बुधवार, 18 अप्रैल 2018

सोशल लव -दर्शना बांठिया

"ज्योति मेरा रूमाल नहीं मिल रहा ,कहाँ रखा कल तुमने"...संजय ने अपनी पत्नी से कहा।"अरे!संजू ,वहीं होगा."..ज्योति ने मोबाइल चलाते हुए कहा..।
"ज्योति ये सब क्या है,तुम्हें दो दिन से कह रहा हूँ,कि मेरी अलमारी साफ कर दो...सारे कपड़े यहाँ -वहाँ फैले पड़े है,शर्ट की जगह पैंट है,एक मोजा कहीं है,तो दूसरा कहीं ओर ..ऐसे कैसे चलेगा"-संजय झल्लाते हुए बोला।
ज्योति फोन चलाते हुए बोली :-"संजू ,मैं कर दूँगी.....,ये देखों ना.....खुशी और मोहित ने कितने अच्छे फोटोज लगाए है...और केप्शन में लिखा है.."I love you my forever".सो,स्वीट, ...कितना प्यार है दोनों में"......और तुम हो कि इन सब चीजों से दूर भागते हो।
"संजू तुम थोड़ा तो सोशल बनो.....अपने पड़ोस की रीटा को देखों कल ही फेसबुक पर स्टेटस डाला है ,"Happily going to goa with my hubby".कितना अच्छा लगता है यार......और तुम बस 10 से 6 की बैंक नौकरी में ही खुश रहते हो। 
ज्योति मेरे पास इन चीजों का समय नहीं है,कल से प्लीज सामान व्यवस्थित रखना"इतना कहकर संजू ऑफिस के लिए निकल गया।
दोपहर में ज्योति ने संजय को फोन किया और कहा," संजू तुमने मेरी प्रोफाइल पिक अभी तक लाइक नहीं कि...दिशा के पति उसकी हर फोटो पर लाइक, कमेंट करते है,वो भी उसके बिना कहे."।
ज्योति अभी काम बहुत है,मैं बाद में कर दूंगा:-संजय ने इतना कहकर फोन रख दिया।
शाम को संजय घर गया तो उसने देखा ज्योति मुंह फूलाए गुस्सें से बैठी।
"ज्योति एक बढ़िया सी चाय तो बनाओ,साथ मैं बैठकर पीते है"..संजय बोला।
"मैं कोई चाय ..वाय नहीं बनाने वाली....खुद बना के पिलो."..ज्योति ने गुस्से से कहा।
क्या हुआ....ज्योति.... इतनी नाराज क्यों हो?संजय ने पूछा।
ज्योति झल्लाते हुए बोली,"नाराज ना हूँ ..तो क्या करूँ....सुबह से शाम होने को है,और आप को इतनी भी फुरसत नहीं कि एक बार मेरी फोटो पर कमेंट ही कर दूँ"..पता है,'सुषमा के पति तो उसके फोटों डालते ही तारीफ के पुल बांधने लगते है ...कितना प्यार करते है उसके पति'।
"भई,प्यार में तो हम भी कम नहीं है ...आओ पास में बैठो...दुनिया को क्या बताना कि मिंया बीवी में कितना प्यार है"....संजय ने ज्योति का हाथ पकड़कर कहा।
"छोडों.... तुम्हें तो प्यार जताना भी नहीं आता .....रहो तुम बुद्द्धू .....,कुछ नहीं आता तुम्हें..... प्यार करना भी नहीं... मेरी किस्मत में ही नहीं है प्यार".. ज्योति ने हाथ झटकातें हुए कहा।
"ज्योति तुम जिसे प्यार कह रही हो वो दिखावा है...मेरे लिये प्यार का मतलब दिखा प्रदर्शन करना नहीं है...,इसे कृत्रिम प्यार कहते है...,मुझसे दिखावा और ये "सोशल लव" नहीं होता.....संजय ने गुस्से मे कहा और घर के बाहर चला गया।
ज्योति ने गुस्से में पूरा घर का सामान बिखेर दिया।
संजय वापस घर आया तो देखा ज्योती सोफे पर ही सो गई,उसे बहुत दुःख हुआ कि "क्यों ज्योति को ऐसा लगता है कि सिर्फ फेसबुक या सोशल साइट्स पर प्यार का प्रदर्शन ही सच्चा प्यार है''...।
अगले दिन संजय ज्योति को बिना उठाऐं ,जल्दी ही ऑफिस चला गया।
शाम को ऑफिस से लौटा तो देखा पूरा घर साफ-सुथरा ,व अनेक खुशबू से युक्त था।कमरे में देखा तो अलमारी के सारे कपड़े व्यवस्थित थे।
"आ गए संजू...... ये लो तुम्हारी पंसदीदा अदरक वाली चाय"-ज्योति ने मुस्कुराकर कहा।
संजय को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ज्योति के सुर अचानक बदल कैसे गए।
"संजू....,सॉरी ....प्लीज मुझे माफ कर दो"।
'क्या हुआ.... ज्योति तबीयत तो ठीक है', सच,सच बताओ हुआ क्या है.?संजय ने हतप्रभ होकर कहा।
"संजू आज मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है ....कि प्यार में दिखावा नहीं होना चाहिए,.... सच्चा प्यार तो वो है,जहाँ कुछ कहने की आवश्यकता नहीं होती....एक -दूसरे को देखकर ही भावनाओं को समझ लेना चाहिए।"
संजय ने मुस्करा के व्यंग्यात्मक ढंग से कहा....,"शुक्र है,मैडम को समझ तो आया,पर ये चमत्कार हुआ कैसे..?सहीं -सहीं बताओ ज्योति"।
"संजू ,दरअसल वो खुशी और मोहित के बारे में बताया था ना ....तो वो मोहित का अफेयर चल रहा है....,आज सुबह कामवाली ने बताया , दोनों में तलाक तक बात पहुंच गई है।सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए... ही .. मोहित मीठी-मीठी तारीफे करता था,...पर हकीकत में तो....उसकी ऑफिस की किसी लड़की के साथ 2साल से अफेयर कर रहा है"
और रीटा गोवा गई ही नहीं ....छूट्टियों मे गांव गई है",
और संजू एक बात बताऊं, पर वादा करो....तुम हँसोगे नहीं...."ज्योति ने नजरे नीची करते हुए कहा।
बोलो तो '......संजय बोला।
"वो दिशा है ना....वो खुद ही अपने पति की फेसबुक आई -डी चलाती है,और खुद की तारीफ खुद ही लिखती है"।
क्या!.....हा हा हा."..संजय जोर से हँसा।
"धन्य है....सोशल मीडिया.... जहाँ सिर्फ दिखावें व कृत्रिमता को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है,...अब समझ आया देवी जी! कि सोशल लव प्रदर्शन कहा तक टिकता है"।
'चलो .....अब छोड़ो ये सब......बाहर चलते है डिनर पर ,तैयार हो जाओ'....और हाँ फेसबुक पर लिखना मत भूलना ,"Happily going to dinner".
क्या ...संजू ....तुम भी️....और दोनों साथ मे हंसने लगे।

वास्तव में दोस्तों आजकल लोगों ने हद से ज्यादा प्रदर्शन को ही प्यार की परिभाषा मान लिया है.ऐसा नहीं कि मैं फेसबुक या सोशल मीडिया के खिलाफ हूँ...पर प्यार केवल सबके सामने, जाहिर करने से ही होता है,
ऐसा मानना गलत है।
आपके क्या विचार है,मुझे जरूर बताइयेगा। आप के विचारों का मुझे इंतजार रहेगा।

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