गुरुवार, 6 सितंबर 2018

फास्ट नहीं स्लाे हाे रहे हैं आप जानिए क्याें

वडा पाव, समोसा, पिज्‍जा,बर्गर, रोल, चौमिन,चिली, फैंच फ्राइ और कोलड्रिंक आदि ने लोगों की खानपान पर कब्जा कर लिया है। आज लोग पौष्टिक आहार को कम फास्ट फूड या जंक फूड को ज्यादा तवज्जों देने लगे हैं। लेकिन जंक फूड हमारी जिंदगी को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं आपको अंदाजा नहीं है। एक शोध की माने तो जंक फूड खाने से दिमाग में गड़बड़ी पैदा होने लगती है।

1. निरंतर फास्ट फूड के सेवन से आप शिथिल होते जाओगे। आप खुद को थका हुआ महसूस करोगे। आवश्‍यक पोषक तत्‍व जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट की कमी की वजह से फास्ट फूड आपकी उर्जा के स्तर को कम कर देता है।

2. जंक फूड का लगातार सेवन टीनेजर्स में डिप्रेशन का कारण बन सकता है। बढती उम्र में बच्‍चों कई तर‍ह के बायोलॉजिकल बदलाव आने लगते हैं। जंक फूड जैसे चौमिन, पिज्जां,बर्गर, रोल खाना बढते बच्चों के लिए एक समस्या बन सकता है और वह डिप्रेशन में भी जा सकता है।

3.मैदे और तेल से बने ये जंक फूड आपकी पाचन क्रिया को भी प्रभावित करता है। इससे कब्ज की समस्‍या उत्‍पन्‍न हो सकती है। इन खानों में फाइबर्स की कमी होने की वजह से भी ये खाद्य पदार्थ पचने में दिक्‍कत करते हैं।
4. ज्यादा से ज्यादा फास्ट फूड का सेवन करने वाले लोगों में 80 फीसदी दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस तरह के आहार में ज्यादा फैट होता है जो कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर में भी योगदान देता है।

5. वसा से भरपूर खाद्य पदार्थ हृदय, रक्त वाहिकाओं, जिगर जैसे कई बीमारियों का कारण हैं। इससे तनाव भी बढ़ता है। कैफीन युक्त खाद्य पदार्थ (कॉफी, चाय, कोला और चॉकलेट), सफेद आटा, नमक, संतृप्त वसा, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ ये कुछ ऐसी चीजें है जो तनाव को बढ़ाने में मदद करती है।

6. फास्ट फूड या जंक फूड के नुकसान के नुकसान में एक नुकसान यह है कि फास्ट फूड से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरी वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। यह आपको मोटापे की ओर ले जा सकती है।

7. जंक फूड और फास्ट फूड के अवयव आपके प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि प्रोसेस्ड फूड में फथालेट्स शामिल हैं। फथालेट्स रसायन हैं जो आपके शरीर में हार्मोन कैसे कार्य करता है बाधित कर सकता है। इन रसायनों के उच्च स्तर के एक्सपोजर से जन्म दोष सहित प्रजनन संबंधी मुद्दों का कारण बन सकता है।

8. फास्ट फूड या जंक फूड के नुकसान में एक हानि यह है कि फास्ट फूड अल्पावधि में भूख को संतुष्ट कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक परिणाम कम सकारात्मक हैं। जो लोग फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, वे उन लोगों की तुलना में अवसाद विकसित करने की 51 प्रतिशत अधिक संभावना रखते हैं जो उन खाद्य पदार्थों को नहीं खाते हैं या बहुत कम खाते हैं।

9. फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड में कार्ब और शुगर आपके मुंह में एसिड बढ़ा सकती है। ये एसिड टूथ एनामेल नष्ट कर सकती है। चूंकि टूथ एनामेल न होने की वजह से बैक्टीरिया दांतों पर अटैक करी और कैविटी का निर्माण करती है।
- सेहत ज्ञान डाटकाम 

बुधवार, 5 सितंबर 2018

रवा इडली और पेठा पनीर- नीरा कुमार


आपने अक्सर चावल से ही इडली बनाई होगी, लेकिन आज हम आपको रवा इडली की रेसिपी बताने जा रहे हैं। रवा इडली की रेसिपी बहुत आसान है। रवा इडली चावल से नहीं बल्कि सूजी से बनती है।
रवा इडली खाने में बेहद ही स्वादिष्ट और सेहत के लिहाज से भी ठीक रहती है। रवा इडली बनाने के साथ आपको सांभर बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रवा इडली को आप चटनी के साथ भी सर्व कर सकती हैं। जानें रेसिपी-

'स्वीट स्टीम्ड इडली' के लिए सामग्री
बारीक सूजी: 1/2 कप
मैदा: 2 टेबल स्पून
दही: 4 टेबल स्पून
चीनी पावडर: 4 टेबल स्पून
कोको पावडर: दो टेबल स्पून
बेकिंग सोडा: 1/4 टी स्पून
वनीला एसेंस: 1 टी स्पून
फ्रूट सॉल्ट: 1 सैशे
रिफाइंड ऑयल: 2 टेबल स्पून
बादाम, पिस्ता, काजू टुकड़े: थोड़े से
विधिबारीक सूजी में मैदा और बेकिंग सोडा डालकर मिक्स करें। दही फेंटें।
इसमें चीनी पावडर, कोको पावडर डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें।
धीरे-धीरे करके सूजी डालकर मिक्स करें। वनीला एसेंस डालें।
यदि मिश्रण गाढ़ा लगे, तो एक टेबल स्पून दूध डाल दें।
फ्रूट सॉल्ट को तेल में मिक्स करें और मिश्रण में डालें।
अच्छी तरह हल्के हाथों से चलाएं।
मिनी इडली स्टैंड के खांचों को तेल से चिकना करें और प्रत्येक खांचे में थोड़ा-थोड़ा मेवा बुरकें, फिर मिश्रण डालें। 5-7 मिनट पकाएं।
थोड़ा ठंडा करके खांचों से बाहर निकाल लें। स्वीट स्टीम्ड इडली तैयार है।

पेठा पनीर पुडिंग' के लिए सामग्रीपनीर: 100 ग्राम
गीला वाला पेठा: 50 ग्राम
दूध: 3 टेबल स्पून
बारीक कटा पिस्ता बादाम: थोड़ा सा
इलायची पावडर: 1/2 टी स्पून
विधि
पहले पेठे और पनीर को बारीक कद्दूकस कर उसमें दूध मिला लें या पनीर, दूध और पेठे को हैंड मिक्सर से मिक्स करें ताकि सभी चीजें एकसार हो जाएं।
इस मिश्रण में छोटी इलायची पावडर मिक्स करके फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें।
एक घंटे बाद छोटे-छोटे दो सर्विंग बाउल में मिश्रण डालें और ऊपर से बादाम पिस्ता की कतरनों से सजा कर सर्व करें।
 नीरा कुमार एक जानी मानी कुकरी विशेषज्ञ हैं। कुकरी से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के पेज पर पूछ सकते हैं। आपके सवालाें का स्वागत हैं।

मंगलवार, 4 सितंबर 2018

मम्मी जी थाेड़ा गुस्सा कम करें- डॉ. अनुजा भट्ट

अधिकांश मम्मी, अपने बच्चाें की लापरवाही, ढीले ढाले रवैया और अनुशासनहीनता के कारण परेशान हैं। यह परेशानी बच्चे के स्कूल,जाने से पहले और स्कूल से आने के बाद शुरू हाे जाती है। एक एक बात बच्चे काे कहनी पड़ती है। स्कूल से आने के बाद हर राेज यह कहना पड़ता है, बेटा जूता सही जगह रखाे। बैग बैग की जगह रखाे। कपड़े निकालकर वाशिंग मशीन में डालाे। लेकिन हम देखते हैं बच्चा काेई बात नहीं सुनता। स्कूल में वह 10 मिनट में खा लेता है लेकिन घर में वह आराम से खाता है। मॉल जाने या फिल्म देखने की बात हाे वह फटाफट तैयार हाे जाता है अपने कपड़े खुद ढूंढ लेता है हालांकि वहां भी वह काेई काेशिश नहीं करता, जाे मिल जाए वह पहन लेता है वह ताे बाहर जाने के नाम से ही राेमांचित है। यह सब शिकायतें बहुत आम हैं। हर पेरेंट्स की हैं। अब इसके उलट बच्चाें से पूछे गलती हाेने पर मम्मी का रिएक्शन क्या हाेता है। मम्मी गुस्सा जाती हैं, डांटती हैं और मारती भी हैं। लेकिन अगर वही गलती पापा,  या बड़े करें ताे मम्मी कुछ नहीं कहती उल्टा सॉरी हीे बाेलती हैं। उदाहरण के लिए अगर मेरे कपड़े बिस्तर पर हैं ताे मां नाराज हाेती है गुस्से में कपड़े फैंक देती हैं पर पापा से कुछ नहीं कहतीं हैं, उनके कपड़े सहेजकर रख देती हैं। और अगर कभी पापा जल्दी आ जाएं और बैड पर कपड़े पड़े हाें ताे मम्मी की जगह पापा नाराज हाेते हैं और कहते हैं, कपड़े अभी तक बिस्तर में पड़े हैं तब मां साॉरी कहती हैं। जैसे पापा अ़ॉफिस जाते हैं थक कर आते हैं एेसे ही हम भी स्कूल जाते हैं और थक कर आते हैं। मम्मी का गुस्सा मुझपर ही क्याें है।
यह उदाहरण बताता है कि एक ही बात के लिए हमारे मानदंड  अलग हैं। बात एक ही है। हम हैंडिल अलग अलग तरह से कर रहे हैं ताे अनुशासन ताे बिगड़ेगा ही। अपने कपड़े सबकाे समेटकर रखने चाहिए बड़े और बच्चाें दाेनाें काे। दूसरी बात जैसा बड़े करते हैं बच्चे भी वैसा ही करते हैं। एेसे में गुस्सा करके आप खुद काे ही बीमार कर रही हैं। यह गुस्सा आपके भीतर तनाव काे पैदा कर रहा है और तनाव है कि बच्चा आपकी नहीं सुनता छाेटी छाेटी बात नहीं सुनता। हर वक्त रिलेक्स हाेकर रहता है।
अब बात खाने की करें। बच्चे बड़े हर काेई ऑफिस या स्कूल में ब्रेक में मिले समय पर खाना खाते हैं घर पर यह नियम लागू नहीं हाेता। हम घर में रिलेक्स हाेते हैं। घर का मतलब हमारे लिए आराम करने की जगह है। बच्चे भी एेसे ही साेचते हैं। एेसे में उनका कीमती समय नष्ट हाे जाता है। काेई काम समय पर पूरा नहीं हाेता वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। उनके पापा काे हर हाल में अपना टारगेट पूरा करना है तभी नाैकरी बची रह सकती है। उनकाे पैसे कमाकर लाने हैं तभी घर का खर्च और पढ़ाई लिखाई हाे सकती है। पापा काे टारगेट पूरा करना है और पापा टारगेट पूरा करते दिखाई नहीं देते क्याेंकि वह ताे घर पर रहते नहीं है। बच्चा इस दृश्य काे नहीं देख पाते इसलिए वह टारगेट काे समझ नहीं पाते। हमें उनको यही समझाना है। पापा अपना टारगेट खत्म करके ही घर आते हैं और रिलेक्स हाेना चाहते हैं और आपकाे अपना टारगेट पूरा करने के लिए स्कूल से आकर भी पढ़ाई करनी है ताकि आप जिंदगी में कुछ हासिल कर पाएं। इस तरह स्कूल से आकर अगर हर समय रिलेक्स हाेकर आप कुछ कर नहीं सकते और फिर जब समय हाथ से निकल जाएगा आपके पास काेई आप्शन नहीं बचेगा।
 आप गुस्सा करने के बजाए काेशिश करें कि किस तरह से वह आपकी बात समझ सकता है। अपने मित्रों की भी मदद लें। समस्या का हल निकालने के लिए प्रयास करें। मायूस न हाे। गुस्सा न करें।
टाइम टेबल सेट करें
रूटीन  बनाने से बच्चों को मदद  मिलती है।  टाइमटेबल स्कूल के साथ साथ घर के लिए भी जरूरी है। उसके खेल और मनोरंजन सहित प्रत्येक गतिविधि के लिए समय स्लॉट सेट करें। 1-1.15 घंटों के लिए अध्ययन करने के लिए समय अवधि निर्धारित करें। इस अवधि में 20 मिनट का अध्ययन, 5 मिनट ब्रेक स्लॉट आवंटित करें।  अपनी बात पर कायम रहें, गुस्सा न करें याद रखें कि उसे दिनचर्या का पालन करवाना है। जब वह पढ़ाई  पूरी करते हैं तो उसे स्टिकर दें। जब उसे 7 स्टिकर मिलते हैं तो उसे  अपनी तरफ से इनाम दें। दिनचर्या करने में धैर्य रखें। धीरे-धीरे यह सब दिनचर्या मदद करेगा।
 खेल खेल में स्पेलिंग और टेबल याद कराएं
 आजकल एेसे बहुत से विकल्प हैं जिनकी मदद ली जा सकती है। स्कूल की पढ़ाई से बच्चों का मन उब जाता है आप वहीं चीजें दूसरी तरह से पढ़ाने की काेशिश करें। अॉडियाे विजुअल का सहारा लें। यह एक कठिन समय है कि आप काे घर संभालने के साथ बच्चे की परवरिश और पढ़ाई पर भी ध्यान देना है। अगर आप कामकाजी हैं ताे आपके लिए थाेड़ा मुश्किल ताे है पर रास्ते बहुत सारे हैं। आप अपने राेजमर्रा के काम के साथ उसके गाेल तय कीजिए। मसलन मैंने इतने समय में यह काम किया आपने इतने समय में क्या किया।  इससे आपका काम भी हाेता जाएगा और वह भी अपना काम समय से करने लगेगा।

सोमवार, 3 सितंबर 2018

दूसराें का दिल जीतने से पहले खुद के दिल का ख्याल ऱखिए- डा. दीपिका शर्मा

रजोनिवृति के  बाद महिलाओं को  हृदय रोग का खतरा अधिक होता है।
तनाव, खानपान में अनियमितता, अपनी सेहत के प्रति अनदेखी जैसे तमाम कारण हैं, जिनके चलते महिलायें दिल की बीमारी की अधिक शिकार हो रही हैं। महिलाओं की स्थिति पुरुषों की अपेक्षा अधिक चिंताजनक हैं क्योंकि महिलाओं के मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों की चपेट में आने के खतरे ज्यादा होते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कोरोनरी धमनियां संकरी होती हैं। इसी वजह से उन्हें धमनियों में अवरोध आने की समस्या अधिक होती है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को एकमात्र लाभ एस्ट्रोजेन हार्मोन के रूप में मिलता है। जो महिलाओं के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ऊपर उठाता है तथा खराब कोलेस्ट्राल के स्तर को कम करता है। लेकिन रजोनिवृति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर घट जाता है और इसलिए इससे मिलने वाली सुरक्षा भी कम हो जाती है और रजोनिवृति के दस साल बाद महिलाओं को हृदय रोग का खतरा पुरुषों के बराबर और कई मामलों में अधिक होता है।
सामान्य जोखिम कारकों के अलावा, आज महिलाएं जीवनशैली से जुड़े अनेक अन्य कारकों के कारण भी हृदय रोगों की चपेट में आ रही हैं. इन में से कुछ में डब्बाबंद भोजन यानी प्रोसैस्ड फूड का अधिक उपभोग शामिल है जो कि संतृप्त वसा, चीनी और नमक में समृद्ध होता है. साथ ही, साबुत अनाज की कमी, उदासीन जीवनशैली और तनाव के स्तर में वृद्धि जब अन्य कौमोरबिड स्थितियों के साथ मिल जाते हैं तो महिलाओं में एस्ट्रोजेन स्तर कम होने लगता है. इसे महिलाओं के बीच हृदय रोगों में वृद्धि के लिए शीर्ष कारणों में से एक माना गया है.
जीवनशैली में बदलाव
रक्तचाप और मधुमेह पर काबू रखें : समय पर अपने रक्तचाप और शर्करा के स्तर को जांचना महत्त्वपूर्ण है. किन्हीं भी तरह की जटिलताओं से बचने के लिए इन पर नियंत्रण रखें.
व्यायाम करें- दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम की जरूरत है। इसके लिए एरोबिक गतिविधियां, जैसे टहलना , जॉगिंग,तैराकी, साइक्लिंग आपके हृदय के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक हफ्ते में 4 से 6 बार कार्डियो कसरत करना भी अच्छा रहता है।
मोटापा कम करें - मोटापा कई बीमारियों का कारण हो सकता है। वजन बढ़ने से रक्तचाप व कोलेस्ट्रोल की समस्या हो सकती है। इसके अलावा डायबिटीज भी हो सकता है जिससे शरीर में इंसुलिन भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद नहीं करता है। टाइप-2 डायबिटीज से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान ना करें -धूम्रपान करने वाली महिला में हार्ट अटैक की संभावना धूम्रपान न करने वाली महिला से दोगुना अधिक होती है क्योंकि सिगरेट में मौजूद टौक्सीन धमनियों को सीधा प्रभावित करते हैं। जिससे धमनियों में रक्त संचार के लिए बाधाएं पैदा हो जाती हैं। धूम्रपान से खून की नलियां चिपचिपी हो जाती हैं, जिससे रक्त संचार में अधिक कठिनाई के कारण स्ट्रोक की संभावना बनी रहती है।
स्वस्थ भोजन खाएं : मोटापा दिल की बीमारी के लिए जोखिम वाले कारकों में से एक है, इसलिए स्वस्थ भोजन अपना कर वजन को काबू में रखना बेहतर है. अपने आहार में बहुत सारे ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें.
तनाव प्रबंधन : तनाव हृदय की सेहत पर बुरा असर डालता है, इसलिए तनावमुक्त रहें.
हृदय रोग से बचाव के लिए महिलाओं को अपना खास खयाल रखना चाहिए साथ ही रजोनिवृत्ति के बाद कुछ जरूरी जांच अवश्य कराएं जिससे आप हृदय रोग के खतरों से बच सकती हैं।

रविवार, 2 सितंबर 2018

मथुरा के पेड़े-निशा मधुलिका

मथुरा के पेड़े से अच्छे और स्वादिष्ट पेड़े दुनियां भर में कहीं भी नहीं मिलते. आप यदि पारम्परिक मथुरा जी के पेड़े  का एक टुकड़ा भी चखते हैं तो कम से कम चार पेड़े से कम खाकर तो रह ही नहीं पायेंगे. आईये आज मथुरा जी के पे़ड़े बनाते हैं.

 इसे बनाने के लिये मावा और  का उपयोग होता है, मावा और  (दाने दार बूरा) आप बाजार से ला सकते हैं यदि बाजार में न मिले तो घर में भी मावा बना सकते हैं देखिये एवं  यदि आप बाजार से मावा ला रहे हैं तो दानेदार मावा लेकर आयें.

मथुरा जी के पेड़े  बनाते समय मावा को अधिक से अधिक भूना जाता है. मावा को जितना अधिक भूनेंगे बने हुये पेड़ों की शेल्फ लाइफ उतनी ही अधिक होगी. मावा भूनते समय बीच बीच में थोड़ा थोड़ा दूध या घी डालते रहते हैं जिससे इसे अधिक भूनना आसान हो जाता है. भूनते समय मावा जलता नहीं और मावा का कलर हल्का ब्राउन हो जाता है. तो आइये बनाना शुरू करते हैं मथुरा के पेड़े.
आवश्यक सामग्री
खोया या मावा - 250 ग्राम (1 कप से ज्यादा)
तगार बूरा - 200 ( 1 कप)
घी - 2-3 टेबल स्पून
छोटी इलायची - 4 - 5 (छील कर कूट लीजिये)
विधि -
मावा को क्रम्बल कर लीजिए.
पैन गरम करके उसमें क्रम्बल किया हुआ मावा डाल दीजिए. मावा को लगातार चलाते हुए मीडियम आंच पर डार्क ब्राउन होने तक भून लीजिए. मावा के हल्के ब्राउन होने पर इसमें 2 चम्मच घी डाल दीजिए और ऎसे ही बीच-बीच में मावा में घी डालते हुए मावा को डार्क ब्राउन होने तक भून लीजिए.
अगर मावा सूखा लगे तो इसमें 2 टेबल स्पून दूध डालकर मावा को लगातार चलाते हुए दूध के सूखने तक भून लीजिए. मावा के भुन जाने पर गैस बंद कर दीजिए लेकिन मावा को चलाते रहिए क्योंकि कढ़ाही गरम है.
माव के हल्के गरम रह जाने पर इसमें इलायची पाउडर और थोड़ा सा तगार पेड़ों पर लपेटने के लिए बचाकर बाकी तगार डाल दीजिए. मिश्रण को अच्छे से मिला दीजिए. पेड़े बनाने के लिये मिश्रण तैयार है.
मिश्रण से थोड़ा सा मिश्रण हाथ में लेकर गोल करके, हाथ से दबाकर पेड़े का आकार दीजिये, पेड़े को प्लेट में रखे हुये बूरे में लपेटकर प्लेट में रखते जाइए. एक एक करके सारे पेड़े इसी तरह तैयार करके प्लेट में लगाते जाइये.
स्वाद में लाज़वाब मथुरा के पेड़े (Mathura Peda) तैयार हैं. मावा को बहुत अच्छे से भूनने पर ये खुश्क हैं. इसलिए इन पेड़ों को फ्रिज में रखकर के एक महीने तक खाया जा सकता है.
सुझाव
बीच -बीच में मावा में थोड़ा-थोड़ा घी इसलिए डाला जाता है ताकि मावा जले ना.
मावा को बिल्कुल ठंडा ना होने दें, हल्के गरम रहते ही पेड़े बना लीजिए वरना मावा खिला खिला हो जाएगा और पेड़े नही बन पाएंगे.
मथुरा के पेड़े को गाय के दूध से बने मावा से बनाया जाए, तो वो नेचुरल रूप से ब्राउन बनता है. उसमें अलग से घी और दूध डालने की आवश्यकता नही होती.
मावा को कल्छी से लगातार चलाते हुए भूनिए, यह तले में लगना नही चाहिए.
साभार- निशा मधुलिका डॉट काम से

मैं पुरुष नहीं हूं, औरत हूं- उड़न परी दुती चंद

आज जिस दुती चंद काे हम उड़नपरी के नाम से जान रहे हैं क्या आपकाे मालूम है कि उनकाे यहां तक पहुंचने से पहले किन किन आराेपाें का सामना करना पड़ा। ईएएएफ ने दुती के शरीर में हाइपरैंड्रोजेनिज्म की अधिक मात्रा में पाए जाने के चलते उनपर प्रतिबंध लगा दिया था। यह हार्मोन पुरुषों वाले गुण विकसित करता है। जिसके कारण दुती पर पुरुष होने का आरोप लगाया गया था। प्रतिबंध के खिलाफ भारतीय धाविका दुती ने कैश में अपील दायर की थी। जिसके बाद कैस ने आईएएफ के नियमों के खिलाफ दुती की अपील को आंशिक तौर पर सही पाया। कैस ने हाइपरैंड्रोजेनिज्म नियम को निलंबित किए जाने के बाद दुती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की छूट दे दी।

मेडिकल भाषा हाइपरैंड्रोजेनिज्म में वह स्थिति है जब शरीर में एंड्रोजेनिज्म हार्मोस की मात्रा बढ़ जाती है। यह हार्मोन ही इंसान में पुरुषों वाले गुण विकसित करता है। सबसे कॉमन एंड्रोजेनिज्म हार्मोन टेस्टोस्टेरोन है। दुती के शरीर में इस हार्मोन की मात्रा ज्यादा पाई गई थी। ऐसा हार्मोन की वजह से होता है और महिला में सामान्य से अधिक टेस्टोस्टेरोन बनता है। इसके बाद दुती ने आईएएएफ के लिंग परीक्षण से जुड़े नियम के खिलाफ कैस में अपील की थी।

दुती ने आईएएएफ के फैसले को कैस में चुनौती दी और फैसला भी इस एथलीट के पक्ष में आया। कैस ने कहा कि हार्मोन की वजह से किसी महिला में सामान्य से अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरान बनता है तो ऐसे में उसे पुरुष करार देना गलत है।

कैस से राहत मिलने के बाद इस प्रतिभावान एथलीट ने अपना अगला लक्ष्य रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का बनाया है। दुती कहती हैं कि, ”यह मेरे जीवन का सबसे खुशी का पल है। कोर्ट के निर्णय आने तक मैं नहीं जानती थी कि भविष्य में क्या होने वाला है। जैसे ही मुझे कैस के निर्णय के बारे में पता चला मैंने बहुत राहत महसूस की। मुझे लगा कि अब मैं फिर अपनी पुरानी जिंदगी में लौट सकती हूं। प्रतिबंध के बाद ट्रैक से दूर रहना मेरे लिए बेहद मुश्किल दौर था। मेरा भविष्य अनिश्चित सा हो गया था लेकिन अब मुझे राहत है।



दुनिया के सबसे तेज धावक जमैका के उसैन बोल्ट को अपना आदर्श मानने वाली दुती चंद का जन्म 3 फरवरी 1996 को ओडिशा के चक्र गोपालपुर गांव के एक गरीब जुलाहे के यहां हुआ। 19 वर्षीय दुती पहली बार तब सुर्खियों में आयी जब 2012 में इस धाविका ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप के अंडर-18 वर्ग में महज 11.8 सेकेंड में 100 मीटर की दूरी तय कर ली। इसके बाद दुती ने पुणो में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में 200 मीटर का फासला 23.811 सेकेंड में तय कर ब्रांज मेडल जीता। इसी साल दुती ग्लोबल एथलेटिक्स की फर्राटा रेस के फाइनल्स में स्थान बनाने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं। 2013 में वह भारतीय एथलीट वल्र्ड यूथ चैंपियनशिप के 100 मीटर रेस के फाइनल्स में पहुंचने में सफल रही। इसी साल दुती ने रांची में आयोजित सीनियर राष्ट्रीय एथलेयिक्स चैंपियनशिप में 11.73 सेकेंड में 100 मीटर और 23.73 सेकेंड में 200 मीटर रेस जीतकर गोल्ड मेडल जीता था।

दुती चंद ने जकार्ता में चल रहे एशियाई खेलों में महिलाओं की 200 मीटर दौड़ और 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया. वह इन दोनों स्पर्धाओं में बहरीन की एडिडियोंग ओडियोंग से पिछड़ गईं.दुती ने स्वदेश लौटने के बाद कहा, उनकी लंबाई थोड़ी कम जरूर है, लेकिन रफ्तार ज्यादा है. प्रशिक्षण में मैं इस चीज पर ध्यान दूंगी.'रजत पदक जीतने वाली फर्राटा धाविका दुती चंद ने का अगला लक्ष्य ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना है. एशियाई खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में दो पदक जीतकर पीटी उषा, ज्योर्तिमय सिकदर जैसी एथलीटों की श्रेणी में शामिल होने वाली दुती ने कहा कि इस जीत के बाद अब वह और कड़ा अभ्यास करेंगी, ताकि ओलंपिक में पदक जीतने का सपना पूरा हो सके.

उन्होंने कहा, ‘इस साल अब कोई बड़ी प्रतियोगिता नहीं है और ओलंपिक के लिए मेरे पास दो साल का समय है. ओलंपिक से पहले अगले साल एशियाई चैंपियनशिप में भी भाग लेना है. इन दो वर्षों में मैं जी जान से अभ्यास करूंगी, ताकि देश का नाम ओलंपिक में भी ऊंचा कर सकूं.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे कड़ा प्रशिक्षण करना है और उसके लिए जरूरी चीजें मुझे मुहैया कराई जा रही है, ऐसे में जाहिर है प्रदर्शन अच्छा होगा.’
दुती की इस सफलता पर राज्य सरकार ने उन्हें तीन करोड़ रुपये (एक पदक के लिए डेढ़ करोड़ रुपये) नकद पुरस्कार और अभ्यास तथा प्रशिक्षण का खर्च उठाने की घोषणा की है.उन्होंने कहा, ‘अब इस घोषणा के बाद मैं खुले दिमाग से अभ्यास कर सकूंगी.’

शनिवार, 1 सितंबर 2018

कहानी- निर्णय - उर्मिल सत्यभूषण

डा. रत्नाकर की कृति
काम्या ने तीनों ड्रामों में बेस्ट परफार्मेंस दी थी। एक ड्रामे में वह स्कूल गर्ल बनी थी। स्कर्ट में सातवीं आठवीं कक्षा के विद्याार्थी का रोल किया था। कपड़े या परिधान पूरा व्यक्तित्व ही बदल देते हैं। दूसरे में वह एक फ्लर्ट युवती का रोल कर रही थी और तीसरी में युवा विधवा का। तीनों अलग अलग तरह के किरदार थे पर बड़ी निपुणता से उसने निभाए थे।
उम्र उसकी होगी कोई तीसक साल पर लगती बहुत कम थी। शरीर बिल्कुल छरहरा था। चेहरा बेरौनक था बेशक उसे सुसज्जित करके रखती थी हालांकि चुलबुलेपन के आवरण में चेहरे के एक्सप्रेशन दबे छुपे रहते थे। नजदीक से बात करने पर आंखों का खालीपन महसूस होता था और शरीर पर भी नवविवाहिता जैसी लुनाई या स्निग्धता दिखाई नहीं देती थी। ऊपर से वह बेपरवाह खिलंदडी हिरणी सी दिखाई देती थी ‐‐‐‐ सारे ड्रामा ग्रुप की एक्टीविटीस में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थी। घूमना, माॅल में जाना, पिक्चर देखना, लड़कों के साथ बेबाक बेलौस हो बतियाती, हंसती, मजाक करती, कभी कभी तो फ्लर्ट जैसा व्यवहार करती।
वे लोग खुलकर बातें करते। अपने रिलेशनशिप को भी। ड्रामें के कम्पलीकेटेड चरित्रों को लेकर भी चर्चायें होती कि ऐसे चरित्र भी होते हैं?  तब जाकर थोड़ा सा भेद खुला या बल्कि सभी अभिनेता अभिनेत्रियों के अन्तद्र्वन्द्व और मनोग्रन्थियांे, मनोविकार उजागर होने लगे थे।
पता चला काम्या को भी डिप्रेशन ने ही घेर रखा था कि उसने ड्रामा ग्रुप का विज्ञापन देखकर ही वह ग्रुप ज्वाइन किया था। वह अपनी शादी से संतुष्ट नहीं थी। उसकी शादी हुए दो साल हो गए पर शादीशुदा जीवन का शुभारंभ नहीं हुआ था। सब उससे सहानुभूति रखते थे पर किसी ने उसकी प्यास बुझाने की जाने या अनजाने कोशिश नहीं की थी। सभी खिलाड़ी (अभिनेता लोग) संस्कारी और विचारशील थे। नजदीकियां बढ़ने लगीं तो प्यासे तनमन की पुकारें भी सुनाई देने लगीं। यदाकदा रिहर्सल के दौरान उसकी कामातुर चेष्टायें मर्यादायें पार करने लगी तो उनकी निदेशक को बात करनी पड़ी।
काम्या उन्हंे अपनी स्थिति समझाते समझाते रो पड़ी।  उसका पति अच्छी पोस्ट पर था। सौम्य, सुदर्शन युवक पर पता नहीं क्यों शादी के निकष पर खरा नहीं उतर पा रहा था। उसने पत्नी से संबध नहीं बनाये। उदास सा बना रहता। काम की व्यस्तता भी बहुत थी। कभी खुलकर काम्या ने भी बात नहीं की। संकोच छोड़कर पहल करने की कोशिश काम्या ने की थी पर पति को तो स्त्रीतन से ही शायद एलर्जी थी। वह उसकी छटपटाती देह को छोड़कर चल देता। वह अपमान का घूंट पी कर रह जाती। कैसे बात करे? वह किससे बात करे?
यूं बाहर घूमने के लिए, खाने पर पति उसे ले जाता बल्कि हनीमून पर भी हो लोग गए थे पर ठंडा गोश्त बेजान ही रहा और वे बेजान ही लौट आए।
अब कानाफूसियां होने लगी थीं कि शायद उसका पति गे है। अब उसका पति उसे कहने लगा था कि वह डायर्वोस ले ले, उसकी तो शादी में या सेक्स में कोई रूचि ही नहीं है। अपनी डायरेक्टर के समझाने पर उसने मनोचिकित्सकों से भी संपर्क किया था पर पति उनके पास जाने को राजी ही नहीं हुआ था ‐‐‐
इसी ऊहापोह में दिन बीत रहे थे।
एक दिन वह रात को ड्रामें की पोशाक में ही लौट आई थी, रात बहुत हो चुकी थी, मेकअप नहीं उतरा था। वह दुल्हन के वेश में थी। दरवाजा कुशाग्र ने ही खोला था। काम्या की मांग में सिंदूर की जगरमग रेखा ने कुशाग्र की आंखो में कामना के डोरे खींच दिये। वह बेहद थकी थी। बोली:- मुझे नींद आ रही है:- मैं सोने जा रही हूं। डायवोर्स पेपर्स तैयार करवा दिये हैं। ये रहे पेपर्स - देख लेना - गुड नाइट और वह साड़ी उतारकर बेहोश सी पलंग पर गिर गई।
कुशाग्र बेडरूम में चला आया। उसकी अस्त व्यस्त देह देखकर घबरा सा गया। उसने उसके खुले बालों को धीरे से छुआ, एक पुलकित लहर उसके भीतर दौड़ गई। उसने उसे स्वतःचालित ही सीधा किया एक चित्ताकर्षक सुगंध उसके नासापुटों में भर गई। उसकी नजर उसकी मांग की रेख और नाक की जगमगाती लौ पर ठहर गई जो उसे बार बार विहृल करने लगी।
एक आंसू काम्या के गाल पर रूका हुआ था धीरे से झुककर कुशाग्र ‐ने उसे होंठों में समेट लिया। अधजगी अधसोई काम्या ने उसके गालों में बाहों का हार डाल दिया। वह उत्तेजित होकर उसे चूमने लगा। वह भी सचेत होकर उससे लिपट गई। जाने कैसे उसके ठंडे तन मन में स्पंदन उठ उठकर बिजलियों में परिवर्तित होते चले गए।  समुद्र ठाठें मारता रहा, मर्यादायें पार करता रहा:
वह कामना के ज्वारों में जानें कितनी उम्रों तक डूबती उतराती रही।
‘सुबह की चाय - आवाज देकर कुशाग्र ने उसे जगाया।
एक नशा सा तारी था। चाय पीकर थोड़ा नशा उतरा, होश आया ‐ ‐‐ पेपर्स पर नजर गई।
ये तुम्हारे डायवोर्स पेपरज काम्या - डायवोर्स चाहिए न तुम्हें।
हां हो डायवोर्स: चाहिए चाहिए मुझे डायवोर्स।
ठीक है:- पहले मैं अपना हक तो ले लूं। कुशाग्र ने फिर उसका मुंह हथेलियों में लेकर लौंग पर उंगली रखी। सिंदूर की रेखा पर आंख गडाई: फिर चूम लिया।
‘काम्या, तुम इतनी सुंदर हो। पहले तो कभी सिंदूर नहीं लगाया। कभी नाक में कील क्यों नहीं पहनी। इन्होंने कितना सुंदर बनाया तुम्हें।
‘‘सुहागरात के लिए क्या इन शर्तों की जरूरत थी कुशाग्र, मेरी देह, मेरा व्यक्तित्व अपने आप में पूर्ण नहीं हैं क्या?
काम्या नहीं: मैंने दो साल तक अपना अपमान सहा। आपको पाने का इंतजार करती रही।कुशाग्र: मेरी सुंदरता के पाने के लिए ये उपादान चाहिए? सिंदूर, लौंग, आभूषण। नहीं कुशाग्र मेरी चेतना जाग चुकी है। कामना का ज्वार मेरे जागरण को अब फिर सुला नहीं सकता। दाम्पत्य की जो अनिवार्य शर्त है वह हमारे बीच में नहीं है।
हम निरंतर सुलग सुलग कर नहीं जी सकते। पूर तरह अजनबी बनकर हम नई शुरूआत करेंगें।
काम्या के ठंडे ठीर शब्दों की फुरैरी उसके कामना ज्वारों को भाटों में बदल चुकी थी। वह फिर स्पंदनहीन सन्नाटों से घिर रहा था।  वह उसके पास सरक आई: ठंडा बेगान हाथ अपने हाथ में लेकर काम्या कहने लगी:- कुशाग्र, मुझे समझ आ गई है कि हम एक दूसरे के लिए नहीं बने। मेरी अतृप्त देह को तृप्ति का स्वाद तुमने चखाया मैं आभारी हूं पर ऐसी तृप्ति काम्य नहीं हैं। हम जल्दी ही इक दूजे को भूल जायेंगें। हम डायवोर्स पेपर्स पर साईन करेंगें और एक दूसरे को शुभकामनाएं देंगें।  जब तक यह सारी कार्यवाही पूरी नहीं होती हम वैसे ही मित्रवत रहते रहेंगें: शांत - सन्नाटों से घिरे - चुपचाप।
ठीक है
ठीक
धीरे से उसका हाथ चूमकर उठ गई काम्या।
AJC-6-300

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