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शनिवार, 24 मार्च 2018

जीने दाे- पार्ट 1 श्रेया श्रीवास्तव

पड़ोस में कथा थी।लता ने बहुत दिनों के बाद एक साड़ी पहनी बाल बनाये बिंदी लगाई पर जैसे ही सिंदूर लगाने चली उसे 25 साल पहले की वो रात याद आ गई जब कमल से उसकी शादी हुई थी।लता एक सुशिक्षित परिवार की पढ़ी लिखी लड़की थी।देखने में साधारण थी कई बहनें थीं पिता के पास दहेज में देने के लिये अधिक कुछ था नहीं सो 22साल की आयु में मामूली प्राइवेट नौकरी करने वाले कमल से उसकी शादी कर दी गई।लता भी पिता की मज़बूरी समझती थी तो अपने कुछ छोटे छोटे सपने मन में ही दफ़न करके
ससुराल चली आई ।पहली रात ही पति ने जता दिया कि उसके लिये लता का होना न होना उसके लिये कोई मायने नहीं रखता था कमल के लिये उसके मा बाप ही सब कुछ थे।लता सुबह 5 बजे उठ जाती झाड़ू लगाती खाना बनाती बरतन कपड़े धोती।बरतन में ज़रा भी कालिख रह जाती तो सास आसमान सिर पर उठा लेती।मसाला सिल पर पीसा जाता जितना और जो कहा जाता लता उतना ही करती।न तो वो अपने मन का खा सकती थी न पहन सकती थी।कहीं बाहर जाना तो दूर छत पर भी नहीं जा। कती थी।ज़रा सा भी काम बिगड़ जाता तो लता के पुरखे तार दिये जाते।
पति श्रवण कुमार थे माँ एक बार बोलती तो वो चार बार मारते।इस बीच लता के कई मिसकैरिज हो गये।लता चुपचाप अपनी बेबसी पर रोती रहती बूढे माँ बाप को बता कर दुख नहीं देना चाहती थी। समय बीता अब कमल की दूसरे शहर में सरकारी नौकरी लग गई।कुछ दिनों बाद कमल के साथ लता को भी भेज दिया गया।नये शहर में लता को बहुत अपनापन मिला इस बीच लता एक बेटी और एक बेटे की माँ बन गई थी।पति का रवैया अभी भी वैसा ही था पर लता का समय बेटी बेटे की परवरिश में और खाली समय सहेलियों के साथ बीत जाता।लता ने भी मन को समझाया कि सब को सब कुछ नहीं मिलता। शादी के 25सालों के बाद एक दिन लता को पता चला कि कमल ने दूसरी शादी कर ली है।लता ने सारा जीवन दुख झेले थे।बेटे बेटी की पैदाइश पर भी पति ने गले न लगाया।करवाचौथ पर भी पानी पिलाने का रिवाज़ तक नहीं पूरा किया कभी।लता के माँ बाप भी चल बसे थे।इस खबर से तो मानो लता की कमर ही टूट गई।लता पति के आगे रोई गिड़गिड़ाई पैर भी छुएपर इससे पति का अहं और बढ़ गया उसे लगा कि इसकी औकात ही कितनी है।धीरे धीरे कमल ने घर के लिये राशन तक लाना बंद कर दिया।ये सब लता के लिये असहनीय हो गया था।फिर एक दिन साहस जुटा कर लता ने कमल का पुरजोर विरोध किया।उसने कमल को साफ़ बता दिया कि अब वो और नहीं सहेगी।लता का ये नया भेष देखकर कमल दंग रह गया।ऐसा तो उसने सोचा भी नहीं था उसे तो काँपती और रोती हुई लता को देखने की आदत थी।
लता ने जब देखा कि उसके सास ससुर भी बेटे का साथ दे रहे हैं तो उसे खुद साहस दिखाना पड़ा।लता कोई कानूनी लड़ाई तो नहीं लड़ सकती उसके पास न तो संसाधन हैं न ठोस सबूत पर उसने कुछ हद तक झुका तो दिया ही।लता के पास आय का कोई साधन नहीं है और उसके सामने बेटे बेटी की परवरिश का भी सवाल है।आज लता सबसे यही कहना चाहती है कि अधिक मौन जीवन मिटा देता है अतःमुखर बनें और अपने अधिकारों के लिये सजग रहें ताकि मेरी तरह किसी और को ऐसा दुखदायी और अपमानजनक जीवन न जीना पड़े।
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