हर सोमवार जब हम सुबह उठते हैं तो खुद को थका हुआ महसूस करते हैं और इसके लिए पिछले सप्ताह की व्यस्त कार्यशैली को उत्तरदायी ठहराते हैं। लेकिन हम यह महसूस नहीं करते कि इसकी वजह हमारी कार्यशैलीहै। पर्याप्त मात्रा में नींद न आना, व्यायाम न करना, पोषण युक्त भोजन न करना जैसे पर्याप्त कारण हैं जो आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपकी जीवनशैली फिलहाल आपको बहुत खुशी दे रही है लेकिन कुछ ही समय बाद जब हमारा शरीर साथ देना बंद कर देगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। बहुत सारे लोग इस बारे में नहीं जानते कि पर्याप्त नींद न होने से या नींद में कमी आने से, स्वास्थ्यवर्धक खाना न खाने से और समय पर व्यायाम न करने से हम बहुत सारी बीमारी को निमंत्रण दे रहे हैं। जैसे मोटापा, ह्रदय संबंधी बीमारी कैंसर, डायबिटीज आदि। और दूसरी तरफ जो लोग जानते हैं और अनदेखी कर रहे हैं उनके शरीर की शक्ति धीरे-धीरे कम हो रही है।भारत में इस समय दो तरह की बीमारी है पहली संक्रामक और दूसरी असंक्रामक। जो तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली और व्यायाम न करने के कारण है। शहरी जीवन में डायबिटीज, हायपरटेंशन, क्रानिक हार्टएलिमेंट्स और कैंसर जैसी बीमारियां बड़ी तेजी से फैल रही हैं। दूसरी तरफ नालों का खुला होना, शौचालय न होना, स्वच्छ पानी का अभाव डैंगू जैसी बीमारी के लिए जिम्मेदार है। दूसरी समस्या है मोटापा। यह बच्चो से लेकर बड़ों सभी को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। नींद न होने के कारण दोपहर में नींद आना, सुबह उठते समय सिरदर्द की शिकायत, सीखने की क्षमता और स्मरण शक्ति का कमजोर होना, चिड़चिड़ापन होना या फिर तनाव महसूस करना, मूड चेंज होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो सावधान हो जाएं। सांस का कभी- धीमी य कभी तेज गति से चलना भी खतरनाक है। धीरे धीरे आपकी श्वांसनलिका का द्रार छोटा होता जा रहा है और गले का आकार सामान्य से बड़ा। यह एक गंभीर खतरा है। हम सब इसकी अनदेखी कर रहे हैं। हम जंकफूड खाते हैं जो हमारे शरीर से निकलता नहीं है बल्कि जमा हो जाता है। यह हमारे लीवर को क्षतिग्रस्त करता है।यही वह कारण है जिसकी वजह से भारत में लीवर ट्रांसप्लांट कराने वालों संख्या बढ़ती जा रही है।
आधुनिक लाइफस्टाइल ब्लॉग: फैशन, संस्कृति, कहानियों और संस्मरणों का अनूठा संगमआज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और उन छोटी-छोटी खुशियों को भूल जाते हैं जो हमारे जीवन को असल मायने में खूबसूरत बनाती हैं। लाइफस्टाइल का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि हम क्या पहनते हैं या हम कहाँ घूमते हैं, बल्कि इसका गहरा संबंध हमारी सोच, हमारे साहित्य और हमारी विरासत से भी है। यदि आप भी एक ऐसे मंच की तलाश में हैं जहाँ आधुनिकता और परंपरा का एक खूबसूरत संतुलन देखने को मिले, तो यह आपके लिए है।
गुरुवार, 5 अप्रैल 2018
थके थके से क्यों हैं आप? डॉ.अनुजा भट्ट
हर सोमवार जब हम सुबह उठते हैं तो खुद को थका हुआ महसूस करते हैं और इसके लिए पिछले सप्ताह की व्यस्त कार्यशैली को उत्तरदायी ठहराते हैं। लेकिन हम यह महसूस नहीं करते कि इसकी वजह हमारी कार्यशैलीहै। पर्याप्त मात्रा में नींद न आना, व्यायाम न करना, पोषण युक्त भोजन न करना जैसे पर्याप्त कारण हैं जो आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपकी जीवनशैली फिलहाल आपको बहुत खुशी दे रही है लेकिन कुछ ही समय बाद जब हमारा शरीर साथ देना बंद कर देगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। बहुत सारे लोग इस बारे में नहीं जानते कि पर्याप्त नींद न होने से या नींद में कमी आने से, स्वास्थ्यवर्धक खाना न खाने से और समय पर व्यायाम न करने से हम बहुत सारी बीमारी को निमंत्रण दे रहे हैं। जैसे मोटापा, ह्रदय संबंधी बीमारी कैंसर, डायबिटीज आदि। और दूसरी तरफ जो लोग जानते हैं और अनदेखी कर रहे हैं उनके शरीर की शक्ति धीरे-धीरे कम हो रही है।भारत में इस समय दो तरह की बीमारी है पहली संक्रामक और दूसरी असंक्रामक। जो तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली और व्यायाम न करने के कारण है। शहरी जीवन में डायबिटीज, हायपरटेंशन, क्रानिक हार्टएलिमेंट्स और कैंसर जैसी बीमारियां बड़ी तेजी से फैल रही हैं। दूसरी तरफ नालों का खुला होना, शौचालय न होना, स्वच्छ पानी का अभाव डैंगू जैसी बीमारी के लिए जिम्मेदार है। दूसरी समस्या है मोटापा। यह बच्चो से लेकर बड़ों सभी को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। नींद न होने के कारण दोपहर में नींद आना, सुबह उठते समय सिरदर्द की शिकायत, सीखने की क्षमता और स्मरण शक्ति का कमजोर होना, चिड़चिड़ापन होना या फिर तनाव महसूस करना, मूड चेंज होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो सावधान हो जाएं। सांस का कभी- धीमी य कभी तेज गति से चलना भी खतरनाक है। धीरे धीरे आपकी श्वांसनलिका का द्रार छोटा होता जा रहा है और गले का आकार सामान्य से बड़ा। यह एक गंभीर खतरा है। हम सब इसकी अनदेखी कर रहे हैं। हम जंकफूड खाते हैं जो हमारे शरीर से निकलता नहीं है बल्कि जमा हो जाता है। यह हमारे लीवर को क्षतिग्रस्त करता है।यही वह कारण है जिसकी वजह से भारत में लीवर ट्रांसप्लांट कराने वालों संख्या बढ़ती जा रही है।
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