से बचाती है।
अश्वगंधा- यह एक टानिक है जाे असमय बुढ़ापा नहीं आने देता है। बच्चाें के सूखा राेग में यह विशेष लाभदायक है। इसका पहला फायदा तो ज्यादातर लोग जानते हैं कि यह तनाव को कम करने में बेहद मददगार औषधि है। यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी काफी मददगार है और दिमाग को ठंडा रखने में भी।
अगर आपको नींद न आने की समस्या है और आपकी रात सिर्फ करवटें बदलने में ही निकल जाती है, तो अश्वगंधा आपके लिए एक प्रभावशाली दवा की तरह काम करता है और आप चैन की नींद सो पाते हैं।
 अगर आप पित्त प्रकृति के व्यक्ति हैं और आपके बाल असमय सफेद होने के साथ ही झड़ने भी लगे हैं, तो आपको अश्वगंधा का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे आपकी समस्या का जरूर समाधान हो जाएगा।
 यह बड़ी उम्र के हिसाब से भी बालों में पोषण का एक बेहतरीन जरिया है जो जड़ों तक पोषण देकर बालों को सफेद होने से बचाता है और उन्हें स्वस्थ बनाए रखता है।
 बालों की जड़ों व स्कैल्प संबंधी समस्याओं में भी यह काफी फायदेमंद है। जड़ों को मजबूती देने के साथ ही यह अन्य समस्याओं जैसे डैंड्रफ आदि से भी बचाता है।

आंवला-आंवले का उपयोग आंखाें की रोशनी को मजबूत करता है। आंखों में खुजली, व जलन से भी राहत देता है।
प्रतिदन एक या दो आंवलों चबाने से दांतों में कीडे लगने की संभावना कम हो जाती है , दांत मजबूत रहते हैं व दांतों का पीलापन भी काफी हद तक कम रहता है
आंवले में विटामिन सी व कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए आंवले के उपयोग से हड्डियां मजबूत रहती हैं।
आंवले के रस को मिश्री के साथ खाने से पाईल्स यानी बवासीर के रोग में लाभ मिलता है।
आंवले का रस पीने से शरीर की पाचन प्रणाली दुरुस्त रहती है। आंवले का रस कब्ज, बदहजमी व खट्टे डकार कम करने में भी अति लाभकारी है।
अशाेक- इसकी छाल रक्त प्रदर में, पेशाब रुकने में लाभ पहुंचाती है। गर्भाशय संबंधी सभी राेगाें में इसके सेवन से लाभ मिलता है। मासिक धर्म की अनियमितता, अतिरिक्त साव्र के लिए अशाेकारिष्ट एक श्रेष्ठ औषधि है। यह तनाव को कम करने में बेहद मददगार औषधि है। यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी काफी मददगार है और दिमाग को ठंडा रखने में भी।
मुलहठी-आयुर्वेदिक औषधि गुणों से भरपूर मुलहठी का प्रयाेग बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। स्वाद में मीठी मुलेठी कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा के गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल श्वसन और पाचन क्रिया के रोग की आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा सर्दि में होने वाली समस्याएं जैसे सर्दी-खांसी, जुकाम, कफ, गले और यूरिन इंफैक्शन की प्रॉब्लम को भी यह जड़ से खत्म कर देता है। इसका सेवन कैंसर जैसी कई बीमारियों को भी दूर करने में मदद करता है। इसका सेवन कफ, सर्दी-खांसी और जुकाम समस्या को दूर करता है।
गले की सूजन, इंफैक्शन, खराश, मुंह में छाले और गला बैठने पर मुलेठी का एक टुकड़ा लेकर उसे चूसे। इससे आपकी सभी प्रॉब्लम दूर हो जाएगी।
यूरिन इंफैक्शन, जलन, और बार-बार यूरिन आने की समस्या  को दूर करने के लिए मुलेठी सबसे अच्छा उपाय है।
डा. दीपिका शर्मा अपाेलाे  फेमिली क्लीनिक नौएडा, उत्तरप्रदेश, सेक्टर 110 में  फेमिली फिजिशियन हैं।
 सेहत से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के फेसबुक पेज में कर सकते हैं। अपनी सेहत संबंधी समस्या के लिए आप हमें मेल भी कर सकते हैं-
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गुरुवार, 27 सितंबर 2018

मिलिए अपनी सेहत के रखवाले से- रेनु दत्त

आंवले के नियमित उपयोग से कई शारीरिक समस्याएं ठीक की जा सकती है। आंवले को कच्चा, सुखाकर या जूस निकाल कर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें किसी तरह के केमिकल नहीं मिले होते है इसलिए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। बात करते हैं इसके गुणों के बारे में।
तनाव या नींद नहीं आने की समस्या में इसका सेवन लाभदायक होता है।
आँखों की ज्योति के लिए और चश्मा हटाने में बहुत लाभदायक है।
हमारे शरीर में बहुत सारे हानिकारक तत्व इक्ट्ठे हो जाते हैंं और इसके सेवन से उन्हें बड़ी आसानी से बाहर किया जा सकता है।
लीवर और ब्लैडर को सही तरीके से काम करने में मदद करता है इसके लिए आप रोजाना सुबह खाली पेट आंवले के रस का उपयोग करें।
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https://mainaparajita.blogspot.com/2018/05/blog-post_18.html
इसके सेवन से मेटाबोलिज्म में सुधार आता है और मोटापे को भी कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
इसका सेवन रोगप्रतिरोधक क्षमता को ब-सजय़ा देता है जिससे रोगों से बचाव की क्षमता में वृद्धि होती है।
इसका सेवन बालों के लिए वरदान हो सकता है।
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https://mainaparajita.blogspot.com/2016/01/blog-post.html
चुकंदर के सेहत के लाभ
चुकंदर के रूप में प्रकृति ने हमारे शरीर की जरुरत के अनुसार हर तरह के गुणों से भरपूर फल हमें दिया है। इसकी सबसे खास बात है कि इस फल को एनीमिया में सबसे अधिक गुणकारी माना जाता हैै।
इसके अंदर प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है इसलिए यह उर्जा का बेहतरीन स्त्रोत है। कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के ऊर्जा के स्तर में इजाफा करता है जिसकी वजह से हमे थकान की समस्या नहीं होती है।
सफेद चुकंदर का इस्तेमाल फोड़े और जलन जैसी समस्या में भी किया जा सकता है। इसके बेतरीन स्वास्थ्य लाभ के लिए सफेद चुकंदर को पानी में उबालकर और छानकर अलग कर लें और उसका इस्तेमाल फोड़े और मुहांसे के लिए कर सकते हैं।
खसरा और बुखार की वजह से हो सकता है आपकी त्वचा खराब हो गयी हो तो चुकंदर के इस्तेमाल से आप उसे भी ठीक कर सकते है।
इस से हमारे पाचनतंत्र को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले कारकां को उतेजना मिलती है जिसकी वजह से पाचनतंत्र भी बेहतर हो जाता है।
इसमें आयरन की भी प्रचुर मात्रा होती है इसको खाने से हमारे खून के अंदर पाए जाने वाली लाल रक्त
कोशिकाएं एक्टिव रहती हैं। एनिमिया होने पर डाक्टर भी इसका सेवन करने की सलाह देते हैं। रक्त की व्याधिओं के लिए यह सबसे उत्तम फल है। जिस से शरीर में नया खून बनने की क्रिया को बल मिलता है।
इसके सेवन से शरीर पर आई विभिन्न चोट और घाव भरने में भी मदद मिलती है और हमारी चोट जल्दी ठीक हो जाती है।
कब्ज जैसे रोगों में भी यह लाभदायक है।
रक्तचाप को नियमित करने में भी यह सहायक होता है।
चुकंदर का सेवन बवासीर में भी उतम होता है।
यह न केवल आपकी आंतरिक शक्ति को ब-सजय़ाता है साथ ही मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। के लिए भी सही होता है।
इसमें प्रचुर मात्र में पोटेशियम, मैग्नेशियम, आयरन, विटामिन बी6 सी, फोलिक एसिड भी होता है । इसके अलावा इसमें प्रचुर मात्रा में शक्तिदायक एंटीआक्सीडेंट होते हैं जो आपके शरीर को विभिन्न रोगों से लड़ने में आपकी मदद करते है।
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https://mainaparajita.blogspot.com/2018/05/blog-post_17.html

सोमवार, 17 सितंबर 2018

याेग करेगा आपकी हड्डियां मजबूत- याेग गुरू सुनील सिंह

हमारे शरीर काे हर उम्र में एक खास देखभाल की जरूरत हाेती है। आजकल बहुत सारे लाेग घुटनाें के दर्द के कारण परेशान हैं। अगर समय रहते हम  ध्यान दें ताे इस असाध्य दर्द से मुक्ति पा सकते हैं। याेग में इसका बहुत बेहतर उपाय बताया गया है। अमूमन 40 वर्ष पूरे होने के साथ साथ हमारे शरीर  की मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और साथ ही हड्डियां कमजोर। इस उम्र में ऑस्टियोपोरेसिस होने का खतरा बढ़ जाता है और हल्की सी चोट से भी हड्डी टूटने का डर बना रहता है।  मगर घबराने की जरूरत नहीं यदि आप इन योगासानों को अपनी दिनचर्या में अपना लेंगे तो यह आपकी हड्डियों को कमजोर नहीं होने देंगे।
चक्रासन
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को घुटने से मोड़ें जिससे एड़ी हिप्स को छुए और पंजे जमीन पर हों। अब गहरी सांस लेते हुए कंधे, कमर और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इस प्रक्रिया के दौरान गहरी सांस लें और छोड़ें। फिर हिप्स से लेकर कंधे तक के भाग को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें। कुछ क्षण बाद नीचे आ जाएं और सांसे सामान्य कर लें।
वृक्षासन
पेड़ की तरह तनकर खड़े हो जाइए। शरीर का भार अपने पैरों पर डाल दीजिए और दाएं पैर को मोड़िये। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइये। दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में लाइये। अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइये और बाएं पैर के तलवे को जमीन की ओर दबाइये। सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइये। सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिये। 20 मिनट तक इस स्थिति में रुके रहें।
पद्मासन
जमीन पर बैठ जाएं। दायां पैर मोड़ें और दाएं पैर को बाईं जांघ के ऊपर कूल्हों के पास रखें। ध्यान रहे दाईं एड़ी से पेट के निचले बाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। बायां पैर मोड़ें तथा बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। यहां भी बाइंर् एड़ी से पेट के निचले दाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। हाथों को ज्ञानमुद्रा में घुटनों के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधी रखें। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़े। कम से कम 10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।
भुजंगासन
पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे रखें। दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ पल इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।
उत्कटासन
सबसे पहले पंजों के सहारे जमीन पर बैठ जाएं। हाथों को आगे की तरफ फैलाएं और उंगलियों को सीधा रखें। गला एकदम सीधा होना चाहिए। अब आप कुर्सी की पोजीशन में आ चुके हैं। 10 मिनट कतक इस मुद्रा में बने रहें।
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गुरुवार, 13 सितंबर 2018

कसरत के पहले भी खाए और बाद में भी- चयनिका शर्मा

पानी ही है असली दवा
सिर्फ कसरत करना सेहत को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। कसरत करने से पहले और बाद में शरीर को स्वस्थ रखने वाली चीजें खाना भी जरूरी है। डायटीशियन चयनिका शर्मा कहती हैं कि व्यायाम के बेहतर नतीजे पाने के लिए उससे पहले और बाद में लिए जाने वाले आहार की जानकारी होनी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि शरीर को छरहरा और त्वचा को मुलायम रखने के लिए व्यायाम से पहले कार्बोहाइड्रेट लेना सबसे अच्छा है। जबकि व्यायाम के बाद ताजी सब्जियों का रस पीना लाभदायक हो सकता है।
व्यायाम से पहले खाएं कुछ ऐसा, जिससे बनी रहे ऊर्जा
साबुत अनाज कामप्लैक्स कार्वाेहाइड्रेट संतुलित मात्रा में खाएं इसकी जगह केला या मेवे भी ले सकते हैं।  व्यायाम से  पहले  भरपूर मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है।
धावकों को व्यायाम के एक बार15 मिनट के अंदर हलकी लस्सी या छाछ लेनी चाहिए। 30 मिनट के बाद  नारीयल पानी पीने की सलाह दी जाती है। उसके बाद ताजा फल और सब्जियाें से बने जूस आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी है यह आपके शरीर से विषैले तत्वाें  काे बाहर निकालने में मदद करता है और आपकाे स्वस्थ रखता है।
 लेकिन याद रहे यह फल और सब्जियाें का चुनाव आप अपनी बॉडी टाइप काे देखकर ही करें। सभी काे यह फायदेमंद नहीं हाेता। बिना किसी की सलाह के जूस का सेवन आपके लिए नुकसानदायक हाे सकता है।
व्यायाम के बाद वो खाएं, जिनसे हो मांसपेशियों की मरम्मत
व्यायाम करने के 30 मिनट बाद ही खाने की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए। ऐसी चीजें खानी चाहिए, जो आपकी मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करें। अखरोट, फल, रसभरी और बादाम के साथ दही, जड़ वाली सब्जियां जैसे गाजर, चुकंदर, शकरकंद या उबले अंडे व्यायाम के बाद लिए जा सकते हैं। अगर आप वजन कम करने के लिए काेई याेजना बना रहे हैं ताे सबसे पहले डायटीशियन से राय अवश्य लें।
दौड़ने के बाद थोड़ा पानी या नारियल पानी और इसके बाद एक घंटे के भीतर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खानी चाहिए।
पूरे दिन भरपूर मात्रा में पानी और फल बहुत जरूरी है यह आपके मेटाबॉलिज्म काे सही रखते हैं साथ ही दूसरे दिन वर्कआउट के लिए भी तैयार करते हैं।

सोमवार, 10 सितंबर 2018

बुढ़ापे में बढ़ जाता है इन 5 बीमारियों का खतरा-साेनिया नारंग



हालांकि उम्र-संबंधी इन बदलाव और परेशानियों से बचना मुश्किल लग सकता है, लेकिन कुछ चीजों का ध्यान रखकर और कुछ स्टेप्स फॉलो कर उम्र संबंधी बीमारियों से दूरी बनाई जा सकती है. शारीरिक रूप से सक्रियता, स्वस्थ आहार और स्मार्ट जीवनशैली अपनाकर उम्र संबंधी स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सकता है.

हम यहां ऐसी ही कुछ बीमारियों और उससे बचने के उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिनका खतरा उम्र बढ़ने के साथ और बढ़ जाता है.
1. मोटापा
भारत में मोटापा स्वास्थ्य संबंधी एक गंभीर परेशानी है, जो लगातार बढ़ रही है. मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति मेटाबॉलिक सिंड्रोम, उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस, हृदय रोग, डायबिटीज, उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल, कैंसर और नींद विकार जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं.
कैसे बचें?
एक स्वस्थ जीवनशैली हृदय रोगों के जोखिम को 80 प्रतिशत तक कम कर सकती है.
इसलिए, सुनिश्चित करें कि आप प्रतिदिन एक्सरसाइज करें, कम वसा वाले खाद्य पदार्थ खाएं और नमक का सेवन सीमित करें ताकि शरीर के वजन को संतुलित रखा जा सके. साथ ही जई, मसूर और फ्लैक्ससीड जैसे फाइबर समृद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें.
फलिया फाइबर के अच्छे स्रोत हैं
दिल को स्वस्थ रखने के लिये प्रतिदिन ड्राईफ्रूट्स जैसे (पांच बादाम, एक अखरोट और एक अंजीर) खाएं, वेजीटेबल जूस, जामुन और मछली को अपनी डाइट में शामिल करें.
अगर आपको एल्कोहल और स्मोकिंग की आदत है, तो पहले इसके सेवन में कटौती करें और धीरे-धीरे पूरी तरह से छोड़ने की कोशिश करें.
आपके शरीर में ऑक्सीजन को प्रभावी ढंग से पंप करने की आपके शरीर की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ घट जाती है. इसलिए, नियमित रूप से एक्सरसाइज करना महत्वपूर्ण है. यह रक्तचाप, तनाव और वजन को मैनेज करने में मदद करता है.
2. गठिया
हमारे देश में बुजुर्गों की लगभग आधी आबादी इस बीमारी से प्रभावित है. इस बीमारी की वजह से जोड़ों और हड्डियों में दर्द रहता है. ऑस्टियोअर्थ्राइटिस गठिया का सबसे आम प्रकार है जो जोड़ों, आमतौर पर हाथ, घुटने, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है.
कैसे बचें?
सही तरह के इलाज और जीवनशैली में बदलाव करके इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है. गठिया को रोकने का सबसे अच्छा तरीका नियमित रूप से एक्सरसाइज करना है. संतुलित स्वास्थ्य के लिए वजन पर नजर रखना भी आवश्यक है.
फ्रेमिंगहम ऑस्टियोअर्थ्राइटिस अध्ययन के अनुसार, केवल 5 किलोग्राम वजन घटाने से घुटनों में ऑस्टियोअर्थ्राइटिस का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
3. ऑस्टियोपोरोसिस
ऑस्टियोपोरोसिस को 'साइलंट बीमारी' के तौर पर जाना जाता है. ऑस्टियोपोरोसिस 50 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के लगभग 4 करोड़ 40 लाख भारतीयों को प्रभावित करता है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं. ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित व्यक्तियों में गिरने पर हड्डी टूटने की संभावना ज्यादा होती है.
कैसे बचें?
हड्डियों के लिए विटामिन डी बेहद महत्वपूर्ण है
ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिये कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा का सेवन करना होगा, उच्च अम्लीय कंटेंट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को सीमित करना होगा और वाष्पित पेय से बचना होगा क्योंकि वे रक्त प्रवाह में पेट से कैल्शियम के अवशोषण को कम करते हैं.
विटामिन डी, हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, विटामिन डी प्राप्त करने के लिय सूर्य की रोशनी (धूप) एक बेहतरीन सोर्स है. सुनिश्चित करें कि आप कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें या इसकी जगह कोई सप्लीमेंट लें.
अपनी हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए वजन घटाने वाले एक्सरसाइज का अभ्यास करना शुरू करें.
4. कैंसर
उम्र बढ़ने के साथ-साथ कैंसर होने का खतरा बढ़ता है. 50 साल की उम्र के बाद ये खतरा और बढ़ जाता है. राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, कैंसर के नये मरीजों में एक-चौथाई हिस्सा ऐसे लोगों का हैं, जिनकी उम्र 65 से 70 वर्ष है.
कैसे बचें?
कैंसर से बचाव के लिए लाइफस्टाइल पर ध्यान दें
कैंसर से बचने के लिए, महिलाओं को नियमित रूप से स्त्री रोग संबंधी जांच करवानी चाहिए और प्रोस्टेट कैंसर को रोकने के लिए पुरुषों को डिजिटल रेक्टल जांच पर विचार करना चाहिए.
फेफड़ों के कैंसर को रोकने के लिए स्मोकिंग छोड़ना आवश्यक है. डाइट में, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें, फल और हरी सब्जियों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं, फाइबर युक्त भोजन की मात्रा बढ़ाएं, अधिक मछली खाएं, पर्याप्त विटामिन डी प्राप्त करें, अपने भोजन में हल्दी का इस्तेमाल करें, लाल मांस खाने से बचें, शराब के सेवन को सीमित करें और ट्रांस फैट से दूर रहें.
5. डायबिटीज
सैचुरेटेड फैट और कम शुगर से युक्त स्वस्थ डाइट अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है.
देश में टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है. इस बीमारी से पीड़ित लोगों में युवा और बुजुर्ग दोनों समान रूप से शामिल हैं.
कैसे बचें?
सैचुरेटेड फैट और कम शुगर से युक्त स्वस्थ डाइट अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है.
सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट के लिए कार्डियो अभ्यास करने की आदत बनाएं. टहलना, तैराकी और साइकलिंग जैसी एक्सरसाइज ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित, वजन को संतुलित और शरीर को मजबूती देने में खासा मददगार हैं.
ऊपर दिये गये सभी तरीके उम्र बढ़ने के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए कारगर उपाय हैं. इन टिप्स को फॉलो कर आप स्वस्थ जीवन का सफर लंबे समय तक तय कर सकते हैं.
(सोनिया नारंग ओरिफ्लेम इंडिया में वेलनेस एक्सपर्ट हैं. )
 साभार.

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

फास्ट नहीं स्लाे हाे रहे हैं आप जानिए क्याें

वडा पाव, समोसा, पिज्‍जा,बर्गर, रोल, चौमिन,चिली, फैंच फ्राइ और कोलड्रिंक आदि ने लोगों की खानपान पर कब्जा कर लिया है। आज लोग पौष्टिक आहार को कम फास्ट फूड या जंक फूड को ज्यादा तवज्जों देने लगे हैं। लेकिन जंक फूड हमारी जिंदगी को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं आपको अंदाजा नहीं है। एक शोध की माने तो जंक फूड खाने से दिमाग में गड़बड़ी पैदा होने लगती है।

1. निरंतर फास्ट फूड के सेवन से आप शिथिल होते जाओगे। आप खुद को थका हुआ महसूस करोगे। आवश्‍यक पोषक तत्‍व जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट की कमी की वजह से फास्ट फूड आपकी उर्जा के स्तर को कम कर देता है।

2. जंक फूड का लगातार सेवन टीनेजर्स में डिप्रेशन का कारण बन सकता है। बढती उम्र में बच्‍चों कई तर‍ह के बायोलॉजिकल बदलाव आने लगते हैं। जंक फूड जैसे चौमिन, पिज्जां,बर्गर, रोल खाना बढते बच्चों के लिए एक समस्या बन सकता है और वह डिप्रेशन में भी जा सकता है।

3.मैदे और तेल से बने ये जंक फूड आपकी पाचन क्रिया को भी प्रभावित करता है। इससे कब्ज की समस्‍या उत्‍पन्‍न हो सकती है। इन खानों में फाइबर्स की कमी होने की वजह से भी ये खाद्य पदार्थ पचने में दिक्‍कत करते हैं।
4. ज्यादा से ज्यादा फास्ट फूड का सेवन करने वाले लोगों में 80 फीसदी दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस तरह के आहार में ज्यादा फैट होता है जो कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर में भी योगदान देता है।

5. वसा से भरपूर खाद्य पदार्थ हृदय, रक्त वाहिकाओं, जिगर जैसे कई बीमारियों का कारण हैं। इससे तनाव भी बढ़ता है। कैफीन युक्त खाद्य पदार्थ (कॉफी, चाय, कोला और चॉकलेट), सफेद आटा, नमक, संतृप्त वसा, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ ये कुछ ऐसी चीजें है जो तनाव को बढ़ाने में मदद करती है।

6. फास्ट फूड या जंक फूड के नुकसान के नुकसान में एक नुकसान यह है कि फास्ट फूड से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरी वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। यह आपको मोटापे की ओर ले जा सकती है।

7. जंक फूड और फास्ट फूड के अवयव आपके प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि प्रोसेस्ड फूड में फथालेट्स शामिल हैं। फथालेट्स रसायन हैं जो आपके शरीर में हार्मोन कैसे कार्य करता है बाधित कर सकता है। इन रसायनों के उच्च स्तर के एक्सपोजर से जन्म दोष सहित प्रजनन संबंधी मुद्दों का कारण बन सकता है।

8. फास्ट फूड या जंक फूड के नुकसान में एक हानि यह है कि फास्ट फूड अल्पावधि में भूख को संतुष्ट कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक परिणाम कम सकारात्मक हैं। जो लोग फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, वे उन लोगों की तुलना में अवसाद विकसित करने की 51 प्रतिशत अधिक संभावना रखते हैं जो उन खाद्य पदार्थों को नहीं खाते हैं या बहुत कम खाते हैं।

9. फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड में कार्ब और शुगर आपके मुंह में एसिड बढ़ा सकती है। ये एसिड टूथ एनामेल नष्ट कर सकती है। चूंकि टूथ एनामेल न होने की वजह से बैक्टीरिया दांतों पर अटैक करी और कैविटी का निर्माण करती है।
- सेहत ज्ञान डाटकाम 

सोमवार, 3 सितंबर 2018

दूसराें का दिल जीतने से पहले खुद के दिल का ख्याल ऱखिए- डा. दीपिका शर्मा

रजोनिवृति के  बाद महिलाओं को  हृदय रोग का खतरा अधिक होता है।
तनाव, खानपान में अनियमितता, अपनी सेहत के प्रति अनदेखी जैसे तमाम कारण हैं, जिनके चलते महिलायें दिल की बीमारी की अधिक शिकार हो रही हैं। महिलाओं की स्थिति पुरुषों की अपेक्षा अधिक चिंताजनक हैं क्योंकि महिलाओं के मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों की चपेट में आने के खतरे ज्यादा होते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कोरोनरी धमनियां संकरी होती हैं। इसी वजह से उन्हें धमनियों में अवरोध आने की समस्या अधिक होती है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को एकमात्र लाभ एस्ट्रोजेन हार्मोन के रूप में मिलता है। जो महिलाओं के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ऊपर उठाता है तथा खराब कोलेस्ट्राल के स्तर को कम करता है। लेकिन रजोनिवृति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर घट जाता है और इसलिए इससे मिलने वाली सुरक्षा भी कम हो जाती है और रजोनिवृति के दस साल बाद महिलाओं को हृदय रोग का खतरा पुरुषों के बराबर और कई मामलों में अधिक होता है।
सामान्य जोखिम कारकों के अलावा, आज महिलाएं जीवनशैली से जुड़े अनेक अन्य कारकों के कारण भी हृदय रोगों की चपेट में आ रही हैं. इन में से कुछ में डब्बाबंद भोजन यानी प्रोसैस्ड फूड का अधिक उपभोग शामिल है जो कि संतृप्त वसा, चीनी और नमक में समृद्ध होता है. साथ ही, साबुत अनाज की कमी, उदासीन जीवनशैली और तनाव के स्तर में वृद्धि जब अन्य कौमोरबिड स्थितियों के साथ मिल जाते हैं तो महिलाओं में एस्ट्रोजेन स्तर कम होने लगता है. इसे महिलाओं के बीच हृदय रोगों में वृद्धि के लिए शीर्ष कारणों में से एक माना गया है.
जीवनशैली में बदलाव
रक्तचाप और मधुमेह पर काबू रखें : समय पर अपने रक्तचाप और शर्करा के स्तर को जांचना महत्त्वपूर्ण है. किन्हीं भी तरह की जटिलताओं से बचने के लिए इन पर नियंत्रण रखें.
व्यायाम करें- दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम की जरूरत है। इसके लिए एरोबिक गतिविधियां, जैसे टहलना , जॉगिंग,तैराकी, साइक्लिंग आपके हृदय के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक हफ्ते में 4 से 6 बार कार्डियो कसरत करना भी अच्छा रहता है।
मोटापा कम करें - मोटापा कई बीमारियों का कारण हो सकता है। वजन बढ़ने से रक्तचाप व कोलेस्ट्रोल की समस्या हो सकती है। इसके अलावा डायबिटीज भी हो सकता है जिससे शरीर में इंसुलिन भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद नहीं करता है। टाइप-2 डायबिटीज से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान ना करें -धूम्रपान करने वाली महिला में हार्ट अटैक की संभावना धूम्रपान न करने वाली महिला से दोगुना अधिक होती है क्योंकि सिगरेट में मौजूद टौक्सीन धमनियों को सीधा प्रभावित करते हैं। जिससे धमनियों में रक्त संचार के लिए बाधाएं पैदा हो जाती हैं। धूम्रपान से खून की नलियां चिपचिपी हो जाती हैं, जिससे रक्त संचार में अधिक कठिनाई के कारण स्ट्रोक की संभावना बनी रहती है।
स्वस्थ भोजन खाएं : मोटापा दिल की बीमारी के लिए जोखिम वाले कारकों में से एक है, इसलिए स्वस्थ भोजन अपना कर वजन को काबू में रखना बेहतर है. अपने आहार में बहुत सारे ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें.
तनाव प्रबंधन : तनाव हृदय की सेहत पर बुरा असर डालता है, इसलिए तनावमुक्त रहें.
हृदय रोग से बचाव के लिए महिलाओं को अपना खास खयाल रखना चाहिए साथ ही रजोनिवृत्ति के बाद कुछ जरूरी जांच अवश्य कराएं जिससे आप हृदय रोग के खतरों से बच सकती हैं।

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

आपकी बॉडी टाइप एप्पल शेप है या पियर शेप- चयनिका शर्मा

हम लाेग अपना खानपान
 अपने परिवार,
 रिश्तेदार या फिर दाेस्ताें के
साथ बैठकर तय करते हैं
जाे एकदम गलत है। 
 अपने आप काे सेहतमंद रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी बॉडी टाइप क्या है. उसी के अनुसार आपकी डायट हाेनी चाहिए। एक ही मां-पिता से जन्म लेने वाले दाे अलग अलग बच्चाें का बॉडी टाइप अलग हाेता है ठीक वैसे ही जैसे ब्लड ग्रुप। हर बच्चे का जेनेटिक आर्डर अलग हाेता है और मेडिकल हिस्ट्री भी। इसलिए हमें अपने खान पान पर ध्यान देना चाहिए। हम लाेग अपना खानपान अपने परिवार, रिश्तेदार या फिर दाेस्ताें के साथ बैठकर तय करते हैं जाे एकदम गलत है। एक ही बीमारी अलग अलग लाेगाें काे अलग अलग  कारणाें से हाे सकती है इसलिए खानपान  भी अलग अलग हाेगा। अमूमन अपनी जैसी बीमारी देखकर लाेग एक दूसरे की तरह खानपान में बदलाव लाते हैं।
खान-पान के बारे में शुरूआती राय तब जान लेनी चाहिए जब बच्चा कुछ खाना शुरू कर देता है।यानी 6 माह बाद। नन्ना शिशु जब खाना खाने लगता है ताे अधिक्तर उसे दूध से बना खाना खिलाया जाता है। अधिक्तर खीर। एेसे में बच्चा खूब  हेल्दी दिखाई देता है पर वास्तव में उसके भीतर मिनरल और विटामिन की कमी हाे जाती  है जिससे उसकी पाचन क्रिया पर असर पड़ता है।
हमारे शरीर की संरचना दो तरह की हाेती है एक ताे एप्पल शेप और दूसरी पियर शेप। सबसे पहले एप्पल शेप की बात करते हैं। इस तरह की बॉडी में माेटापा शरीर के  ऊपरी हिस्से में हाेता है। एेसे में अपने खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है । नहीं तो आप गंभीर बीमारी के  शिकार हाे सकते हैं। अपने खानपान में हरी सब्जियां,प्राेटीन और  फलाें का जूस शामिल करें। फास्ट फू़ड से बचें। पीयर शेप में  ताेंद बाहर आ जाती है। टमी वाले हिस्से में काफी फेट जमा हाे जाता है। आपकी डाइट में प्राेटीन और हरी सब्जियां शामिल हाेनी चाहिए। इस शेप के लाेगाें काे भी  फास्ट फूड और काेल्ड ड्रिकं से बचना चाहिए। आपकी बॉडी टाइप काे जानकर डायटीशियन आपके स्वाद की रेसिपी आपकाे बता देंगे। जिससे आप अपने स्वादनुसार पाैष्टिक खाना खा सकते हैं। बच्चाें में  भी उनके स्वाद के अनुसार भाेजन दिया जा सकता है। अमूमन मम्मी बच्चाें के खाना न खाने पर उसे मैगी, बर्गर, पास्ता जैसी चीजें दे देती हैं जाे सेहत के लिए बहुत खतरनाक  है।  वैसे भी जितने पैक्ड फूड हैं वह सेहत के लिए हानिकारक हाेते हैं।
 इन दिनाें  ब्लड टाइप पर भी चर्चा हाे रही है पर अभी इसमें काफी मतभेद हैं। डायटीशियन और डाक्टर की सलाह पर ही इसे करना चाहिए।

सोमवार, 27 अगस्त 2018

जब नींद न आए....... तब पढ़िए लिविंग द हैल्दी लाइफ


स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक आहार और व्यायाम के साथ रोज रात को कम से कम सात घंटे की नींद लेना भी खासा जरूरी है। हालांकि काम के तनाव और भविष्य की चिंताओं के चलते ज्यादातर लोगों की रात का अधिकतर हिस्सा करवटें बदलने में गुजर जाता है। ब्रिटेन की मशहूर आहार विशेषज्ञ जेसिका सेपल ने इसी के मद्देनजर अपनी  किताब‘लिविंग द हेल्दी लाइफ’ में गहरी नींद के आगोश में ले जाने वाले पांच उपाय सुझाए हैं।

काम का तनाव घर साथ न ले जाएं

सेपल के मुताबिक दफ्तर में रोज कुछ नया और अनोखा करने का दबाव तनाव को जन्म देता है। हालांकि काम का तनाव दफ्तर में ही छोड़करआने में भलाई है। इसे घर साथ ले जाने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन‘कॉर्टिसोल’ और ‘एड्रिनालिन’ का स्त्राव बढ़ जाता है, जो न सिर्फ नींदमें खलल डालता है, बल्कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर से मौत का खतरा भी बढ़ाता है।

डिनर में दाल, अंडा, चिकन खाएं

प्रोटीन युक्त आहार नींद की गुणवत्ता सुधारने में कारगर माना जाता है।विभिन्न अध्ययनों में इसे स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बढ़ानेमें असरदार पाया गया है। इसलिए डिनर में दाल, अंडा, चिकन,पालक, बींस, सोया उत्पाद जरूर शामिल करें। आप चाहें तो चावलऔर चीज का सेवन भी बढ़ा सकते हैं। फैट की मौजूदगी के चलते येखाद्य वस्तुएं शरीर में सुस्ती पैदा करती हैं।

8 बजे के बाद फोन से दूरी बना लें

स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी और टैबलेट की स्क्रीन से निकलनेवाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बाधित करती है। लिहाजाबिस्तर पर जाने से एक-डेढ़ घंटे पहले ही गैजेट से दूरी बना लें। मोबाइलबंद न कर सकें तो ‘साइलेंट मोड’ पर डाल दें। यही नहीं, सोते समयफोन को पहुंच से दूर रखें, ताकि बार-बार मैसेज आने के ख्याल केचलते नींद में खलल न पैदा हो।

नहाने से तन-मन की थकान मिटेगी

बकौल सेपल, अच्छी नींद के लिए तन-मन की थकान मिटना बेहदजरूरी है। ऐसे में सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक मिलाकर स्नानकरें। अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने पढ़ें। दिल को सुकून पहुंचानेवाला धीमा संगीत सुनें। लौंग, इलायची और तुलसी से बनी मसाला चायका सेवन करें। गुनगुने दूध में दालचीनी मिलाकर पीना और बादामखाना भी बेहद फायदेमंद है।

साेने से पहले कमरे में अंधेरा कर दें 

 सोने से पहले कमरे में अंधेरा और ठंडक कर लें। पैरों को ऊपर करके दीवार पर टिकाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए लगभग 10मिनट तक इसी मुद्रा में लेटे रहें। हो सके तो तकिये पर मोगरे, गुलाब या लैवेंडर की खुशबू वाला परफ्यूम छिड़कें।

शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

पका पपीता, प से पपीता, क्या है पपीता-चयनिका शर्मा

पपीता खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है जो शरीर को कई बीमारियों से दूर रखने का काम करते हैं। रोजाना पपीते का सेवन करने से पेट की बीमारियां दूर हो जाती है।  पपीता डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
♥विटामिन ए की कमी दूर करता है
अगर आपके शरीर में विटामिन ए की कमी है तो पपीते का सेवन इस प्रॉब्लम को दूर कर सकता है।

♥डायबिटीज में फायदेमंद
पपीता खाना डायबिटीज रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। इससे डायबिटीज कंट्रोल में रहती
है।
♥वजन को करता है कम
अगर आप भी मोटापे की समस्या से परेशान है तो रोजाना पपीते का सेवन करें।
♥इम्यून सिस्टम मजबूत बनाता है
पपीते और इसके बीजों में काफी मात्रा में विटामिन ए है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनता है।
♥कब्ज से छुटकारा
पपीते में ऐसे एंजाइम और फाइबर होते हैं, जो पाचन तंत्र को ठीक रखते है और पेट में गैस नहीं बनने देते। इससे आपको कुछ समय में ही कब्ज और पेट दर्द से छुटकारा मिल जाता है।
♥ब्रैस्ट फीडिंग में फायदेमंद
ब्रैस्ट फीडिंग करवाने वाली महिलाओं को ज्यादा न्यूट्रिशंस की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पपीते का सेवन शरीर में एंजाइम की कमी को पूरा करके दूध बढ़ाने में मदद करता है।
♥गठिया में फायदेमंद
पपीते से बनी ड्रिंक गठिया रोग में भी फायदेमंद होता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले 2 लीटर पानी उबाल लें। इसके बाद पपीते को धोकर और इसके बीज निकालकर पानी में 5 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसमें 2 चम्‍मच ग्रीन टी की पत्‍तियां डालें और थोड़ी देर के लिए उबालें। अब इसे छानकर पीएं।
♥लीवर के लिए फायदेमंद
पपीते का सेवन लीवर के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह लीवर को मजबूती देता है। पीलिया होने से लीवर को काफी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में पपीता खाने से पीलिया के रोगियों को काफी फायदा पहुंचता है।
♥यूरिन इंफेक्शन से मुक्ति
महिलाओं को अक्सर यूरिन इंफेक्शन की समस्या हो जाती है। ऐसे में इस समस्या को दूर करने के लिए आपको पपीते का सेवन करना चाहिए। पपीता इंफेक्शन की समस्या को दूर करके बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है।

सावधानियां-पपीते में माैजूद एंटी आक्सीडेंट्स की अधिक मात्रा से कि़डनी में स्टाेेंस बढ़ जाते हैं।

पपीते में माैजूद पपाइन से खून पतला हाे सकता है इसलिए जिसकी सर्जरी हुई है वह पपीता न खाएं

इसमें फाइबर्स हाेता है जिनकाे डायरिया हुआ है वह इसे न खाएं।

सोमवार, 20 अगस्त 2018

समय से खाएं ,बीमारी भगाएं- डा. दीपिका शर्मा


फाेटाे क्रेडिट- श्यामली बरूआ तालुकदार
मैं जब भी आप जैसे दाेस्ताें से मिलती हूं ताे  सबसे पहला सवाल करती हूं आपने खाना खा लिया.. यह उस वक्त पर निर्भर करता है कि मैं किसके बारे में बात कर रही हूं। अक्सर मैं  पाती हूं कि खाने पीने में लाेग समय का ख्याल नहीं रखते। लंच के समय  ब्रेकफास्ट और ब्रेकफास्ट के समय वह नींद में हाेते हैं। अक्सर लाेगाे का टाइमटेबिलसही से मैनेज नहीं हाेता। देर रात में साेना, शिफ्ट ड्यूटी जैसे बहुत से कारण है जिसके कारण मेरे सवाल आपने खाना खा लिया का सही जवाब नहीं मिलता।
आज बात डिनर की करती हूं। डिनर के टाइम का ध्यान रखें। रात में हल्का खाना खाना हेल्थ के लिए बेहतर होता है। आपने कभी जानने की कोशिश की है कि डिनर इतना महत्वपूर्ण क्यों है ? कई शोध में यह बात सामने आयी है कि आप कब, क्या, कितना और कैसे खाते हैं इसका अपके हेल्थ पर असर पड़ता है। कुछ शोध तो इस बात को भी कहते हैं कि खान-पान का सीधा असर इंसान के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि आप खाने में पोषक तत्व खूब खाते हैं तो वह आपके स्वास्थ्य को बेहतर रखेगा। खाने के समय का अगर सही से ध्यान न रखा जाय तो पोषक तत्व भी नुकसान पहुंचाते हैं। सुबह का ब्रेकफास्ट जहां अपको पूरे दिन की ऊर्जा देता है तो रात का डिनर दिन भर की कमियों की खाना-पूर्ति करता है। मैं आपकाे रात के डिनर के बारे में कुछ खास बातें बताती हूं।
रात में खाना खाने में अक्सर लोग लेट कर देते हैं। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो लोग रात में देर से डिनर करते हैं वो एक उम्र के बाद कई तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसलिए रात का खाना टाइम से खाना चाहिए।
ज्यादातर लोगों को देखा गया है कि रात में खाना खाते ही लोग बेड पर चले जाते हैं। एक सर्वे के मुताबिक जो लोग रात में खाना खाते ही सोने चले जाते हैं वो बहुत जल्द मोटापा के शिकार हो जाते हैं जो बाद में डायबिटीज जैसी बीमारियों के भी शिकार होते हैं।
अगर आप रात के समय ऑयली और मसालेदार खाना खाते हैं तो उससे आपका वजन बढ़ सकता है। रात के समय हल्का खाना नहीं खाने से पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है। रात को ऐसा खाना खाने से नींद भी सही से नहीं आती है और बेचैनी बनी रहती है।
रात के समय हल्का खाना खाने से ब्लड शुगर भी नियंत्रण में रहती है। कोशिश करनी चाहिए कि खाना खाने के एक-दो घंटे बाद ही सोने जाएं।
रात को हल्का खाना खाने से सुबह के समय शरीर हल्का रहता है और एनर्जी लेवल भी बना रहता है. इसके सा‍थ ही यह मूड को भी बेहतर रखने में मददगार होता है।
रात को बहुत मसालेदार और ऑयली खाना खाने वालों को अक्सर गैस और कब्ज की समस्या हो जाती है जो स्वास्थ्य संबंधी अन्य परेशानियों की वजह बनती हैं। अगर आप ऐसी किसी भी समस्या से बचना चाहते हैं तो रात को हल्का भोजन करना ही आपके लिए फायदेमंद होगा।

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

किवी खाकर ताे देखिए- डा. ईशी खाेसला


किवी फल का नाम न्यू ज़ीलैंड के किवी बर्ड के नाम पर रखा गया है, क्योंकि दोनों छोटे, भूरे और फ़र वाले हैं। यह फल सुनहरे रंग का भी होता है, जिसका छिलका चिकना और ब्रांज कलर का होता है। गोल्डेन किवी मीठा और ख़ुशबूदार होता है। न्यूजीलैंड की कंपनी जेस्प्री पूरे विश्व में किवी की आपूर्ति के लिए जानी जाती है. 1997 में स्थापित हुई जेस्प्री अब तक साठ देशों में न्यूजीलैंड का यह राष्ट्रीय फल उपलब्ध करा चुकी है। किवी में विटामिन सी, पोटेशियम, फॉलिक एसिड, विटामिन ई, डायट्री फाइबर, केरोटेनॉयड, लो ग्लाएसेमिक इंडेक्स, लो फैट और दूसरे फलों के अनुपात में एंटी ऑक्सीडेंट्‌स ज़्यादा होते हैं।
डॉ. ईशी खोसला के अनुसार भारतीय जीवनशैली में बदलाव आने की वज़ह से लोगों में डिसऑर्डर वाले रोगों जैसे मधुमेह एवं हाई ब्लडप्रेशर आदि का खतरा बढ़ गया है. इससे बचने के लिए लोग खानपान के प्रति सतर्क हो गए हैं। इसके लिए वे उन खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिनमें कैलोरी कम होती है। किवी ऐसा ही फल है. इसमें संतुलित मात्रा में पौष्टिकता है।
1. एंजाइम्स द्वारा पाचन क्रिया में सुधार

किवी फ्रूट में एक्टिनिडेन, एक प्रोटीन घोलने वाला एंजाइम होता है जो भोजन पचाने में मदद करता है। जिस तरह पपीते में पैपेन और अन्नानास में ब्रोमीलेन होता है।

2. ब्लड प्रेशर नियंत्रण

किवी में मौजूद पोटैशियम का उच्च स्तर इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है। यह सोडियम के विपरीत काम करता है।

3. डीएनए को क्षति से बचाए

कोलिंस, होर्स्का और हॉटेन के अध्ययन द्वारा पता चला है, किवी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स का अनोखा तालमेल डीएनए कोशिका को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है। कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह कैंसर से भी बचाता है।

4. इम्यूनिटी बढ़ाए

किवी में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं।

5. वज़न घटाने में मददगार

किवी में कम ग्लाइसीमिक इंडेक्स और हाइ फ़ाइबर कंटेंट होता है। इस वजह से इंसुलिन रश नहीं होता और शरीर में चर्बी नहीं जमा हो पाती है।

6. पाचन क्रिया सुधारे किवी फल में प्रचुर मात्रा में रेशे होते हैं। इसे खाने से कब्ज़ और दूसरी आंत संबंधी समस्याएं नहीं हो पाती हैं।

7. टॉक्सिंस ख़त्म करे किवी फल का फ़ज़्ज़ी फ़ाइबर आंत से टॉक्सिंस को बांधकर बाहर निकाल देते हैं।

8. दिल की बीमारियों से बचाव

हर दिन 2 से 3 किवी खाने से ब्लड क्लाटिंग 18% और ट्राइग्लिस्राइड्स 15% कम हो जाती है। बहुत से लोग ब्लड क्लाटिंग कम करने के लिए एस्पिरिन का प्रयोग करते हैं, जिसके कारण आंत में जलन और ब्लीडिंग हो सकती है। किवी फल में एंटी क्लाटिंग गुण होते हैं और कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होता है। साथ साथ बहुत से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

9. डायबेटिक मरीज़ के लिए उत्तम

किवी में ग्लाइसीमिक इंडेक्स कम होने से ब्लड शुगर जल्दी नहीं बढ़ता है। इसका ग्लासीमिक लोड 4 है, जिस कारण यह मधुमेह के रोगियों के लिए सुरक्षित है।

10. आंखों की रोशनी बढ़ाए बुढ़ापे की ओर अग्रसर व्यक्तियों में मैकुलर डीजेनेरेशन के कारण आंखों की रोशनी कम होने लगती है। एक लाख से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन के अनुसर 3 किवी रोज़ खाने से मैकुलर डीजेनेरेशन 30% कम हो जाता है। किवी में लूटीन और ज़ियाज़ैंथिन होता है, जो आंखों के रोग खत्म करता है।

11. एल्कलाइन बैलेंस बनाए

किवी में प्रचुर एल्कलाइन तत्व होते हैं, जो मिनिरल्स को बढ़ाकर अतिरिक्त एसिड को शरीर में कम करता है। एल्कलाइन और एसिड के संतुलन से जवां त्वचा, अच्छी नींद और शारीरिक ऊर्जा मिलती है। सर्दी से सुरक्षा, गठिया से बचाव और ऑस्टियोपोरोसिस में कमी होती है।

12. त्वचा की रक्षा किवी में विटामिन ई और त्वचा का विघटन कम करने वाला एंटीऑक्सीडेंट होता है।

13. लाजवाब स्वाद

किवी का स्वाद बेहद लाजवाब होता है। बच्चों को भी इसका स्वाद बहुत पसंद होता है।

14. पेस्टिसाइड्स से सुरक्षित

किवी फ्रूट पेस्टिसाइड रेज़िड्यूज़ से सुरक्षित होता है। इसलिए इसे सुरक्षित फल की श्रेणी में रखा गया है।

सावधानी
किवी फ्रूट में ओक्ज़लेट होता है। अगर शरीर के द्रव्य में यह ज़्यादा जमा हो जाए तो उसे क्रिस्टलाइज़ कर सकता है और हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है। जिनको किडनी और गाल्ब्लैडर की समस्या हो, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
किवी में लैटेक्स-फ्रूट एलर्जी सिंड्रोम वाला एंजाइम होता है। जिसे लैटेक्स एलर्जी हो, उसे किवी से भी एलर्जी होगी। एथलीन गैस से पका हुआ फल ऑर्गैनिक रूप से पके फल की तुलना में ज़्यादा एलर्जिक हो सकता है। इसे कुक करके खाने से एंजाइम का असर ख़त्म हो जाता है।

सोमवार, 13 अगस्त 2018

डायबिटीज काे मैनेज करने के आसान उपाय-डा. दीपिका शर्मा



डायबिटीज के रोगी को एक दिन में कम से कम चार से पांच सर्विंग मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिये। डायबिटीज के रोगी को जूस का सेवन नहीं करना चाहिये, इसकी जगह वे सूप का सेवन नियमित तौर पर कर सकते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि जूस पीने से शुगर का स्तर बढ़ता है और ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स भी बढ़ जाती है। तो हर डायबिटीज रोगी के लिये जरूरी है कि वो हर दिन मौसमी फल और सब्जियों की पांच सर्विंग ले। लेकिन डायबिटीज में कुछ फल जैसे आम, अंगूर, अनार व केला आदि का सेवन करने से ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ता है। डायबिटीज रोगी सेब, संतरा, पपीता व अमरूद आदि का सेवन कर सकते हैं। साथ ही सलाद (प्याज, ककड़ी, मूली व खीरा आदि) अधिक खाना चाहिये। डायबिटीज रोगी को अन्न थोड़ा कम ही खाना चाहिये। डायबिटीज में कुछ हरी सब्जियां जैसे, करेला (जूस भी), लोकी (जूस भी) व जामुन आदि का सेवन करना चाहिये। इनके सेवन से न सिर्फ शुगर का स्तर सामान्य होता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बनता है। ज़मीन से निकने वाली सब्जियां, जैसे आलू, शकरकंद, अरबी, जिमीकंद व गाजर आदि के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर अचानक बढ़ जाता है, इसलिये इनका कम से कम सेवन करना चाहिये।


वजन के हिसाब से डायट


डायबिटीज के मरीज के लिए अपना वजन काबू में रखना बेहद जरूरी होता है। अगर आपका वजन अधिक है, तो आपको उसी हिसाब से अपनी कैलोरी में कटौती कर देनी च‍ाहिए। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि आपके रोजाना के आहार का चालीस से साठ फीसदी पोषण कार्बोहाइड्रेट से हो। आपको गेहूं के साथ ज्वार, बाजरा और चने का आटा मिलाकर खाना चाहिए। इसके साथ ही चीनी का सेवन कम करें। सब्जियों का सेवन अधिक करें। स्टार्ची सब्जियों का सेवन न करें।


घरेलू उपाय


अगर आप डायबिटीज पर काबू पाना चाहते हैं तो अपनी दवा और डॉक्‍टर की सलाह के साथ-साथ आप कुछ घरेलू उपायों को भी अपना सकते हैं। यह घरेलू उपाय आपकी डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। लेकिन सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्‍यान बहुत जरूरी है। इसलिए लेने पर दिन में 3 बार भरपेट खाने की बजाय हर 2-3 घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें। अपने आहार में फाइबर युक्‍त चीजों को बढ़ा दें। हरी सब्जियां, फलों, सलाद और अंकुरित अनाज में फाइबर बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा करेले के जूस को अपने आहार में शामिल करें। मेथी के बीज का सेवन करें


डा. दीपिका शर्मा अपाेलाे  फेमिली क्लीनिक नौएडा, उत्तरप्रदेश, सेक्टर 110 में  फेमिली फिजिशियन हैं।
 सेहत से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के फेसबुक पेज में कर सकते हैं। अपनी सेहत संबंधी समस्या के लिए आप हमें मेल भी कर सकते हैं-
mainaparajita@gmail.com



गुरुवार, 9 अगस्त 2018

उम्र हाे गई 35 साल ताे खान पान का करें ख्याल-डा. रश्मि व्यास

उम्र बढ़ने के साथ हमारी शारीरिक क्रियाआें में भी बदलाव आने लगता है, हर उम्र में यह बदलाव अलग अलग हाेता है। अगर आपकी उम्र 35 पार कर गई हो तो  आपकाे अपने खानपान के तरीके में बदलाव लाना हाेगा। आपके लिए क्या अच्छा है, क्या बुरा यह जानना बहुत जरूरी है।
30 से 35 वर्ष के बाद शरीर की रक्त धमनियों में ना सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है बल्कि हड्डियों में कैल्शियम और खनिज की मात्रा घटने लगती हैं। आयु बढ़ने के साथ ही शरीर के मेटाबॉलिज्‍म रेट के कम होने और पाचन तंत्र के कमजोर पड़ने के साथ ही शरीर में परिवर्तन होने लगता है जिसे विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है। इसलिए 35 वर्ष के बाद ना सिर्फ उम्र के हिसाब से खाना चाहिए बल्कि कुछ आहारों से परहेज करना जरूरी हो जाता है।
30 के बाद स्वस्थ रहने के लिए वसायुक्त आहाराें से  परहेज करन में ही भलाई है। वसायुक्त आहारों के अलावा तेल और मीठे के सेवन में भी कमी लानी चाहिए। आहारों के साथ साथ अपने खाने के तरीके में भी बदलाव लाना चाहिए। एक बार में अधिक खाने की जगह थोड़ा थोड़ा करके खायें। इस उम्र से बीपी बढ़ने की समस्या हो जाती है, इसलिए कम मात्रा में नमक खाएं। आपका दिल और गुर्दे सलामत रहेंगे। ज्यादा चीनी कभी भी फायदेमंद नहीं होती इसलिए आप 35 के बाद चीनी का सेवन कम कर दें। इससे डायबीटीज का खतरा बहुत कम हो जाता है। लेबल्ड डाइट फूडखाना स्वाद में बेहतर लग सकता है लेकिन इससे दूरी बनाएं। इससे आपको कमजोरी महसूस हो सकती है।

35 की उम्र के बाद तनाव ज्यादा रहता है, ऐसे में कैफीन को चाय या कॉफी के रूप में पीना आपके लिए और घातक साबित हो सकता है।दूध वाली चाय से परहेज करना चाहिये क्योंकि इसमें कैलोरी अधिक होती हैं। ज्यादा वाइन सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे दिल और लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है।

30 की उम्र के बाद कोलेस्टेरोल कम करने का एक आसान तरीका यह है कि आप कोलेस्टेरोल युक्त आनाज न खाएं। अपने आहार में कार्ब की मात्रा कम करके आप खराब कोलेस्टेरोल को कम कर सकते हैं और अच्छे कोलेस्‍ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं। आपको अपने आहार में ब्राउन ब्रेड और ब्राउन राइस को जरूर शामिल करना चाहिए।

सोमवार, 6 अगस्त 2018

डिहाइड्रेशन से बचें – डा. दीपिका शर्मा


कई बार पानी की कमी से कई समस्याएं हो जाती हैं और उनमें से सबसे अधिक होने वाली समस्या है डिहाइड्रेशन, यानी पानी की कमी से अवशिष्‍ट पदार्थों का विष शरीर में फैल जाता है। कई लोग ऐसे हैं जो नहीं जानते कि एक दिन में कम से कम कितना पानी पीना चाहिए या फिर लगातार पानी पीते रहने से क्या नुकसान हो सकता है।  अगर आप भी या आपके परिवार का काेई सदस्य डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहा है ताे यह लेख  आपकी मदद कर सकता है।
शरीर में पानी की कमी से कई समस्याएं पैदा हाेती हैं,जैसे शरीर में चर्बी बढ़ना, पाचन क्रिया कमजोर होना, अंगों का ठीक प्रकार से काम न कर पाना, शरीर में विषाक्तता का बढ़ना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना इत्यादि। इतना ही नहीं जो लोग प्रतिदिन व्यायाम करते हैं उनके लिए पानी की कमी और भी अधिक नुकसानदायक हो सकती है।कई बीमारियां जैसे बुखार, उल्टी, ब्लैडर इंफैक्शन, पथरी इत्यादि होने पर शरीर में पानी की मात्रा बहुत कम हो जाती है। ऐसे में पानी की जरूरत शरीर को हर समय रहती है फिर चाहे रोगी को प्यास लगे या न लगे। कई बार लोग सिर्फ प्यास लगने पर ही पानी पीते हैं जबकि प्यास लगे न लगे दिन में आठ गिलास पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है।कुछ लोग पानी के बजाय सॉफ्ट ड्रिंक, बीयर, कॉफी, सोडा इत्यादि पीने लगते हैं लेकिन वे ये नहीं जानते बेशक ये चीजें तरल पदार्थें में शामिल होती हैं लेकिन यह न सिर्फ स्वास्थ्य की दृष्‍टि से नुकसानदायक हैं बल्कि इनके पीने के बावजूद डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। डिहाइड्रेशन से व्यक्ति के सोचने-विचारने, चीजों को संतुलित करने, रक्त संचार इत्यादि में कमी आ जाती है। इतना ही नहीं शराब पीने वाले व्यक्ति जिनको अकसर हैंगओवर हो जाता है, को भी डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। गर्मी के मौसम में और अधिक व्यायाम करने वालों या फिर जिम जाने वाले लोगों, भागदौड़ करने वाले व्यक्तियों को अकसर डिहाइड्रेशन की समस्या से गुजरना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अपने पानी पीने की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए।
कब एवं कैसा पानी पिएपानी हमेशा खाना खाने से आधा घंटा पहले या खाना खाने के एक घंटे बाद पीना चाहिए।गर्मी में बाहर से आकर तुरंत पानी न पीएं बल्कि थोड़ी देर रूककर नॉर्मल पानी पीना चाहिए।यदि आपको कब्ज की समस्या है, तो पानी में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पिएं।खाने के बीच में पानी कभी न पीएं इससे आपको खाना पचाने में मुश्किल होगी। सुबह-सुबह उठकर पानी पीना बहुत फायदेमंद रहता है।
डिहाइड्रेशन होने पर क्या करें
जब आपको डिहाइड्रेशन होने लगता है तो आपको जी मिचलाना, उल्टियां होना, जबान का सूखना, सांस सही से ना ले पाना, चिड़चिड़ापन इत्यादि समस्‍याएं होने लगती है। अगर आपको डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम हो रही हो तो तुरंत पानी में थोडा सा नमक और शक्कर मिलाकर घोल बनाऐं और पी लें। कच्चे दूध की लस्सी बनाकर पीने से भी डिहाइड्रेशन में लाभ होता है। छाछ में नमक डालकर पीने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलेगी। डिहाइडेशन होने पर नारियल का पानी पिऐं।

 डा. दीपिका शर्मा अपाेलाे  फेमिली क्लीनिक नौएडा, उत्तरप्रदेश, सेक्टर 110 में  फेमिली फिजिशियन हैं।
 सेहत से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के फेसबुक पेज में कर सकते हैं। अपनी सेहत संबंधी समस्या के लिए आप हमें मेल भी कर सकते हैं-
mainaparajita@gmail.com

सोमवार, 30 जुलाई 2018

कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी पावर- डा. दीपिका शर्मा

 शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति को ही इम्युनिटी पावर कहते है। अक्सर कुछ लोग बार बार बीमार पड़ जाते है खासकर जब मौसम बदलता है तब वे जल्दी ही मौसमी बीमारियों और इन्फेक्शन की चपेट में आ जाते है इसका प्रमुख कारण है बॉडी इम्युनिटी कमजोर होना। 
  आजकल हवा में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस मौजूद है जो सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते है। ऐसे में हमारा इम्यून सिस्टम हमें इनसे बचाता है पर जब इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है तब हवा में मौजूद ये वायरस हमारे शरीर में बढ़ने लगते है। बुखार सर्दी जुखाम और खांसी इसकी पहचान है।

  1.   इम्युनिटी पावर बढ़ाने के तरीके में ब्लैक टी और green tea दोनों ही उपयोगी है। प्रतिदिन इनके 1 – 2 कप पीना इम्युनिटी पावर के लिए अच्छा है। ध्यान रहे इनका अधिक सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है।
  2.  याेग, प्राणायाम, वाकिंग, एराेबिक काे अपनी जीवनशेली में शामिल करें। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत हाेता है। भरपूर नींद लें और अपने आराम का भी ख्याल रखें।
  3.   मोटापा अधिक होना या फिर कम होना भी इम्यूनिटी कमजोर होने का एक कारण है। इसलिए weight का नियंत्रण में रहना बहुत ज़रूरी है।
  4.   रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय में शतावरी, अश्वगंधा , तुलसी, शिलाजीत, गिलोय, मुलेठी और हल्दी का प्रयोग किया जाता है।  विटामिन डी से शरीर को बीमारी से लड़ने की ताकत मिलती है और साथ ही ये दिल के रोग दूर करने व हड्डियां मजबूत करने में भी असरदार है। 
  5.   दही के सेवन से रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा पाचन शक्ति ठीक करने में भी ये अचूक इलाज है।
  6. फल और सब्जियाें का ज्यादा से ज्यादा मात्रा में सेवन करें। खासताैर पर जिसमें विटामिन सी की मात्रा ज्यादा हाे । खट्टे फल, माैसमी. अनार,सेब,नींबू, पालक टमाटर, आंवला, अनानास और संतरा में विटामिन सी होता है जो शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी मदद करता है। शरीर को इन्फेक्शन से बचाने में विटामिन सी काफी फायदेमंद है। नींबू और आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। 
  7.  इम्युनिटी बढ़ाने वाले फूड में हरी पत्तेदार सब्जी सबसे अच्छा food माना जाता है। पालक में फोलिक एसिड होता है जो शरीर में नये सेल्स बनाने व पुराने सेल्स ठीक करने में उपयोगी है। पालक में फाइबर, आयरन एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी भी होते है जो शरीर काे स्वस्थ रखते है। प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ में मशरूम खाने से भी फायदा होता है। ब्राेकोली में विटामिन सी और ऐ होता है जो इम्युनिटी पावर बढ़ाने वाला फुड है। इससे बॉडी को प्रोटीन और कैल्शियम भी मिलता है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में कच्चा लहसुन दवा का काम करता है। लहसुन में विटामिन ए, सल्फर और जिंक होता है जो immunity increase करने में उपयोगी है।
  8.  आेमेगा  थ्री फैटी एेसिड मछली में पाया जाता है जाे इम्युनिटी के लिए बहुत अच्छा है।
  9.  प्राेटीन युक्त खाद्यपदार्थ जैसे दालें,दूध, पनीर ,साेयाबीन, चना,राजमा, बीन्स, मटर वैगरह ज्यादा लें।
  10.  एंटी आक्सीडेंट की मात्रा बढ़ा दें। वे भोज्य पदार्थ जिनमें विटामिन ई,बीटाकैराेटीन व मिनरल्स जैसे जिंक और सेलिनियम ज्यादा हाें अवश्य लें। ये न्यूट्रीएंट्स श्वसन तंत्र की रक्षा करते हैं और तनाव से भी बचाते हैं। इनके लिए बादाम,गाजर,पपीता,संतरा, माैसमी, शिमलामिर्च,टमाटर, अनार हरी पत्तेदार सब्जियां भाेजन में अवश्य शामिल करें।
  11.  साबुत अनाज जैसे बाजारा,राई,गेहूं ,साेया चना, आेट्स, मूंग आदि काे नाश्ते में दलिए के रूप में या अन्य किसी रूप में अवश्य लें।
  12.  जंक फूड जैसे बर्गर,पिज्जा, नमकीन, पेस्ट्री, अचार, चिप्स,काेल्डड्रिंक, नूडल्स वैगरह कम से कम खाएं। बाहर का खाना खाने से बचें।
  13.  प्रतिदिन तुलसी, अदरक, आंवला, गिलाेय आदि जड़ी बूटिंयाें का किसी न किसी रूप में सेवन करते रहें।
  14. तनाव से इम्युनिटी कम हाेती है अतः तनाव से बचें।
  15. सफाई का विशेष ध्यान रखें। हाथ धाेकर खाना खाएं।
  16. मेवा (dry fruits) में विटामिन ऐ भरपूर मात्रा में होता है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए जरुरी पोषक तत्व है। साथ ही इसमें फाइबर, जिंक, मिनरल्स और आयरन भी होते है। बादाम में vitamin A अधिक होता है। हर रोज 8 – 10 बादाम खाने से शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती है। बादाम के  अलावा अखराेट,तिलस सूरजमुखी के बीज का पावडर एक चम्मच अवश्य लें।


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