शनिवार, 15 अप्रैल 2017

प्राकृतिक उपायों से कीजिए दर्द दूर- रेनु दत्त


जब कभी दर्द होता है या चोट लगती है तो सबसे पहले दिमाग में यह बात आती है कि इस दर्द को दूर करने के लिए गर्म पैक लगाएं या ठंडा पैक। आइस पैक और हीटींग पैड पाॅवरफुल दवा नहीं है लेकिन फिर भी यह सबसे सस्ता और आसानी से उपलब्ध उपाय है। यह एक नैचुरल तरीका है।
यदि आम भाषा में बात की जाए तो आइस पैक चोट के लिए होता है और हीट पैक मसल्स के लिए होता है। जब किसी चोट के कारण हमारे टिशू में जलन, रेडनेस, सूजन हो जाती हैं तो उस समय आइस पैक लगाया जाता है।  गर्म पैक मसल्स, तनाव और पुराने दर्द के लिए होता है।  जैसे कि बैक पेन, नेक पेन या नर्वस सिस्टम और दिमाग को शांत करता है।
यदि आपको पहले से ही गर्म लग रहा है तो उस समय गर्म पैक आपकी मदद नहीं करेगा और यदि आपको पहले से ही ठंड लग रही है तो उस समय कोल्ड पैक स्थिति को और बिगाड़ेगा।  गलत पैक लगा लेने के कारण उसके दुष्परिणाम भी झेलने पड़ते हैं।
यह जानने के लिए कि हमें कब कौन सा पैक लगाना है उसके लिए हमें दर्द के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। हम यहां पर कुछ जानकारी दे रहे हैं।
ऐसी समस्याएं जोकि लंबे समय से चल रही हों या क्रोनिक हों या जोकि छः सप्ताह से ज्यादा चल रही हों। उदाहरण के लिए आर्थराईट्स जिसकी वजह से कारटिलेज खराब होती हैं।  ऐसी समस्या के लिए गर्म पैक ट्रीटमंेट की जरूरत होती है जिससे कि ज्वाईंट स्टिफनेस कम होती है और मसल्स रिलेक्स होते हैं।
आईस पैक ऐसे दर्द के लिए ठीक रहता है जोकि जलन को कम करता है।  सिर दर्द में नर्व और दिमाग की ब्लड वेस्लस में दर्द बढ़ता है।  इसको आईस पैक लगा कर नंबनेस के द्वारा कम किया जा सकता है।
नेक स्पैज्म में अधिकतर लोग ठंडा पैक लगाने की गलती करते हैं जिससे कि दर्द कम होने की बजाय बढ़ जाता है।  इसलिए इस दर्द को कम करने के लिए गर्म पैक लगाएं।
यदि आपके मसल्स खिंच जाते हैं या नसों में चोट लग जाती है तो पहले ठंडा पैक लगा कर जलन और दर्द को नंब किया जा सकता है।  जब जलन कम हो जाती है तो आपके मसल्स अकड़ सकते हैं।  ऐसे में उन्हें हल्का करने के लिए हीट पैक का इस्तेमाल करें।
जब आपके ज्वाईंट्स खिंच जाते हैं या फट जाते हैं तो पहले उस पर कोल्ड पैक लगाएं जिससे कि जलन और दर्द में कमी आए।  जब जलन बिल्कुल भी न रहे तो हौट पैक लगाएं जिससे कि अकड़ाहट कम हो।
ठंड में पैर सूज जाएं तो एपस्म साल्ट को सेंधा नमक को गर्म पानी में मिलाकर पैर की सिकाई करं। यह साल्ट एंटी इन्फ्लैमटरी होता है। जो सूजन को कम करने और दर्द में राहत पहुंचाता हैं। इसमें मैग्नीशियम सल्फेट भी होता है जो मांसपेशियों के दर्द में राहत पहुंचाता है। इसमें मैग्नीशियम सल्फेट भी होता है जो मांसपेशयों के दर्द से दूर करता है। थके हुए पैरों को आराम पहुंचाने के लिए एक टब में दो लीटर पानी डालकर उसमें आधा कम नमक मिला दें। ध्यान दें पानी ज्यादा गर्म न हो। पैरों को टब में कम से कम 20 मिनट तक रखें।

  •  ठंडी सिकाई करते समय ध्यान दें
  •  आइस बैग को 20 से ज्यादा बार प्रभावित स्थान पर न लगाएं। 10 मिनट तक सिकाई के बाद 2 मिनट का ब्रेक लें। मसल्स में दर्द, खिंचाव, सूजन और त्वचा छिल जाने पर ठंडी सिकाई दें।
  • गर्म सिकाई 
  •  अगर डायबिटीज है या ब्लडसर्कुलेशन संबधी कोई बीमारी हे तो गर्म सिकाई न करें।
  •  अगर दर्द किसी पुरानी चोट का हो तो गर्म सिकाई मदद करती है।
  •  पुरानी चोट का ब्लड सर्कुलेशन से की जाए तो गर्म सिकाई से फिर से शुरू हो जाता ह। इससे मसल्स का दर्द दूर होता है।
  •  ध्यान दें - सूजन होने पर तुरंत पैक न लगाएं। पहले ठंडा पैक के बाद में गर्म पैक दें।
  •  5 मिनट से अधिक गर्म पैक न हो।
  •  एक बार इस्तेमाल करके पानी को फेंक दें, उसे दोबारा से इस्तेमाल न करें।
  •  बहुत गर्म पैक न लगाएं।

बुधवार, 12 अप्रैल 2017

मैजिक मिरर से बने घर खूबसूरत



घर बड़ा हो या छोटा उसे सुंदर बनाने के लिए हमारे भीतर सृजनात्मक विचारों का होना बहुत मायने रखता है लेकिन हर व्यक्ति के भीतर सृजनात्मकता हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए हम आपको बता रहे हैं साजसज्जा से जुड़ी खास बातें-
महानगरों में अधिकतर लोग फ्लैट में रहते हैं। यहां आपके पास सीमित जगह होती है और सामान असीमित, जिस कारण आपका घर अस्त-व्यस्त दिखता है। लेकिन अगर आप चाहें तो कम जगह का भी इस्तेमाल भी नियोजित तरीके से कर सकती हैं। इंटीरियर डिजाइनर लिपिका सूद से जानिए घर की सजावट के लिए खास टिप्स:-
दीवारों का रंग
छोटे कमरे में हमेशा हल्के रंग का पेंट करवाएं। हल्का रंग कम लाइट ऐब्जौर्ब करते हैं, जिस से कमरा खुलाखुला लगता है।
कमरे को ज्यादा ऊंचा दिखाने के लिए सीलिंग पर फ्लोरोसैंट कलर के स्टिकर या वालपेपर का इस्तेमाल करें।
छोटे कमरे का फर्श भी हल्के रंग का होना चाहिए। इसके लिए हल्के रंग के पत्थर या फिर टाइल्स लगवाएं।
वन वाल डार्क का फैशन छोटे कमरों में लागू न करें।  हां, यदि आप कुछ अलग ही करना चाहते हैं तो एक ही कलर के दूसरे शेड का इस्तेमाल करें लेकिन चुनें लाइट शेड ही।
स्टाइलिश फर्नीचर और उसकी सैटिंग
छोटे कमरे के लिए स्टेटमैंट फर्नीचर का चुनाव करें। कमरे में छोटे-छोटे फर्नीचर की जगह कोई ऐसा फर्नीचर चुनें जो कम जगह घेरे और जरूरत को भी पूरा करें।
कभी भी फर्नीचर को दीवार से सटा कर न रखें। ऐसा करने पर दीवारें खराब होने के साथ ही भरीभरी भी लगती हैं। हमेशा फर्नीचर को दीवार से कुछ इंच छोड़ कर ही रखें।
बाजार में सोफा कम बैड व बैड बाॅक्स तो पहले से ही आ रहे हैं।  अब डाइनिंग टेबल, सोफासैट और कुछ मौड्यूलर फर्नीचर ऐसे आने लगे हैं, जो जगह भी कम घेरते हैं और स्टोरेज का भी काम करते हैं।
सजावट करें कम
कमरे में कलर थीम से मैच करती हुई ड्रैमैटिक पेंटिंग को लगाया जा सकता है। कमरे की कलर थीम से मैच होतीे पेंटिंग होने से कमरा भराभरा नहीं लगेगा।
कमरे में टेबल पर फ्लाॅवरवास रखना पुराना ट्रैंड हो गया है। अब टेबल को फ्री रखें और कमरे की किसी साइड में एक सुंदर और आकार में बड़ा टैराकोटा, चीनी मिट्टी या किसी धातु से बना पौट, वास या आर्टिकल सजा दें।
मिरर डैकोरेशन का आइडिया छोटे घरों के लिए एकदम सही है। यदि मिरर डैकोरेशन को इनोवेटिव तरीके से किया जाए, तो यह घर की रौनक बढ़ाने के साथ-साथ घर को स्पेशियस दिखाने का भ्रम भी बना देता है।
कमरे की एक दीवार को मिरर पैनल से कवर करना ट्रैंड में है। खासतौर पर घर के ड्राइंगरूम में इस तरह का इनोवेशन किया जा सकता है।
छोटे घरों में स्ट्रिप कारपेट का इस्तेमाल करना चाहिए, इस से कमरा लंबा दिखता है।
स्टूडियो फ्लैट में एक कमरे में ही हर कमरे की जरूरत का सामान रखना होता है. ऐसे में कारपेट सैपरेटर का काम कर सकता है. इस के लिए आप छोटे  कारपेट का इस्तेमाल कर एक ही कमरे में अलग-अलग काम के लिए ऐरिया डिवाइड कर सकते हैं।
मार्केट में आ रहे डिवाइडर्स छोटे आशियाने के लिए अच्छा विकल्प हैं. इन्हें एक ही कमरे में अलग-अलग काम करने के लिए या प्राइवेसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
खिड़की और दरवाजों पर करें गौर
कमरा छोटा है तो खिड़कियों को हर वक्त भारीभरकम परदों से कवर कर के न रखें. हो सके तो उन्हें अनकवर्ड रखें. इस से कमरे में रोशनी भी आएगी और कमरा भराभरा नहीं लगेगा।
छोटे कमरों में यदि लगाने ही हैं तो शिमरी करटेंस लगाएं ये पारदर्शी होते हैं साथ ही खूबसूरत लगते हैं। इनमें भी हल्के रंग के परदों का इस्तेमाल करें।
आजकल ग्लास डोर्स ट्रैंड हैं। वुडेन डोर्स की जगह सेमी ग्लास डोर्स घर में लगवाएं। इस से कमरा अलग भी हो जाएगा और बंदबंद भी नहीं लगेगा।
लाइट्स की सैटिंग
ओवरहैड लाइट्स का फैशन तो एवरग्रीन है, लेकिन कुछ नया ट्राय करना है तो आप अपने घर में बिलो हैडलाइट्स की सैटिंग कराएं। इस के लिए आप फ्लोर लाइट्स, डिजाइनर लैंप्स, हैंगिंग लाइट्स का चुनाव कर सकते हैं।
घर में नैचुरल लाइट्स का अच्छा सोर्स होना चाहिए. इस के लिए खिड़कियों पर वुडेन वर्क कराने की जगह उन पर ग्लास वर्क कराएं. इस से सूर्य की रोशनी घर के अंदर आ सकेगी.
कमरे में कितनी रोशनी की आवश्यकता है, उस हिसाब से लाइट अरैंजमेंट होने चाहिए. जैसे, बैडरूम में मीडियम लाइट्स के लिए वाॅल लैंप्स से भी काम चल सकता है. वहीं स्टडी रूम के लिए ज्यादा रोशनी की जरूरत होती है. इस लिए यहां ओवरहैड लाइट्स ही होनी चाहिए.
आप का डाइनिंग ऐरिया कितना ही छोटा क्यों न हो, आप डाइनिंग टेबल पर हैंगिंग लाइट लगा कर सिर्फ उतने पोर्शन को फोकस करेंगे तो कमरे का साइज छोटा है या बड़ा ज्यादा पता नहीं चलेगा.

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

तुलसी में है दवा भी दुआ भी-डा. अनुजा भट्ट



तुलसी को हरिप्रिया भी कहते हैं अर्थात वह जगत के पालन पोषण करने वाले भगवान विष्णु की प्रिय हैं। भारतीय परंपरा में घर-आंगन में तुलसी का होना सुख एवं कल्याण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। सिर्फ हिंदु धर्म ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी इसके महत्व और गुणवत्ता को महत्व दिया गया है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें तो तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है। इसकी जड़, तना, पत्तियां तथा बीज सभी उपयोगी होते हैं। इसमें कीटाणुनाशक अपार शक्ति हैं। इसको छू कर आने वाली वायु स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक होती है। तुलसी दो रंगों में होती है यह दो रंग है हरा और कत्थई। दोनों का ही सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
तुलसी के  उपयोग
स्वास्थ्यवर्धक तुलसी
पानी में तुलसी के पत्ते डालकर रखने से यह पानी टॉनिक का काम करता है।
खाँसी अथवा गला बैठने पर तुलसी की जड़ सुपारी की तरह चूसें।
तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंक कर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला ठीक हो जाता है।
खांसी-जुकाम में तुलसी के पत्ते, अदरक और काली मिर्च से तैयार की हुई चाय पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है।
फेफड़ों में खरखराहट की आवाज आने व खाँसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियाँ 4 ग्राम मिश्री के साथ लें।
तुलसी के पत्तों का रस, शहद, प्याज का रस और अदरक का रस चम्मच भर लेकर मिला लें। इसे आवश्यकतानुसार दिन में तीन-चार बार लें। इससे बलगम बाहर निकल जाता हैै।
श्वांस रोगों में तुलसी के पत्ते काले नमक के साथ सुपारी की तरह मुँह में रखने से आराम मिलता है।
शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है।
तुलसी के पत्ते का रस 1-2 ग्राम रोज पिएं, बुखार नहीं होगा।
यदि मासिक धर्म ठीक से नहीं आता तो एक ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो इस काढ़े को पी जाएं, मासिक धर्म खुलकर होगा। मासिक धर्म के दौरान यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें।
तुलसी का रस शरीर पर मलकर सोयें, मच्छरों से छुटकारा मिलेगा।
प्रातःकाल खाली पेट 2-3 चम्मच तुलसी के रस का सेवन करें तो शारीरिक बल एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ आपका व्यक्तित्व भी प्रभावशाली होगा।
तुलसी भोजन को शुद्ध करती है, इसी कारण ग्रहण लगने के पहले भोजन में डाल देते हैं जिससे सूर्य या चंद्र की विकृत किरणों का प्रभाव भोजन पर नहीं पड़ता।
खाना बनाते समय सब्जी पुलाव आदि में तुलसी के रस का छींटा देने से खाने की पौष्टिकता व महक दस गुना बढ़ जाती है।
तुलसी के नियमित सेवन से हीमोग्लोबीन तेजी से बढ़ता है, स्फूर्ति बनी रहती है।
तुलसी की सेवा अपने हाथों से करें, कभी चर्म रोग नहीं होगा।
सौंदर्यवर्धक तुलसी
तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में नीबू का रस मिलायें और रात को चेहरे पर लगाये तो झाइयां नहीं रहती, फुंसियां ठीक होती है और चेहरे की रंगत में निखार आता है।
तुलसी पत्रों को पीसकर चेहरे पर उबटन करने से चेहरे की आभा बढ़ती है।
दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है।
चेहरे के मुँहांसे दूर करने के लिए तुलसी पत्र एवं संतरे का रस मिलाकर रात्रि को चेहरा धोकर अच्छी तरह से लेप लगाएं, आराम मिलेगा।
तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से सांसों की दुर्गध चली जाती है।
उपयोग में सावधानियाँ
तुलसी की प्रकृति गर्म है, इसलिए गर्मी निकालने के लिये इसे दही या छाछ के साथ लें।    तुलसी के सेवन के बाद दूध भूलकर भी ना पियें, चर्म रोग हो सकता है।
तुलसी रस को अगर गर्म करना हो तो शहद साथ में ना लें। कारण गर्म वस्तु के साथ शहद विष तुल्य हो जाता है।
तुलसी के साथ दूध, मूली, नमक, प्याज, लहसुन, मांसाहार, खट्टे फल ये सभी का सेवन करना हानिकारक है।
तुलसी के पत्ते दांतो से चबाकर ना खायें, अगर खायें हैं तो तुरंत कुल्ला कर लें। कारण इसका अम्ल दांतों के एनेमल को खराब कर देता है।
तुलसी का पौधा जहां लगा हो वहा आसपास सांप बिच्छू जैसे जहरीले जीव नहीं आते।
तुलसी के पत्तों को रात्रि में नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि अंधेरे में इसकी विद्युत लहरें प्रखर हो जाती है।
तुलसी का पौधा दिन रात आक्सीजन देता है, प्रदूषण दूर करता है।

तुलसी का सान्निध्य सात्विकता और पुण्यभाव के साथ आरोग्य की शक्ति को भी बढ़ाता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण तुलसी की माला कंठी आदि शरीर में धारण करने का विधान है। प्रत्येक घर में एक तुलसी का पौधा जरूर होना चाहिए। समाजसेवा का इससे अच्छा, सुलभ, सुगम और निशुल्क उपलब्ध होने वाला और क्या उपाय हो सकता है।



रविवार, 2 अप्रैल 2017

जिंदगी के रास्ते पर चलना जरा संभलकर- डा. अनुजा भट्ट


यदि हमें कोई समस्या होती है तो हमारा शरीर कुछ संकेत अवश्य देता हैै।  लेकिन हम छोटी-छोटी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते और समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है।  आइए बात करते हैं ऐसे ही कुछ संकेतों और समस्याओं के बारे में।

कई बार ऐसा देखने में आता है कि पेशेंट का टूथ इनेमिल एकाएक खत्म हो गया । जांच के बाद उन्हें बड़ी हैरानी होती है कि ऐसा  ऐसिड रिफल्क्स के कारण हुआ है जबकि उन्हें कभी भी हार्टबर्न और रिफल्क्स की समस्या नहीं होती।  रिफल्क्स का यदि ट्रीटमेंट न किया जाए तो आपके दांत खराब हो सकते हैं साथ ही आपको गले का कैंसर भी हो सकता है।  रिफल्क्स की अन्य निशानियों हैं गले में खराश, खांसी, जोर-जोर से सांस लेना।
 एग्जीमा की बीमारी के रूप में देखा जाता है लेकिन इसका एक और गंभीर कारण हो सकता है वह है कोलिक डीसिज। यह ऐसी बीमारी है जिसमें यदि थोड़ी सी ग्लूटन भी खाने की चीजों में ले लिया जाए (जैसे की गेहूं, राई, बारले) तो आपकी बाॅडी खुद ही अपनी आंतों को नुकसान पहुंचाने लगती हैै।  इसलिए यदि आपको  कोई भी समस्या हो तो उसे इग्नोर न करें।
 बीमारी का पहला लक्षण है कंपकंपी।  लेकिन इसका पहला लक्षण होता है कि हैंडराइटिंग छोटी हो जाती है और शब्द बहुत ज्यादा बतवूकमक दिखतेेे हैं।  तकनीकी तौर पर इस बीमारी को माइक्रोग्राफिया कहा जाता है।  पार्किन्सन बीमारी में दिमाग के अंदर के सेल खराब या मरने लगते हैं।  उनसे डोपामाइन कम बनता होता है और हमारी मूवमेंट प्रभावित होती है जिससे हाथों एंव उंगलियों में अकड़ाहट आ जाती है और हैंडराइटिंग बतंउचमक दिखती है।  इसके अलावा बोलने में दिक्कत और सही से नींद न आना अन्य लक्षण हैं।  चूंकि यह बीमारी बुर्जुगों को ज्यादा होती है इसलिए इसके लक्षण जल्दी नहीं पता लग पाते क्योंकि बुजुर्ग होने पर अधिकतर लोगों को यह समस्याएं हो जाती है।  इसके शुरूआती लक्षण होते हैं धीमे बोलना और या हल्का हकला कर बोलना।
डिप्रेशन के आधे से ज्यादा पेशेंट में चिड़चिड़ापन या गुस्सा जैसे लक्षण होते हैं।  महिलाओं में डिप्रेशन पुरूषों से ज्यादा होता है लेकिन चिड़चिड़ापन और गुस्से के लक्षण पुरूषों में ज्यादा दिखाई देते हैं।  यदि आप अपने साथी पर छोटी छोटी बात पर गुस्सा करने लगते हो तो इसका कारण डिप्रेशन हो सकता है।  इसके लिए थैरिपी करवाएं और यदि जरूरी हो तो डाक्टरी सलाह पर एंटी डिप्रेसेन्ट्स भी लें।
यदि आपको छोटी छोटी बातों को याद रखने में, अपने रोजमर्रा के फाइनेंस को मैनेज करने में दिक्कत हो रही हो तो इसे हल्के में न लें।  यह अलजाइमर की शुरूआत हो सकती है।
 खर्राटे आपकी कारोटिड आरटरी को खराब कर सकते हैं जिससे कि ब्लड की सप्लाई ब्रेन को होती है। ं जिसकी वजह से हार्ट फेल या स्ट्रोक होने की संभावना होती है।  इसलिए खर्राटे को हल्की परेशानी में न लें।
कई पुरूषों को  45 वर्ष की उम्र केे करीब पहुंच कर  मतमबजपसम कलेनिदबजपवद की समस्या हो जाती है लेकिन दिल की बीमारी की कोई चिन्ह नहीं होते ।  यह समस्या जिनको होती है उनमें से करीब 60 प्रतिशत पुरूषों को दिल की बीमारी हो सकती है।  इसलिए यदि यह समस्या लग रही हो वह डाक्टर से दिल का चेकअप जरूर कराएं।
जो बैक्टीरिया गम डीसीज करता है वही दिल की बीमारी का भी कारण बन सकता है।  इसलिए तीन या छः महीने के अंदर एक बार अपने दांतों की क्लीनिंग जरूर करा लें।
यदि आपको बार बार पेशाब के लिए जाना पड़ता हैै तो आपको टाइप 2 की डायबटीज हो सकती है।  उसके लिए डाक्टर की सलाह पर टेस्ट कराएं और अपना इलाज भी करवाएं।  यदि आपको पेशाब जाने में कमी या अधिकता हो गई है तो ब्लैडर या प्रोस्टेट कैंसर वजह हो सकती है।
यदि आप स्ट्रेस या थकान की वजह से लोगों के नाम जल्दी भूल जाते हैं तो ऐसा होना स्वाभाविक है।  इसके अलावा चीजों को भूल जाने का एक कारण हाइपोथायराइड या थायराइड हारमोन की कमी भी हो सकती है।  यदि आप पूरी रात की नींद के बाद भी थकान महसूस कर रहे हैं,  ठंड, रूखी त्वचा, टूटे नाखून महसूस कर रहे हैं तो इन लक्षणों को इग्नोर न करें और थायराइड के लिए अपना इलाज करवाएं।
यदि आप बिना किसी व्यायाम या डाइट प्लान के भी 4 सें 5 किलो वजन घटा लेते हो तो अपना चेकअप जरूर कराएं।  इसकी वजह पेनक्रियेटिक, स्टोमेक, भोजन की नली का या फिर लंग कैंसर भी हो सकती है।
यदि किसी भी कारण से आपको ब्लीडिंग होती है चाहे वह खांसी करने पर आए, वैजीना से, यूरीन में, स्टूल में या ब्रेस्ट से तो इसके लिए डाक्टरी सलाह अवश्य लें।
डाइट की वजह से अपच, डायरिया गैस या ब्लोटिंग हो सकती है लेकिन यदि यह समस्या एक सप्ताह से ज्यादा हो रही है तो अपने डाक्टर से सलाह लें।
यदि आपको जल्दी जल्दी बुखार आता है या इन्फेक्शन हो रहा है, दर्द होता है या फ्लू जैसे लक्षण है तो यह ल्यूकिमिया हो सकता है।







शनिवार, 1 अप्रैल 2017

सिर्फ गप मारती हैं महिलाएं- डा. अनुजा भट्ट


अक्सर लोग यह कहते हैं महिलाओं से सीक्रेट बात शेयर नहीं करनी चाहिए क्योंकि इनके पेट में वो टिकती नहीं या यूं कहें पचती नहीं हैैं। लेकिन क्या पुरुष ऐसा नहीं करते ? क्या पुरुष के पेट में सारी बातें पचती है। 

महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया बहुत तंज भरा है। उनकी तरक्की को लेकर शायद ही मुहावरा गड़ा गया होगा, लेकिन उनकी मजाक उड़ाते हुए बहुत सारी उक्तियां आज के दौर में भी प्रचलित हैं जबकि हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी तरक्की से अपने साहस और हुनर का परिचय दिया है। पेश है महिलाओं के प्रति समाज की सोच और उस सोच पर अपराजिता की प्रतिक्रिया ‐‐‐‐‐
इनके पेट में बात नहीं टिकती 
माॅम डे केयर की मनीषा कहती हैं कि मान्यता के अनुसार युधिष्ठर द्वारा द्रौपदी को दिए गए श्राप के अनुसार ही महिलाएं अपनी बात पचा नहीं पाती। यह सब जानते ही हैं कि द्रौपदी अपने पांचों पति के प्रति समभाव से रहती थी और किसी की कोई बात साझा नहीं करती थी जबकि वह साझा पत्नी थी। एक बार युधिष्ठर ने कुछ जानना चाहा तो द्रौपदी ने मना कर दिया तब क्रोध में युधिष्ठर ने श्राप दिया कि महिलाएं आज के बाद से कोई भी बात छुपा नहीं पाएंगी। हंसते हुए मनीषा कहती हैं कि इस युग में तो महिलाएं टेक्नोसेवी हैं इसलिए वह अपनी उम्र और बहुत सारे रहस्य छुपा लेती हैं।
इनकी तो बातें ही खत्म नहीं होती 
 जरा अपने दिल पर हाथ रख कर सोचिये कि क्या गॉसिप सिर्फ महिलाएं ही करती हैंे? आपने दोपहर के समय किसी पेड़ के नीचेे बैठे हुक्के पीते, चाय की ठेली या पान के खोखे के पास खडे हुए पुरूषों को इधर-उधर की बातें करते हुए नहीं देखा। फिर यह कहना कि केवल महिलाएं ही गॉसिप करती है कहां तक ठीक है।

तैयार होने में देर लगाती है 
ऐसा कहते हैं कि महिलाएं तैयार होने में समय लेती है लेकिन आप यह तो मानेंगे कि महिलाओं के ऊपर घर-परिवार की भी जिम्मेदारी होती है जिन्हें निभाते निभाते उन्हें थोड़ा समय लग जाता है। आप कहते है मुझे तो तैयार होने में इतना समय नहीं लगता है क्योंकि आप को सिर्फ खुद को तैयार करना है लेकिन उन्हें घर भी देखना है, बच्चों को भी तैयार करना है और खुद भी तैयार होना है।  आप ये बताएं क्या आप उनकी जगह होकर उनकी तरह जिम्मेदारियां निभा सकते है । जब आप अपने जीवनसाथी का चुनाव करते के समय उनके सववो और पहनावे को बवदेपकमत करते हैं तो उनके तैयार होने के समय में भी धैर्य रखना सीखना होगा।
गाड़ी अच्छे से नहीं चला सकती 
रश्मि आनंद कहती हैं कि यह आरोप निराधार है। गाड़ी चलाने के लिए आपको नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास की जरूरत होती है और यह दोनो गुण महिलाओं में जन्मजात होते हैं। इसलिए ऐसा कहना कि महिलाएं गाड़ी नहीं चला सकती उनके महत्व को कम करता है। होता यह है कि रोजाना के ंबबपकमदज के पीछे की वजह जानना हम लोग पसंद नहीं करते या उन पर चर्चा भी नहीं करते।  अगर  कोई महिला या कोई लड़की कितनी भी ठीक से गाड़ी चलाना जानती हो और ‘खुदा न खास्ता‘ किसी छोटी मोटी दुर्घटना का शिकार हो जाये तो आप उसे एक बहस का विषय बना लेते है कि महिलाओं को गाड़ी ड्राइव नहीं करनी चाहिए उन्हें तो ठीक से वअमतजंाम करना भी नहीं आता। ,जबकि सच्चाई ये है महिलाएं पुरुषों की तुलना में कंही अधिक संयम से गाड़ी को ड्राइव करती है और कम जल्दबाजी दिखाती है। अक्सर वो भीड़-भाड़ वाले इलाके की अपेक्षा जंहा से ड्राइव कर गाड़ी ले जाना आसान हो वंहा से जाना पसंद करती है चाहे वो रास्ता उनके लिए कुछ लम्बा ही क्यों न हो।
घर को समय नहीं देती 
 महिलाएं घर सँभालने के लिए बनी है ऐसे में जॉब के साथ-साथ वो घर को अच्छे से नहीं संभाल सकती है यह आम धारणा है। ऐसे सवाल करने वालों से डा तुलिका कहती हैं कि समाज का यह रवैया गुस्सा दिलाने वाला है।  हम अलग-अलग में ऊँचे पदों पर काम कर रही महिलाओं को पढके सुनके उनके बारे में अच्छी-अच्छी बातें बोलते है और महिला सशक्तिकरण मुद्दे के लिए उनके उदाहरण भी देते हैं लेकिन जब घर परिवार की बात आती है तो महिलाआें के प्रतिं इतने क्रूर क्यों हो जाते हैं । कोई भी महिला करियर या परिवार की जिम्मेदारी में पहले परिवार को चुनती है। परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए लाखों के पैकेज वाला जॉब छोड़ने का फैसला ले सकती है भले ही कितनी जीनियस क्यों न हो। क्या कोई पुरूष ऐसा कर सकता है?
वो पुरुषों पर नियंत्रण रखती है 
उमा गुप्ता जी कहती हैं आखिर हम महिलाएं अपने पति को क्यों नियंत्रण में रखेंगी लेकिन यदि पति गलत रास्ते पर जा रहा है, परिवार की उपेक्षा कर रहा है तो उसे सही रास्ते पर लाने के लिए यदि कठोर निर्णय लिए जाएं तो फिर अप्रिय संवाद क्यों हो। अगर मां अपने बेटों को सही संस्कार देकर बड़ा करे उसे महिलाओं का सम्मान करना सिखाए तो क्या  किसी महिला के साथ यौन शोषण जैसी घटना हो, कोई महिला दहेज के लिए प्रताड़ित हो? क्या किसी भी महिला के साथ जोर जबरदस्ती होगी ? पुरूषों को चाहे वह बेटे हों, पति हों, दोस्त हों कंट्रोल में रखना जरूरी है पर उसे डोमिनेट करना एकदम गलत। महिलाएं अपने पति को दबाव में रखती हैं यह कहना तर्कहीन है।
वैसे तो महिला उत्थान की बातें की जाती हैं,  लम्बे चाैड़े भाषण दिए जाते हैं,  ज्ञान बांटा जाता है और उसके बाद भी किसी महिला के आचरण पहनावे रहन सहन जैसी बातों का हम मजाक बनाते हैं तो यह कितना सही है।  कृप्या  अपनी सोच बदलिए और एक आदर्श माहौल बनाऐं जिसमें कि उनके लिए भी वही सम्मान और समान स्तर हो जिसकी आप बातें करते हैं।

बुधवार, 29 मार्च 2017

चिड़ियों के डिजाइनर घर

प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा यह है कि बहुत सारे पक्षी अब विलुप्त होते जा रहे हैं। सुबह उठते ही चिड़ियों की चहचहाहट हमें ऊर्जा से भर देती है। पर्यावरण संरक्षक चिड़ियों की वापसी के लिए नेस्ट बाॅक्स लेकर स्वागत में खड़े हैं।

चिड़िया की चहचहाहट ने फिर से वापसी की है पर्यावरण संरक्षक नेस्ट बाॅक्स को नए-नए तरीके से डिजाईन कर रहे हैं। चिड़ियों का इनकी तरफ आकर्षित होना और इनको अपना घर स्वीकार करना पर्यावरण संरक्षकों को अधिक उत्साह के साथ और भी नए डिजाईन के नेस्ट बाॅक्स बनाने के लिए प्ररित कर रहा है।
चिड़िया ज्यादातर अपना घोंसला इंसानों द्वारा बनाए हुए घरों में, दीवारों, मीटरों के पीछे में ही बनाया करती हैं।  हम सभी इनकी चहचहाहट सुनकर ही बड़े हुए हैं।  लेकिन पिछले कुछ दशकों में मकान बनाने के लिए शीशे की दीवारें, स्टील का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही कम होते पानी के óोत भी कम हुए हैं जिसकी वजह से कीड़े मकौड़े भी कम हो गए हैं और यही कीड़े मकौड़े चिड़ियों का आहार है। 
जवाहर नगर जयपुर के रहने वाले रविंद्र पाल सूद ने दो साल पहले नोटिस किया कि उनके आसपास चिड़ियों की चहचहाहट कम हो गई है।  उन्हें लगा चिडियांें की संख्या में कमी आई है और वह गायब होती जा रही हैं।  सूद भारतीय बर्ड फेयर में कुछ पर्यावरणविदों से मिले और उन्होंने उन्हें एक नेस्ट बाॅक्स और एक फीड बाॅक्स दिया जिसे कि उन्होंने दीवार पर टंगा दिया।  जब उन्होंने देखा कि चिड़िया बाॅक्स को बहुत अच्छे से ले रही है। तो वह और नेस्ट बाॅक्स खरीद लाए।  जिसमें बहुत सी चिडिया आकर रहने लगीं और उसे अपना घर बना लिया।  इसके बाद तो उनका बागीचा चिड़ियों की चहचहाहट से गूंज उठा।
इसी तरह आगरा के रहने वाले राकेश खत्री पहले सड़क पर बिखरे हरे नारियलों को इकट्ठा कर, उनके चारों ओर कूलर की घास लपेटकर घोंसला बनाते थे लेकिन इस तरह के घोंसलें ज्यादा दिन नहीं चलते थें फिर उन्होंने नारियल जटा, जूट की रस्सी और बांस के टुकड़ों से घोंसला बनाना शुरू कर दिया।  उन्होंने अपने इस अभियान में स्कूलों के बच्चों को भी जोड़ा।  वह उन्हें घोंसला बनाना सिखाते हैं साथ ही विभिन्न पक्षियों के बारे में जानकारी भी देते हैं।  राकेश जी ने गौरैया पर दो छोटी-छोटी किताबें भी लिखी हैं ताकि बच्चों को जानकारी दी जा सके और जल्द ही वह गौरया संरक्षण के बारे में वेबसाइट भी शुरू करने जा रहे हैं।
हमें भी नेस्ट बाॅक्स बनाने के आइडिया पर ध्यान देना चाहिए।  एक छोटा सा वुडन बाॅक्स और फीडर एक प्रजाति को फिर से बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।  बर्ड फेयर के कार्यकर्ताओं द्वारा अभी तक कुल 1200 बक्से जयपुर भेज दिए है और इस मुहिम के द्वारा तकरीबन 8000 चिड़िया हमारे पर्यावरण में नई आ गई हैं, जोकि वाकई खुशी और गर्व की बात भी है।  हमें इस मुहिम को पूरे देश में ले जाना है।
कहने का अभिप्राय यह है कि इस जीवन को सुंदर बनाने के लिए हमें प्रकृति के साथ चलना होगा और उसके खूबसूरत तोहफों चाहे वह नदी, पर्वत, पहाड़ हों या पशु-पक्षी, फूल और वृक्ष सबको  सहेजना होगा।

मंगलवार, 28 मार्च 2017

एथनिक स्टाइल में आपका घर-डा. अनुजा भट्ट

 
एथेनिक स्टाइलमें आपका घर विलक्षण और चमकदार आभा लिए दिखाई देगा। इस स्टाइल में घुमावदार फर्नीचर को शामिल करें। बाजार में इस तरह के फर्नीचर के कई डिजाइन मौजद हैं। एथेनिक स्टाइल में कई संस्कृतियों का समावेश है।

एथेनिक प्रिंट चूज करने के लिए आप ईस्ट से लेकर वेस्ट तक के पैटर्न्स ट्राय कर सकती हैं एथेनिक स्टाइलमें कमरे; एकांत का पर्याय लगते हैं। जहां अपने लिए दो पल गुजारे जा सकें। चमकीले रंगों का प्रयोग इसकी खासियत है। इस तरह के;स्टाइल में; रत्नों का भी प्रयोग किया जाता है। यहां पर कुछ ऐसीबातें बताई जा रही हैं जिनका; प्रयोग करके आप अपने घर को एथेनिकस्टाइल में बदल सकते हैं

एथेनिक स्टाइल फर्नीचर- 

कर्व स्टाइल इसकी विशेषता है। अपने ड्राइंगरूम के लिए जोसोफा लें वह बिना हत्थे वाला होना चाहिए।; रंगों में वाइन रेडकलर का प्रयोग करें  किचन में गहरे रंग की लकड़ी का प्रयोगकरे। खासकर केबिनेट बनवाने; के लिए।; गाढ़े रंगों को महत्वदें। फेब्रिक, वॉल हैंगिग, परदे सभी में यही पैटर्न चलेगा। कसीदाकारीइस थीम की विशेषचा होती है। कुशन कवर, बेड कवर और टेबल कवर के रुप मेंइसका प्रयोग करें। ये सभी चीजें कमरे को एथेनिक लुक देतीहैंबेड की ऊंचाई कम होनीचाहिए। मच्छरदानी लगाने वाले खूबसूरत; सेटेंड भी एथेनिक लुक देतेहैं। कमरे के दोनो तरफ टेबल लगी हो। बाथ रुम में रॉट आयरन या ब्रासवेयर का टॉवल रेल्स लगाएं। कपड़े टांगने के लिए जो हुक लगाएं वह हीएथेनिक स्टाइल के होने चाहिए।

एथेनिक स्टाइल का फर्श-

 टेरोकोटा स्टाइल और स्टोन का प्रयोग करें। यह आपके घर कोभव्यता प्रदान करेंगे और आपका घर एथेनिक लुक में नजर आने लगेगा।;हर कमरे में रग्स का प्रयोग करें। बेडरूम में मोसका फ्लोरिंग करें।फर्श पर बिछाने के लिए कारपेट की जगह ब्राइट कलर के रग्स का इस्तेमालकरें। यह आपके कमरे को एथेनिक लुक देगा।एथेनिक स्टाइल के ही फेब्रिक का प्रयोग करें। जो रंग सबसे ज्यादा चलते हैं वह हैं चमकदार गहरे और कसीदारी किए गए। यह अधिक्तर परदे, कुशन और बेडसीट में प्रयोग में लाए जाते हैं। मोरक्कन टच के लिए हैवी वैलवेट का प्रयोग करें। भारतीय शैली को दिखाने के लिए कसीदारी पर जोर दें। गोल्ड ,सिल्वर धागों से की गई कसीदाकारी भारतीय एथेनिक लुक को दर्शाती है।

कलर स्कीम- 

गोल्ड, टरमिनिक, रेड, ब्राउनकोबेल्ट; ब्लू, लाइम ग्रीन, हॉट पिंक, पिकॉक शेड्स। पिस्ता,वाइन, मरून, गोल्ड और आइवरी शेड्स।एक्सेसरीज में भी इन रंगों का प्रयोग करें।
 पर्दे- एथेनिक स्टाइल पर्दे में सीसे का प्रयोग अच्छालगता है। साडिय़ों का प्रयोग भी एथेनिक लुक. देता है। कुशन में बीड्सका प्रयोग करें। 

 वॉल पेंटिंग -

 एथेनिक स्टाइल की वाल पेटिंज का प्रयोग करें। यहां भी वहीं कलर का; प्रयोग करें इस तरह के कमरों में; रहने पर घनिष्ठता का अहसास होता है। नजदीकियां बढ़ती वॉल हैंगिग, कारपेट्स, लैंटर्स, वॉल स्कान्स का प्रयोग करें।

चमकदार रोशनी के प्रयोग से बचें।

शनिवार, 25 मार्च 2017

ममता की डोर थामें सजाएं बच्चों का कमरा

डा. अनुजा भट्ट
 हमेशा बदलावों और नए नए ट्रेंड पर जोर देता है। टेंड भी ऐसे होने चाहिए जिसेस्वीकार करने में ज्यादा दिक्कतों का सामना न करना पड़े । माता-पिताके अलावा डिजाइनरों ने भी यह मान लिया है कि बच्चों के कमरे का अर्थ कार्टून वाले पर्दे या बेबी पोस्टर से सजे कमरे से नहीं है। अब यहकमरा खास कमरा है। बाजार में किड्सफर्नीचर अलावा बैड, पर्दे,कुशन सभी कुछ बच्चों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे है। कमरे को सजानेके लिए एक्सेसरीज हैं, जिसमें पपेट के अलावा छोटी छोटी घंटियों की  मांग ज्यादा है।;इंटीरियरडिजाइनर मेहर दिवानिया कहती हैं, कि बच्चों के लिए अब पिंक और ब्लूबोरिंग हो गए हैं बंक बेड्स और क्यूट एक्सेसरीज भी अब फैशन में नहींहैं। लेकिन 0 से 6 साल के बच्चों का कमरा सजाने के लिए आपके पास बहुतसारे विकल्प हैं इसीलिए बच्चों का कमरा सजना सबसे ज्यादा आसान है। इसउम्र में बच्चों की अभिरुचियां स्पष्ट नहीं होती। वाल माउंटेन गेम्स,सॉउ्ट बोड्र्स, स्लाइड्स के अलावा बंक बेड्स, ट्रंडल बेड्स भी कमरे कीजरूरत हो सकते हैं। लेकिन सबसे पहले यह गौर करना है कि उपयुक्तफर्नीचर और स्टोरेज कैसे हासिल किया जाए।इतनी कम उम्रके बच्चे ऐसी जगह तलाश करते हैं जो परीकथा जैसी हो। इसीलिए सुंदर औरव्यवहारिक फर्नीचर खरीदें। सपाइडरमैन, क्रिकेट बॉबी डॉल जैसी चीजेंवॉलपेपर के रूप में लगाएं।; वालपेपर का प्रयोग थीम के साथ कियाजा सकता है।मार्केट में बेबी बायकी अपेक्षाकृत बेबी गर्ल के लिए ज्यादा च्वाइस है। उनके कमरे ज्यादाइनोवेटिव है। थीम के तौर पर कभी उनका कमरा गुडिय़ों से सजा होता है तोकभी पूरा का पूरा कमरा किसी खास रंग से। वैसे बेबी गर्ल को पिंक कलरज्यादा पसंद है और इसके लिए बैड कवर से लेकर, तौलिया, लैंप शेड सभीपिंकी पिंकी नजर आते हैं यहां तक कि उनकी गुडिय़ा के कपड़े,जूते, हेयर बैंड, फ्लावर पोट भी गुलाबी।अगर आप किसी दुविधामें हैं कि कैसे मैं उसके कमरे को सजाऊं तो अपनी बच्ची के मन पसंद रंगऔर उनकी पसंद के कपड़ों पर गौर कीजिए। बाजार में उनके लिए जो परिधानबन रहे है उनकी डिजाइन पर गौर करे आपको वहीं से कोई आइडिया क्लिक करजाएगा, क्योंकि ट्रेंड यहीं से शुरू होता है। आपको जानकर आश्चर्य होगाजब प्यारी प्यारी बच्चियां खूब घेरदार फ्राक पहनकर नाचती है तो वहअपनी खुशी प्रकट करती है इसीलिए उनके कमरे में झालर का प्रयोग करनाचाहिए यह झालरचद्दरों से लेकर पर्दो और बैडकवर तक में दिखाई देसकती है। इसी तरह उनको चौखनी प्रिंट वाले या फिर सीधी धारियों वालेफेब्रिक पसंद आते हैं। इसकी वजह है स्कूल की ड्रेस।क्या आपने अपनीनन्हीं बिटिया की ड्राइंगबुक देखी है वह किसी एक रंग का प्रयोग नहींकरती बल्कि उसे गाढ़े रंग पसंद आते है एकदम चटक। सफेद को तो वह रंगमानती ही नहीं। वह तरह तरह के गोले बनाती है और उनमें रंग भरती है।इसीलिए अगर आप पोलका डाट प्रिंट वाले पिलो उसके लिए चुनेंगी तो उसेपसंद आएंगे। अपनी बेटी की जो तस्वीरे आपको पसंद हैं और जिन्हें देखकरउसका बचपन याद आता है तो उसे फोटो फ्रेम में बंद न करें अब यह फैशनपुराना पड़ गया है। आप चाहें तो उन फोटो को तौलिए, चादर, टी शर्ट याफिरकाकरी में संजो सकती हैं यह ट्रेंड एकदम नया है। अगर आप काबच्चा आड़ी तिरछी रेखाएं खींच रहा है तो खींचने दीजिए और उसे ्िकसीपेंटिंग थीम में बदल दीजिए। किड्स पेंटिंग इन दिनों एकदम नए टेंड केतौर परउभर रही है। गुडिय़ों की जगह कठपुतलियों ने ले ली है।आर्ट क्राफ्ट काप्रयोग इंटीरियर के साथ किया जा रहाहै।पर अगर बच्चोंकमरे को पेंट करने की बात करें तो बच्चों को काला, स्टील और ग्रे कलरपसंद है लेकिन इसके बाद वह लाल कलर पर ही फोकस करते हैं।उनकेऔर पसंदीदा कलर हैं- इंडिगो ब्लू, यलो, आरेंज, ब्राइट पिंक औररस्ट। आजकल कई तरह केप्रिंट वाले वालपेपर बाजार में मौजूद है। फ्लोरल प्रिंट के अलावाएनिमल प्रिंट पर ज्यादा जोर है। वाल पेपर के साथ साथ बार्डर भी मौजूदहै। पर्दे ,बार्डर और वाल पेपर के संयोजन से बहुत बदलाव लाया जा सकताहै।इसके अलावा वास्तुशास्त्र और फैंगशुई जैसी तमाम देशी विदेशी पद्धितियों पर भी लोगों की नजर है । माना जाता है कि ये पद्धतियां सकारात्मक ऊर्जा पैदा करती है।अपने बच्चों के कमरे में कभी भी झाडफ़ानूस न लगाएं। बड़े हो जाने के बाद
फैंसियर,इनडायरेक्ट लाइट लगा सकते हैं। अगर आप अपनी बच्ची का कमरासजाने जा रही है तो मल्टीपरपज फर्नीचर की तैयारी करें जो बाद में भी काम आ सके।

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अंजलि के लिए वह दिन सबसे खौफनाक था। इस दिन तो वह अपने अरमानों की डोली सजाए आई थी। कई सपने थे कई उम्मीदें। पर... वह वक्त जब अंजलि ने अपना माय...