शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

फैशन सिर्फ सिल्मट्रिम लाेगाें के लिए ही नहीं है- डा. अनुजा भट्ट

फैशन के गलियाराें मे इन दिनाें प्लस साइज के दीवानाें की चर्चा है। समाज में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है कि
अब वह अपनी साेच बदल रहा है या बदलने के लिए मजबूर है। माेटे लाेग बेवजह ही  निराशा के भंवर में फंसे हैं जबकि माेटा हाेना  उनकी दिलचस्पी में शामिल नहीं है। वह न  ताे मन का खा पाते हैं और न ही पहन आेढ़ पाते हैं। स्वाद और साैंदर्य से बेरुखी क्याें हाे। फैशन डिजाइनर अब प्लस साइज के लिए बहुत ही खूबसूरत परिधान लेकर आ रहे हैं।  फिर चाहे वह प्लस साइज टीनएजर हाे या फिर प्लस साइज  दुल्हन।
 यह सच है  कि माेटापा पूरी दुनिया में बहुत तेजी से फैल रहा है। इसके लिए हमारा लाइफ स्टाइल और जैनेटिक पैटर्न दाेनाें की उत्तरदायी है।  इसलिए माेटे व्यक्ति काे भी उतनी ही तव्जाे मिलनी चाहिए जितनी पतले लाेगाें काे। यह सिर्फ फैशन के मामले में ही नहीं  सब जगह हाेना चाहिए।  फैशन में आए इस बदलाव का असर फिल्माें और टीवी पर भी पड़ेगा वहां भी माेटे लाेगाें काे अभिनय के अवसर मिलेंगे। लाेग उनके अभिनय काे देखेंगे ताे उनके माेटापे पर नजर नहीं जाएगी। इस तरह उनके भीतर की प्रतिभा काे देखने सुनने का अवसर पैदा हाेगा और वह समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए अग्रिम पंक्ति पर खड़े हाेंगे। अभी हाल में जब प्लस साइज मॉडल का आडिशन हुआ ताे उसमें 5000 से ज्यादा प्लस साइज मॉडल ने हिस्सा लिया। यह नाेटिस करने वाली बात है।
  अक्सर हम अपने लिए  ड्रेस का चयन ताे कर लेते हैं पर उसके साथ एक्सेसरीज पर फाेकस नहीं करते।हमारी हेयर स्टाइल और मेकअप दाेनाें हमारी पर्सनेलिटी  काे बैलेंस करते हैं। प्लस साइज के मेकअप टेंड्रस और हेयर स्टाइल भी आकर्षक हाेने चाहिए।  बहुत बार देखा जाता है कि वह अपने माेटापे के कारण  भीतर ही भीतर हीन भावना के शिकार हाेने लगते हैं एेसे में ड्रेस डिजानर काे यह भी पहल करनी चाहिए कि वह उनके  कांफिडेंस काे माेटिवेट करे।

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