मंगलवार, 28 अगस्त 2018

परेशान न हाें अपने हाइपर एक्टिव बच्चे से- डा. अनुजा भट्ट

हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें
 बहुत ज्यादा बोलने वाला, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने वाला, काफी शरारती और जिद्दी  बच्चों को हाइपर एक्टिव कहा जाता है। अभिभावक बच्चे को कंट्रोल में करने के लिए अक्सर डांट-फटकार व मारपीट का सहारा लेते हैं। इससे आपके बच्चे में नकारात्मक सोच आ जाती है और वह पहले से भी ज्यादा गलत व्यवहार करने लगता है। सवाल उठता है कि आखिरकार आजकल बच्चे इतने शैतान और उदंड कैसे बन रहे हैं।
 मनाेवैज्ञानिक भावना बर्मी कहती हैं, मॉडर्न लाइफस्टाइल की वजह से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। पढ़ाई से लेकर खेलकूद तक हर फील्ड में उन पर कॉम्पिटिशन में आगे निकलने का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा शहरों में एकल परिवार की वजह से भी बच्चे अकेलेपन से जूझ रहे हैं। इन सब कारणों से बच्चे गुस्सैल, चिड़चिड़े या यूं कहें कि हाइपर एक्टिव हो रहे हैं। हम अपने बच्चे की गलत आदतों की अनदेखी  कर रहे हैं यह  नहीं हाेना चाहिए। इसकी जगह उसके कारणों को जानकर उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।  अगर आपका बच्चा भी हाइपर एक्टिव है ताे इन बाताें पर अमल करें।
  •  डीप ब्रीदिंग लेना सिखाएं-उस बच्चे को डीप ब्रीदिंग सिखाई जाए। यह गहरी सांस इस तरीके से हो कि वह नाक से सांस को शरीर के अंदर ले और मुंह से छोड़े। इसका असर यह होगा कि आपको फ्रस्टेटेट बच्चे को डील करने में आसानी होगी। 
  •  बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं – अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छे से व्यवहार करे, तो जरूरी है कि उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उन्हें ज्यादा प्यार दें। इससे उन्हें अच्छा महसूस होगा। इसके अलावा बच्चे को धैर्य से रहना सिखाइए।
  • दूसरों के सामने न डांटें – अक्सर पैरेंट्स हाइपर एक्टिव बच्चे के स्वभाव को बदतमीजी मानकर बार-बार उसे दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने ही डांटने लगते हैं। लंबे समय तक ऐसा करना बच्चे की मानसिकता, आत्मविश्वास और दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ उनके व्यवहार पर नकारात्मक असर डालता है। बच्चे के आसपास ऐसा माहौल बनाएं जिससे वह अपनी हाइपर एक्टिविटी से बाहर आ सके। यदि उसे किसी काम से रोकना है, तो दूसरों के सामने डांटकर न रोकें। बेहतर है कि उसे अकेले में समझाएं।
  • बच्चे के मन का विश्लेषण करते रहें - अगर आपका बच्चा ज्यादा हाइपर एक्टिव है, तो उसके मन की स्थिति का विश्लेषण करने के लिए मनोचिकित्सक की सलाह लें। दरअसल हाइपर एक्टिव बच्चों के लक्षण एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) से काफी मिलते हैं। इस स्थिति में बच्चे के आत्मसम्मान पर भी प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा आसपास के लोगों के साथ उसके संबंध भी प्रभावित होते हैं। एडीएचडी एक दिमागी जैविक बीमारी है, जिसका इलाज दवाओं द्वारा किया जा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे के ऊपर खास ध्यान दें।
  •  प्यार और समय दें -ऐसे बच्चों को मां-बाप अपने पास बैठाकर सहलाएं। यानी उनके माथे को हाथों से दबाएं, कांधे को हल्का प्रेस करें। माता-पिता का यह टच बच्चों के प्रति बहुत सेंसेटिव होता है। यह उनके लिए रिलेक्सिंग टच होता है।   ऐसे बच्चों को कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका ये है कि आप उसे बहुत प्यार दें, इससे वह शांत हो जाएंगे। जब उनका मूड ज्यादा खराब हो तो उन्हें गले लगा लीजिए और फिर समझाइए।
  • सही से बच्चे की बात सुनें – ऐसे बच्चों की बात को सुनना बहुत जरूरी है। कई बार वह ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन जब कोई उनकी बात नहीं सुनता तो वह और हाइपर हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप उनकी बात सुनें। इससे वह शांत रहेंगे और आपकी बात भी मानेंगे। 
  • खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में रखें व्यस्त – हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें। ऐसे बच्चे को डांस या आर्ट क्लास में भी भेज सकते हैं। इससे उसकी अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा व्यय होगी और साथ ही आत्म अभिव्यक्ति और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा।
  • कुछ नया खरीदकर दें - बच्चे का मन बहलाने के लिए कुछ नई चीज खरीदकर गिफ्ट करें। नई चीज को पा कर वह दूसरी बातें भूल जाएगा और खुश रहेगा।
  • पालतू जानवर लाएं – बच्चे को जो भी पालतू जानवर अच्छा लगता है, उसके लिए वह खरीदकर ले आएं। नया दोस्त देखकर व उसके साथ खेलने में उसकी बदमाशियां कम हो जाएंगी।
  • हर गतिविधि पर रखें नजर – हाइपर एक्टिव बच्चे की हर गतिविधि पर नजर रखना जरूरी है। रूटीन से उसके स्कूल टीचर से मिलते रहें। इससे बच्चे के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी। टीचर को वजह बताते हुए उसे आगे वाली सीट पर बिठाने व समय-समय पर कुछ गिफ्ट देने का अनुरोध कर सकते हैं। इससे वह खुश रहेगा।
  • क्रिएटिव बनाएं-एक बॉक्स हमेशा अपने घर में तैयार रहना चाहिए। इस बॉक्स में क्लै आर्ट, कलर्स, पेंसिल्स या अन्य क्रिएटिविटी वाली चीजें रखना चाहिए। ताकि बच्चा इस बक्से के साथ ही लंबे समय तक बिजी रहे।
  •  रिलैक्स प्लेस पर एक्टिविटी कराएं-आपके घर में एक जगह ऐसी होनी चाहिए जिसे हम रिलैक्सेशन की जगह कह सकते हैं। यह कोई छोटी बालकनी हो सकती है, जहां आराम कुर्सी रखी हो। ध्यान रखें यह ऐसी जगह हो जहां एक्टिविटी कम से कम और रिलैक्स ज्यादा मिले। 
  •  टाइम टेबल फॉलो कराएं-ऐसे बच्चों के लिए एक टाइम टेबल को फॉलो करना बहुत जरूरी है। यह मिलिट्री रूल जैसा नहीं होगा, लेकिन उनके सोने, खाने, उठने, नहाने, खेलने का समय निर्धारित रहेगा तो उनसे डील करना आसान होगा। 
  •  शुगर और कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रखें-बच्चों की डाइट मॉनीटरिंग और उनका शुगर इनटेक कंट्रोल करना जरूरी है। यदि हम उन्हें ज्यादा स्वीट्स दे रहे हैं तो उनकी एक्टिविटी का लेवल बढ़ने लगता है। शुगर कोटेड सप्लीमेंट्स और कोल्ड ड्रिंक्स से उनको दूर रखें। 
  •  विटामिन दिखाएं असर-हाइपर एक्टिव बच्चाें के लिए 4 तरह के विटामिन बहुत असरदार हाेते हैं  विटामिन बी 3, बी 6, बी 12 और विटामिन सी। विटामिन सी  हमें रसीले फल जैसे नींबू, संतरा, माैसमी में  मिलता है। इसी तरह दूध और अंडे, मक्खन, मछली में हमें विटामिन 12 मिलता है।   मूंगफली, बादाम, अखराेट में हमें विटामिन 6 मिलता है।
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