मंगलवार, 31 जनवरी 2012

सादगी में सुंदरता


नेहा दीवान 


 आपके घर में भी बेहद खूबसूरत तरीके से सादगी की झलक मिल सकती है। कम से कम साज-सज्जा करने से एक ओर जहां घर अस्तव्यस्त नजर नहीं आता, वहीं दूसरी ओर इसमें काफी जगह मिल जाती है। आप कुछ मूल बातों को ध्यान में रखकर अपना घर और सुंदर बना सकते हैं। यह समझना मुश्किल नहीं है कि बहुत से फायदों की वजह से न्यूनतम साज-सज्जा का चलन जोर पकड़ता जा रहा है। सबसे पहले यह आंखों को भाती है और घर को साफ सुथरा रखने में आसानी होती है। अगर आपके पास छोटी जगह है तो इस शैली को अपनाना आपके लिए अच्छा रहेगा क्योंकि इससे आपको अपने घर का अंदरुनी भाग काफी खुला मिलेगा। 
रविसांत होम/इंटीरियर्स की हेड डिजाइनर पदमिनी शर्मा का कहना है, ''न्यूनतम साज-सज्जा आपकी भावनाओं और जीवन में अनुशासन लाने के नजरिए को दर्शाती है। इसमें उपलब्ध स्थान का बेहतरीन डिजाइन बरकरार रखते हुए घर की कम से कम साज-सज्जा की जाती है। ऐसी साज-सज्जा के लिए उपयुक्त फर्नीचर और दीवारों पर मेटल फिनिश बेहतर रहती है।'' 
रविसांत ने इसके लिए अलग से अपना एक क्लेक्शन पेश किया है जिसमें आंखों को भाने वाले रंगों के पर्दे और कम जगह घेरने वाले फर्नीचर के साथ अन्य एसेस्री भी शामिल हैं। दिल्ली के लग्जरी इंटीरियर सॉल्यूशन ब्रांड ला सोरोगीका के पास भी न्यूनतम साज-सज्जा के लिए समाधान मौजूद हैं। तीन हजार रुपये स्क्वेयर फीट से शुरु होने वाली रेंज भूमध्य सागर के आसपास बसे तटीय देशों और सागर की ठंडी हवा की ताजगी से प्रेरित है। इसमें उपयुक्त डिजाइन के साथ ही शीशा, लकड़ी, स्टील जैसे मैटीरियल का बेहतरीन मिश्रण दिखता है। ला सोरोगीका की डायरेक्टर और सीईओ, अंजलि गोयल का मानना है कि न्यूनतम साज-सज्जा में फिनिश्ड प्रोडक्ट पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। 
यह जरूरी है कि आप अपने घर में भारी भरकम फर्नीचर का इस्तेमाल न करें। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आपके घर का इंटीरियर फीका नजर आए। इसमें आप रंगों के बेहतर इस्तेमाल और थोड़ी सी साज-सज्जा के साथ खूबसूरती में चार चांद लगा सकते हैं। इंटीरियर सॉल्यूशन ब्रांड कासा पैराडॉक्स के पास न्यूनतम साज-सज्जा को बेहतरीन दिखाने के लिए कुछ आकर्षक विकल्प उपलब्ध हैं। 
ब्रांड की सॉरबेट लाइन प्लम, कीवी, मैंड्रिन और चेरी जैसी चटकीले रंगों में मौजूद है। एसेस्री में बर्मा की फनीर्चर शैली की झलक मिलती है और इसकी रेंज 25,000 रुपये से शुरु होती है। फर्नीचर सॉल्यूशन ब्रांड ऊषा लेक्सस ने बर्कली के नाम वाली कम ऊंचाई वाले बेड की रेंज बाजार में उतारी है जिसकी कीमत 20,000 रुपये से शुरु है। यह ओक, रोजवुड, टीक, वॉलनट और वेंज के पांच शेड विकल्पों में उपलब्ध है। इस बेड में सामान रखने के लिए जगह नहीं है जिस वजह से इनका वजन भी काफी हल्का है। 
घर की न्यूनतम साज-सज्जा आपके घर को सादगी के साथ ही आंखों को भाने वाले सुंदरता भी देती है। तो क्या आप भी तैयार हैं न्यूनतम साज-सज्जा के साथ अपने घर को सुंदर बनाने के लिए।

सोमवार, 30 जनवरी 2012

आभार



 मित्रों आपने मेरा ब्लाग वागीशा पढ़ा और इसे सराहा इसके लिए मैं आप सबको धन्यवाद देना चाहती हूं। एक माह में  2000 से ज्यादा लोगों का इसे पढऩा एक सुखद अनुभूति का अहसास करा रहा है।  मैं चाहती हूं कि आप अपनी  टिप्पणी  भी प्रेषित करें। माह में सर्वश्रेष्ठ टिप्पणी  को पुरस्कृत किया जाएगा। आप क्या पढऩा चाहते हैं इस पर भी अपनी राय दें। हम बहुत जल्दी ही वागीशा का विस्तार एक वेब मैग्जीन के रूप में करने जा रहे हैं। जहां आपको देने के लिए मेरे पास ज्यादा स्पेस रहेगा।
 सादर स्नेह- अनुजा

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

हर रंग कुछ कहता है


इंद्रधनुषी रंगों से सजी दीवारें हमारे घर की खूबसूरती को बढ़ाने के साथ-साथ हमारे दिल को भी सुकून देती हैं। हर रंग का हमारी सोच पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कुछ रंग हम पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं तो कुछ नकारात्मक।
दिशा आधारित शाखाओं में उत्तर दिशा हेतु जल तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले रंग नीले और काले माने गए हैं। दक्षिण दिशा हेतु अग्नि तत्व का प्रतिनिधि काष्ठ तत्व है जिसका रंग हरा और बैंगनी है। प्रवेश आधारित शाखा में प्रवेश सदा उत्तर से ही माना जाता है, भले ही वास्तविक प्रवेश कहीं से भी हो। इसलिए लोग दुविधा में पड़ जाते हैं कि रंगों का चयन वास्तु के आधार पर करें या वास्तु और फेंगशुई के अनुसार। यदि फेंगशुई का पालन करना हो, तो दुविधा पैदा होती है कि रंग का दिशा के अनुसार चयन करें या प्रवेश द्वार के आधार पर। दुविधा से बचने के लिए वास्तु और रंग-चिकित्सा की विधि के आधार पर रंगों का चयन करना चाहिए। वास्तु और फेंगशुई दोनों में ही रंगों का महत्व है। शुभ रंग भाग्योदय कारक होते हैं और अशुभ रंग भाग्य में कमी करते हैं। विभिन्न रंगों को वास्तु के विभिन्न तत्वों का प्रतीक माना जाता है। नीला रंग जल का, भूरा पृथ्वी का और लाल अग्नि का प्रतीक है। वास्तु और फेंगशुई में भी रंगों को पांच तत्वों जल, अग्नि, धातु, पृथ्वी और काष्ठ से जोड़ा गया है। इन पांचों तत्वों को अलग-अलग शाखाओं के रूप में जाना जाता है। इन शाखाओं को मुख्यतः दो प्रकारों में में बाँटा जाता है, ‘दिशा आधारित शाखाएंऔर प्रवेश आधारित शाखाएं
सामान्यतः सफेद रंग सुख समृद्धि तथा शांति का प्रतीक है यह मानसिक शांन्ति प्रदान करता है। लाल रंग उत्तेजना तथा शक्ति का प्रतीक होता है। यदि पति-पत्नि में परस्पर झगड़ा होता हो तथा झगडे की पहल पति की ओर से होती हो तब पति-पत्नि अपने शयनकक्ष में लाल, नारंगी, ताम्रवर्ण का अधिपत्य रखें इससे दोनों में सुलह तथा प्रेम रहेगा। काला, ग्रे, बादली, कोकाकोला, गहरा हरा आदि रंग नकारात्मक प्रभाव छोडते हैं। अतः भवन में दिवारों पर इनका प्रयोग यथा संभव कम करना चाहिये। गुलाबी रंग स्त्री सूचक होता है। अतः रसोईघर में, ड्राईंग रूम में, डायनिंग रूम तथा मेकअप रूम में गुलाबी रंग का अधिक प्रयोग करना चाहिये। शयन कक्ष में नीला रंग करवायें या नीले रंग का बल्व लगवायें नीला रंग अधिक शांतिमय निद्रा प्रदान करता है। विशेष कर अनिद्रा के रोगी के लिये तो यह वरदान स्वरूप है। अध्ययन कक्ष में सदा हरा या तोतिया रंग का उपयोग करें।
रंग चिकित्सा पद्दति का उपयोग किसी कक्ष के विशेष उद्देश्य और कक्ष की दिशा पर निर्भर करती है। रंग चिकित्सा पद्दति का आधार सूर्य के प्रकाश के सात रंग हैं। इन रंगों में बहुत सी बीमारियों को दूर करने की शक्ति होती है। इस दृष्टिकोण से उत्तर पूर्वी कक्ष, जिसे घर का सबसे पवित्र कक्ष माना जाता है, में सफेद या बैंगनी रंग का प्रयोग करना चाहिए। इसमें अन्य गाढे़ रंगों का प्रयोग कतई नहीं करना चाहिए। दक्षिण-पूर्वी कक्ष में पीले या नारंगी रंग का प्रयोग करना चाहिए, जबकि दक्षिण-पश्चिम कक्ष में भूरे, ऑफ व्हाइट या भूरा या पीला मिश्रित रंग प्रयोग करना चाहिए। यदि बिस्तर दक्षिण-पूर्वी दिशा में हो, तो कमरे में हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए। उत्तर पश्चिम कक्ष के लिए सफेद रंग को छोड़कर कोई भी रंग चुन सकते हैं। सभी रंगों के अपने सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हैं।
इसी प्रकार वास्तु या भवन में उत्तर का भाग जल तत्व का माना जाता है। इसे धन यानी लक्ष्मी का स्थान भी कहा जाता है। अतः इस स्थान को अत्यंत पवित्र स्वच्छ रखना चाहिए और इसकी साज-सज्जा में हरे रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए। कहा जाता हे कि रंग नेत्रों के माध्यम से हमारे मानस में प्रविष्ट होते हैं एवं हमारे स्वास्थ्य, चिंतन, आचार-विचार आदि पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है। अतः उचित रंगों का प्रयोग कर हम वांछित लाभ पा सकते हैं।
लाल रंग शक्ति, प्रसन्नता प्रफुल्लता और प्यार का प्रोत्साहित करने वाला रंग है। नारंगी रंग रचनात्मकता और आत्मसम्मान को बढ़ाता है। पीले रंग का संबंध आध्यात्मिकता और करूणा से है। हरा रंग शीतलदायक है। नीला रंग शामक और पीड़ाहारी होता है। इंडिगो आरोग्यदायक तथा काला शक्ति और काम भावना का प्रतीक है।
जहाँ सफेद रंग हमें शांति का अहसास देता है तो वहीं हरा रंग खुशहाली का। दीवारों पर रंगों के बदलने के साथ ही हमारा जीवन किस तरह से प्रभावित होता है। रंग केवल वास्तु के लिहाज से श्रेष्ठ होते हैं, बल्कि हमारे जीवन की दशा दिशा भी निर्धरित करने में सहयोग प्रदान करते हैं। अगर रंगों का चयन वास्तु के अनुरूप हो, तो तरक्की के सारे रास्ते खुल जाते हैं। आइये, इस पर एक नजर डालते हैं कि अलग-अलग रंग हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी भवन में गृहस्वामी का शयनकक्ष तथा तमाम कारखानों, कार्यालयों या अन्य भवनों में दक्षिणी-पश्चिम भाग में जी भी कक्ष हो, वहां की दीवारों फर्नीचर आदि का रंग हल्का गुलाबों अथवा नींबू जैसा पीला हो, तो श्रेयस्कर रहता है। गुलाबी रंग को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह आपसी सामंजस्य तथा सौहार्द में वृद्धि करता है। इस रंग के क्षेत्र में वास करने वाले जातकों की मनोभावनाओं पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि होली जैसे, पवित्र त्यौहार पर गुलाबी रंग का प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है। इस भाग में गहरे लाल तथा गहरे हरे रंगों का प्रयोग करने से जातक की मनोवृत्तियों पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इसी प्रकार उत्तर-पश्चिम के भवन में हल्के स्लेटी रंग का प्रयोग करना उचित रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह भाग घर की अविवाहित कन्याओं के रहने या अतिथियों के ठहरने हेतु उचित माना जाता हैं।
इस स्थान का प्रयोग मनोरंजन कक्ष, के रूप में भी किया जा सकता है। किसी कार्यालय के उत्तर-पश्चिम भाग में भी स्लेटी रंग का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इस स्थान का उपयोग कर्मचारियों के मनोरंजन कक्ष के रूप में किया जा सकता है। वास्तु या भवन के दक्षिण में बना हुआ कक्ष छोटे बच्चों के लिए उपयुक्त माना जाता है। चूंकि चंचलता बच्चों का स्वभाव है, इसलिए इस भाग में नारंगी रंग का प्रयोग करना उचित माना जाता है। इस रंग के प्रयोग से बच्चों के मन में स्फूर्ति एवं उत्साह का संचार होता है। इसके ठीक विपरीत इस भाग में यदि हल्के रंगों का प्रयोग किया जाता है, तो बच्चों में सुस्ती एवं आलस्य की वृद्धि होती है। वास्तु या भवन में पूरब की ओर बने हुए कक्ष का उपयोग यदि अध्ययन कक्ष के रूप में किया जाए, तो उत्तम परिणाम पाया जा सकता है।
वास्तु या भवन में पूरब की ओर बने हुए कक्ष का उपयोग यदि अध्ययन कक्ष के रूप में किया जाए, तो उत्तम परिणाम पाया जा सकता है।
इस कक्ष में सफेद रंग का प्रयोग किया जाना अच्छा रहता है, क्योंकि सफेद रंग सादगी एवं शांति का प्रतीक होता है। इसे सभी रंगों का मूल माना जाता हैं। चूंकि दृढ़ता, सादगी तथा लक्ष्य के प्रति सचेत एवं मननशील रहना विद्यार्थी के लिए आवश्यक होता है, अतः सफेद रंग के प्रयोग से उसमें इन गुणों की वृद्धि होती है। इस स्थान पर चटक रंगों का प्रयोग करने से विद्यार्थी का मन चंचल होगा और उसका मन पढ़ने में नहीं लगेगा।
वास्तु या भवन में पश्चिम दिशा के कक्ष का उपयोग गृहस्वामी को अपने अधीनस्थों या संतान के रहने के लिए करना चाहिए और इसकी साज-सज्जा में नीले रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसा करने से वहां रहने वाले आज्ञाकारी और आदर देने वाले बने रहेंगे तथा उनके मन में गृहस्वामी के प्रति अच्छी भावना बनी रहेगी।
वैसे भी नीला रंग नीलाकाश की विशालता, त्याग तथा अनंतता का प्रतीक है, इसलिए वहां रहने वाले के मन में संकुचित या ओछे भाव नहीं उत्पन्न होंगे। इसी प्रकार किसी वास्तु या भवन के उत्तर-पूर्वी भाग को हरे एवं नीले रंग के मिश्रण से रंगना अच्छा रहता है। चंूकि यह स्थान जल तत्व का माना जाता है, इसलिए इसका उपयोग पूजा-अर्चना, ध्यान आदि के लिए किया जाना उचित है। इस स्थान पर साधना करने से आध्यात्मिकता में वृद्धि होती है तथा सात्विक प्रवृत्तियों का विकास होता है। इस स्थान पर चटख रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वास्तु या भवन में दक्षिण-पश्चिम का भाग अग्रि तत्व का माना जाता है। इसलिए इस स्थान का प्रयोग रसोई के रूप में किया जाना श्रेष्ठ होता है। इस स्थान की साज-सज्जा में पीले रंग का प्रयोग उचित होता है।
यह जानने के लिए अपने आशियाने की दीवारों को रंगवाने से पहले उन रंगों के हम पर पड़ने वाले प्रभावों पर एक नजर-
ला रंग:- यह रंग हमें गर्माहट का अहसास देता है। इस रंग से कमरे का आकार पहले से थोड़ा बड़ा लगता है तथा कमरे में रोशनी की भी जरूरत कम पड़ती है। अत: जिस कमरे में सूर्य की रोशनी कम आती हो, वहाँ दीवारों पर हमें पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए। पीला रंग सुकून रोशनी देने वाला रंग होता है। घर के ड्राइंग रूम, ऑफिस आदि की दीवारों पर यदि आप पीला रंग करवाते हैं तो वास्तु के अनुसार यह शुभ होता है।
गुलाबी रंग:- यह रंग हमें सुकून देता है तथा परिवारजनों में आत्मीयता बढ़ाता है। बेडरूम के लिए यह रंग बहुत ही अच्छा है।
नीला रंग:- यह रंग शांति और सुकून का परिचायक है। यह रंग घर में आरामदायक माहौल पैदा करता है। यह रंग डिप्रेशन को दूर करने में भी मदद करता है।
 जामुनी रंग:- यह रंग धर्म और अध्यात्म का प्रतीक है। इसका हल्का शेड मन में ताजगी और अद्भुत अहसास जगाता है। बेहतर होगा यदि हम इसके हल्के शेड का ही दीवारों पर प्रयोग करें।
 नारंगी रंग:- यह रंग लाल और पीले रंग के समन्वय से बनता है। यह रंग हमारे मन में भावनाओं और ऊर्जा का संचार करता है। इस रंग के प्रभाव से जगह थोड़ी सँकरी लगती है परंतु यह रंग हमारे घर को एक पांरपरिक लुक देता है।
अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए आपको अपने कमरे की उत्तरी दीवार पर हरा रंग करना चाहिए।
—– आसमानी रंग जल तत्व को इंगित करता है। घर की उत्तरी दीवार को इस रंग से रंगवाना चाहिए।
—–. घर के खिड़की दरवाजे हमेशा गहरे रंगों से रंगवाएँ। बेहतर होगा कि आप इन्हें डार्क ब्राउन रंग से रंगवाएँ।
—-जहाँ तक संभव हो सके घर को रंगवाने हेतु हमेशा हल्के रंगों का प्रयोग करें।
 इसी प्रकार वास्तु या भवन में उत्तर का भाग जल तत्व का माना जाता है। इसे धन यानी लक्ष्मी का स्थान भी कहा जाता है। अतः इस स्थान को अत्यंत पवित्र स्वच्छ रखना चाहिए और इसकी साज-सज्जा में हरे रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए। कहा जाता हे कि रंग नेत्रों के माध्यम से हमारे मानस में प्रविष्ट होते हैं एवं हमारे स्वास्थ्य, चिंतन, आचार-विचार आदि पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है। अतः उचित रंगों का प्रयोग कर हम वांछित लाभ पा सकते हैं।

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