verification

गुरुवार, 22 मार्च 2018

छलिया है वो छलिया प्रीती कविता

"छलिया है वो छलिया "

छलिया है वो छलिया,
वो तो छलता जाता है,

मंद मंद मुस्कानो से,
अपना बनाता जाता है ।

सूरज जैसा तेज सदा,
उसके चेहरे पर गहराता है ।

मीठी मीठी बातों से वो,
मन को मोहता जाता है ।

बाँट सबका दुःख दर्द,
चेहरे पर खुशियाँ लाता है ।

मद मस्त पवन का झोंका,
शीतलता बरसाता है ।

इस धरती पर वो फरिश्ता,
ईश्वर का कहलाता है।

छलिया है वो छलिया,
वो तो छलता जाता है ।

मंद मंद मुस्कानो से,
अपना बनाता जाता है ।

     

ऐसे लेख जो हमारी जीवनशैली को प्रभावित करते हैं, विचार को समृद्ध करते हैं,जीवन के इंद्रधनुषी रंग हैं

वारली कला में जीवन और फैशन साथ साथ हैं- डॉ अनुजा भट्ट

लाल गेरू रंग की दीवारों पर सफेद रंग से चित्रित साधारण वारली आकृतियाँ अप्रशिक्षित आँखों को कुछ खास नहीं लग सकती हैं। लेकिन करीब स...

पोस्ट हमारी ,पसंद आपकी- मैं अपने पाठकों का दिल से सम्मान करती हूं ।