सोमवार, 3 सितंबर 2018

दूसराें का दिल जीतने से पहले खुद के दिल का ख्याल ऱखिए- डा. दीपिका शर्मा

रजोनिवृति के  बाद महिलाओं को  हृदय रोग का खतरा अधिक होता है।
तनाव, खानपान में अनियमितता, अपनी सेहत के प्रति अनदेखी जैसे तमाम कारण हैं, जिनके चलते महिलायें दिल की बीमारी की अधिक शिकार हो रही हैं। महिलाओं की स्थिति पुरुषों की अपेक्षा अधिक चिंताजनक हैं क्योंकि महिलाओं के मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों की चपेट में आने के खतरे ज्यादा होते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कोरोनरी धमनियां संकरी होती हैं। इसी वजह से उन्हें धमनियों में अवरोध आने की समस्या अधिक होती है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को एकमात्र लाभ एस्ट्रोजेन हार्मोन के रूप में मिलता है। जो महिलाओं के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ऊपर उठाता है तथा खराब कोलेस्ट्राल के स्तर को कम करता है। लेकिन रजोनिवृति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर घट जाता है और इसलिए इससे मिलने वाली सुरक्षा भी कम हो जाती है और रजोनिवृति के दस साल बाद महिलाओं को हृदय रोग का खतरा पुरुषों के बराबर और कई मामलों में अधिक होता है।
सामान्य जोखिम कारकों के अलावा, आज महिलाएं जीवनशैली से जुड़े अनेक अन्य कारकों के कारण भी हृदय रोगों की चपेट में आ रही हैं. इन में से कुछ में डब्बाबंद भोजन यानी प्रोसैस्ड फूड का अधिक उपभोग शामिल है जो कि संतृप्त वसा, चीनी और नमक में समृद्ध होता है. साथ ही, साबुत अनाज की कमी, उदासीन जीवनशैली और तनाव के स्तर में वृद्धि जब अन्य कौमोरबिड स्थितियों के साथ मिल जाते हैं तो महिलाओं में एस्ट्रोजेन स्तर कम होने लगता है. इसे महिलाओं के बीच हृदय रोगों में वृद्धि के लिए शीर्ष कारणों में से एक माना गया है.
जीवनशैली में बदलाव
रक्तचाप और मधुमेह पर काबू रखें : समय पर अपने रक्तचाप और शर्करा के स्तर को जांचना महत्त्वपूर्ण है. किन्हीं भी तरह की जटिलताओं से बचने के लिए इन पर नियंत्रण रखें.
व्यायाम करें- दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम की जरूरत है। इसके लिए एरोबिक गतिविधियां, जैसे टहलना , जॉगिंग,तैराकी, साइक्लिंग आपके हृदय के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक हफ्ते में 4 से 6 बार कार्डियो कसरत करना भी अच्छा रहता है।
मोटापा कम करें - मोटापा कई बीमारियों का कारण हो सकता है। वजन बढ़ने से रक्तचाप व कोलेस्ट्रोल की समस्या हो सकती है। इसके अलावा डायबिटीज भी हो सकता है जिससे शरीर में इंसुलिन भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद नहीं करता है। टाइप-2 डायबिटीज से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान ना करें -धूम्रपान करने वाली महिला में हार्ट अटैक की संभावना धूम्रपान न करने वाली महिला से दोगुना अधिक होती है क्योंकि सिगरेट में मौजूद टौक्सीन धमनियों को सीधा प्रभावित करते हैं। जिससे धमनियों में रक्त संचार के लिए बाधाएं पैदा हो जाती हैं। धूम्रपान से खून की नलियां चिपचिपी हो जाती हैं, जिससे रक्त संचार में अधिक कठिनाई के कारण स्ट्रोक की संभावना बनी रहती है।
स्वस्थ भोजन खाएं : मोटापा दिल की बीमारी के लिए जोखिम वाले कारकों में से एक है, इसलिए स्वस्थ भोजन अपना कर वजन को काबू में रखना बेहतर है. अपने आहार में बहुत सारे ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें.
तनाव प्रबंधन : तनाव हृदय की सेहत पर बुरा असर डालता है, इसलिए तनावमुक्त रहें.
हृदय रोग से बचाव के लिए महिलाओं को अपना खास खयाल रखना चाहिए साथ ही रजोनिवृत्ति के बाद कुछ जरूरी जांच अवश्य कराएं जिससे आप हृदय रोग के खतरों से बच सकती हैं।

रविवार, 2 सितंबर 2018

मथुरा के पेड़े-निशा मधुलिका

मथुरा के पेड़े से अच्छे और स्वादिष्ट पेड़े दुनियां भर में कहीं भी नहीं मिलते. आप यदि पारम्परिक मथुरा जी के पेड़े  का एक टुकड़ा भी चखते हैं तो कम से कम चार पेड़े से कम खाकर तो रह ही नहीं पायेंगे. आईये आज मथुरा जी के पे़ड़े बनाते हैं.

 इसे बनाने के लिये मावा और  का उपयोग होता है, मावा और  (दाने दार बूरा) आप बाजार से ला सकते हैं यदि बाजार में न मिले तो घर में भी मावा बना सकते हैं देखिये एवं  यदि आप बाजार से मावा ला रहे हैं तो दानेदार मावा लेकर आयें.

मथुरा जी के पेड़े  बनाते समय मावा को अधिक से अधिक भूना जाता है. मावा को जितना अधिक भूनेंगे बने हुये पेड़ों की शेल्फ लाइफ उतनी ही अधिक होगी. मावा भूनते समय बीच बीच में थोड़ा थोड़ा दूध या घी डालते रहते हैं जिससे इसे अधिक भूनना आसान हो जाता है. भूनते समय मावा जलता नहीं और मावा का कलर हल्का ब्राउन हो जाता है. तो आइये बनाना शुरू करते हैं मथुरा के पेड़े.
आवश्यक सामग्री
खोया या मावा - 250 ग्राम (1 कप से ज्यादा)
तगार बूरा - 200 ( 1 कप)
घी - 2-3 टेबल स्पून
छोटी इलायची - 4 - 5 (छील कर कूट लीजिये)
विधि -
मावा को क्रम्बल कर लीजिए.
पैन गरम करके उसमें क्रम्बल किया हुआ मावा डाल दीजिए. मावा को लगातार चलाते हुए मीडियम आंच पर डार्क ब्राउन होने तक भून लीजिए. मावा के हल्के ब्राउन होने पर इसमें 2 चम्मच घी डाल दीजिए और ऎसे ही बीच-बीच में मावा में घी डालते हुए मावा को डार्क ब्राउन होने तक भून लीजिए.
अगर मावा सूखा लगे तो इसमें 2 टेबल स्पून दूध डालकर मावा को लगातार चलाते हुए दूध के सूखने तक भून लीजिए. मावा के भुन जाने पर गैस बंद कर दीजिए लेकिन मावा को चलाते रहिए क्योंकि कढ़ाही गरम है.
माव के हल्के गरम रह जाने पर इसमें इलायची पाउडर और थोड़ा सा तगार पेड़ों पर लपेटने के लिए बचाकर बाकी तगार डाल दीजिए. मिश्रण को अच्छे से मिला दीजिए. पेड़े बनाने के लिये मिश्रण तैयार है.
मिश्रण से थोड़ा सा मिश्रण हाथ में लेकर गोल करके, हाथ से दबाकर पेड़े का आकार दीजिये, पेड़े को प्लेट में रखे हुये बूरे में लपेटकर प्लेट में रखते जाइए. एक एक करके सारे पेड़े इसी तरह तैयार करके प्लेट में लगाते जाइये.
स्वाद में लाज़वाब मथुरा के पेड़े (Mathura Peda) तैयार हैं. मावा को बहुत अच्छे से भूनने पर ये खुश्क हैं. इसलिए इन पेड़ों को फ्रिज में रखकर के एक महीने तक खाया जा सकता है.
सुझाव
बीच -बीच में मावा में थोड़ा-थोड़ा घी इसलिए डाला जाता है ताकि मावा जले ना.
मावा को बिल्कुल ठंडा ना होने दें, हल्के गरम रहते ही पेड़े बना लीजिए वरना मावा खिला खिला हो जाएगा और पेड़े नही बन पाएंगे.
मथुरा के पेड़े को गाय के दूध से बने मावा से बनाया जाए, तो वो नेचुरल रूप से ब्राउन बनता है. उसमें अलग से घी और दूध डालने की आवश्यकता नही होती.
मावा को कल्छी से लगातार चलाते हुए भूनिए, यह तले में लगना नही चाहिए.
साभार- निशा मधुलिका डॉट काम से

मैं पुरुष नहीं हूं, औरत हूं- उड़न परी दुती चंद

आज जिस दुती चंद काे हम उड़नपरी के नाम से जान रहे हैं क्या आपकाे मालूम है कि उनकाे यहां तक पहुंचने से पहले किन किन आराेपाें का सामना करना पड़ा। ईएएएफ ने दुती के शरीर में हाइपरैंड्रोजेनिज्म की अधिक मात्रा में पाए जाने के चलते उनपर प्रतिबंध लगा दिया था। यह हार्मोन पुरुषों वाले गुण विकसित करता है। जिसके कारण दुती पर पुरुष होने का आरोप लगाया गया था। प्रतिबंध के खिलाफ भारतीय धाविका दुती ने कैश में अपील दायर की थी। जिसके बाद कैस ने आईएएफ के नियमों के खिलाफ दुती की अपील को आंशिक तौर पर सही पाया। कैस ने हाइपरैंड्रोजेनिज्म नियम को निलंबित किए जाने के बाद दुती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की छूट दे दी।

मेडिकल भाषा हाइपरैंड्रोजेनिज्म में वह स्थिति है जब शरीर में एंड्रोजेनिज्म हार्मोस की मात्रा बढ़ जाती है। यह हार्मोन ही इंसान में पुरुषों वाले गुण विकसित करता है। सबसे कॉमन एंड्रोजेनिज्म हार्मोन टेस्टोस्टेरोन है। दुती के शरीर में इस हार्मोन की मात्रा ज्यादा पाई गई थी। ऐसा हार्मोन की वजह से होता है और महिला में सामान्य से अधिक टेस्टोस्टेरोन बनता है। इसके बाद दुती ने आईएएएफ के लिंग परीक्षण से जुड़े नियम के खिलाफ कैस में अपील की थी।

दुती ने आईएएएफ के फैसले को कैस में चुनौती दी और फैसला भी इस एथलीट के पक्ष में आया। कैस ने कहा कि हार्मोन की वजह से किसी महिला में सामान्य से अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरान बनता है तो ऐसे में उसे पुरुष करार देना गलत है।

कैस से राहत मिलने के बाद इस प्रतिभावान एथलीट ने अपना अगला लक्ष्य रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का बनाया है। दुती कहती हैं कि, ”यह मेरे जीवन का सबसे खुशी का पल है। कोर्ट के निर्णय आने तक मैं नहीं जानती थी कि भविष्य में क्या होने वाला है। जैसे ही मुझे कैस के निर्णय के बारे में पता चला मैंने बहुत राहत महसूस की। मुझे लगा कि अब मैं फिर अपनी पुरानी जिंदगी में लौट सकती हूं। प्रतिबंध के बाद ट्रैक से दूर रहना मेरे लिए बेहद मुश्किल दौर था। मेरा भविष्य अनिश्चित सा हो गया था लेकिन अब मुझे राहत है।



दुनिया के सबसे तेज धावक जमैका के उसैन बोल्ट को अपना आदर्श मानने वाली दुती चंद का जन्म 3 फरवरी 1996 को ओडिशा के चक्र गोपालपुर गांव के एक गरीब जुलाहे के यहां हुआ। 19 वर्षीय दुती पहली बार तब सुर्खियों में आयी जब 2012 में इस धाविका ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप के अंडर-18 वर्ग में महज 11.8 सेकेंड में 100 मीटर की दूरी तय कर ली। इसके बाद दुती ने पुणो में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में 200 मीटर का फासला 23.811 सेकेंड में तय कर ब्रांज मेडल जीता। इसी साल दुती ग्लोबल एथलेटिक्स की फर्राटा रेस के फाइनल्स में स्थान बनाने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं। 2013 में वह भारतीय एथलीट वल्र्ड यूथ चैंपियनशिप के 100 मीटर रेस के फाइनल्स में पहुंचने में सफल रही। इसी साल दुती ने रांची में आयोजित सीनियर राष्ट्रीय एथलेयिक्स चैंपियनशिप में 11.73 सेकेंड में 100 मीटर और 23.73 सेकेंड में 200 मीटर रेस जीतकर गोल्ड मेडल जीता था।

दुती चंद ने जकार्ता में चल रहे एशियाई खेलों में महिलाओं की 200 मीटर दौड़ और 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया. वह इन दोनों स्पर्धाओं में बहरीन की एडिडियोंग ओडियोंग से पिछड़ गईं.दुती ने स्वदेश लौटने के बाद कहा, उनकी लंबाई थोड़ी कम जरूर है, लेकिन रफ्तार ज्यादा है. प्रशिक्षण में मैं इस चीज पर ध्यान दूंगी.'रजत पदक जीतने वाली फर्राटा धाविका दुती चंद ने का अगला लक्ष्य ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना है. एशियाई खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में दो पदक जीतकर पीटी उषा, ज्योर्तिमय सिकदर जैसी एथलीटों की श्रेणी में शामिल होने वाली दुती ने कहा कि इस जीत के बाद अब वह और कड़ा अभ्यास करेंगी, ताकि ओलंपिक में पदक जीतने का सपना पूरा हो सके.

उन्होंने कहा, ‘इस साल अब कोई बड़ी प्रतियोगिता नहीं है और ओलंपिक के लिए मेरे पास दो साल का समय है. ओलंपिक से पहले अगले साल एशियाई चैंपियनशिप में भी भाग लेना है. इन दो वर्षों में मैं जी जान से अभ्यास करूंगी, ताकि देश का नाम ओलंपिक में भी ऊंचा कर सकूं.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे कड़ा प्रशिक्षण करना है और उसके लिए जरूरी चीजें मुझे मुहैया कराई जा रही है, ऐसे में जाहिर है प्रदर्शन अच्छा होगा.’
दुती की इस सफलता पर राज्य सरकार ने उन्हें तीन करोड़ रुपये (एक पदक के लिए डेढ़ करोड़ रुपये) नकद पुरस्कार और अभ्यास तथा प्रशिक्षण का खर्च उठाने की घोषणा की है.उन्होंने कहा, ‘अब इस घोषणा के बाद मैं खुले दिमाग से अभ्यास कर सकूंगी.’

शनिवार, 1 सितंबर 2018

कहानी- निर्णय - उर्मिल सत्यभूषण

डा. रत्नाकर की कृति
काम्या ने तीनों ड्रामों में बेस्ट परफार्मेंस दी थी। एक ड्रामे में वह स्कूल गर्ल बनी थी। स्कर्ट में सातवीं आठवीं कक्षा के विद्याार्थी का रोल किया था। कपड़े या परिधान पूरा व्यक्तित्व ही बदल देते हैं। दूसरे में वह एक फ्लर्ट युवती का रोल कर रही थी और तीसरी में युवा विधवा का। तीनों अलग अलग तरह के किरदार थे पर बड़ी निपुणता से उसने निभाए थे।
उम्र उसकी होगी कोई तीसक साल पर लगती बहुत कम थी। शरीर बिल्कुल छरहरा था। चेहरा बेरौनक था बेशक उसे सुसज्जित करके रखती थी हालांकि चुलबुलेपन के आवरण में चेहरे के एक्सप्रेशन दबे छुपे रहते थे। नजदीक से बात करने पर आंखों का खालीपन महसूस होता था और शरीर पर भी नवविवाहिता जैसी लुनाई या स्निग्धता दिखाई नहीं देती थी। ऊपर से वह बेपरवाह खिलंदडी हिरणी सी दिखाई देती थी ‐‐‐‐ सारे ड्रामा ग्रुप की एक्टीविटीस में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थी। घूमना, माॅल में जाना, पिक्चर देखना, लड़कों के साथ बेबाक बेलौस हो बतियाती, हंसती, मजाक करती, कभी कभी तो फ्लर्ट जैसा व्यवहार करती।
वे लोग खुलकर बातें करते। अपने रिलेशनशिप को भी। ड्रामें के कम्पलीकेटेड चरित्रों को लेकर भी चर्चायें होती कि ऐसे चरित्र भी होते हैं?  तब जाकर थोड़ा सा भेद खुला या बल्कि सभी अभिनेता अभिनेत्रियों के अन्तद्र्वन्द्व और मनोग्रन्थियांे, मनोविकार उजागर होने लगे थे।
पता चला काम्या को भी डिप्रेशन ने ही घेर रखा था कि उसने ड्रामा ग्रुप का विज्ञापन देखकर ही वह ग्रुप ज्वाइन किया था। वह अपनी शादी से संतुष्ट नहीं थी। उसकी शादी हुए दो साल हो गए पर शादीशुदा जीवन का शुभारंभ नहीं हुआ था। सब उससे सहानुभूति रखते थे पर किसी ने उसकी प्यास बुझाने की जाने या अनजाने कोशिश नहीं की थी। सभी खिलाड़ी (अभिनेता लोग) संस्कारी और विचारशील थे। नजदीकियां बढ़ने लगीं तो प्यासे तनमन की पुकारें भी सुनाई देने लगीं। यदाकदा रिहर्सल के दौरान उसकी कामातुर चेष्टायें मर्यादायें पार करने लगी तो उनकी निदेशक को बात करनी पड़ी।
काम्या उन्हंे अपनी स्थिति समझाते समझाते रो पड़ी।  उसका पति अच्छी पोस्ट पर था। सौम्य, सुदर्शन युवक पर पता नहीं क्यों शादी के निकष पर खरा नहीं उतर पा रहा था। उसने पत्नी से संबध नहीं बनाये। उदास सा बना रहता। काम की व्यस्तता भी बहुत थी। कभी खुलकर काम्या ने भी बात नहीं की। संकोच छोड़कर पहल करने की कोशिश काम्या ने की थी पर पति को तो स्त्रीतन से ही शायद एलर्जी थी। वह उसकी छटपटाती देह को छोड़कर चल देता। वह अपमान का घूंट पी कर रह जाती। कैसे बात करे? वह किससे बात करे?
यूं बाहर घूमने के लिए, खाने पर पति उसे ले जाता बल्कि हनीमून पर भी हो लोग गए थे पर ठंडा गोश्त बेजान ही रहा और वे बेजान ही लौट आए।
अब कानाफूसियां होने लगी थीं कि शायद उसका पति गे है। अब उसका पति उसे कहने लगा था कि वह डायर्वोस ले ले, उसकी तो शादी में या सेक्स में कोई रूचि ही नहीं है। अपनी डायरेक्टर के समझाने पर उसने मनोचिकित्सकों से भी संपर्क किया था पर पति उनके पास जाने को राजी ही नहीं हुआ था ‐‐‐
इसी ऊहापोह में दिन बीत रहे थे।
एक दिन वह रात को ड्रामें की पोशाक में ही लौट आई थी, रात बहुत हो चुकी थी, मेकअप नहीं उतरा था। वह दुल्हन के वेश में थी। दरवाजा कुशाग्र ने ही खोला था। काम्या की मांग में सिंदूर की जगरमग रेखा ने कुशाग्र की आंखो में कामना के डोरे खींच दिये। वह बेहद थकी थी। बोली:- मुझे नींद आ रही है:- मैं सोने जा रही हूं। डायवोर्स पेपर्स तैयार करवा दिये हैं। ये रहे पेपर्स - देख लेना - गुड नाइट और वह साड़ी उतारकर बेहोश सी पलंग पर गिर गई।
कुशाग्र बेडरूम में चला आया। उसकी अस्त व्यस्त देह देखकर घबरा सा गया। उसने उसके खुले बालों को धीरे से छुआ, एक पुलकित लहर उसके भीतर दौड़ गई। उसने उसे स्वतःचालित ही सीधा किया एक चित्ताकर्षक सुगंध उसके नासापुटों में भर गई। उसकी नजर उसकी मांग की रेख और नाक की जगमगाती लौ पर ठहर गई जो उसे बार बार विहृल करने लगी।
एक आंसू काम्या के गाल पर रूका हुआ था धीरे से झुककर कुशाग्र ‐ने उसे होंठों में समेट लिया। अधजगी अधसोई काम्या ने उसके गालों में बाहों का हार डाल दिया। वह उत्तेजित होकर उसे चूमने लगा। वह भी सचेत होकर उससे लिपट गई। जाने कैसे उसके ठंडे तन मन में स्पंदन उठ उठकर बिजलियों में परिवर्तित होते चले गए।  समुद्र ठाठें मारता रहा, मर्यादायें पार करता रहा:
वह कामना के ज्वारों में जानें कितनी उम्रों तक डूबती उतराती रही।
‘सुबह की चाय - आवाज देकर कुशाग्र ने उसे जगाया।
एक नशा सा तारी था। चाय पीकर थोड़ा नशा उतरा, होश आया ‐ ‐‐ पेपर्स पर नजर गई।
ये तुम्हारे डायवोर्स पेपरज काम्या - डायवोर्स चाहिए न तुम्हें।
हां हो डायवोर्स: चाहिए चाहिए मुझे डायवोर्स।
ठीक है:- पहले मैं अपना हक तो ले लूं। कुशाग्र ने फिर उसका मुंह हथेलियों में लेकर लौंग पर उंगली रखी। सिंदूर की रेखा पर आंख गडाई: फिर चूम लिया।
‘काम्या, तुम इतनी सुंदर हो। पहले तो कभी सिंदूर नहीं लगाया। कभी नाक में कील क्यों नहीं पहनी। इन्होंने कितना सुंदर बनाया तुम्हें।
‘‘सुहागरात के लिए क्या इन शर्तों की जरूरत थी कुशाग्र, मेरी देह, मेरा व्यक्तित्व अपने आप में पूर्ण नहीं हैं क्या?
काम्या नहीं: मैंने दो साल तक अपना अपमान सहा। आपको पाने का इंतजार करती रही।कुशाग्र: मेरी सुंदरता के पाने के लिए ये उपादान चाहिए? सिंदूर, लौंग, आभूषण। नहीं कुशाग्र मेरी चेतना जाग चुकी है। कामना का ज्वार मेरे जागरण को अब फिर सुला नहीं सकता। दाम्पत्य की जो अनिवार्य शर्त है वह हमारे बीच में नहीं है।
हम निरंतर सुलग सुलग कर नहीं जी सकते। पूर तरह अजनबी बनकर हम नई शुरूआत करेंगें।
काम्या के ठंडे ठीर शब्दों की फुरैरी उसके कामना ज्वारों को भाटों में बदल चुकी थी। वह फिर स्पंदनहीन सन्नाटों से घिर रहा था।  वह उसके पास सरक आई: ठंडा बेगान हाथ अपने हाथ में लेकर काम्या कहने लगी:- कुशाग्र, मुझे समझ आ गई है कि हम एक दूसरे के लिए नहीं बने। मेरी अतृप्त देह को तृप्ति का स्वाद तुमने चखाया मैं आभारी हूं पर ऐसी तृप्ति काम्य नहीं हैं। हम जल्दी ही इक दूजे को भूल जायेंगें। हम डायवोर्स पेपर्स पर साईन करेंगें और एक दूसरे को शुभकामनाएं देंगें।  जब तक यह सारी कार्यवाही पूरी नहीं होती हम वैसे ही मित्रवत रहते रहेंगें: शांत - सन्नाटों से घिरे - चुपचाप।
ठीक है
ठीक
धीरे से उसका हाथ चूमकर उठ गई काम्या।
AJC-6-300

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

आइलाइनर से आँखाें की सुंदरता निखारें - प्रत्यूषा नंदिनी

आंखों के भीतरी किनारे से आईलाइनर की 
पतली लाइनें शुरू करते हुए बाहरी कोने तक
 उसकी मोटाई बढ़ानी चाहिए. 


चेहरे के परफेक्ट मेकअप से किसी भी महिला को खूबसूरत बनाया जा सकता है, जिसमें आंखों की सुंदरता को बढ़ाने के लिए एक अच्छे आईलाइनर का उपयोग बेहद ही जरूरी है, क्योंकि आंखे ही हमारे चेहरे का सबसे सुंदर और महत्वपूर्ण अंग है। अधिकांश महिलाएं यह समझती हैं कि आईलाइनर केवल एक ही तरीके से लगाया जा सकता हैं, जो आंखों की पलक पर आईलाइनर को सीधी रेखा में लगाने जैसा हैं। दरअसल,आंखों की खूबसूरती के लिए आंखों की आकृति के अनुसार आईलाइनर लगाने का तरीका अपनाना बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। तो आइए जानते हैं आंखों की आकृति के अनुसार आईलाइनर लगाने के तरीकों के बारे में।

. हुडेड (Hooded)-
यदि आपकी आंखों की आकृति हुडेड हैं, तो बिल्ली की आंखों जैसा आईलाइनर लगाएं। कोने में पतली और आंखों के बीच में मोटी आईलाइनर लगाएं। इससे आपकी आंखें बड़ी दिखेंगी।

वाइड सेट (Wide set)-

आंखों की ऐसी आकृति वाली महिलाएं विभिन्न प्रकार के आईलाइनर का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसमें ऊपरी और निचली पलक को एक साथ लाकर, आंखों के बाहरी कोनों पर हल्का-सा आईलाइनर लगाना चाहिए। निचले आईलैशेस को आईलाइनर से कलर करना चाहिए। इस तरह आपकी आंखें खूबसूरत दिखेंगी।

डाउनटर्नड (नीचे की ओर झुकाव वाली आकृति) (Downturned)-

ऐसी महिलाएं जिनकी आंखों के बाहरी किनारे थोड़े से नीचे की ओर झुके हों, उन्हें आईलाइनर लगाते समय बाहरी किनारे पर आईलाइनर ऊपर की तरफ उठाते हुए लगाना चाहिए। इससे आपकी आंखें बड़ी और चमकदार दिखेंगी। आंखों को बड़ा दिखाने के लिए निचले आईलैशेस में आईलाइनर लगाना चाहिए।

बादाम की तरह शेप (Almond shaped)-

ऐसे आकार की आंखों वाली महिलाआें को अपनी आंखों के अनुरूप आईलाइनर लगाना चाहिए। इसमें आंखों के भीतरी किनारे से आईलाइनर की पतली लाइनें शुरू करते हुए बाहरी कोने तक उसकी मोटाई बढ़ानी चाहिए।

डीप सेट (Deep set)-
इसमें आंखों के बाहरी किनारों से आईलाइनर लगाना शुरू करना चाहिए। इसके अलावा पलकों की सबसे ऊंची जगह से आईलाइनर लगाना शुरू करना भी अच्छा होता हैं। ऐसी आंखों में मोटा आईलाइनर नहीं लगाना चाहिए, अन्यथा आंखें छोटी दिखेंगी।

अपटर्नड आंखें (ऊपर की ओर उठी हुई आंखें) (Upturned eyes)-

ऐसी आंखों वाली महिलाओं को ऊपरी और निचली पलकों में अंतर होता हैं। ऐसे में आप आंखों के बाहरी किनारों पर ऊपर की ओर उठती हुई आईलाइनर से लाइन खींचे और लोअर लैश पर हल्के हाथों से आईलाइनर लगाएं।

आईलाइनर लगाते समय बरतें ये सावधानियां

चेहरे की मेकअप के दौरान आंखों की सुंदरता के लिए महिलाएं प्रायः आईलाइनर का प्रयोग करती हैं। ये आईलाइनर लिक्विड फॉर्म में आते हैं। ऐसे करते समय सावधानी बरतने की आवश्यकता होती हैं, अन्यथा इसके चेहरे पर फैल जाने का डर बना रहता हैं। जिससे चेहरे और आंखों का मेकअप खराब हो सकता हैं।

आईलाइनर लगाते समय की जानें वाली गलतियां –
कुछ महिलाएं मेकअप या आईलाइनर लगाने से पहले अपना चेहरा नहीं धोती हैं। जबकि कंसीलर और पाउडर लगाने से पहले आईलाइनर का प्रयोग करना भी गलत होता है। इससे आईलाइनर फैल सकता है।

आसान मेकअप के लिए आईलाइनर पेंसिल का प्रयोग करें –
बाज़ार में विभिन्न प्रकार के आईलाइनर मौजूद हैं। महिलाएं जैल आईलाइनर, ड्राई आईलाइनर, काजल स्टिक में से किसी एक का प्रयोग कर सकती हैं। इन सब से हट कर पेंसिल आईलाइनर से अपनी आंखों का मेकअप करना ज्यादा आसान होता हैं।

आईलाइनर को लीक आउट (फैलने) से रोकने के लिए अपनाएं ये तरीके –

1. आई शैडो का प्रयोग (Set Your Eyeliner With Eyeshadow) –
पेंसिल आईलाइनर का प्रयोग करते समय पहले आई शैडो लगाएं। यह आईलाइनर को फैलने से रोकता हैं।आईलाइनर लगाने के लिए पतले ब्रश का उपयोग करें। इससे आईलाइनर एक समान रूप में दिखता है और चेहरे पर अतिरिक्त दाग-धब्बे नहीं लगते हैं।

2. कंसीलर का प्रयोग (Use A Concealer First) –
आंखों का मेकअप करने या आईलाइनर लगाने से पहले कंसीलर लगाना चाहिए। आपको अपनी आंखों के ऊपरी पलकों और भीतरी भागों में पहले कंसीलर लगाना चाहिए। इस तरह आईलाइनर नहीं फैलता हैं।

3. आईलाइनर पेंसिल का उपयोग (Use Eyeliner Pencil) –
वॉटर प्रूफ और जैल युक्त आईलाइनर पेंसिल आंखों के मेकअप के लिए अच्छी होती हैं, परन्तु जब आपके पास समय की कमी हो तो आप आईलाइनर पेंसिल का उपयोग कर सकती हैं। बस, प्रयोग से पहले आईलाइनर पेंसिल को सुखा लेना चाहिए।

4. ऑयली स्किन की सफाई (Prepare Your Skin Properly) –
कुछ महिलाओं के चेहरे की त्वचा ऑयली होती हैं, इसलिए यह जरुरी हो जाता हैं कि मेकअप करने से पहले अपने चेहरे को साबुन, पानी से धोकर अच्छी तरह पोंछ लें। फिर मेकअप या आईलाइनर लगाएं।

5. अपनी पलकों पर मॉइस्चराइजर लगाने से बचें (Avoid Applying Moisturizer On Your Lids) –
चूंकि पलकें स्वभाविक रूप से ऑयली एवं चिकनी होती हैं। इसलिए चाहें चेहरे की त्वचा जैसी भी हो।आईलाइनर को फैलने से रोकने के लिए मॉइस्चराइजर का उपयोग करने से बचें।

6. फेस पाउडर का उपयोग करें (Use Face Powder) –

आंखों
सहित अपने चेहरे का मेकअप करने के बाद फेस पाउडर लगाएं। इससे आपकी आंखें और चेहरा खूबसूरत दिखने लगेगा।

7. सस्ते आईलाइनर का प्रयोग न करें (Don’t Go For Cheaper Ones) –
जब ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बात आती हैं तो आपको इनकी क्वालिटी का खास ध्यान रखना चाहिए। सस्ते उत्पादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। आपको अच्छे क्वालिटी वाले ब्रांडेड ब्यूटी प्रोडक्ट्स ही खरीदने चाहिए।

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

आपकी बॉडी टाइप एप्पल शेप है या पियर शेप- चयनिका शर्मा

हम लाेग अपना खानपान
 अपने परिवार,
 रिश्तेदार या फिर दाेस्ताें के
साथ बैठकर तय करते हैं
जाे एकदम गलत है। 
 अपने आप काे सेहतमंद रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी बॉडी टाइप क्या है. उसी के अनुसार आपकी डायट हाेनी चाहिए। एक ही मां-पिता से जन्म लेने वाले दाे अलग अलग बच्चाें का बॉडी टाइप अलग हाेता है ठीक वैसे ही जैसे ब्लड ग्रुप। हर बच्चे का जेनेटिक आर्डर अलग हाेता है और मेडिकल हिस्ट्री भी। इसलिए हमें अपने खान पान पर ध्यान देना चाहिए। हम लाेग अपना खानपान अपने परिवार, रिश्तेदार या फिर दाेस्ताें के साथ बैठकर तय करते हैं जाे एकदम गलत है। एक ही बीमारी अलग अलग लाेगाें काे अलग अलग  कारणाें से हाे सकती है इसलिए खानपान  भी अलग अलग हाेगा। अमूमन अपनी जैसी बीमारी देखकर लाेग एक दूसरे की तरह खानपान में बदलाव लाते हैं।
खान-पान के बारे में शुरूआती राय तब जान लेनी चाहिए जब बच्चा कुछ खाना शुरू कर देता है।यानी 6 माह बाद। नन्ना शिशु जब खाना खाने लगता है ताे अधिक्तर उसे दूध से बना खाना खिलाया जाता है। अधिक्तर खीर। एेसे में बच्चा खूब  हेल्दी दिखाई देता है पर वास्तव में उसके भीतर मिनरल और विटामिन की कमी हाे जाती  है जिससे उसकी पाचन क्रिया पर असर पड़ता है।
हमारे शरीर की संरचना दो तरह की हाेती है एक ताे एप्पल शेप और दूसरी पियर शेप। सबसे पहले एप्पल शेप की बात करते हैं। इस तरह की बॉडी में माेटापा शरीर के  ऊपरी हिस्से में हाेता है। एेसे में अपने खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है । नहीं तो आप गंभीर बीमारी के  शिकार हाे सकते हैं। अपने खानपान में हरी सब्जियां,प्राेटीन और  फलाें का जूस शामिल करें। फास्ट फू़ड से बचें। पीयर शेप में  ताेंद बाहर आ जाती है। टमी वाले हिस्से में काफी फेट जमा हाे जाता है। आपकी डाइट में प्राेटीन और हरी सब्जियां शामिल हाेनी चाहिए। इस शेप के लाेगाें काे भी  फास्ट फूड और काेल्ड ड्रिकं से बचना चाहिए। आपकी बॉडी टाइप काे जानकर डायटीशियन आपके स्वाद की रेसिपी आपकाे बता देंगे। जिससे आप अपने स्वादनुसार पाैष्टिक खाना खा सकते हैं। बच्चाें में  भी उनके स्वाद के अनुसार भाेजन दिया जा सकता है। अमूमन मम्मी बच्चाें के खाना न खाने पर उसे मैगी, बर्गर, पास्ता जैसी चीजें दे देती हैं जाे सेहत के लिए बहुत खतरनाक  है।  वैसे भी जितने पैक्ड फूड हैं वह सेहत के लिए हानिकारक हाेते हैं।
 इन दिनाें  ब्लड टाइप पर भी चर्चा हाे रही है पर अभी इसमें काफी मतभेद हैं। डायटीशियन और डाक्टर की सलाह पर ही इसे करना चाहिए।

बुधवार, 29 अगस्त 2018

बन जाए पनीर ,बच जाए पानी ताे क्या करेंगी - नीरा कुमार


जब भी हम कुछ बनाते हैं तो बहुत सारी चीजें बेकार समझकर फैंक देते हैं। जबकि कुछ भी बेकार नहीं हाेता। हमें उसके उपयाेग करने का तरीका मालूम नहीं हाेता। बहुत बार जिसमें सबसे ज्यादा पाैष्टिक तत्व हाेते हैं उसी का प्रयाेग हम नहीं करते।

1. घर में पनीर बनाया है तो उस के पानी में पकौड़े के लिए बेसन घोलें. पकौड़े स्वादिष्ठ बनेंगे.

2. पनीर के पानी से आटा गूंधें अथवा सूप में भी इस का इस्तेमाल कर सकती हैं.

3. अचार का मसाला बच गया हो तो उस में लहसुन छील कर अथवा प्याज काट कर डाल दें. स्वादिष्ठ अचार तैयार हो जाएगा.

4. आम के अचार के बचे तेल व मसालों को बैगन, टिंडा, भिंडी या करेले में भर कर सब्जी बनाएं.

5. अधिक पका केला फेंकने के बजाय पुडिंग या कस्टर्ड में डालें अथवा स्मूदी या शेक में प्रयोग करें.

6. चावल के निकले मांड़ में हींग, जीरा, अदरक, नीबू का रस और हरीमिर्च का तड़का लगा दें. बढि़या स्वादिष्ठ सूप तैयार हो जाएगा.

7. चावल का बचा पानी दाल में डाल दें, तो दाल गाढ़ी हो जाएगी और मात्रा भी बढ़ जाएगी.

8. अगर चोकर को सूजी में डाल कर हलवा बनाएं तो वह और स्वादिष्ठ व पौष्टिक बनेगा.

9. पका पपीता फीका निकला हो तो दूध व थोड़ी चीनी डाल कर थिक शेक बना लें.

10. फीके पपीते को पके कद्दू की तरह छौंक कर सब्जी बनाएं. सब्जी स्वादिष्ठ होने के साथसाथ पौष्टिक भी होगी.

11. छोटी इलायची के छिलकों को फेंकें नहीं. इन्हें पीस कर चीनी में मिला दें. जब भी चाय के पानी में चीनी डालेंगी इलायची की महक आएगी.

12. जिन सब्जियों को कद्दूकस कर रही हैं उन से निकले पानी को फेंकें नहीं, बल्कि उस से आटा गूंध लें. अधिक विटामिन इसी रस में होता है.

13. सब्जियों के डंठलों को फेंकें नहीं. उन्हें अच्छी तरह धो कर कोई सब्जी मिला कर उबाल लें. फिर छान कर कालीमिर्च, नमक और नीबू का रस डालें. बढि़या सूप तैयार हो जाएगा. चाहे तो वैजिटेबल स्टौक की तरह प्रयोग में लाएं.

14. अनार के छिलकों को फेंकें नहीं, बल्कि उन्हें अच्छी तरह धो कर सुखा लें. मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाएं. जब भी पेट में दर्द हो कुनकुने दूध के साथ 1 चम्मच फांक लें.

15. सूखी नारंगी के छिलकों को सुखा कर चूर्ण बनाएं. बेक करने वाली चीज पुडिंग में डाल कर उसे सुगंधित बनाएं.

मंगलवार, 28 अगस्त 2018

परेशान न हाें अपने हाइपर एक्टिव बच्चे से- डा. अनुजा भट्ट

हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें
 बहुत ज्यादा बोलने वाला, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने वाला, काफी शरारती और जिद्दी  बच्चों को हाइपर एक्टिव कहा जाता है। अभिभावक बच्चे को कंट्रोल में करने के लिए अक्सर डांट-फटकार व मारपीट का सहारा लेते हैं। इससे आपके बच्चे में नकारात्मक सोच आ जाती है और वह पहले से भी ज्यादा गलत व्यवहार करने लगता है। सवाल उठता है कि आखिरकार आजकल बच्चे इतने शैतान और उदंड कैसे बन रहे हैं।
 मनाेवैज्ञानिक भावना बर्मी कहती हैं, मॉडर्न लाइफस्टाइल की वजह से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। पढ़ाई से लेकर खेलकूद तक हर फील्ड में उन पर कॉम्पिटिशन में आगे निकलने का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा शहरों में एकल परिवार की वजह से भी बच्चे अकेलेपन से जूझ रहे हैं। इन सब कारणों से बच्चे गुस्सैल, चिड़चिड़े या यूं कहें कि हाइपर एक्टिव हो रहे हैं। हम अपने बच्चे की गलत आदतों की अनदेखी  कर रहे हैं यह  नहीं हाेना चाहिए। इसकी जगह उसके कारणों को जानकर उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।  अगर आपका बच्चा भी हाइपर एक्टिव है ताे इन बाताें पर अमल करें।
  •  डीप ब्रीदिंग लेना सिखाएं-उस बच्चे को डीप ब्रीदिंग सिखाई जाए। यह गहरी सांस इस तरीके से हो कि वह नाक से सांस को शरीर के अंदर ले और मुंह से छोड़े। इसका असर यह होगा कि आपको फ्रस्टेटेट बच्चे को डील करने में आसानी होगी। 
  •  बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं – अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छे से व्यवहार करे, तो जरूरी है कि उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उन्हें ज्यादा प्यार दें। इससे उन्हें अच्छा महसूस होगा। इसके अलावा बच्चे को धैर्य से रहना सिखाइए।
  • दूसरों के सामने न डांटें – अक्सर पैरेंट्स हाइपर एक्टिव बच्चे के स्वभाव को बदतमीजी मानकर बार-बार उसे दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने ही डांटने लगते हैं। लंबे समय तक ऐसा करना बच्चे की मानसिकता, आत्मविश्वास और दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ उनके व्यवहार पर नकारात्मक असर डालता है। बच्चे के आसपास ऐसा माहौल बनाएं जिससे वह अपनी हाइपर एक्टिविटी से बाहर आ सके। यदि उसे किसी काम से रोकना है, तो दूसरों के सामने डांटकर न रोकें। बेहतर है कि उसे अकेले में समझाएं।
  • बच्चे के मन का विश्लेषण करते रहें - अगर आपका बच्चा ज्यादा हाइपर एक्टिव है, तो उसके मन की स्थिति का विश्लेषण करने के लिए मनोचिकित्सक की सलाह लें। दरअसल हाइपर एक्टिव बच्चों के लक्षण एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) से काफी मिलते हैं। इस स्थिति में बच्चे के आत्मसम्मान पर भी प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा आसपास के लोगों के साथ उसके संबंध भी प्रभावित होते हैं। एडीएचडी एक दिमागी जैविक बीमारी है, जिसका इलाज दवाओं द्वारा किया जा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे के ऊपर खास ध्यान दें।
  •  प्यार और समय दें -ऐसे बच्चों को मां-बाप अपने पास बैठाकर सहलाएं। यानी उनके माथे को हाथों से दबाएं, कांधे को हल्का प्रेस करें। माता-पिता का यह टच बच्चों के प्रति बहुत सेंसेटिव होता है। यह उनके लिए रिलेक्सिंग टच होता है।   ऐसे बच्चों को कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका ये है कि आप उसे बहुत प्यार दें, इससे वह शांत हो जाएंगे। जब उनका मूड ज्यादा खराब हो तो उन्हें गले लगा लीजिए और फिर समझाइए।
  • सही से बच्चे की बात सुनें – ऐसे बच्चों की बात को सुनना बहुत जरूरी है। कई बार वह ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन जब कोई उनकी बात नहीं सुनता तो वह और हाइपर हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप उनकी बात सुनें। इससे वह शांत रहेंगे और आपकी बात भी मानेंगे। 
  • खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में रखें व्यस्त – हाइपर एक्टिव बच्चों को खेलकूद व आउटडोर एक्टिविटी में ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें। ऐसे बच्चे को डांस या आर्ट क्लास में भी भेज सकते हैं। इससे उसकी अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा व्यय होगी और साथ ही आत्म अभिव्यक्ति और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा।
  • कुछ नया खरीदकर दें - बच्चे का मन बहलाने के लिए कुछ नई चीज खरीदकर गिफ्ट करें। नई चीज को पा कर वह दूसरी बातें भूल जाएगा और खुश रहेगा।
  • पालतू जानवर लाएं – बच्चे को जो भी पालतू जानवर अच्छा लगता है, उसके लिए वह खरीदकर ले आएं। नया दोस्त देखकर व उसके साथ खेलने में उसकी बदमाशियां कम हो जाएंगी।
  • हर गतिविधि पर रखें नजर – हाइपर एक्टिव बच्चे की हर गतिविधि पर नजर रखना जरूरी है। रूटीन से उसके स्कूल टीचर से मिलते रहें। इससे बच्चे के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी। टीचर को वजह बताते हुए उसे आगे वाली सीट पर बिठाने व समय-समय पर कुछ गिफ्ट देने का अनुरोध कर सकते हैं। इससे वह खुश रहेगा।
  • क्रिएटिव बनाएं-एक बॉक्स हमेशा अपने घर में तैयार रहना चाहिए। इस बॉक्स में क्लै आर्ट, कलर्स, पेंसिल्स या अन्य क्रिएटिविटी वाली चीजें रखना चाहिए। ताकि बच्चा इस बक्से के साथ ही लंबे समय तक बिजी रहे।
  •  रिलैक्स प्लेस पर एक्टिविटी कराएं-आपके घर में एक जगह ऐसी होनी चाहिए जिसे हम रिलैक्सेशन की जगह कह सकते हैं। यह कोई छोटी बालकनी हो सकती है, जहां आराम कुर्सी रखी हो। ध्यान रखें यह ऐसी जगह हो जहां एक्टिविटी कम से कम और रिलैक्स ज्यादा मिले। 
  •  टाइम टेबल फॉलो कराएं-ऐसे बच्चों के लिए एक टाइम टेबल को फॉलो करना बहुत जरूरी है। यह मिलिट्री रूल जैसा नहीं होगा, लेकिन उनके सोने, खाने, उठने, नहाने, खेलने का समय निर्धारित रहेगा तो उनसे डील करना आसान होगा। 
  •  शुगर और कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रखें-बच्चों की डाइट मॉनीटरिंग और उनका शुगर इनटेक कंट्रोल करना जरूरी है। यदि हम उन्हें ज्यादा स्वीट्स दे रहे हैं तो उनकी एक्टिविटी का लेवल बढ़ने लगता है। शुगर कोटेड सप्लीमेंट्स और कोल्ड ड्रिंक्स से उनको दूर रखें। 
  •  विटामिन दिखाएं असर-हाइपर एक्टिव बच्चाें के लिए 4 तरह के विटामिन बहुत असरदार हाेते हैं  विटामिन बी 3, बी 6, बी 12 और विटामिन सी। विटामिन सी  हमें रसीले फल जैसे नींबू, संतरा, माैसमी में  मिलता है। इसी तरह दूध और अंडे, मक्खन, मछली में हमें विटामिन 12 मिलता है।   मूंगफली, बादाम, अखराेट में हमें विटामिन 6 मिलता है।
  • यह भी पढ़ें https://mainaparajita.blogspot.com/2018/08/blog-post_21.html?spref=

सोमवार, 27 अगस्त 2018

जब नींद न आए....... तब पढ़िए लिविंग द हैल्दी लाइफ


स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक आहार और व्यायाम के साथ रोज रात को कम से कम सात घंटे की नींद लेना भी खासा जरूरी है। हालांकि काम के तनाव और भविष्य की चिंताओं के चलते ज्यादातर लोगों की रात का अधिकतर हिस्सा करवटें बदलने में गुजर जाता है। ब्रिटेन की मशहूर आहार विशेषज्ञ जेसिका सेपल ने इसी के मद्देनजर अपनी  किताब‘लिविंग द हेल्दी लाइफ’ में गहरी नींद के आगोश में ले जाने वाले पांच उपाय सुझाए हैं।

काम का तनाव घर साथ न ले जाएं

सेपल के मुताबिक दफ्तर में रोज कुछ नया और अनोखा करने का दबाव तनाव को जन्म देता है। हालांकि काम का तनाव दफ्तर में ही छोड़करआने में भलाई है। इसे घर साथ ले जाने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन‘कॉर्टिसोल’ और ‘एड्रिनालिन’ का स्त्राव बढ़ जाता है, जो न सिर्फ नींदमें खलल डालता है, बल्कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर से मौत का खतरा भी बढ़ाता है।

डिनर में दाल, अंडा, चिकन खाएं

प्रोटीन युक्त आहार नींद की गुणवत्ता सुधारने में कारगर माना जाता है।विभिन्न अध्ययनों में इसे स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बढ़ानेमें असरदार पाया गया है। इसलिए डिनर में दाल, अंडा, चिकन,पालक, बींस, सोया उत्पाद जरूर शामिल करें। आप चाहें तो चावलऔर चीज का सेवन भी बढ़ा सकते हैं। फैट की मौजूदगी के चलते येखाद्य वस्तुएं शरीर में सुस्ती पैदा करती हैं।

8 बजे के बाद फोन से दूरी बना लें

स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी और टैबलेट की स्क्रीन से निकलनेवाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बाधित करती है। लिहाजाबिस्तर पर जाने से एक-डेढ़ घंटे पहले ही गैजेट से दूरी बना लें। मोबाइलबंद न कर सकें तो ‘साइलेंट मोड’ पर डाल दें। यही नहीं, सोते समयफोन को पहुंच से दूर रखें, ताकि बार-बार मैसेज आने के ख्याल केचलते नींद में खलल न पैदा हो।

नहाने से तन-मन की थकान मिटेगी

बकौल सेपल, अच्छी नींद के लिए तन-मन की थकान मिटना बेहदजरूरी है। ऐसे में सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक मिलाकर स्नानकरें। अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने पढ़ें। दिल को सुकून पहुंचानेवाला धीमा संगीत सुनें। लौंग, इलायची और तुलसी से बनी मसाला चायका सेवन करें। गुनगुने दूध में दालचीनी मिलाकर पीना और बादामखाना भी बेहद फायदेमंद है।

साेने से पहले कमरे में अंधेरा कर दें 

 सोने से पहले कमरे में अंधेरा और ठंडक कर लें। पैरों को ऊपर करके दीवार पर टिकाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए लगभग 10मिनट तक इसी मुद्रा में लेटे रहें। हो सके तो तकिये पर मोगरे, गुलाब या लैवेंडर की खुशबू वाला परफ्यूम छिड़कें।

शनिवार, 25 अगस्त 2018

मेला - ममता कालिया

मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व पहुँच गईं चरनी मासी। पहले कभी उसके घर आई नहीं थीं। पर उन्होंने पता ठिकाना ढूँढ निकाला। अंकल चिप्स की छोटी-सी डायरी में उनके पोते के हाथ की टेढी-मेढी लिखावट में दर्ज था 'सत्य प्रकाश' २२७ मालवीय नगर इलाहाबाद। उनके साथ चमडे का एक बडा-सा थैला, बिस्तरबंद और कनस्तर उतरा। और उतरीं उन जैसी ही गोलमटोल उनकी सत्संगिन, प्रसन्नी।

स्टेशन से चौक के, रिक्शे वाले ने माँगे चार, मासी ने दे डाले पाँच रुपए। तीरथ पर आई हैं, किसी का दिल दुखी न हो। पुन्न कमा लें। इतनी ठंड में दो सवारी खींच कर लाया है रिक्शेवाला।

चाय पानी के बाद उनके लिए कमरे का एक कोना ठीक किया गया तो बोली 'रहने दे घन्टे भर बाद स्वामी जी के आश्रम में जाना है।'

सत्य ने कहा, ''थोडे दिन घर में रह लो मासी, वहाँ बड़ी ठंड है।''
''तीरथ करने निकली हैं, गृहस्थ विच नहीं रहना।''
''अच्छा मासी यह बताओ आप तीरथ पर क्यों निकली हो?"

''ले मैं क्या पहली बार निकली हूँ। सारे तीरथ कर डाले मैंने-हरद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, केदारनाथ, पुष्करजी, गयाजी, नासिक, उज्जैन। बस प्रयाग का यह कुम्भ रह गया था, वह भी पूरन हो जाएगा।''

''मासी आप इतने तीरथ क्यों करतीं हो?''
''ले पाप जो धोने हुए।''
भानजे की आँखों में शरारत चमकी, ''कौन से पाप आपने ने किए हैं?' सत्ते (सत्य प्रकाश) मासी से सिर्फ़ छह साल छोटा था। नानके में उसका बचपन इसी मासी को छकाते, खिझाते बीता था।

चरनी मासी हँस पडीं, एकदम स्वच्छ दाँतों वाली भोली-भाली निष्पाप हँसी। जब वे निरुत्तर होने लगती हैं तो स्वामी जी की भाषा बोलने लगती हैं, ''पाप सिर्फ़ वही नहीं होता जो जानकर किया जाय। अनजाने भी पाप हो जाता है, उसी को धोने।''

अनजाने पाप में उनके स्वामी जी के अनुसार बुरा बोलना, बुरा देखना, बुरा सुनना जैसे गांधीवादी निषेध हैं।
सत्ते की पत्नी चारू साइंस की टीचर है। उसने कहा, ''मासी आप से भी तो लोग अनजाने में कभी बुरा बोले होंगे। जैसे जीरो से जीरो कट जाता है, पाप से पाप नहीं कट सकता क्या?''
''पाप से पाप और मैल ने मैल नहीं कटता। पाप की काट पुण्य है, जैसे मैल की काट साबुन।''
''मलमल धोऊँ दाग नहीं छूटे'' जैसे भजन के बारे में आप क्या सोचती हैं?''
''छोटे मोटे तीरथ पर यह मुश्किल आती होगी, प्रयाग का महाकुम्भ तो संसार में अनोखा है। तुम गरम पानी से नहाने वाले क्या जानो।'' मासी ने आर्यां दी हट्टी के लड्डुओं का पैकेट पीपे में से निकाला और चारू के हाथ में दिया और कहा,
''तीरथ अमित कोटि सम पावन।
नाम अखिल अध नसावन।''

चारु सोचने लगी 'दसियों बरस तो मैं इन्हें जानती हूँ, जगत मासी हैं ये। हर एक के दुख में कातर, सुख में शामिल! न किसी से बैर न द्वेष, पडोस में सबसे बोलचाल, रिश्तेदारों में मिलनसार, परिवार में आदरणीय, यहाँ तक कि बहुएँ भी कभी इनकी आलोचना नहीं करतीं। ऐसी प्यारी चरनी मासी कुम्भ पर कौन से पाप धोने आई हैं कि घर की सुविधा छोड वहाँ खुले में रहेंगी।''
पर मासी नहीं मानी। सूरज डूबने से पहले चली गईं।

पेशे से पत्रकार है सत्ते मगर दोस्तियाँ उसकी हर महकमें में है। इसलिए जब एस.पी. कुम्भ ने कहा, ''कवरेज'' आपके रिपोर्टर करते रहेंगे, एक दिन खुद आकर छटा तो देख जाएँ तो सबकी बाँछें खिल गईं। अभी मेला क्षेत्र में प्रवेश भी नहीं किया था सत्या और चारू ने कि मेले का समां नजर आने लगा। सोहबतिया बाग से संगम जाने वाले मार्ग पर भगवे रंग की एम्बैसडर गाडियाँ दौड रहीं थीं। पाँच सितारा आध्यात्म पेश करने वाले, विशाल जटाजूट धारण किए साधू संत, फकीर रंग बिरंगे यात्रियों के रेले में अलग नज़र आ रहे थे। दूर से संगम तट पर असंख्य बाँस बल्ली के चंदोवे तने हुए थे। कहीं रजाई में बैठे हुए भी ठिठुर रहे थे लोग, कहीं मेले में ठंडे कपडो में बूढे, जवान, अधेड स्त्री पुरुष और बच्चे एक धुन में चले जा रहे थे। सबसे अच्छा दृश्य था किसी टोले का सड़क पार करने का उपक्रम। सब एक दूसरे की धोती कुरते का छोर पकड़ कर रेलगाडी के डिब्बों की तरह चल रहे थे।

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