शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

आइलाइनर से आँखाें की सुंदरता निखारें - प्रत्यूषा नंदिनी

आंखों के भीतरी किनारे से आईलाइनर की 
पतली लाइनें शुरू करते हुए बाहरी कोने तक
 उसकी मोटाई बढ़ानी चाहिए. 


चेहरे के परफेक्ट मेकअप से किसी भी महिला को खूबसूरत बनाया जा सकता है, जिसमें आंखों की सुंदरता को बढ़ाने के लिए एक अच्छे आईलाइनर का उपयोग बेहद ही जरूरी है, क्योंकि आंखे ही हमारे चेहरे का सबसे सुंदर और महत्वपूर्ण अंग है। अधिकांश महिलाएं यह समझती हैं कि आईलाइनर केवल एक ही तरीके से लगाया जा सकता हैं, जो आंखों की पलक पर आईलाइनर को सीधी रेखा में लगाने जैसा हैं। दरअसल,आंखों की खूबसूरती के लिए आंखों की आकृति के अनुसार आईलाइनर लगाने का तरीका अपनाना बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। तो आइए जानते हैं आंखों की आकृति के अनुसार आईलाइनर लगाने के तरीकों के बारे में।

. हुडेड (Hooded)-
यदि आपकी आंखों की आकृति हुडेड हैं, तो बिल्ली की आंखों जैसा आईलाइनर लगाएं। कोने में पतली और आंखों के बीच में मोटी आईलाइनर लगाएं। इससे आपकी आंखें बड़ी दिखेंगी।

वाइड सेट (Wide set)-

आंखों की ऐसी आकृति वाली महिलाएं विभिन्न प्रकार के आईलाइनर का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसमें ऊपरी और निचली पलक को एक साथ लाकर, आंखों के बाहरी कोनों पर हल्का-सा आईलाइनर लगाना चाहिए। निचले आईलैशेस को आईलाइनर से कलर करना चाहिए। इस तरह आपकी आंखें खूबसूरत दिखेंगी।

डाउनटर्नड (नीचे की ओर झुकाव वाली आकृति) (Downturned)-

ऐसी महिलाएं जिनकी आंखों के बाहरी किनारे थोड़े से नीचे की ओर झुके हों, उन्हें आईलाइनर लगाते समय बाहरी किनारे पर आईलाइनर ऊपर की तरफ उठाते हुए लगाना चाहिए। इससे आपकी आंखें बड़ी और चमकदार दिखेंगी। आंखों को बड़ा दिखाने के लिए निचले आईलैशेस में आईलाइनर लगाना चाहिए।

बादाम की तरह शेप (Almond shaped)-

ऐसे आकार की आंखों वाली महिलाआें को अपनी आंखों के अनुरूप आईलाइनर लगाना चाहिए। इसमें आंखों के भीतरी किनारे से आईलाइनर की पतली लाइनें शुरू करते हुए बाहरी कोने तक उसकी मोटाई बढ़ानी चाहिए।

डीप सेट (Deep set)-
इसमें आंखों के बाहरी किनारों से आईलाइनर लगाना शुरू करना चाहिए। इसके अलावा पलकों की सबसे ऊंची जगह से आईलाइनर लगाना शुरू करना भी अच्छा होता हैं। ऐसी आंखों में मोटा आईलाइनर नहीं लगाना चाहिए, अन्यथा आंखें छोटी दिखेंगी।

अपटर्नड आंखें (ऊपर की ओर उठी हुई आंखें) (Upturned eyes)-

ऐसी आंखों वाली महिलाओं को ऊपरी और निचली पलकों में अंतर होता हैं। ऐसे में आप आंखों के बाहरी किनारों पर ऊपर की ओर उठती हुई आईलाइनर से लाइन खींचे और लोअर लैश पर हल्के हाथों से आईलाइनर लगाएं।

आईलाइनर लगाते समय बरतें ये सावधानियां

चेहरे की मेकअप के दौरान आंखों की सुंदरता के लिए महिलाएं प्रायः आईलाइनर का प्रयोग करती हैं। ये आईलाइनर लिक्विड फॉर्म में आते हैं। ऐसे करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता होती हैं, अन्यथा इसके चेहरे पर फैल जाने का डर बना रहता हैं। जिससे चेहरे और आंखों का मेकअप खराब हो सकता हैं।

आईलाइनर लगाते समय की जानें वाली गलतियां –
कुछ महिलाएं मेकअप या आईलाइनर लगाने से पहले अपना चेहरा नहीं धोती हैं। जबकि कंसीलर और पाउडर लगाने से पहले आईलाइनर का प्रयोग करना भी गलत होता है। इससे आईलाइनर फैल सकता है।

आसान मेकअप के लिए आईलाइनर पेंसिल का प्रयोग करें –
बाज़ार में विभिन्न प्रकार के आईलाइनर मौजूद हैं। महिलाएं जैल आईलाइनर, ड्राई आईलाइनर, काजल स्टिक में से किसी एक का प्रयोग कर सकती हैं। इन सब से हट कर पेंसिल आईलाइनर से अपनी आंखों का मेकअप करना ज्यादा आसान होता हैं।

आईलाइनर को लीक आउट (फैलने) से रोकने के लिए अपनाएं ये तरीके –

1. आई शैडो का प्रयोग (Set Your Eyeliner With Eyeshadow) –
पेंसिल आईलाइनर का प्रयोग करते समय पहले आई शैडो लगाएं। यह आईलाइनर को फैलने से रोकता हैं।आईलाइनर लगाने के लिए पतले ब्रश का उपयोग करें। इससे आईलाइनर एक समान रूप में दिखता है और चेहरे पर अतिरिक्त दाग-धब्बे नहीं लगते हैं।

2. कंसीलर का प्रयोग (Use A Concealer First) –
आंखों का मेकअप करने या आईलाइनर लगाने से पहले कंसीलर लगाना चाहिए। आपको अपनी आंखों के ऊपरी पलकों और भीतरी भागों में पहले कंसीलर लगाना चाहिए। इस तरह आईलाइनर नहीं फैलता हैं।

3. आईलाइनर पेंसिल का उपयोग (Use Eyeliner Pencil) –
वॉटर प्रूफ और जैल युक्त आईलाइनर पेंसिल आंखों के मेकअप के लिए अच्छी होती हैं, परन्तु जब आपके पास समय की कमी हो तो आप आईलाइनर पेंसिल का उपयोग कर सकती हैं। बस, प्रयोग से पहले आईलाइनर पेंसिल को सुखा लेना चाहिए।

4. ऑयली स्किन की सफाई (Prepare Your Skin Properly) –
कुछ महिलाओं के चेहरे की त्वचा ऑयली होती हैं, इसलिए यह जरुरी हो जाता हैं कि मेकअप करने से पहले अपने चेहरे को साबुन, पानी से धोकर अच्छी तरह पोंछ लें। फिर मेकअप या आईलाइनर लगाएं।

5. अपनी पलकों पर मॉइस्चराइजर लगाने से बचें (Avoid Applying Moisturizer On Your Lids) –
चूंकि पलकें स्वभाविक रूप से ऑयली एवं चिकनी होती हैं। इसलिए चाहें चेहरे की त्वचा जैसी भी हो।आईलाइनर को फैलने से रोकने के लिए मॉइस्चराइजर का उपयोग करने से बचें।

6. फेस पाउडर का उपयोग करें (Use Face Powder) –

आंखों
सहित अपने चेहरे का मेकअप करने के बाद फेस पाउडर लगाएं। इससे आपकी आंखें और चेहरा खूबसूरत दिखने लगेगा।

7. सस्ते आईलाइनर का प्रयोग न करें (Don’t Go For Cheaper Ones) –
जब ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बात आती हैं तो आपको इनकी क्वालिटी का खास ध्यान रखना चाहिए। सस्ते उत्पादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। आपको अच्छे क्वालिटी वाले ब्रांडेड ब्यूटी प्रोडक्ट्स ही खरीदने चाहिए।

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

आपकी बॉडी टाइप एप्पल शेप है या पियर शेप- चयनिका शर्मा

हम लाेग अपना खानपान
 अपने परिवार,
 रिश्तेदार या फिर दाेस्ताें के
साथ बैठकर तय करते हैं
जाे एकदम गलत है। 
 अपने आप काे सेहतमंद रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी बॉडी टाइप क्या है. उसी के अनुसार आपकी डायट हाेनी चाहिए। एक ही मां-पिता से जन्म लेने वाले दाे अलग अलग बच्चाें का बॉडी टाइप अलग हाेता है ठीक वैसे ही जैसे ब्लड ग्रुप। हर बच्चे का जेनेटिक आर्डर अलग हाेता है और मेडिकल हिस्ट्री भी। इसलिए हमें अपने खान पान पर ध्यान देना चाहिए। हम लाेग अपना खानपान अपने परिवार, रिश्तेदार या फिर दाेस्ताें के साथ बैठकर तय करते हैं जाे एकदम गलत है। एक ही बीमारी अलग अलग लाेगाें काे अलग अलग  कारणाें से हाे सकती है इसलिए खानपान  भी अलग अलग हाेगा। अमूमन अपनी जैसी बीमारी देखकर लाेग एक दूसरे की तरह खानपान में बदलाव लाते हैं।
खान-पान के बारे में शुरूआती राय तब जान लेनी चाहिए जब बच्चा कुछ खाना शुरू कर देता है।यानी 6 माह बाद। नन्ना शिशु जब खाना खाने लगता है ताे अधिक्तर उसे दूध से बना खाना खिलाया जाता है। अधिक्तर खीर। एेसे में बच्चा खूब  हेल्दी दिखाई देता है पर वास्तव में उसके भीतर मिनरल और विटामिन की कमी हाे जाती  है जिससे उसकी पाचन क्रिया पर असर पड़ता है।
हमारे शरीर की संरचना दो तरह की हाेती है एक ताे एप्पल शेप और दूसरी पियर शेप। सबसे पहले एप्पल शेप की बात करते हैं। इस तरह की बॉडी में माेटापा शरीर के  ऊपरी हिस्से में हाेता है। एेसे में अपने खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है । नहीं तो आप गंभीर बीमारी के  शिकार हाे सकते हैं। अपने खानपान में हरी सब्जियां,प्राेटीन और  फलाें का जूस शामिल करें। फास्ट फू़ड से बचें। पीयर शेप में  ताेंद बाहर आ जाती है। टमी वाले हिस्से में काफी फेट जमा हाे जाता है। आपकी डाइट में प्राेटीन और हरी सब्जियां शामिल हाेनी चाहिए। इस शेप के लाेगाें काे भी  फास्ट फूड और काेल्ड ड्रिकं से बचना चाहिए। आपकी बॉडी टाइप काे जानकर डायटीशियन आपके स्वाद की रेसिपी आपकाे बता देंगे। जिससे आप अपने स्वादनुसार पाैष्टिक खाना खा सकते हैं। बच्चाें में  भी उनके स्वाद के अनुसार भाेजन दिया जा सकता है। अमूमन मम्मी बच्चाें के खाना न खाने पर उसे मैगी, बर्गर, पास्ता जैसी चीजें दे देती हैं जाे सेहत के लिए बहुत खतरनाक  है।  वैसे भी जितने पैक्ड फूड हैं वह सेहत के लिए हानिकारक हाेते हैं।
 इन दिनाें  ब्लड टाइप पर भी चर्चा हाे रही है पर अभी इसमें काफी मतभेद हैं। डायटीशियन और डाक्टर की सलाह पर ही इसे करना चाहिए।

बुधवार, 29 अगस्त 2018

बन जाए पनीर ,बच जाए पानी ताे क्या करेंगी - नीरा कुमार


जब भी हम कुछ बनाते हैं तो बहुत सारी चीजें बेकार समझकर फैंक देते हैं। जबकि कुछ भी बेकार नहीं हाेता। हमें उसके उपयाेग करने का तरीका मालूम नहीं हाेता। बहुत बार जिसमें सबसे ज्यादा पाैष्टिक तत्व हाेते हैं उसी का प्रयाेग हम नहीं करते।

1. घर में पनीर बनाया है तो उस के पानी में पकौड़े के लिए बेसन घोलें. पकौड़े स्वादिष्ठ बनेंगे.

2. पनीर के पानी से आटा गूंधें अथवा सूप में भी इस का इस्तेमाल कर सकती हैं.

3. अचार का मसाला बच गया हो तो उस में लहसुन छील कर अथवा प्याज काट कर डाल दें. स्वादिष्ठ अचार तैयार हो जाएगा.

4. आम के अचार के बचे तेल व मसालों को बैगन, टिंडा, भिंडी या करेले में भर कर सब्जी बनाएं.

5. अधिक पका केला फेंकने के बजाय पुडिंग या कस्टर्ड में डालें अथवा स्मूदी या शेक में प्रयोग करें.

6. चावल के निकले मांड़ में हींग, जीरा, अदरक, नीबू का रस और हरीमिर्च का तड़का लगा दें. बढि़या स्वादिष्ठ सूप तैयार हो जाएगा.

7. चावल का बचा पानी दाल में डाल दें, तो दाल गाढ़ी हो जाएगी और मात्रा भी बढ़ जाएगी.

8. अगर चोकर को सूजी में डाल कर हलवा बनाएं तो वह और स्वादिष्ठ व पौष्टिक बनेगा.

9. पका पपीता फीका निकला हो तो दूध व थोड़ी चीनी डाल कर थिक शेक बना लें.

10. फीके पपीते को पके कद्दू की तरह छौंक कर सब्जी बनाएं. सब्जी स्वादिष्ठ होने के साथसाथ पौष्टिक भी होगी.

11. छोटी इलायची के छिलकों को फेंकें नहीं. इन्हें पीस कर चीनी में मिला दें. जब भी चाय के पानी में चीनी डालेंगी इलायची की महक आएगी.

12. जिन सब्जियों को कद्दूकस कर रही हैं उन से निकले पानी को फेंकें नहीं, बल्कि उस से आटा गूंध लें. अधिक विटामिन इसी रस में होता है.

13. सब्जियों के डंठलों को फेंकें नहीं. उन्हें अच्छी तरह धो कर कोई सब्जी मिला कर उबाल लें. फिर छान कर कालीमिर्च, नमक और नीबू का रस डालें. बढि़या सूप तैयार हो जाएगा. चाहे तो वैजिटेबल स्टौक की तरह प्रयोग में लाएं.

14. अनार के छिलकों को फेंकें नहीं, बल्कि उन्हें अच्छी तरह धो कर सुखा लें. मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाएं. जब भी पेट में दर्द हो कुनकुने दूध के साथ 1 चम्मच फांक लें.

15. सूखी नारंगी के छिलकों को सुखा कर चूर्ण बनाएं. बेक करने वाली चीज पुडिंग में डाल कर उसे सुगंधित बनाएं.

मंगलवार, 28 अगस्त 2018

परेशान न हाें अपने हाइपर एक्टिव बच्चे से- डा. अनुजा भट्ट

हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें
 बहुत ज्यादा बोलने वाला, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने वाला, काफी शरारती और जिद्दी  बच्चों को हाइपर एक्टिव कहा जाता है। अभिभावक बच्चे को कंट्रोल में करने के लिए अक्सर डांट-फटकार व मारपीट का सहारा लेते हैं। इससे आपके बच्चे में नकारात्मक सोच आ जाती है और वह पहले से भी ज्यादा गलत व्यवहार करने लगता है। सवाल उठता है कि आखिरकार आजकल बच्चे इतने शैतान और उदंड कैसे बन रहे हैं।
 मनाेवैज्ञानिक भावना बर्मी कहती हैं, मॉडर्न लाइफस्टाइल की वजह से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। पढ़ाई से लेकर खेलकूद तक हर फील्ड में उन पर कॉम्पिटिशन में आगे निकलने का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा शहरों में एकल परिवार की वजह से भी बच्चे अकेलेपन से जूझ रहे हैं। इन सब कारणों से बच्चे गुस्सैल, चिड़चिड़े या यूं कहें कि हाइपर एक्टिव हो रहे हैं। हम अपने बच्चे की गलत आदतों की अनदेखी  कर रहे हैं यह  नहीं हाेना चाहिए। इसकी जगह उसके कारणों को जानकर उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।  अगर आपका बच्चा भी हाइपर एक्टिव है ताे इन बाताें पर अमल करें।
  •  डीप ब्रीदिंग लेना सिखाएं-उस बच्चे को डीप ब्रीदिंग सिखाई जाए। यह गहरी सांस इस तरीके से हो कि वह नाक से सांस को शरीर के अंदर ले और मुंह से छोड़े। इसका असर यह होगा कि आपको फ्रस्टेटेट बच्चे को डील करने में आसानी होगी। 
  •  बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं – अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छे से व्यवहार करे, तो जरूरी है कि उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उन्हें ज्यादा प्यार दें। इससे उन्हें अच्छा महसूस होगा। इसके अलावा बच्चे को धैर्य से रहना सिखाइए।
  • दूसरों के सामने न डांटें – अक्सर पैरेंट्स हाइपर एक्टिव बच्चे के स्वभाव को बदतमीजी मानकर बार-बार उसे दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने ही डांटने लगते हैं। लंबे समय तक ऐसा करना बच्चे की मानसिकता, आत्मविश्वास और दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ उनके व्यवहार पर नकारात्मक असर डालता है। बच्चे के आसपास ऐसा माहौल बनाएं जिससे वह अपनी हाइपर एक्टिविटी से बाहर आ सके। यदि उसे किसी काम से रोकना है, तो दूसरों के सामने डांटकर न रोकें। बेहतर है कि उसे अकेले में समझाएं।
  • बच्चे के मन का विश्लेषण करते रहें - अगर आपका बच्चा ज्यादा हाइपर एक्टिव है, तो उसके मन की स्थिति का विश्लेषण करने के लिए मनोचिकित्सक की सलाह लें। दरअसल हाइपर एक्टिव बच्चों के लक्षण एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) से काफी मिलते हैं। इस स्थिति में बच्चे के आत्मसम्मान पर भी प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा आसपास के लोगों के साथ उसके संबंध भी प्रभावित होते हैं। एडीएचडी एक दिमागी जैविक बीमारी है, जिसका इलाज दवाओं द्वारा किया जा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे के ऊपर खास ध्यान दें।
  •  प्यार और समय दें -ऐसे बच्चों को मां-बाप अपने पास बैठाकर सहलाएं। यानी उनके माथे को हाथों से दबाएं, कांधे को हल्का प्रेस करें। माता-पिता का यह टच बच्चों के प्रति बहुत सेंसेटिव होता है। यह उनके लिए रिलेक्सिंग टच होता है।   ऐसे बच्चों को कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका ये है कि आप उसे बहुत प्यार दें, इससे वह शांत हो जाएंगे। जब उनका मूड ज्यादा खराब हो तो उन्हें गले लगा लीजिए और फिर समझाइए।
  • सही से बच्चे की बात सुनें – ऐसे बच्चों की बात को सुनना बहुत जरूरी है। कई बार वह ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन जब कोई उनकी बात नहीं सुनता तो वह और हाइपर हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप उनकी बात सुनें। इससे वह शांत रहेंगे और आपकी बात भी मानेंगे। 
  • खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में रखें व्यस्त – हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें। ऐसे बच्चे को डांस या आर्ट क्लास में भी भेज सकते हैं। इससे उसकी अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा व्यय होगी और साथ ही आत्म अभिव्यक्ति और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा।
  • कुछ नया खरीदकर दें - बच्चे का मन बहलाने के लिए कुछ नई चीज खरीदकर गिफ्ट करें। नई चीज को पा कर वह दूसरी बातें भूल जाएगा और खुश रहेगा।
  • पालतू जानवर लाएं – बच्चे को जो भी पालतू जानवर अच्छा लगता है, उसके लिए वह खरीदकर ले आएं। नया दोस्त देखकर व उसके साथ खेलने में उसकी बदमाशियां कम हो जाएंगी।
  • हर गतिविधि पर रखें नजर – हाइपर एक्टिव बच्चे की हर गतिविधि पर नजर रखना जरूरी है। रूटीन से उसके स्कूल टीचर से मिलते रहें। इससे बच्चे के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी। टीचर को वजह बताते हुए उसे आगे वाली सीट पर बिठाने व समय-समय पर कुछ गिफ्ट देने का अनुरोध कर सकते हैं। इससे वह खुश रहेगा।
  • क्रिएटिव बनाएं-एक बॉक्स हमेशा अपने घर में तैयार रहना चाहिए। इस बॉक्स में क्लै आर्ट, कलर्स, पेंसिल्स या अन्य क्रिएटिविटी वाली चीजें रखना चाहिए। ताकि बच्चा इस बक्से के साथ ही लंबे समय तक बिजी रहे।
  •  रिलैक्स प्लेस पर एक्टिविटी कराएं-आपके घर में एक जगह ऐसी होनी चाहिए जिसे हम रिलैक्सेशन की जगह कह सकते हैं। यह कोई छोटी बालकनी हो सकती है, जहां आराम कुर्सी रखी हो। ध्यान रखें यह ऐसी जगह हो जहां एक्टिविटी कम से कम और रिलैक्स ज्यादा मिले। 
  •  टाइम टेबल फॉलो कराएं-ऐसे बच्चों के लिए एक टाइम टेबल को फॉलो करना बहुत जरूरी है। यह मिलिट्री रूल जैसा नहीं होगा, लेकिन उनके सोने, खाने, उठने, नहाने, खेलने का समय निर्धारित रहेगा तो उनसे डील करना आसान होगा। 
  •  शुगर और कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रखें-बच्चों की डाइट मॉनीटरिंग और उनका शुगर इनटेक कंट्रोल करना जरूरी है। यदि हम उन्हें ज्यादा स्वीट्स दे रहे हैं तो उनकी एक्टिविटी का लेवल बढ़ने लगता है। शुगर कोटेड सप्लीमेंट्स और कोल्ड ड्रिंक्स से उनको दूर रखें। 
  •  विटामिन दिखाएं असर-हाइपर एक्टिव बच्चाें के लिए 4 तरह के विटामिन बहुत असरदार हाेते हैं  विटामिन बी 3, बी 6, बी 12 और विटामिन सी। विटामिन सी  हमें रसीले फल जैसे नींबू, संतरा, माैसमी में  मिलता है। इसी तरह दूध और अंडे, मक्खन, मछली में हमें विटामिन 12 मिलता है।   मूंगफली, बादाम, अखराेट में हमें विटामिन 6 मिलता है।
  • यह भी पढ़ें https://mainaparajita.blogspot.com/2018/08/blog-post_21.html?spref=

सोमवार, 27 अगस्त 2018

जब नींद न आए....... तब पढ़िए लिविंग द हैल्दी लाइफ


स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक आहार और व्यायाम के साथ रोज रात को कम से कम सात घंटे की नींद लेना भी खासा जरूरी है। हालांकि काम के तनाव और भविष्य की चिंताओं के चलते ज्यादातर लोगों की रात का अधिकतर हिस्सा करवटें बदलने में गुजर जाता है। ब्रिटेन की मशहूर आहार विशेषज्ञ जेसिका सेपल ने इसी के मद्देनजर अपनी  किताब‘लिविंग द हेल्दी लाइफ’ में गहरी नींद के आगोश में ले जाने वाले पांच उपाय सुझाए हैं।

काम का तनाव घर साथ न ले जाएं

सेपल के मुताबिक दफ्तर में रोज कुछ नया और अनोखा करने का दबाव तनाव को जन्म देता है। हालांकि काम का तनाव दफ्तर में ही छोड़करआने में भलाई है। इसे घर साथ ले जाने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन‘कॉर्टिसोल’ और ‘एड्रिनालिन’ का स्त्राव बढ़ जाता है, जो न सिर्फ नींदमें खलल डालता है, बल्कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर से मौत का खतरा भी बढ़ाता है।

डिनर में दाल, अंडा, चिकन खाएं

प्रोटीन युक्त आहार नींद की गुणवत्ता सुधारने में कारगर माना जाता है।विभिन्न अध्ययनों में इसे स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बढ़ानेमें असरदार पाया गया है। इसलिए डिनर में दाल, अंडा, चिकन,पालक, बींस, सोया उत्पाद जरूर शामिल करें। आप चाहें तो चावलऔर चीज का सेवन भी बढ़ा सकते हैं। फैट की मौजूदगी के चलते येखाद्य वस्तुएं शरीर में सुस्ती पैदा करती हैं।

8 बजे के बाद फोन से दूरी बना लें

स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी और टैबलेट की स्क्रीन से निकलनेवाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बाधित करती है। लिहाजाबिस्तर पर जाने से एक-डेढ़ घंटे पहले ही गैजेट से दूरी बना लें। मोबाइलबंद न कर सकें तो ‘साइलेंट मोड’ पर डाल दें। यही नहीं, सोते समयफोन को पहुंच से दूर रखें, ताकि बार-बार मैसेज आने के ख्याल केचलते नींद में खलल न पैदा हो।

नहाने से तन-मन की थकान मिटेगी

बकौल सेपल, अच्छी नींद के लिए तन-मन की थकान मिटना बेहदजरूरी है। ऐसे में सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक मिलाकर स्नानकरें। अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने पढ़ें। दिल को सुकून पहुंचानेवाला धीमा संगीत सुनें। लौंग, इलायची और तुलसी से बनी मसाला चायका सेवन करें। गुनगुने दूध में दालचीनी मिलाकर पीना और बादामखाना भी बेहद फायदेमंद है।

साेने से पहले कमरे में अंधेरा कर दें 

 सोने से पहले कमरे में अंधेरा और ठंडक कर लें। पैरों को ऊपर करके दीवार पर टिकाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए लगभग 10मिनट तक इसी मुद्रा में लेटे रहें। हो सके तो तकिये पर मोगरे, गुलाब या लैवेंडर की खुशबू वाला परफ्यूम छिड़कें।

शनिवार, 25 अगस्त 2018

मेला - ममता कालिया

मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व पहुँच गईं चरनी मासी। पहले कभी उसके घर आई नहीं थीं। पर उन्होंने पता ठिकाना ढूँढ निकाला। अंकल चिप्स की छोटी-सी डायरी में उनके पोते के हाथ की टेढी-मेढी लिखावट में दर्ज था 'सत्य प्रकाश' २२७ मालवीय नगर इलाहाबाद। उनके साथ चमडे का एक बडा-सा थैला, बिस्तरबंद और कनस्तर उतरा। और उतरीं उन जैसी ही गोलमटोल उनकी सत्संगिन, प्रसन्नी।

स्टेशन से चौक के, रिक्शे वाले ने माँगे चार, मासी ने दे डाले पाँच रुपए। तीरथ पर आई हैं, किसी का दिल दुखी न हो। पुन्न कमा लें। इतनी ठंड में दो सवारी खींच कर लाया है रिक्शेवाला।

चाय पानी के बाद उनके लिए कमरे का एक कोना ठीक किया गया तो बोली 'रहने दे घन्टे भर बाद स्वामी जी के आश्रम में जाना है।'

सत्य ने कहा, ''थोडे दिन घर में रह लो मासी, वहाँ बड़ी ठंड है।''
''तीरथ करने निकली हैं, गृहस्थ विच नहीं रहना।''
''अच्छा मासी यह बताओ आप तीरथ पर क्यों निकली हो?"

''ले मैं क्या पहली बार निकली हूँ। सारे तीरथ कर डाले मैंने-हरद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, केदारनाथ, पुष्करजी, गयाजी, नासिक, उज्जैन। बस प्रयाग का यह कुम्भ रह गया था, वह भी पूरन हो जाएगा।''

''मासी आप इतने तीरथ क्यों करतीं हो?''
''ले पाप जो धोने हुए।''
भानजे की आँखों में शरारत चमकी, ''कौन से पाप आपने ने किए हैं?' सत्ते (सत्य प्रकाश) मासी से सिर्फ़ छह साल छोटा था। नानके में उसका बचपन इसी मासी को छकाते, खिझाते बीता था।

चरनी मासी हँस पडीं, एकदम स्वच्छ दाँतों वाली भोली-भाली निष्पाप हँसी। जब वे निरुत्तर होने लगती हैं तो स्वामी जी की भाषा बोलने लगती हैं, ''पाप सिर्फ़ वही नहीं होता जो जानकर किया जाय। अनजाने भी पाप हो जाता है, उसी को धोने।''

अनजाने पाप में उनके स्वामी जी के अनुसार बुरा बोलना, बुरा देखना, बुरा सुनना जैसे गांधीवादी निषेध हैं।
सत्ते की पत्नी चारू साइंस की टीचर है। उसने कहा, ''मासी आप से भी तो लोग अनजाने में कभी बुरा बोले होंगे। जैसे जीरो से जीरो कट जाता है, पाप से पाप नहीं कट सकता क्या?''
''पाप से पाप और मैल ने मैल नहीं कटता। पाप की काट पुण्य है, जैसे मैल की काट साबुन।''
''मलमल धोऊँ दाग नहीं छूटे'' जैसे भजन के बारे में आप क्या सोचती हैं?''
''छोटे मोटे तीरथ पर यह मुश्किल आती होगी, प्रयाग का महाकुम्भ तो संसार में अनोखा है। तुम गरम पानी से नहाने वाले क्या जानो।'' मासी ने आर्यां दी हट्टी के लड्डुओं का पैकेट पीपे में से निकाला और चारू के हाथ में दिया और कहा,
''तीरथ अमित कोटि सम पावन।
नाम अखिल अध नसावन।''

चारु सोचने लगी 'दसियों बरस तो मैं इन्हें जानती हूँ, जगत मासी हैं ये। हर एक के दुख में कातर, सुख में शामिल! न किसी से बैर न द्वेष, पडोस में सबसे बोलचाल, रिश्तेदारों में मिलनसार, परिवार में आदरणीय, यहाँ तक कि बहुएँ भी कभी इनकी आलोचना नहीं करतीं। ऐसी प्यारी चरनी मासी कुम्भ पर कौन से पाप धोने आई हैं कि घर की सुविधा छोड वहाँ खुले में रहेंगी।''
पर मासी नहीं मानी। सूरज डूबने से पहले चली गईं।

पेशे से पत्रकार है सत्ते मगर दोस्तियाँ उसकी हर महकमें में है। इसलिए जब एस.पी. कुम्भ ने कहा, ''कवरेज'' आपके रिपोर्टर करते रहेंगे, एक दिन खुद आकर छटा तो देख जाएँ तो सबकी बाँछें खिल गईं। अभी मेला क्षेत्र में प्रवेश भी नहीं किया था सत्या और चारू ने कि मेले का समां नजर आने लगा। सोहबतिया बाग से संगम जाने वाले मार्ग पर भगवे रंग की एम्बैसडर गाडियाँ दौड रहीं थीं। पाँच सितारा आध्यात्म पेश करने वाले, विशाल जटाजूट धारण किए साधू संत, फकीर रंग बिरंगे यात्रियों के रेले में अलग नज़र आ रहे थे। दूर से संगम तट पर असंख्य बाँस बल्ली के चंदोवे तने हुए थे। कहीं रजाई में बैठे हुए भी ठिठुर रहे थे लोग, कहीं मेले में ठंडे कपडो में बूढे, जवान, अधेड स्त्री पुरुष और बच्चे एक धुन में चले जा रहे थे। सबसे अच्छा दृश्य था किसी टोले का सड़क पार करने का उपक्रम। सब एक दूसरे की धोती कुरते का छोर पकड़ कर रेलगाडी के डिब्बों की तरह चल रहे थे।

शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

पका पपीता, प से पपीता, क्या है पपीता-चयनिका शर्मा

पपीता खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है जो शरीर को कई बीमारियों से दूर रखने का काम करते हैं। रोजाना पपीते का सेवन करने से पेट की बीमारियां दूर हो जाती है।  पपीता डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
♥विटामिन ए की कमी दूर करता है
अगर आपके शरीर में विटामिन ए की कमी है तो पपीते का सेवन इस प्रॉब्लम को दूर कर सकता है।

♥डायबिटीज में फायदेमंद
पपीता खाना डायबिटीज रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। इससे डायबिटीज कंट्रोल में रहती
है।
♥वजन को करता है कम
अगर आप भी मोटापे की समस्या से परेशान है तो रोजाना पपीते का सेवन करें।
♥इम्यून सिस्टम मजबूत बनाता है
पपीते और इसके बीजों में काफी मात्रा में विटामिन ए है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनता है।
♥कब्ज से छुटकारा
पपीते में ऐसे एंजाइम और फाइबर होते हैं, जो पाचन तंत्र को ठीक रखते है और पेट में गैस नहीं बनने देते। इससे आपको कुछ समय में ही कब्ज और पेट दर्द से छुटकारा मिल जाता है।
♥ब्रैस्ट फीडिंग में फायदेमंद
ब्रैस्ट फीडिंग करवाने वाली महिलाओं को ज्यादा न्यूट्रिशंस की जरूरत पड़ती है। ऐसे में पपीते का सेवन शरीर में एंजाइम की कमी को पूरा करके दूध बढ़ाने में मदद करता है।
♥गठिया में फायदेमंद
पपीते से बनी ड्रिंक गठिया रोग में भी फायदेमंद होता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले 2 लीटर पानी उबाल लें। इसके बाद पपीते को धोकर और इसके बीज निकालकर पानी में 5 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसमें 2 चम्‍मच ग्रीन टी की पत्‍तियां डालें और थोड़ी देर के लिए उबालें। अब इसे छानकर पीएं।
♥लीवर के लिए फायदेमंद
पपीते का सेवन लीवर के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह लीवर को मजबूती देता है। पीलिया होने से लीवर को काफी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में पपीता खाने से पीलिया के रोगियों को काफी फायदा पहुंचता है।
♥यूरिन इंफेक्शन से मुक्ति
महिलाओं को अक्सर यूरिन इंफेक्शन की समस्या हो जाती है। ऐसे में इस समस्या को दूर करने के लिए आपको पपीते का सेवन करना चाहिए। पपीता इंफेक्शन की समस्या को दूर करके बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है।

सावधानियां-पपीते में माैजूद एंटी आक्सीडेंट्स की अधिक मात्रा से कि़डनी में स्टाेेंस बढ़ जाते हैं।

पपीते में माैजूद पपाइन से खून पतला हाे सकता है इसलिए जिसकी सर्जरी हुई है वह पपीता न खाएं

इसमें फाइबर्स हाेता है जिनकाे डायरिया हुआ है वह इसे न खाएं।

गुरुवार, 23 अगस्त 2018

जिसे छूने से भी डरते थे उसे पहनते हैं अब नवाब भी- डा. अनुजा भट्ट



सियूँण, कंडली नामक पाैधा उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रो में पाया जाता है! इस पौधे को जहाँ कुमाऊ मंडल में सियूँण के नाम से जाना जाता है वही गढ़वाल में इस कंडली कहते है! इस पौधे पर हाथ लगते ही एक करंट सा लगता जैसे बिच्छू ने काटा हो ! तभी हिंदी में इसे बिच्छू घास के नाम से भी जाना जाता है!

रूरल इंडिया क्राफ्ट संस्था और उत्तरकाशी जिले के भीमतल्ला में जय नंदा उत्थान समिति हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का काम करती हैं। चमोली जिले के मंगरौली गांव में इन संस्थाओं ने बिच्छू घास के रेशे से हाफ जैकेट, शॉल, बैग, स्टॉल बनाए हैं। उद्योग विभाग के निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल कहते हैं, नेचुरल फाइबर को बढ़ावा देने के लिए सरकार व विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है।
जंगलों में उगने वाली बिच्छू घास यानी हिमालयन नेटल (स्थानीय भाषा में कंडाली) से उत्तराखंड में जैकेट, शॉल, स्टॉल, स्कॉर्फ व बैग तैयार किए जाने की खबरे आ रही हैं। चमोली व उत्तरकाशी जिले में कई समूह बिच्छू घास के तने से रेशा (फाइबर) निकाल कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं। अमेरिका, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, रूस आदि देशों को निर्यात के लिए नमूने भेजे गए हैं। इसके साथ ही जयपुर, अहमदाबाद, कोलकाता आदि राज्यों से इसकी भारी मांग आ रही है।
ऐसे तैयार होता है कपड़ा
उत्तराखंड के सभी जिलों में बिच्छू घास प्राकृतिक रूप से उगती है। तने को सूखाने के बाद मशीन में प्रोसेसिंग की जाती है। इसके बाद धागा बनता है। 3 से 5 किलो बिच्छू घास से एक किलो धागा निकलता है। इसमें प्रति मीटर 600 से 700 रुपये की लागत आती है। रेशा मुलायम होने से कपड़ा तैयार करने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। बिच्छू घास के रेशे से बनी जैकेट की कीमत 1,700 से 1,800 रुपये तक है।
नहीं मिल रहा पर्याप्त कच्चा माल
रूरल इंडिया क्राफ्ट संस्था के बचन सिंह रावत कहते हैं, बिच्छू घास की प्रदेश में व्यावसायिक खेती नहीं होती है। ऐसे में कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जबकि इन उत्पादों की भारी मांग है। मंगरौली गांव में कंडाली के रेशे से उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। देश के कई राज्यों के कारोबारियों ने ऑर्डर देने के लिए संपर्क किया है। उद्योग विभाग की ओर से जैकेट को निर्यात करने के लिए उसके नमूने विदेश भेजे गए हैं। उनका कहना है कि सरकार प्रदेश में नेचुरल फाइबर को बढ़ावा देती है, तो इससे लोगों को रोजगार मिलने की ज्यादा संभावना है। देहरादून के शेरपुर में 120 महिलाओं को संस्था की ओर से इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पराबैंगनी किरणों से बचाता है यह जैकेट
बिच्छू घास से तैयार रेशा पराबैंगनी किरणों से बचाता है। इसके रेशे से बनी जैकेट को गर्मी व सर्दी दोनों ही मौसम में पहना जा सकता है। साथ ही यह देखने में दूसरे जैकेट से आकर्षक लगता है।







बुधवार, 22 अगस्त 2018

जब आएं अचानक मेहमान क्या खिलाएंगी आप- नीरा कुमार


अकसर हर गृहिणी के समक्ष त्योहारों में यह समस्या आ जाती है कि उस ने अपने परिवार के सदस्यों के हिसाब से खाना बनाया होता है और अचानक 1-2 मेहमान आ जाते हैं. ऐसे में भोजन की मात्रा कम पड़ जाती है. मगर अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. यदि आप के समक्ष भी इस तरह की परेशानी आ जाए तो इन टिप्स को अपना कर आप अपनी समस्या से छुटकारा पा सकती हैं.

– अगर आप ने पनीर की तरी वाली सब्जी बनाई है तो थोड़े मखाने तल कर थोड़ी सी टोमैटो प्यूरी व सूखे मसालों के साथ 3-4 मिनट पकाएं और बनी सब्जी में मिला दें. बढि़या सब्जी ज्यादा मात्रा में तैयार हो जाएगी.

– फ्रोजन मटर फ्रीजर में रखे हों तो कुनकुने पानी में डालें. फिर और आलू, मंगोड़ी, पनीर आदि सब्जी में मिला दें.

– उबले आलू हों तो मसल कर किसी भी ग्रेवी वाली सब्जी में मिला दें अथवा थोड़ा दही डाल कर दही आलू बना लें. इस के अलावा बेसन व दही फेंट कर मिलाएं और कढ़ी वाला झोल तैयार कर लें.

– कढ़ी वाले झोल को यों ही सर्व कर सकती हैं या इस में उबले आलू के टुकड़े कर के

डाल दें.

– अरहर, धुली मूंग, धुली उड़द या धुली मसूर की दाल बनी है पर लगता है कम पड़ेगी, तो प्याज, टमाटर का तड़का बनाएं. उस में 2 चम्मच बेसन डाल कर भून लें, साथ ही कोई पत्तेदार सब्जी हो तो वह भी. बस दाल में तड़का लगा दें. दाल की मात्रा बढ़ जाएगी.

– दाल कोई भी हो हरे पत्तेदार साग ज्यादा मात्रा में डालना चाहें तो अदरक, हरीमिर्च व हींग का तड़का लगा कर छौंक दें. 5 मिनट में तैयार पत्तेदार सब्जी को दाल में डाल दें. साग वाली दाल तैयार हो जाएगी.

– उबले आलू कम हों तो उन्हें हाथ से अच्छी तरह मैश कर टोमेटो प्यूरी व हींगजीरे का तड़का तथा सांभर पाउडर और इमली का रस डाल कर आलू वाला सांभर तैयार कर लें. यह चावल व परांठों दोनों के साथ स्वादिष्ठ लगेगा.

– छोलों की मात्रा कम हो तो उन में कच्चा बारीक कटा टमाटर, प्याज व धनियापत्ती डाल कर मिला दें. छोलों की मात्रा बढ़ जाएगी. आलू को भी छोटेछोटे क्यूब्स में तल कर छोलों में मिला सकती हैं.

– पके चावलों की मात्रा कम हो तो खूब सारे प्याज, जीरे, टमाटर व करीपत्ता का तड़का तैयार कर चावलों में मिला दें.

– दही की मात्रा कम हो तो खूब सारा सलाद बारीक काटें और उस में दही फेंट कर डाल दें. बढि़या सब्जी वाला रायता तैयार हो जाएगा.

– यदि कुछ भी समझ में न आए तो सब से अच्छा है आटे में बेसन, अदरक लहसुन पेस्ट व मिर्च मसाले डालें और दही डाल कर गूंध लें. खस्ता पराठे अचार के साथ सर्व करें.

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

बच्चाें को सिखाएं अनुशासन- अनुजा भट्ट


शरारत करने पर पेरेंट्स बच्चों को सजा देते है और कारण पूछे जाने पर कहते है ” ऐसा करना जरुरी होता है नहीं तो बच्चे बिगड़ जाऐंगें। जबकि ऐसा नहीं है अगर आप चाहे तो बिना सजा दिए भी बच्चे से सही व्यवहार करने की उम्मीद कर सकते है ।

एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि अनुभव उम्र के साथ-साथ होता है। बच्चे के पास उतनी जानकारी नहीं होती जितनी आपके पास अनुभव से आई है इसलिए हो सकता है उन्हें नहीं पता कि किस तरह की स्थिति में किस तरह से पेश आना है ऐसे में अगर आप गुस्से में आकर उन्हें सजा देते है तो आप उन्हें यही सन्देश देते है कि जो कमजोर है और छोटे है उन्हें आदर कम देना चाहिए। बच्चे बड़ी जल्दी सीखते है और अगर इस तरह की गलतफहमी को वो सीखते है तो उनके बड़े होने पर उनका ऐसा व्यवहार आपके लिए शर्मिंदगी की वजह बन सकता है। ऐसे में आप उसे सही और गलत के बीच का फर्क बताएं और उसे सिखाएं कि किसी खास तरह की स्थिति से कैसे निपटा जाये और अगली बार बच्चा जब ये सीख लेता है तो उसे इसके लिए कुछ प्रोत्साहन दें।

सजा देने से अगर कोई सुधरता तो जेल से बाहर आने के बाद कोई भी अपराधी कुख्यात नहीं रह जाता और वो आदर्श होता। इसलिए आप इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चे को सजा देकर आप बस केवल अपना गुस्सा उस पर उतार रहे है।

अगर आप बच्चे को बात बात पर डांटते है और मारते है तो बच्चे और आपके बीच एक दीवार खड़ी हो जाती है “डर की दीवार”। यह आपके बच्चे को आपसे उसके जीवन से जुडी कुछ बातें या उसके अनुभव आपसे शेयर करने से रोकती है इसलिए हमेशा इस बात का ध्यान रखें। हो सकता है आपका बच्चा कोई ऐसी गलती करे जिसके लिए आपको बहुत बुरा लगे लेकिन फिर भी संयम बरतते हुए उसके साथ सही और गलत के बारे में खुल कर बात करें। सजा देने की जल्दबाजी की अपेक्षा आप उसे प्यार से चीजों के बीच में फर्क समझाएं और एक ऐसा रिश्ता कायम करें जिसमे अगर आपका बच्चा कुछ गलत भी करता है तो भी आपको बता पायें।

बड़ो की तरह बच्चांे को बहुत अधिक सिखाने की जरुरत नहीं होती है अगर आप थोडा स्मार्ट तरीके से उनके साथ पेश आते है तो बच्चांे में उनके आस पास के माहौल से सीखने की क्षमता हम बड़ो से कंही अधिक होती है। अगर आप उनके साथ सम्मान से पेश आते है तो वो भी ये सीखते है कि छोटों के साथ भी सम्मान से पेश आना चाहिए। ऐसे में आप बिना किसी अधिक मेहनत के जिन्दगी के कई महत्वपूर्ण पाठ उन्हें सिखा सकते हैं।


सोमवार, 20 अगस्त 2018

समय से खाएं ,बीमारी भगाएं- डा. दीपिका शर्मा


फाेटाे क्रेडिट- श्यामली बरूआ तालुकदार
मैं जब भी आप जैसे दाेस्ताें से मिलती हूं ताे  सबसे पहला सवाल करती हूं आपने खाना खा लिया.. यह उस वक्त पर निर्भर करता है कि मैं किसके बारे में बात कर रही हूं। अक्सर मैं  पाती हूं कि खाने पीने में लाेग समय का ख्याल नहीं रखते। लंच के समय  ब्रेकफास्ट और ब्रेकफास्ट के समय वह नींद में हाेते हैं। अक्सर लाेगाे का टाइमटेबिलसही से मैनेज नहीं हाेता। देर रात में साेना, शिफ्ट ड्यूटी जैसे बहुत से कारण है जिसके कारण मेरे सवाल आपने खाना खा लिया का सही जवाब नहीं मिलता।
आज बात डिनर की करती हूं। डिनर के टाइम का ध्यान रखें। रात में हल्का खाना खाना हेल्थ के लिए बेहतर होता है। आपने कभी जानने की कोशिश की है कि डिनर इतना महत्वपूर्ण क्यों है ? कई शोध में यह बात सामने आयी है कि आप कब, क्या, कितना और कैसे खाते हैं इसका अपके हेल्थ पर असर पड़ता है। कुछ शोध तो इस बात को भी कहते हैं कि खान-पान का सीधा असर इंसान के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि आप खाने में पोषक तत्व खूब खाते हैं तो वह आपके स्वास्थ्य को बेहतर रखेगा। खाने के समय का अगर सही से ध्यान न रखा जाय तो पोषक तत्व भी नुकसान पहुंचाते हैं। सुबह का ब्रेकफास्ट जहां अपको पूरे दिन की ऊर्जा देता है तो रात का डिनर दिन भर की कमियों की खाना-पूर्ति करता है। मैं आपकाे रात के डिनर के बारे में कुछ खास बातें बताती हूं।
रात में खाना खाने में अक्सर लोग लेट कर देते हैं। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो लोग रात में देर से डिनर करते हैं वो एक उम्र के बाद कई तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसलिए रात का खाना टाइम से खाना चाहिए।
ज्यादातर लोगों को देखा गया है कि रात में खाना खाते ही लोग बेड पर चले जाते हैं। एक सर्वे के मुताबिक जो लोग रात में खाना खाते ही सोने चले जाते हैं वो बहुत जल्द मोटापा के शिकार हो जाते हैं जो बाद में डायबिटीज जैसी बीमारियों के भी शिकार होते हैं।
अगर आप रात के समय ऑयली और मसालेदार खाना खाते हैं तो उससे आपका वजन बढ़ सकता है। रात के समय हल्का खाना नहीं खाने से पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है। रात को ऐसा खाना खाने से नींद भी सही से नहीं आती है और बेचैनी बनी रहती है।
रात के समय हल्का खाना खाने से ब्लड शुगर भी नियंत्रण में रहती है। कोशिश करनी चाहिए कि खाना खाने के एक-दो घंटे बाद ही सोने जाएं।
रात को हल्का खाना खाने से सुबह के समय शरीर हल्का रहता है और एनर्जी लेवल भी बना रहता है. इसके सा‍थ ही यह मूड को भी बेहतर रखने में मददगार होता है।
रात को बहुत मसालेदार और ऑयली खाना खाने वालों को अक्सर गैस और कब्ज की समस्या हो जाती है जो स्वास्थ्य संबंधी अन्य परेशानियों की वजह बनती हैं। अगर आप ऐसी किसी भी समस्या से बचना चाहते हैं तो रात को हल्का भोजन करना ही आपके लिए फायदेमंद होगा।

रविवार, 19 अगस्त 2018

गाेल्ड बनाने वाली महिला आखिर काैन है... डा. अनुजा भट्ट


भारतीय सिनेमा के इतिहास पर गौर करें तो पाएंगे कि पहले नाममात्र की कुछ महिला निर्देशक हुआ करती थीं। इनमें अपर्णा सेन और दीपा मेहता जैसी फिल्मकारों का नाम लिया जा सकता है। लेकिन आज इस लिस्ट में नई पीढ़ी की महिला फिल्मकारों की लिस्ट थोड़ी लंबी हो चुकी है। मेघना गुलजार, गाैरी शिंदे,जाेया अख्तर, काेंकणा सेन, अलंकृता श्रीवास्तव, गुरिंदर चढ्ढा केबाद ये गाेल्ड बनाने वाली महिला के बारे में आइए जानते हैं...


इन दिनाें हर जगह गाेल्ड फिल्म की चर्चा है।   एेसे में  हर काेई यह जानना चाहता है  कि आखिर गाेल्ड बनाने वाली यह महिला काैन है. इस महिला का नाम है रीमा कागती। इनका जन्म गुवाहटी, असम में हुआ था।उन्होंने मुंबई स्थित सोफिया कॉलेज से इंग्लिश लिट्रेचेर में स्नातक की डिग्री हासिल की है। साथ ही उन्होंने सोफिया कॉलेज से सोशल कम्युनिकेशन में परा-स्नातक की डिग्री ली है।
आज  रीमा कागती एक भारतीय फिल्म निर्देशक और स्क्रीनराइटर हैं। रीमा कागती ने अपने करियर की शुरुआत बतौर सहायक निर्देशक की। इस दौरान उन्होंने हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया, जिसमे फरहान अखतर(दिल चाहता है), आशुतोष गोविरकर (लगान)हनी इरानी (अरमान), मीरा नायर (वैनिटी फेयर) शामिल हैं।
  हिंदी सिनेमा में उन्हाेंने बताैर  निर्देशक फिल्म हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड से डेब्यू किया था। इसके बाद रीमा ने फिल्म तलाश निर्देशित की, इस फिल्म में मुख्य भूमिका में आमिर खान, करीना कपूर और रानी मुखर्जी नजर आयीं थी, फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। वर्ष 2016 में रीमा ने फिल्म गोल्ड पर काम करना शुरू किया। फिल्म में मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार, फरहान अख्तर, कुनाल कपूर और मौनी रॉय मुख्य भूमिका में हैं।फिल्म में खिलाड़ियों को हॉकी की ट्रेनिंग भारतीय हॉकी कप्तान संदीप सिंह द्वारा दी गयी है।





शनिवार, 18 अगस्त 2018

कहां हाे उर्मिला- प्रीति मिश्रा

स्वाति गुप्ता की पेंटिंग.
 प्रकृति और स्त्री दाेनाें ही सुंदर हैं पर समाज इनकी कद्र नहीं करता.

छोटे से कद की, उम्र यही कोई पचास से पचपन साल, चेहरे पर झुर्रियां प्रौढ़ावस्था की कहानी कह रही थीं, बालों पर सफेदी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी। पर सक्रिय इतनी कि किशोरवय भी शर्मा जाएं, कभी-कभी हम सबको ये लगता था कि क्या ये कभी थकती नहीं है, बहू के साथ घरेलू कामों में कदम से कदम मिला कर चलती थीं ।

हमने सुना था कि 7 साल की उम्र में ही वह ससुराल आ गई थी, शायद 2-3 साल की थी तभी उनकी माँ का देहावसान हो गया था, पिता ने किसी तरह से उनके हाथ पीले कर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति पा कर वैराग्य का जीवन धारण कर लिए। मात्र 7 साल की उम्र से ही उनका वो जीवन शुरू हुआ जो इस समय में 25 साल में भी जल्दी लगता है। संयुक्त परिवार छः भाइयों की सबसे बड़ी भाभी थी तो जिम्मेदारियां भी बड़ी थी, सब कुछ सिर झुका कर मानना और चुप रहना उनका जीवन बन चुका था, बोलती भी किसके दम पर माँ ने तो मर कर साथ छोड़ा था, पर पिता ने अपनी जिम्मेदारियों से भागना उचित समझा बिना ये सोचे कि बिटिया पर क्या गुजरेगी। उनका मायका और उनकी ससुराल सब वही थी। स्वभाव से बहुत सरल, खाना ऐसा बनाना कि होटल का शेफ भी फेल हो जाए, पर पता नहीं क्यों ससुराल में लोग उनसे कभी खुश नहीं होते, हमेशा उनकी ही बुराई सबसे पसंदीदा विषय रहता था, देवरों की शादी होती गई, देवरनिया आती गई, और उन पर काम का बोझ बढ़ता गया, अब वो उस घर में बहू ना हो कर एक नौकरानी बन कर रह गयी।

कभी तो हमें लगता था कि ये कुछ बोलती क्यों नहीं। पर उनका चुप तो बस चुप । फेस्टिवल पर अक्सर हमने देखा था कि सबको खिला कर तृप्त करने वाली जब खुद खाने बैठती तो झगड़े शुरू कर दिए जाते और वो भूखे पेट ही सो जाती या फिर बहते हुए अश्रुधारा के साथ कौर को निगल लिया जाता था, पर फिर भी चुप और सास ऐसी कि इस बात को लेकर सुनाने से बाज ना आए कि छोटी बहुओं को समय पर नाश्ता खाना दिया कि नहीं । कभी देवर तो कभी पति द्वारा हाथ उठा दिए जाने पर भी वो हमेशा की तरह चुप और हद तो तब हो गई जब देवर द्वारा डण्डे के प्रहार से रक्तरंजित हुई वो अपने ही परिवार द्वारा दोषी ठहराई गई औऱ महीनों तक किसी भी सदस्य ने उनसे बात नहीं की, एक अंधेरी कोठरी में पड़ी उनका करुण क्रदन ऐसा लग रहा था जैसे वो बड़ी कातरता से अपनी माँ को पुकार रही हों पर फिर भी चुप |

पति भी ऐसा जो कभी बीवी की तरफदारी नहीं करता क्योंकि वह पत्नी का गुलाम नहीं बनना चाहता था । ऐसा लगता था कि जैसे वो बोलना भूल चुकी हैं । दुनिया उनकी तारीफ करता सम्मान देता पर अपने परिवार में ही उपेक्षित । शायद ही उन्हें कभी बाहर जाते हुए देखा हो, क्योंकि सास को पसंद नहीं था कभी चली भी जाती तो घर में बवंडर मच जाता । बस कभी-कभी मन्दिर के सामने उन्हें रोता हुआ पाया, हो सकता है ईश्वर से माँ ना होने का दुःख बयां करती रहीं होंगी अपने आँसुओ के द्वारा ।

उनका संघर्ष उनके अपनों से था, उनके पास वो कोई नहीं था जिससे वो शिकायत करती, जिससे जी भर कर अपना दुःख बयां करती, जी भर कर रोती, ऐसा कोई हाथ नहीं था जो उनके सिर पर फेरा जाता। शायद वो चुप ही रहती जिंदगी भर अगर उनकी बच्ची के साथ इतना बुरा ना हुआ होता, एक दुर्घटना ने उनकी बेटी के पति को उससे छीन लिया शादी के साल भर के अंदर ही बेटी का विधवा हो जाना बहुत बुरा था । 1 साल के अंदर पति की मृत्यु के लिए सब उनकी बेटी को ही जिम्मेदार मानने लगे और उसे अभागिनी, पति को खा गई शब्द बाणों से बेधने लगे, जब उन्होंने देखा कि बेटी भी चुपचाप सारी बातों को सुन लेती है तो उन्होंने सोच लिया कि अब उनकी चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है । समाज के द्वारा मारे गए हर ताने का वो बहुत मजबूती से जवाब देती। एक दिन जब परिवार के लोगों ने ही बेटी पर उंगली उठाई तो उनके अंदर जमा हुआ बरसों का लावा निकल पड़ा उन्होंने अपनी बेटी से रोष भरे शब्दों में कहा- "मैं चुप इसलिए थी कि, मेरी माँ नहीं थी, तुम्हारे पास माँ है, मैंने इतना संघर्ष इसलिए किया ताकि तुम मजबूत हो, मैं डरती थी कि अगर मैं बोलूँगी तो कोई मजबूती से मेरे पीछे ना होगा, पर तेरे पीछे मैं हूँ। मैं रिश्तों के चक्रव्यूह में हमेशा अर्थहीन और महत्वहीन रही पर तू अर्थहीन नहीं रहेगी, मैं माँ ना होने के दर्द से सदैव जूझती रही हूँ पर तेरी माँ है तेरे साथ और तेरे संघर्ष में भी । बस - अब दूसरी उर्मिला नहीं, तू सबके सवालों का मुंहतोड़ जबाव दे वो मत कर जो मैंने किया, तभी मेरा संघर्ष पूर्ण होगा |

इसके बाद सबको उनके चुप रहने का आशय समझ में आया । उनका संघर्ष अपने में बेमिसाल था, और उसी में तप कर वो मजबूत हो गयी थी। अब वो बिल्कुल चुप नहीं थी क्योंकि अब उनका संघर्ष उनके लिए नहीं उनकी बेटी के लिए था ।

ऐसी ही है हमारी उर्मिला!!!

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

फूलाें सा चेहरा तेरा...-अनामिका अनूप तिवारी

प्राचीन काल में भारतीय नारी अपनी सौंदर्य को बढ़ाने और देखभाल के लिए प्रकृति पर निर्भर रहती थी, फूलों और प्रकृतिप्रदत्त चीज़ो से अपनी सौंदर्य की देखभाल करती थी प्रकृति के दिए ख़ज़ाने में ऐसे अनमोल फूल पत्तियां है जिससे आप आजमाए तो खुद को एक हसीन और स्वस्थ त्वचा की मालकिन बना सकत

गुलाब के फूल
गुलाब जल का नियमित रूप दिन में तीन से चार बार अपने चेहरे पर लगाये,पंद्रह मिनट तक रखे फिर ठंडे पानी से धो ले, अगर आप के पास किसी अच्छी कंपनी का गुलाबजल नहीं है तो गुलाब की पंखुड़ियों को साफ़ पानी में करीब तीस से चालीस मिनट तक उबाले फिर ठंडा कर के साफ़ बोतल में रखे।
गुलाब का फूल त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, ईरानी और तुर्किश औरते अपनी सौंदर्य की देखरेख के लिए पूरी तरह से गुलाब जल पर निर्भर रहती है, आप भी आजमाए ये नायाब नुस्खा।
दही

दही चेहरे को बेदाग़ बनाने के लिए सर्वोत्तम उपाय है, दही में नींबू का रस मिला कर कुछ समय इसे फ़्रिज करे और उसके बाद धीरे धीरे अपनी उँगलियों की सहायता से चेहरे और गर्दन तक मालिश करते हुए लगायें करीब पंद्रह मिनट तक ऐसे करे फिर हल्के गर्म पानी से चेहरे को धो ले।
दही में जिंक मौजूद होता है जो मुहांसों को दूर करने में सहायक होता है, दही में पाए जाने लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है दही त्वचा को डिटॉक्सिफाई करने के अलावा बढ़ती उम्र के साथ त्वचा में बदलाव, कॉम्प्लेक्शन में सुधार और टैनिंग से बचाव करती है दही का प्रयोग करने से आप त्वचा संबंधी समस्याओं से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकती है।
शहद
शहद प्रकृति का दिया एक नायाब उपहार है। शहद को नमक के साथ मिक्स कर आप एक बेहतरीन स्क्रब तैयार कर सकती है जो आपकी त्वचा में एक नयी जान डाल देगा, शहद को नींबू रस के साथ मिक्स कर के अपने चेहरे पर लगाएं और ये पैक चेहरे पर धुप से होने वाली टैनिंग, रूखापन को दूर कर चेहरे पर एक खूबसूरत निखार ले आता है।

शहद, नींबू रस, बेसन और हल्दी को एक साथ मिक्स कर फेसपैक तैयार करे, सूखने तक चेहरे पर लगाये फिर ठन्डे पानी से धो ले हफ़्ते में दो से तीन बार ये प्रयोग करे। यह पैक चेहरे पर निखार तो लाएगा ही चेहरे के दाग धब्बों को भी दूर करता है।

ऑर्गेन ऑइल

ऑर्गेन ऑइल को हर रोज़ सुबह नहाने से पहले पांच मिनट मसाज़ करते हुए चेहरे पर लगाये फिर गर्म तौलिये को चेहरे पर रखें तौलिया जब ठंडा होने लगे तो हलके हाथों से चेहरे पर दबाव बनाते हुए हटायें और कुछ समय पश्चात नहाये।
ऑइल लगाते समय ये जांच आवश्यक है कि आप की त्वचा बहुत ज्यादा ऑइली ना हो।
ऑर्गेन ऑइल मार्केट में उपलब्ध हैं अगर आप को नहीं मिल रहा तो आप इसे घर पर तैयार कर सकती है।
एक जार में ऑरिगेनो की पत्तियां को बारीक़ काट कर या कूट कर डाले उसमे अपनी त्वचा के अनुकूल ऑलिव या बादाम का तेल डालें फिर जार को गर्म पानी के अंदर डाले, जिससे से तेल गर्म हो जाए, गर्म पानी से जार को निकाल ले दो तीन हफ्ते इस मिक्सचर को धुप में रखे फिर तेल को एक साफ़ जार में छान कर ठन्डे जगह पर रखे।
ये ऑइल प्रमुख रूप से आप की त्वचा से मुहांसे, कालापन, दाग धब्बे, असमय पड़ी झुर्रियों को दूर करता है।
प्राचीन काल में ग्रीक औरते ये ऑइल नियमित रूप से अपने चेहरे लगाती थी।
ये ऑइल सिर्फ चेहरे को ही एक जान नहीं देता बल्कि आप के बालों की समस्याएं जैसे बाल टूटने और डैंड्रफ की परेशानी से भी बचाता है।

लैवेंडर
लैवेंडर के फूल त्वचा और बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं, लैवेंडर वाटर को चेहरे पर नियमित रूप से लगाने से मुहांसे तो दूर होते ही है साथ ही आप की त्वचा चमकदार, उजली और झुर्रियों को दूर करने का सबसे कारगर साबित होगी।आप को यहाँ लैवेंडर वाटर बनाने की आसान विधि बताते है।
मुट्ठी भर लैवेंडर के फूलों को सौ मिलीलीटर पानी में करीब दो से ढाई घंटे तक मध्यम आंच पर उबालें फिर उसे छान कर साफ़ जार में ठंडी जगह पर रखे।
लैवेंडर के सूखे फूल बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है लेकिन अच्छा होगा की आप ये फूल अपने घर एक छोटे गमले में उगाये इससे आप को ताजे फूल घर में ही मिल जाएंगे।

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

किवी खाकर ताे देखिए- डा. ईशी खाेसला


किवी फल का नाम न्यू ज़ीलैंड के किवी बर्ड के नाम पर रखा गया है, क्योंकि दोनों छोटे, भूरे और फ़र वाले हैं। यह फल सुनहरे रंग का भी होता है, जिसका छिलका चिकना और ब्रांज कलर का होता है। गोल्डेन किवी मीठा और ख़ुशबूदार होता है। न्यूजीलैंड की कंपनी जेस्प्री पूरे विश्व में किवी की आपूर्ति के लिए जानी जाती है. 1997 में स्थापित हुई जेस्प्री अब तक साठ देशों में न्यूजीलैंड का यह राष्ट्रीय फल उपलब्ध करा चुकी है। किवी में विटामिन सी, पोटेशियम, फॉलिक एसिड, विटामिन ई, डायट्री फाइबर, केरोटेनॉयड, लो ग्लाएसेमिक इंडेक्स, लो फैट और दूसरे फलों के अनुपात में एंटी ऑक्सीडेंट्‌स ज़्यादा होते हैं।
डॉ. ईशी खोसला के अनुसार भारतीय जीवनशैली में बदलाव आने की वज़ह से लोगों में डिसऑर्डर वाले रोगों जैसे मधुमेह एवं हाई ब्लडप्रेशर आदि का खतरा बढ़ गया है. इससे बचने के लिए लोग खानपान के प्रति सतर्क हो गए हैं। इसके लिए वे उन खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिनमें कैलोरी कम होती है। किवी ऐसा ही फल है. इसमें संतुलित मात्रा में पौष्टिकता है।
1. एंजाइम्स द्वारा पाचन क्रिया में सुधार

किवी फ्रूट में एक्टिनिडेन, एक प्रोटीन घोलने वाला एंजाइम होता है जो भोजन पचाने में मदद करता है। जिस तरह पपीते में पैपेन और अन्नानास में ब्रोमीलेन होता है।

2. ब्लड प्रेशर नियंत्रण

किवी में मौजूद पोटैशियम का उच्च स्तर इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है। यह सोडियम के विपरीत काम करता है।

3. डीएनए को क्षति से बचाए

कोलिंस, होर्स्का और हॉटेन के अध्ययन द्वारा पता चला है, किवी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स का अनोखा तालमेल डीएनए कोशिका को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है। कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह कैंसर से भी बचाता है।

4. इम्यूनिटी बढ़ाए

किवी में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं।

5. वज़न घटाने में मददगार

किवी में कम ग्लाइसीमिक इंडेक्स और हाइ फ़ाइबर कंटेंट होता है। इस वजह से इंसुलिन रश नहीं होता और शरीर में चर्बी नहीं जमा हो पाती है।

6. पाचन क्रिया सुधारे किवी फल में प्रचुर मात्रा में रेशे होते हैं। इसे खाने से कब्ज़ और दूसरी आंत संबंधी समस्याएं नहीं हो पाती हैं।

7. टॉक्सिंस ख़त्म करे किवी फल का फ़ज़्ज़ी फ़ाइबर आंत से टॉक्सिंस को बांधकर बाहर निकाल देते हैं।

8. दिल की बीमारियों से बचाव

हर दिन 2 से 3 किवी खाने से ब्लड क्लाटिंग 18% और ट्राइग्लिस्राइड्स 15% कम हो जाती है। बहुत से लोग ब्लड क्लाटिंग कम करने के लिए एस्पिरिन का प्रयोग करते हैं, जिसके कारण आंत में जलन और ब्लीडिंग हो सकती है। किवी फल में एंटी क्लाटिंग गुण होते हैं और कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होता है। साथ साथ बहुत से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

9. डायबेटिक मरीज़ के लिए उत्तम

किवी में ग्लाइसीमिक इंडेक्स कम होने से ब्लड शुगर जल्दी नहीं बढ़ता है। इसका ग्लासीमिक लोड 4 है, जिस कारण यह मधुमेह के रोगियों के लिए सुरक्षित है।

10. आंखों की रोशनी बढ़ाए बुढ़ापे की ओर अग्रसर व्यक्तियों में मैकुलर डीजेनेरेशन के कारण आंखों की रोशनी कम होने लगती है। एक लाख से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन के अनुसर 3 किवी रोज़ खाने से मैकुलर डीजेनेरेशन 30% कम हो जाता है। किवी में लूटीन और ज़ियाज़ैंथिन होता है, जो आंखों के रोग खत्म करता है।

11. एल्कलाइन बैलेंस बनाए

किवी में प्रचुर एल्कलाइन तत्व होते हैं, जो मिनिरल्स को बढ़ाकर अतिरिक्त एसिड को शरीर में कम करता है। एल्कलाइन और एसिड के संतुलन से जवां त्वचा, अच्छी नींद और शारीरिक ऊर्जा मिलती है। सर्दी से सुरक्षा, गठिया से बचाव और ऑस्टियोपोरोसिस में कमी होती है।

12. त्वचा की रक्षा किवी में विटामिन ई और त्वचा का विघटन कम करने वाला एंटीऑक्सीडेंट होता है।

13. लाजवाब स्वाद

किवी का स्वाद बेहद लाजवाब होता है। बच्चों को भी इसका स्वाद बहुत पसंद होता है।

14. पेस्टिसाइड्स से सुरक्षित

किवी फ्रूट पेस्टिसाइड रेज़िड्यूज़ से सुरक्षित होता है। इसलिए इसे सुरक्षित फल की श्रेणी में रखा गया है।

सावधानी
किवी फ्रूट में ओक्ज़लेट होता है। अगर शरीर के द्रव्य में यह ज़्यादा जमा हो जाए तो उसे क्रिस्टलाइज़ कर सकता है और हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है। जिनको किडनी और गाल्ब्लैडर की समस्या हो, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
किवी में लैटेक्स-फ्रूट एलर्जी सिंड्रोम वाला एंजाइम होता है। जिसे लैटेक्स एलर्जी हो, उसे किवी से भी एलर्जी होगी। एथलीन गैस से पका हुआ फल ऑर्गैनिक रूप से पके फल की तुलना में ज़्यादा एलर्जिक हो सकता है। इसे कुक करके खाने से एंजाइम का असर ख़त्म हो जाता है।

बुधवार, 15 अगस्त 2018

आजादी अभी अधूरी है -अटल बिहारी वाजपेयी



पन्द्रह अगस्त का दिन कहता - आज़ादी अभी अधूरी है।

सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥


जिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आई।

वे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई॥


कलकत्ते के फुटपाथों पर जो आंधी-पानी सहते हैं।

उनसे पूछो, पन्द्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैं॥


हिन्दू के नाते उनका दुख सुनते यदि तुम्हें लाज आती।

तो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जाती॥


इंसान जहाँ बेचा जाता, ईमान ख़रीदा जाता है।

इस्लाम सिसकियाँ भरता है,डालर मन में मुस्काता है॥


भूखों को गोली नंगों को हथियार पिन्हाए जाते हैं।

सूखे कण्ठों से जेहादी नारे लगवाए जाते हैं॥


लाहौर, कराची, ढाका पर मातम की है काली छाया।

पख़्तूनों पर, गिलगित पर है ग़मगीन ग़ुलामी का साया॥


बस इसीलिए तो कहता हूँ आज़ादी अभी अधूरी है।

कैसे उल्लास मनाऊँ मैं? थोड़े दिन की मजबूरी है॥


दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएँगे।

गिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएँगे॥


उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करें।

जो पाया उसमें खो न जाएँ, जो खोया उसका ध्यान करें॥

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

हँसिए और हँसाइए- डा. हरीश भल्ला

क्या आपको मालूम है कि बहुत सी बीमारियों का निदान स्वयं आपके पास है जिनका प्रयोग करने से जहां एक ओर आप गंभीर बीमारी से बच सकते हैं वहीं दूसरी ओर व्यर्थ की दौड़-भाग, मानसिक तनाव से भी मुक्ति पा सकते हैं। हँसना एक प्राकृतिक दवा है।

हँसना एक मनोभाव है, ठीक वैसे ही जैसे रोना। मनुष्य जन्म लेने के बाद इन भावों को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। चिकित्सकीय दृष्टिकोण से हँसना क्या है?

मनोभाव के साथ-साथ हँसना एक यौगिक प्रक्रिया है जिसमंे मनुष्य के शरीर ओर मन दोनों का व्यायाम होता है। हँसी के दो चरण होते हैं। उतार ओर चढ़ाव। ठहाका मारकर हंसना चढ़ाव है और फिर धीरे-धीरे हंसना संतुलित हो जाना है इसे ही उतार कहा जाता है। यह प्रकिया रोज की जिंदगीं में आए तनाव को कम करती है। हंसने से केटेकोलेमेनाइज एड्रर्लिन और नान एड्रर्लिन का रिसाव होता है जिससे ठीक होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और आप स्वयं को स्वस्थ अनुभव करते हैं।

हँसने से क्या लाभ हो सकता है?

चिकित्सकीय विज्ञान में हुए अनुसंधानों से यह सिद्ध हो चुका है कि हँसने का प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है। हँसी एक तरह की दर्द निवारक दवा है। लेकिन यह योग क्रिया के माध्यम से प्रयोग की जाती है। हँसने की इस प्रक्रिया से ब्लडप्रेशर, दिल की बीमारी, डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, कमर का दर्द, मासंपेशियों का दर्द ठीक हो जाता है। इसके अतिरिक्त तनाव, उदासी और उतेजना को कम करने में भी यह सहायक सिद्ध हुआ है।

आपने बताया कि हंसने से जोड़ों का दर्द आदि ठीक हो जाता है। लेकिन यह कैसे संभव हैं?हंसी एक दर्द निवारक दवा है। हँसते समय हमारे शरीर से दो न्यूरो पेप्टीडाइज उनडारफिन और उनकेलेफिन नामक पदार्थ निकलते हैं जिससे शरीर में स्वयं ही दर्द कम हो जाता हे। जब हम हँसते हैं तो खून का संचरण तेज हो जाता है जिससे दर्द भी कम महसूस होता है। यदि आप 10 मिनट तक खुल कर हँसे तो उसका असर दो घंटे तक आपके शरीर में रहता है और बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधी शक्ति पैदा हो जाती है। 100 बार ठहाका मार कर हंसी 10 मिनट की तेज दौड़ के बराबर होती है। हंसने से पुरानी बीमारियों जैसे खांसीं, जुकाम, गठिया, एलर्जी आदि भी ठीक होती देखी गई है।

हँसने के लिए कैसा वातावरण होना चाहिए?यह प्रश्न स्वयं में महत्वपूर्ण हैं। हँसना तभी संभव है जब वातावरण भी वैसा ही हो। हँसना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, हर बात में या हर समय हँसी नहीं आ सकती। हँसी भीतर से पैदा होती है पर यहां जिस हँसने की बात हम कर रहे हैं वह एक तरह का योग है। ठीक वैसे ही जैसे दौड़ना, टहलना आदि। अतः यहां हँसना एक यौगिक क्रिया की तरह है जिसमें हम अपने दोनों हाथ ऊपर ले जाते हैं और फिर हँसत हैंै धीरे-धीरे हंसी की आवृति को कम करते हुए हम अपने दोनों हाथ नीचे ले आते हैं। जब हम व्यायाम करें तो हवा शुद्व होनी चाहिए ताकि हमारे फेफड़ों में आक्सीजन की मात्रा बढें़ और शुद्व रक्त संचार हो।

बीमारियों के निदान के अतिरिक्त व्यक्ति को अन्य क्या लाभ हो सकते हैं?यदि हम प्रतिदिन हँसे तो एकाग्रता बढ़ सकती है। साथ ही कार्य करने की शक्ति में भी गुणात्मक परिवर्तन होता है जिससे वह कम समय में अधिक काम कर सकता है साथ ही उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। दम्पति यदि मिलकर हँसें तो परिवार में जहां हँसी-खुशी का वातावरण होगा वहीं उसके संबंध भी मधुर होंगें। लेकिन यदि वे एक दूसरे की कमियों पर हँसेंगे तो माहौल तनावपूर्ण होगा और संबंध कटु बन जाएंगे।

आपकी दृष्टि में क्या ऐसी संस्थाएं हैं जो इस तरह के योगासन कराते हैं?जिस तरह महानगरों में ’हेल्थ क्लब’ या लाफटर क्लब होते हैं। विदेशों में तो इनकी संख्या काफी है पर भारत में यह अपेक्षाकृत कम हैं। लोगों का ध्यान अब इस ओर जा रहा हैं। धीरे-धीरे यहां भी इस तरह के केन्द्र विकसित हो जाएंगे। पश्चिमी देशों में तो प्रत्येक अस्पताल में एक लाफटर क्लब चलाया जाता है जहां चुटकले, कार्टून फिल्मों, पुस्तकों आदि के माध्यम से हँसाया जाता है।

क्या आप मानते हैं कि अब हँसनेे के लिए भी लाफ्टर क्लब जाया जाए।मैंने ऐसा कब कहा कि आप हँसने के लिए लाफ्टर क्लब का इंतजार कीजिए। भारत में इन सब की कोई जरुरत नहीं हैं। ऋषि मुनियों के समय से ही हँसने को एक दवा के रुप में मान्यता मिली है जो व्यक्ति को हँसाने का कार्य करता था उसे विदूषक कहा जाता था। उसके पहनावे, हरकतों से व्यक्ति बिना हँसे नहीं रह पाता था। यह भी एक तरह की कला थी। प्राचीन काल के कोई भी नाटक आप पढें़ उसमें विदूषक का पात्र अवश्य होता था। फिल्मों में यही किरदार जोकर कहलाता है। हँसी हमारे जीवन में शामिल है। कभी हम स्वयं की मूर्खता पर हँसते हैं। अतः हँसने के लिए लाफ्टर क्लब जाना भी एक हँसी का मुहावरा हो सकता है। यह याद रखें कि जब आप हँसे तो दिल खोलकर हँसे, आपकी हँसी गूंजनी चाहिए। सिर्फ मुस्कुरा कर काम नहीं चलेगा। अब वह जमाना गया जब खुल कर हँसना अभद्रता माना जाता था। आज की दुनिया में संस्कार भी वैज्ञानिक होने चाहिए।
दंपति की समस्याएं डा. हरीश भल्ला, संपादन- डा. अनुजा भट्ट
 प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक से

सोमवार, 13 अगस्त 2018

डायबिटीज काे मैनेज करने के आसान उपाय-डा. दीपिका शर्मा



डायबिटीज के रोगी को एक दिन में कम से कम चार से पांच सर्विंग मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिये। डायबिटीज के रोगी को जूस का सेवन नहीं करना चाहिये, इसकी जगह वे सूप का सेवन नियमित तौर पर कर सकते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि जूस पीने से शुगर का स्तर बढ़ता है और ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स भी बढ़ जाती है। तो हर डायबिटीज रोगी के लिये जरूरी है कि वो हर दिन मौसमी फल और सब्जियों की पांच सर्विंग ले। लेकिन डायबिटीज में कुछ फल जैसे आम, अंगूर, अनार व केला आदि का सेवन करने से ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ता है। डायबिटीज रोगी सेब, संतरा, पपीता व अमरूद आदि का सेवन कर सकते हैं। साथ ही सलाद (प्याज, ककड़ी, मूली व खीरा आदि) अधिक खाना चाहिये। डायबिटीज रोगी को अन्न थोड़ा कम ही खाना चाहिये। डायबिटीज में कुछ हरी सब्जियां जैसे, करेला (जूस भी), लोकी (जूस भी) व जामुन आदि का सेवन करना चाहिये। इनके सेवन से न सिर्फ शुगर का स्तर सामान्य होता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बनता है। ज़मीन से निकने वाली सब्जियां, जैसे आलू, शकरकंद, अरबी, जिमीकंद व गाजर आदि के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर अचानक बढ़ जाता है, इसलिये इनका कम से कम सेवन करना चाहिये।


वजन के हिसाब से डायट


डायबिटीज के मरीज के लिए अपना वजन काबू में रखना बेहद जरूरी होता है। अगर आपका वजन अधिक है, तो आपको उसी हिसाब से अपनी कैलोरी में कटौती कर देनी च‍ाहिए। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि आपके रोजाना के आहार का चालीस से साठ फीसदी पोषण कार्बोहाइड्रेट से हो। आपको गेहूं के साथ ज्वार, बाजरा और चने का आटा मिलाकर खाना चाहिए। इसके साथ ही चीनी का सेवन कम करें। सब्जियों का सेवन अधिक करें। स्टार्ची सब्जियों का सेवन न करें।


घरेलू उपाय


अगर आप डायबिटीज पर काबू पाना चाहते हैं तो अपनी दवा और डॉक्‍टर की सलाह के साथ-साथ आप कुछ घरेलू उपायों को भी अपना सकते हैं। यह घरेलू उपाय आपकी डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। लेकिन सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्‍यान बहुत जरूरी है। इसलिए लेने पर दिन में 3 बार भरपेट खाने की बजाय हर 2-3 घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें। अपने आहार में फाइबर युक्‍त चीजों को बढ़ा दें। हरी सब्जियां, फलों, सलाद और अंकुरित अनाज में फाइबर बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा करेले के जूस को अपने आहार में शामिल करें। मेथी के बीज का सेवन करें


डा. दीपिका शर्मा अपाेलाे  फेमिली क्लीनिक नौएडा, उत्तरप्रदेश, सेक्टर 110 में  फेमिली फिजिशियन हैं।
 सेहत से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के फेसबुक पेज में कर सकते हैं। अपनी सेहत संबंधी समस्या के लिए आप हमें मेल भी कर सकते हैं-
mainaparajita@gmail.com



रविवार, 12 अगस्त 2018

फन्ने खां ने उठाया बॉडी शेमिंग पर सवाल- डा. अनुजा भट्ट

फन्ने खां  फिल्म अपनी लचर कथा और बिखरती पटकथा के कारण आज के प्रासंगिक सवालाें को सही ढ़ंग से नहीं उठा पाई। कहानी का आइडिया अच्छा था। बॉडी शेमिंग खासकर महिलाआें के लिए एक अहम सवाल है। यह आपकी प्रतिभा काे बाहर निकलने का माैका नहीं देता। समाज  न उनकाे सुंदर मानने काे तैयार है और न  प्रतिभावान। स्कूल हाे या कालेज,घर परिवार हाे या अॉफिस या बाजार। हर जगह स्वागत करती हैं ताे फब्बितयां। जाे उनके आत्मविश्वास काे चूर चूर कर  देती है। इस फिल्म में लता काे भी इसी तरह की सामाजिक विसंगतियाें का सामना करता पड़ता है और वह कभी बहुत इमाेशनल ताे कभी बहुत जिद्दी और बदतमीज हाे जाती है। अपने पिता के  प्रति उसका रूखा व्यवहार आज की नई पीढ़ी के बच्चाें का एेसा अक्स पेश करता है जिसे सही नहीं ठहराया जा सकता। जाे पिता हर समय उसके लिए सपने देखता है और चाहता है  कि उसे उसकी मंजिल मिले एेसे पिता के लिए उसका व्यवहार ठीक नहीं। वह सिर्फ अपने लिए जीती नजर आती है। मां के साथ ट्यूनिंग है पर वह भी एकदम सतही...
 फिल्में संदेश देती हैं एेसे में लता का संदेश एक रूकावट पैदा करता है। आज के दाैर में हाे सकता है यह किसी काे न खटका हाे पर मुझे जरूर खटका। मां पिता के साथ बच्चाें के रिश्ते दाेस्ताना हाेेने के पक्ष में मैं भी हूं पर माता पिता की अवहेलना और उनकी मेहनत काे नजर अंदाज करने के पक्ष में कतई नहीं।  अभिनय की दृष्टि से लता के रूप में पिहू का अभिनय जानदार है। फेक्ट्री में अपहरण की गई बेबी उर्फ एश्वर्या वाला  दृश्य बहुत लंबा है  इस वजह से कहानी के बहुत सारे डिटेल्स खतम हाे जाते हैं। मेहनत के बल पर सबकुछ मिल सकता है बेबी का यह मैसेज भी सार्थक नहीं हाेता। क्याेंकि लता जाे मुकाम हासिल करती है वह मेहनत से नहीं बल्कि जुगाड़ से करती है।  फिल्म में अगर लता काे मेहनत के बल पर अपना लक्ष्य हासिल करते हुए दिखाया जाता  ताे यह एक अच्छी कहानी हाेती।  आजकल हर बच्चा पढ़ाई के साथ साथ कुछ और भी सीख रहा है। उसके सपनाें में कई सेलीब्रिटी है। जैसा वह बनना चाहते हैं। एेसे बच्चाें के लिए यह एक निराशाजनक बात है।
 और अगर इसे कामेडी फिल्म की तरह देखा जाए ताे यह एक बच्ची का मजाक उड़ाती है उसके माेटेपर पर हँसती है। वह लड़की जिसमें प्रतिभा है और सपना भी है अपने पिता की हरकताें पर बेसाख्ता राेना चाहती है, माइक ताेड़कर फैंक देना चाहती है। पर वह चालाक भी है माैके का  फायदा उठाना आता है उसे ,क्याेंकि बाजार भी ताे यही कर रहा है।
 फिर भी फिल्म निराश नहीं करती। कम से कम सवाल ताे उठाती है। 

शनिवार, 11 अगस्त 2018

संध्या का सूरज- उर्मिल सत्यभूषण

उर्मिल सत्यभूषण
 महामाया ने दो दिन पहले सूचित किया था।
‘‘वरिष्ठ नागरिक गृह में आपको सिटी मॉम्ज के साथ मातृदिवस मनाने जाना है। आप चलेंगी न आपको बहुत अच्छा लगेगा।
महामाया ने कहा था : ‘सिटी मॉम्ज घरेलू महिलाओं का एक एन जी ओ है। ये होममेकरज हैं पर घर में ही कुछ न कुछ उद्यम चला रखे हैं। घर भी उपेक्षित नहीं होता और महिलाओं की आर्थिक और बौद्विक जरूरतें भी पूरी होती रहती हैं। अपने पारिवारिक कार्यों के साथ साथ समाजोपयोगी प्रोजेक्ट भी हाथ में लेती रहती हैं।
श्रीदेवी के मन में वरिष्ठगृह को देखने की उत्सुकता भी जगी और सिटी मॉम्ज एन जी ओ के सदस्यों से मिलने की इच्छा भी। समय के साथ जरूरतें बदलती हैं तो सामाजिक ढांचे भी अपना रूप बदलने लगते हैं। आज के बुजुर्गों की समस्या बहुत गंभीर रूप लेती जा रही है। संताने अपने काम की भागदौड़ के कारण वृ़द्ध मां बाप को अकेले छोड़ते जा रहे हैं। वृद्ध लोग अपनी उम्र की आधियों, व्याधियों से ग्रसित अकेले रह गये हैं बहुत निरीह और असहाय सी जिंदगी हो गई है उनकी। श्रीदेवी कब से ऐसे सांध्यगृहों की खोज में लगी हैं : उनकी जरूरत शिद्दत से महसूस हो रही है।
ठीक समय पर महामाया लेने पहुंची। वह तैयार बैठी थी कुछ किताबें उठाई और चल दी।
‘‘आंटी, थोड़ी देर हो गई है हमें पर वो लोग बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं। आपका इन्तजार हो रहा है।
वहां प्रोग्राम क्या है?
‘वहां मदरज डे मनाना हैं ताकि वहां के रहने वालों को भी अपने होने का एहसास हो। आपका काव्यपाठ होगा, उनको प्रेरणा मिलेगी आंटी अभी दो साल पहले ही दो युवा माताओं की पहल पर यह एन जी ओ शुरू किया गया हैैै।
मैं भी उस एन जी ओ का हिस्सा हूं।
‘आप क्या क्या करते हैं उसमें? श्रीदेवी ने पूछा।
तो महामाया बोली : यह घरेलू महिलाओं की सार्थक पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि औरतें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनें। उनके व्यक्त्तिव का विकास हो और सशक्त महिलायें अच्छे समाज का भी निर्माण कर सकें। अब समय के साथ परिवार की चूलें हिल चुकी हैं। काम दौड़भाग में परिवार टूटते जा रहे हैं। बच्चों का पालनपोषण सही नहीं हो पाता। पढ़ी लिखी महिलाओं ने इस बारे में अच्छी तरह सोचा है कि परिवार, व्यक्ति समाज किस तरह से संतुलित किया जाये तो मातृशक्ति ने एक सार्थक पहल की है।
‘श्रीदेवी, सुनकर खुश हुई। वाह महामाया बड़ा अच्छा सोचा है शहरी माताओं ने। मेरी जैसी ग्रैंड मॉम भी आपके मिशन में शामिल होना चाहती हैं।
‘ओ श्योर - आंटी - इसीलिए तो हमने आपको चुना है हमें गाइडकरने के लिए।
‘आधे घंटे में वे लोग वरिष्ट्ठ गृह पहुंच गये।
शहर की सम्पन्न कालोनी में था गृह - सारी सुख सुविधाओं और वाटिकाओं की हरीतिमा से घिरा हुआ। मंदिर का बहुत बड़ा हाल भी था। जिसमे सत्संग के अलावा कई प्रकार के कार्यक्रम होते रहते थे।
लिफ्ट से वे लोग ऊपर हाल में पहुंचे। वहां पर 20-25 लोग सीनियर सिटीजन थे और 15 या 20 सिटी मॉम्ज की सदस्यायें थी। श्रीदेवी जी का परिचय कराया गया। सबने खड़े होकर तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। सब लोग बड़े उत्साह और उमंग में दिखाई दे रहे थे। श्रीदेवी जी ने काव्यपाठ आरम्भ किया तो सभी मंत्रमुग्ध हो उठे। सभी कवितायें उमंग और जीवन्तता से भरी थीं। बाद में वरिष्ट्ठ लोगों ने भी अपने अपने अनुभव शेयर किये। सबने कुछ न कुछ सुनाया और अपना अपना परिचय दिया। उन युवा उत्साही मातृशक्तियों ने नृत्य आरम्भ किया तो वे लोग भी झूम झूम कर नाचने लगी। बाद में जलपान कराया गया और हरेक व्यक्ति का तोहफों से अभिनंदन किया गया। श्रीदेवी इस कार्यक्रम से बड़ी प्रफुल्लित थीं। उसने बुजुर्गों के कमरों का निरिक्षण किया। सब के पास अपना अपना खरीदा हुआ एक कमरा था शौचालय सहित। कमरे अच्छे हवादार, रोशन और फर्नीचर से लैस थे। खाना आदि सब फ्री का। रैम्प भी बने हुए थे। काफी अच्छा प्रबंध था। श्रीदेवी बहुत समय से सोच रही थी अपने लिए भी कमरा लेने का ताकि वहां आकर यहां लिख पढ़ सके। जब मन हुआ घर वालों से मिल भी आए।
उसने अपने विचार सिटी मॉम्ज के आगे भी रखे कि ये सांध्य गृहों का विस्तार किया जाए और प्रचार भी। क्योंकि समय की जरूरत है ये पर सभी समाजजसेवा में लगी संस्थायें समय समय पर इनसे मिलने आये। इनके साथ मिलकर कार्यक्रम करें।
ऐसा चल रहा है आंटी -  बहुत से आयोजन यहां होते रहते हैं जिनमें ये लोग भी शामिल होते हैं। दो दिन बाद यहां पर सामूहिक विवाह का कार्यक्रम है जिसमें हमें शामिल होना है। एक महिला ने कहा। उसन कहा ‘दीदी‘ आप चाहो तो कभी आकर रह भी सकते हैं हमारे साथ। कमरे कई खाली रहते हैं जब कई लोग अपने घर चले जाते हैं मिलने।
एक बुजुर्ग ने कहा - मैडम, हमें अपनी पुस्तकें दे जाएं यहां की लाइब्रेरी अभी ठीक नहीं है।
मैं जरूर पुस्तकें लाऊंगी और लाइब्रेरी का प्रबंध भी किया जायेगा। श्रीदेवी ने सिटी मॉम्ज से इस बारे में कहा।
जाते जाते : वो लोग बोले :-
मैडम एक गीत और सुना जाओ। आपके गीत जीवन का संदेश लाये हैं। श्रीदेवी ने कहा - जरूर : यह मेरा गीत आप मेरे साथ गायें
सूखे पत्ते हैं हम तो बिखर जायेंगें
पेड़ को पर हरेपन से भर जायेंगें
जिंदगी की नदी में नहाये बहुत
हंसते गाते ही पार उतर जायेंगें
उसने जीने को दी थी सौगाते उम्र
इसके पल पल को जीवंत कर जायेंगें
हम तपे हैं उम्र भर मगर शाम को
ढलते सूरज की मानिंद बिखर जायेंगें।
छेद करती रही उर्मिला तिमिर में
रोशनी जब मिले अपने घर जायेंगें।
कवियित्री कथाकार।संस्थापक अध्यक्ष परिचय साहित्य परिषद्                                                                                                                               

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

नन्हें काे चाहिए कंफर्ट, मत बनाइए उसे स्टाइलिश-डा. अनुजा भट्ट

फाेटाे क्रेडिट- एलविन गुप्ता
मां बनने के बाद महिलाओं की जिम्मेदारियां दुगनी हाे जाती है। कई महिलाओं को इन दोनों के बीच तालमेल बैठाने में दिक्कत होती है। बच्चे के जीवन में आने के बाद मां का खाना-पीना, सोना-जागना उसकी आदतों पर निर्भर हो जाता है। मातृत्व के इस सफर काे इन टिप्स के जरिए आप आसान बना सकती हैं।

  • शिशु को कम से कम तक पांच से छह महीने तक मां का दूध जरूर दें। इसके अलावा उसे कुछ भी नहीं दें। मां का दूध बच्चे के लिए संपूर्ण आहार होता है। जब आपका शिशु छ: माह का हो जाए तब आप उसे दूध के साथ ही दलिया, खिचड़ी, चावल, फल आदि भी देना शुरू कर दें। बच्चों के नाखून बहुत जल्दी बढ़ते हैं। जिससे वे खुद को चोट पहुंचा सकते हैं साथ ही लंबे नाखूनों में गंदगी जमा होने का भी डर होता है। इसलिए समय समय पर नाखून काटते रहें।
  • गीलेपन से शिशु को इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है इसलिए समय समय पर देखते रहें कि शिशु गीले में तो नहीं सो रहा है। उसकी नैपी को बार-बार बदलें व उसकी त्वचा को सुखे मुलायम कपड़े से साफ करें।
  • शिशु को स्वच्छ रखने व बीमारियों से बचाने के लिए उसे रोज स्नान कराएं। इससे उसे नींद भी अच्छी आएगी और वो दिनभर तरोताजा महसूस करेगा। मालिश से शिशु की हड्डियां मजबूत बनती हैं साथ ही शरीर की गतिविधियां भी बढ़ती है। नहलाने से पहले शिशु की मालिश करना सबसे अच्छा है।
  • अगर आपका शिशु सरकने की कोशिश करने लगा है तो फर्श पर कोई भी नुकीली, धारदार, खुरदरी चीज नहीं रखें। बच्चा सहारा लेकर खड़ा होना सीख रहा है तो टेलीफोन या गुलदस्ते इत्यादि उसकी पहुंच से दूर रखें। बच्चे को हमेशा मुलायम व आरामदायक कपड़े पहनाएं। कई बार ऐसा होता है कि बच्चे को स्टाइलिश दिखाने के लिए माता-पिता उन्हें ऐसे कपड़े पहना देते हैं जिससे बच्चों को परेशानी होती है।
  • बच्चों को किचन से दूर रखें क्योंकि दुर्घटना होने की संभावना सबसे ज्यादा किचन में ही होती है। किचन का सारा सामान बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • कई बार बच्चों को कोई तकलीफ होने पर वे लगातार रोते रहते हैं। अक्सर ऐसा तब होता है जब बच्चे के पेट में दर्द होता है।
  • शिशु के सारे टीके समय पर लगवाएं। ये टीके बच्चों को बीमारियों से बचाते हैं।
  • बच्चों की आदत होती है कि वे जमीन से उठाकर कुछ भी मुंह में डाल लेते हैं। इसलिए घर की ठीक से सफाई करनी चाहिए।




गुरुवार, 9 अगस्त 2018

उम्र हाे गई 35 साल ताे खान पान का करें ख्याल-डा. रश्मि व्यास

उम्र बढ़ने के साथ हमारी शारीरिक क्रियाआें में भी बदलाव आने लगता है, हर उम्र में यह बदलाव अलग अलग हाेता है। अगर आपकी उम्र 35 पार कर गई हो तो  आपकाे अपने खानपान के तरीके में बदलाव लाना हाेगा। आपके लिए क्या अच्छा है, क्या बुरा यह जानना बहुत जरूरी है।
30 से 35 वर्ष के बाद शरीर की रक्त धमनियों में ना सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है बल्कि हड्डियों में कैल्शियम और खनिज की मात्रा घटने लगती हैं। आयु बढ़ने के साथ ही शरीर के मेटाबॉलिज्‍म रेट के कम होने और पाचन तंत्र के कमजोर पड़ने के साथ ही शरीर में परिवर्तन होने लगता है जिसे विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है। इसलिए 35 वर्ष के बाद ना सिर्फ उम्र के हिसाब से खाना चाहिए बल्कि कुछ आहारों से परहेज करना जरूरी हो जाता है।
30 के बाद स्वस्थ रहने के लिए वसायुक्त आहाराें से  परहेज करन में ही भलाई है। वसायुक्त आहारों के अलावा तेल और मीठे के सेवन में भी कमी लानी चाहिए। आहारों के साथ साथ अपने खाने के तरीके में भी बदलाव लाना चाहिए। एक बार में अधिक खाने की जगह थोड़ा थोड़ा करके खायें। इस उम्र से बीपी बढ़ने की समस्या हो जाती है, इसलिए कम मात्रा में नमक खाएं। आपका दिल और गुर्दे सलामत रहेंगे। ज्यादा चीनी कभी भी फायदेमंद नहीं होती इसलिए आप 35 के बाद चीनी का सेवन कम कर दें। इससे डायबीटीज का खतरा बहुत कम हो जाता है। लेबल्ड डाइट फूडखाना स्वाद में बेहतर लग सकता है लेकिन इससे दूरी बनाएं। इससे आपको कमजोरी महसूस हो सकती है।

35 की उम्र के बाद तनाव ज्यादा रहता है, ऐसे में कैफीन को चाय या कॉफी के रूप में पीना आपके लिए और घातक साबित हो सकता है।दूध वाली चाय से परहेज करना चाहिये क्योंकि इसमें कैलोरी अधिक होती हैं। ज्यादा वाइन सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे दिल और लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है।

30 की उम्र के बाद कोलेस्टेरोल कम करने का एक आसान तरीका यह है कि आप कोलेस्टेरोल युक्त आनाज न खाएं। अपने आहार में कार्ब की मात्रा कम करके आप खराब कोलेस्टेरोल को कम कर सकते हैं और अच्छे कोलेस्‍ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं। आपको अपने आहार में ब्राउन ब्रेड और ब्राउन राइस को जरूर शामिल करना चाहिए।

बुधवार, 8 अगस्त 2018

बदल रही है साेच, बदल रही है जिंदगी




सुप्रभात दाेस्ताें। बारिश की रिमझिम फुहार से आपका मन भी उल्लसित और प्रफुल्लित हाेगा, एेसी आशा है। अभी तक हमने विविध विषयाें पर लेख प्रकाशित किए। जिन विषयाें काे पढ़ने में आपने रुचि दिखाई वह हैं - हेल्थ. पेरेंटिंग, रिलेशन शिप, फैशन,और समाज में सीधा हस्तक्षेप करती कहानियां।
आपका यह चयन दर्शाता है कि आप बदलते हुए समाज की हर नब्ज काे जानना चाहते हैं। समस्या का निदान चाहते हैं। अपनी सेहत काे लेकर जागरूक हैं। फैशन के बारे में पढ़ना चाहते हैं, रिश्ताें की उधेड़बुन से निकलकर उनकाे संवारना चाहते हैं। सबसे अच्छी और रेखांकित करने वाली बात यह है कि आपने अपनी साेच भी बदली है। यह बहुत आसान नहीं हाेता है। परंपरागत ढ़ांचे काे हिलाना आसान नहीं। मुझ अच्छालगा यह जानकर कि आपने एकमत से कहा लड़कियाें काेई वस्तु नहीं जिनकाे दान दिया जाय। मुझे यह भी अच्छा लगा कि लड़कियां नहीं चाहती कि शादी के लिए उनकाे एक प्राेडक्ट की तरह पेश किया जाए और लाेग उनकाे देखें परखें पसंद ना पसंद करें। शक्ल सूरत हेंडसम जैसे शब्दाें काे परे धकेलकर उन्हाेंने साथी के चयन के लिए साेच के मिलने का समर्थन किया। शब्द बदल रहे हैं पहले कहा जाता था
आेह कितना हैंडसम है तेरा हसबैंड.. आज कहते हैं वाउ.. कितना जीनियस है तेरा हसबैंड..
इस तरह के कई बदलाव मैं देख रही हूं। पहले जब हसबैंड खाना बनाने की या चाय बनाने की ही बात करता था ताे लगता है जैसे अगर वह रसाेई में चला गया उसने बर्तन धोए ताे कितना पाप चढ़ जाएगा मन दुःखी हाे जाएगा. आज वाइफ कहती है मेरा ताे दिन बन गया, जायका बदल गया..
सचमुच जायका बदल रहा पति परमेश्वर की जगह एक साथी ने ले ली है।
आप इसी तरह मैं अपराजिता पढ़ते रहिए। हमारे इस ब्लाग काे शेयर कीजिए. क्याेंकि आपकाे अपने मित्राें की रूचि के बारे में पता है

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

पति-पत्नी अपने संबंधों में शुष्कता न आने दें-डा. हरीश भल्ला

 यदि दंपति जीवन में प्रेम की उदात्ता को महसूस करना चाहें तो उनके लिए उनको अपनी जरुरतों और बच्चों की जरुरतों के बीच संतुलन पैदा करना होगा।
संतान प्राप्ति के बाद अक्सर पति-पत्नी को यह शिकायत रहती है कि वह अपनी अंतरंग जिंदगी ठीक से नहीं बिता पाते। इसके क्या कारण है?
आप आसानी से अपनी सेक्सुअल लाइफ जी सकते हैं । यह ठीक है कि संतान के आने से जीवन में खुशियां और बदलाव आते हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आप अपनी आत्मीयता और अंतरंग व्यक्तिगत जीवन को नीरस बना दें। आपको अपने संबधों पर भी ध्यान देना चाहिए।
यह किस तरह संभव है?
ज्ीवन में प्रेम की उदातता और गहन अनुभूति शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्राप्त की जा सकती है। अधिक समस्याएं संतुलन न होने के कारण ही होती हैं। यह न भूलें कि वह प्रेमी-प्रेमिका भी हैं और पेरेंट्स भी। पति-पत्नी एक दूसरे के प्रेमी बने रहें, यह बहुत जरुरी है। प्रेम, रोमांस यह सब इंसान की जरुरतों में एक है। यह ठीक है कि यह खाने, रहने जितना महत्वपूर्ण नहीं, लेकिन उससे कम भी नहीं है। यह वह चीज है जिससे हम जिंदा रहते हैं।
पति-पत्नी को इसके लिए क्या करना चाहिए?
अक्सर पेरेंट्स बनने के बाद पति-पत्नी एक गंभीर आवरण ओढ़ लेते हैं। वह चुहुलबाजी, शरारतें या बेवकूफियां करना भूल जाते हैं। इस तरह धीरे-धीरे एक निष्क्रियता पैदा होने लगती है। सरप्राइज का गुण इस निष्क्रियता को समाप्त करने में सहायक होता है। यदि आपके पति/पत्नी काम से बाहर गए हैं और आपको मालूम हैं कि वह वहां किस होटल में ठहरे हैं तो आजकल यह सुविधा उपलब्ध है कि आप उन तक अपनी स्नेह भावना पहुंचा सकें, जैसे फोन के माध्यम सें, अथवा एजेंन्ट के माध्यम से फूल आदि भिजवा कर। इसका बहुत मादक अहसास होता है। शादी की सालगिरह, जन्मदिन आदि ऐसे मौके होते हैं जो आपको एक दूसरे का सामीप्य तो प्रदान करते ही हैं, साथ ही जीवन में आ रही नीरसता को भी दूर करते हैं। अमूनन पेरेंट्स पेरेंट्स मीटिंग में ही साथ जा पाते हैं।
क्या इसके लिए कुछ टिप्स दिए जा सकते हैं?
क्यों नहीं। सर्वप्रथम ऐसा मौहाल पैदा करें जहां बच्चों की देखभाल के साथ-साथ रोमांटिक व्यवहार भी हो। यह एक बहुत बडा सच है कि प्रत्येक दंपति को यह अहसास होता है कि अन्य दम्पतियों की तुलना मे उनका जीवन बड़ा नीरस है। वह आपस में एक दूसरे को दोषी ठहराते है जबकि वास्तव में कोई भी दम्पति ऐसे नही है जो इस तरह की समस्याओं से न गुजरें हां, एक दूसरे की कमियां निकालने से कहीं अच्छा है स्वयं की गलतियों को स्वीकार करने का साहस पैदा करें। एक दूसरे का इंतजार न करके स्वयं पहल करें जिससे नीरसता टूटे। पति-पत्नी दोनों एक दूसरे के पूरक हैं अतः अपनी इच्छा जाहिर करने में संकोच न करें। आंखों में आंखे डालकर अपने मन की बात करें। निश्चित तौर पर पत्नी/पति खुश होंगे। प्रत्येक युगल के मन में प्रेम की एक फंतासी अवश्य होती है। वह अपने कल्पना लोक में कई सपने देखते हैं लेकिन कह पाने में उसे यह डर होता है कि कहीं वह उपहास का पात्र न बन जाए। ऐसी स्थिति में दिल की बात दिल में ही रह जाती है। हो सकता है कि आपकी कल्पना को साकार करने में आपके साथी को विशेष प्रसन्नता हो और आप दोनों आनंद का अनुभव करें। शादी के बाद पति-पत्नी अपनी देह और सौंदर्य आदि पर ध्यान नहीं देते। पत्नी को लगता है कि अब किसके लिए तैयार हों जो मिलना था वह तो मिल गया। पति का भाव भी ऐसा ही होता है। यह एक गलत एप्रोच है। और यहीं से प्रारम्भ होते हैं विवाहेतर संबंध। क्योंकि आकर्षण ही वह पहली श्रेणी है जो पुरुष को बांधती है। संबंधों में आकर्षण का बहुत महत्व होता है। इसी तरह हमेशा स्वयं को चुस्त बनाए रखें। आलसी पुरुष और स्त्री किसी को पसंद नही होते। इसके साथ प्रेम के संकेत भी पति-पत्नी एक दूसरे को देते रहें। चाहे वह शरारत भरे ही क्यों न हों। जो आपके प्रेम को दर्शाएं साथ ही जिसके पीछे आमंत्रण का भाव छुपा हो। याद रहे प्रेम की ऊष्मा से ही आपके संबंध प्रगाढ हो सकते हैं।
एकल परिवारों में इस समस्या से कैसे निपटा जा सकता है?
हम आपकी बात से सहमत है कि एकल परिवारों में दंपति के सामने एक चुनौती होती है। वह पेरेंट्स भी हैं, अतः वह दायित्व भी उन्हें निभाना है। घर में और कोई नहीं होता जिसके सहारे वह बच्चों को छोड़ सकें। बच्चों को अकेला छोड़कर स्वयं रोमानी जिंदगी जीना कोई तर्कपूर्ण बात नहीं है। लेकिन हम जिस बात पर जोर दे रहे हैं, वह यह है कि पति-पत्नी पेरेंट्स का रोल माडल अपनाते हुए एक तरह से स्वयं की इच्छाओं पर अंकुश लगा देते हैं। और यह दमित इच्छाएं बच्चों के लिए खतरनाक होती हैं और स्वयं उनके लिए भी। अतः कोई ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए जिससे संबंधों में संतुलन रहे। संतुलन ही संबंधों में स्थायित्व लाता है।
दंपति की समस्याएं डा. हरीश भल्ला, संपादन- डा. अनुजा भट्ट
 प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक से

सोमवार, 6 अगस्त 2018

डिहाइड्रेशन से बचें – डा. दीपिका शर्मा


कई बार पानी की कमी से कई समस्याएं हो जाती हैं और उनमें से सबसे अधिक होने वाली समस्या है डिहाइड्रेशन, यानी पानी की कमी से अवशिष्‍ट पदार्थों का विष शरीर में फैल जाता है। कई लोग ऐसे हैं जो नहीं जानते कि एक दिन में कम से कम कितना पानी पीना चाहिए या फिर लगातार पानी पीते रहने से क्या नुकसान हो सकता है।  अगर आप भी या आपके परिवार का काेई सदस्य डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहा है ताे यह लेख  आपकी मदद कर सकता है।
शरीर में पानी की कमी से कई समस्याएं पैदा हाेती हैं,जैसे शरीर में चर्बी बढ़ना, पाचन क्रिया कमजोर होना, अंगों का ठीक प्रकार से काम न कर पाना, शरीर में विषाक्तता का बढ़ना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना इत्यादि। इतना ही नहीं जो लोग प्रतिदिन व्यायाम करते हैं उनके लिए पानी की कमी और भी अधिक नुकसानदायक हो सकती है।कई बीमारियां जैसे बुखार, उल्टी, ब्लैडर इंफैक्शन, पथरी इत्यादि होने पर शरीर में पानी की मात्रा बहुत कम हो जाती है। ऐसे में पानी की जरूरत शरीर को हर समय रहती है फिर चाहे रोगी को प्यास लगे या न लगे। कई बार लोग सिर्फ प्यास लगने पर ही पानी पीते हैं जबकि प्यास लगे न लगे दिन में आठ गिलास पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है।कुछ लोग पानी के बजाय सॉफ्ट ड्रिंक, बीयर, कॉफी, सोडा इत्यादि पीने लगते हैं लेकिन वे ये नहीं जानते बेशक ये चीजें तरल पदार्थें में शामिल होती हैं लेकिन यह न सिर्फ स्वास्थ्य की दृष्‍टि से नुकसानदायक हैं बल्कि इनके पीने के बावजूद डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। डिहाइड्रेशन से व्यक्ति के सोचने-विचारने, चीजों को संतुलित करने, रक्त संचार इत्यादि में कमी आ जाती है। इतना ही नहीं शराब पीने वाले व्यक्ति जिनको अकसर हैंगओवर हो जाता है, को भी डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। गर्मी के मौसम में और अधिक व्यायाम करने वालों या फिर जिम जाने वाले लोगों, भागदौड़ करने वाले व्यक्तियों को अकसर डिहाइड्रेशन की समस्या से गुजरना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अपने पानी पीने की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए।
कब एवं कैसा पानी पिएपानी हमेशा खाना खाने से आधा घंटा पहले या खाना खाने के एक घंटे बाद पीना चाहिए।गर्मी में बाहर से आकर तुरंत पानी न पीएं बल्कि थोड़ी देर रूककर नॉर्मल पानी पीना चाहिए।यदि आपको कब्ज की समस्या है, तो पानी में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पिएं।खाने के बीच में पानी कभी न पीएं इससे आपको खाना पचाने में मुश्किल होगी। सुबह-सुबह उठकर पानी पीना बहुत फायदेमंद रहता है।
डिहाइड्रेशन होने पर क्या करें
जब आपको डिहाइड्रेशन होने लगता है तो आपको जी मिचलाना, उल्टियां होना, जबान का सूखना, सांस सही से ना ले पाना, चिड़चिड़ापन इत्यादि समस्‍याएं होने लगती है। अगर आपको डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम हो रही हो तो तुरंत पानी में थोडा सा नमक और शक्कर मिलाकर घोल बनाऐं और पी लें। कच्चे दूध की लस्सी बनाकर पीने से भी डिहाइड्रेशन में लाभ होता है। छाछ में नमक डालकर पीने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलेगी। डिहाइडेशन होने पर नारियल का पानी पिऐं।

 डा. दीपिका शर्मा अपाेलाे  फेमिली क्लीनिक नौएडा, उत्तरप्रदेश, सेक्टर 110 में  फेमिली फिजिशियन हैं।
 सेहत से जुड़े सवाल आप हमारे मैं अपराजिता के फेसबुक पेज में कर सकते हैं। अपनी सेहत संबंधी समस्या के लिए आप हमें मेल भी कर सकते हैं-
mainaparajita@gmail.com

रविवार, 5 अगस्त 2018

सार्थक अस्तित्व मेरा- उर्मिल सत्यभूषण


राजेश्वरी अकेली रह गई हैं। श्रीवास्तव जी छोड़कर जा चुके हैं। बच्चों के साथ रहना गवारा नहीं। स्वतंत्रता हर हाल में प्यारी है। बच्चे आते जाते हैं। हिदायतों का पुलिंदा साथ में थमा जाते हैं। राजेश्वरी दूर दराज जा नहीं पाती। घर पर एक लैंडलाइन फोन है। उसकी के द्वारा बातचीत करती है। कामचलाऊ। तन्हाइयां काटने को आती हैं। वह समझदार है, तन्हाइयों को इजाजत नहीं देंगी कि वे उन्हें काट दें। वे तन्हाइयों को काटने का ही कुछ इन्तजाम करेंगी बेमौत नहीं मरेंगी। ज्यादा कार्यक्रमां में जाना संभव नहीं। सुबह एक सत्संग में जरूर जाती हैं।
‘‘लाओ, इनके कागज पत्र समेटते हैं। पुस्तकें लिखते थे श्रीवास्तक साहब लिख लिखकर रखते जाते थे कि रिटायर होने के बाद छपवायेंगें। छपवाने की मोहलत नहीं मिली। अब हम ही देखते हैं कुछ छपवाने का प्रबंध करें।
धीरे धीरे उन कागजों को छांटना, संवारना, पढ़ना शुरू किया तो छोटे छोटे जुगनू रोशनी की पकड़ में आने लगे। विषाद अवसाद घुलने लगा। धीरे धीरे महसूस हुआ - ये तो रोशनी के द्वार पर द्वार खुलते जा रहे हैं। कहानियों को अलग किया, कविताओं को अलग। अपनी भी कई पुरानी डायरियाँ, कापियाँ अंधेरे कोनों से नमूदार हुई जिन्हें कब का छुपाकर रख दिया गया था कि अतीत कभी आंखे ही न खोले। जो मिला उसी में सुख प्राप्त कर लें। पति का प्रेम मिल गया तो अपना अस्तित्व अपना व्यक्तित्व उन्हीं में विलीन कर सुख का अनुभव करने लगी थीं वे। औरत को और क्या चाहिए भला?
लेकिन आज आधुनिक युग की खुली आंखों और सिर उठाती महत्वाकांक्षाओं को देखकर महसूस होता है कि औरत को भी अपने अस्तित्व की, अपने व्यक्तित्व की जरूरत है।
किसी की मदद से उसने पति के कार्यों को प्रकाशित करवाने की ठानी। अपनी भी कवितायें चीख पुकार मचाने लगी तो उनके लिए भी प्रयत्न शुरू हुआ। पैसे की कमी न थी।  पैसा लगाकर पुस्तकें सामने आई। राजेश्वरी का हौंसलां बढ़ा तो और भी पुस्तकें लिखने लगी। बातचीत करने लगी। आत्मविश्वास बढ़ा तो कई सम्पर्क सूत्र काम आने लगे।
किताब को नाम मिला :- रोशनी की तलाश में।
भूमिका में सुंदर कविता अवतरित हुईः- रोशनी जुगनू की हो या सूरज की।
रोशनी तो रोशनी है जो विषाद के, अवसाद के अंधेरे दूर करती है। मैं भी निकल पड़ी हूं रोशनी की तलाश में। तुम्हारी हथेली का जुगनू मेरी कलम पर आन बैठा लफ्जों के लिबास में कागज की देह पर उतरता चला गया। कविता के आधार में। गीत के संसार में उजास ही उजास था। रोशनाई से लिखा प्रकाश ही प्रकाश था। इलाही नूर से भरपूर हुआ अस्तित्व मेरा। राह मुझको मिल गई चलने लगी, चलती गई, चलती गई। लीलने को तत्पर थी तन्हाइयां किधर गई, किधर गई? निकल पड़ी अनगिनत रचनायें जुगनू पकड़ने रोशनी की आस में। चल पड़ी मैं चल पड़ी - जुगनुओं की तलाश में
सार्थक प्रयास मेरा दे रहा खुशियां मुझे
चलने लगी अब छोड़कर बैसाखियां। हो रहा है सार्थक
और समर्थ अब अस्तित्व मेरा। तिनका तिनका सुख
मुझको दे रहा संतोष कितना यह मेरा व्यक्तित्व




शनिवार, 4 अगस्त 2018

किकी चैलेंज- खतराें के खिलाड़ी मत बनिए आप- डा. अनुजा भट्ट


  पिछले  दिनाें साेशल मीडिया पर किकी चैलेंज ने जबरदस्त धूम मचायी और इसका असर सड़काें पर नजर आया। युवाआें से लेकर उम्रदराज लाेगाें ने इसमें हिस्सा लिया। आनंद के अतिरेक में उनकाे पीछे आ रही गा़ड़ी का हार्न भी नहीं सुनाई दिया। ड़्राइवर से माफी मांगने के बजाय वह उसपर नाराज हाेते नजर आए क्याेंकि उन्हाेंने उनके आनंद में खलल डाला।  डांस  करना आनंदित ताे  करता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप सड़क जाम कर दें। वैसे भी जब हम किसी भी चीज के साथ चैलेंज शब्द का प्रयाेग कर  देते हैं ताे फिर हर आदमी औरत चाहें वह  किसी भी उम्र का क्याें न हाे जाेरआजमाइश करने लगता है।  फिर इस जोरआजमाइश में उसका पूरा कुनबा टूट पड़ता है। फेसबुक लाइव आते ही उसके रिश्तेदार से लेकर सारे दाेस्त इस मुहिम में शामिल हाे जाते हैं। और हर शहर हर गांव हर कस्बे से एेसी खबरे आने लगती है।  हर क्षेत्र  के लाेग फिल्मी लोग. नाैकरी पेशा लाेग, व्यापारी. बेराेजगार सब  शामिल हाे जाते हैं।
 लेकिन जब यह नशा स्कूली बच्चाें टीनएजर पर पड़ता है ताे फिर वैसा ही नजारा आते देर नहीं लगेगी जैसा  ब्लू व्हैल गेम खेलते समय हुई थी। तब यह फनचैलेंज बनाम एडवैंचर, एक्सीडेंट में बदलने लगेगा और हम हाथ मलते रह जाएंगे। किशाेर मन काे जब एक बार  उकसा दें ताे फिर वह बार बार उस काम काे करता है। फन और उन्माद में फर्क काे महसूस करना सीखना चाहिए। हम सब लाेग एक अंधी दाैड़ में भागते जा रहे हैं।  और मीडिया भी इस तरह की खबराें काे महत्व दे रहा है। आखिर इस तरह के फन का क्या मतलब है जहां सड़के जाम हाे जाए। लाेग समय पर आफिस न पहुंच पाएं। बीमार सड़क पर कसमसाते रहे। सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां  उड़ जाएं और हम हँसते रहे, गुदगुदाते रहे, फाेटाे शेयर करते हैं चाहे हमारे पीछे काेई तड़प तड़प कर मर जाए।
 देस भक्ति की भावना ताे हमारे भीतर से गायब हाेती जा रही है। बच्चाें काे इससे काेई सराेकार नहीं क्याेंकि हम एेसे संस्कार देने में अब काेई रूचि नहीं दिखा रहे। हम फन की तलाश में है चाहे  वह फन कितना भ हिंसक और बेहूदा क्याें न हाे। हम नाचना चाहते हैं, हम मदमस्त हाेना चाहते हैं  दुनिया जाए भाड़ में.. यही हमारी साेच बनती जा रही है। आपके बच्चे भी आपके साथ इस हिंसक खेल में साझेदारी कर रहे हैं। इस खेल में हार या जीत  नहीं है यहां है खुला चैलेंज... मैं कर सकता हूं.. आपमें है दम ताे  काीजिए.. खाेलिए गाड़ी का दरवाजा और बाहर  निकलकर कीजिए किकी डांस.....

शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

फैशन सिर्फ सिल्मट्रिम लाेगाें के लिए ही नहीं है- डा. अनुजा भट्ट

फैशन के गलियाराें मे इन दिनाें प्लस साइज के दीवानाें की चर्चा है। समाज में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है कि
अब वह अपनी साेच बदल रहा है या बदलने के लिए मजबूर है। माेटे लाेग बेवजह ही  निराशा के भंवर में फंसे हैं जबकि माेटा हाेना  उनकी दिलचस्पी में शामिल नहीं है। वह न  ताे मन का खा पाते हैं और न ही पहन आेढ़ पाते हैं। स्वाद और साैंदर्य से बेरुखी क्याें हाे। फैशन डिजाइनर अब प्लस साइज के लिए बहुत ही खूबसूरत परिधान लेकर आ रहे हैं।  फिर चाहे वह प्लस साइज टीनएजर हाे या फिर प्लस साइज  दुल्हन।
 यह सच है  कि माेटापा पूरी दुनिया में बहुत तेजी से फैल रहा है। इसके लिए हमारा लाइफ स्टाइल और जैनेटिक पैटर्न दाेनाें की उत्तरदायी है।  इसलिए माेटे व्यक्ति काे भी उतनी ही तव्जाे मिलनी चाहिए जितनी पतले लाेगाें काे। यह सिर्फ फैशन के मामले में ही नहीं  सब जगह हाेना चाहिए।  फैशन में आए इस बदलाव का असर फिल्माें और टीवी पर भी पड़ेगा वहां भी माेटे लाेगाें काे अभिनय के अवसर मिलेंगे। लाेग उनके अभिनय काे देखेंगे ताे उनके माेटापे पर नजर नहीं जाएगी। इस तरह उनके भीतर की प्रतिभा काे देखने सुनने का अवसर पैदा हाेगा और वह समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए अग्रिम पंक्ति पर खड़े हाेंगे। अभी हाल में जब प्लस साइज मॉडल का आडिशन हुआ ताे उसमें 5000 से ज्यादा प्लस साइज मॉडल ने हिस्सा लिया। यह नाेटिस करने वाली बात है।
  अक्सर हम अपने लिए  ड्रेस का चयन ताे कर लेते हैं पर उसके साथ एक्सेसरीज पर फाेकस नहीं करते।हमारी हेयर स्टाइल और मेकअप दाेनाें हमारी पर्सनेलिटी  काे बैलेंस करते हैं। प्लस साइज के मेकअप टेंड्रस और हेयर स्टाइल भी आकर्षक हाेने चाहिए।  बहुत बार देखा जाता है कि वह अपने माेटापे के कारण  भीतर ही भीतर हीन भावना के शिकार हाेने लगते हैं एेसे में ड्रेस डिजानर काे यह भी पहल करनी चाहिए कि वह उनके  कांफिडेंस काे माेटिवेट करे।

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