मंगलवार, 12 सितंबर 2017

बिपाशा बसु- जिंदगी का खूबसूरत सफर

स्वास्थ्यवर्धक खाना और व्यायाम जिंदगी को खूबसूरत बनाने का मूलमंत्र है। यही वह रहस्य है जिससे जिंदगी को खूबसूरत बनाया जा सकता है। मैं खूब पानी पीतीहूं। घर पर तैयार की गई रेसिपी ही मेरी चमकती त्वचा का राज है। जो लुक मुझे सबसे ज्यादा पसंद है वह है सेक्सी स्मोकी आंखें और बिना लिपिस्टक लगे होंठ।अरे हां मेरे बाल मेरी सुंदरता के सबसे बड़े राजदार हैं। और इसके लिए मैं हमेशा अच्छे कंडीशनर का प्रयोग करती हूं।ताकि मेरे बॉल सुंदर और स्वस्थ रह सकें। मैं हमेशा आइल;मसाज करवाती हूं ताकि मेरे बाल चमकदार बने रहें। मेरे बाल प्राकृतिक रूप से काले और घने हैं फिर भी मैं कलर का प्रयोगकरती हूं। कलर से मैं अपने बालों का हायलाइट करती हूं।
मेरी चाहत है कि मैं हमेशा सुंदर दिखूं, मेरी त्वचा चमकती रहे इसके लिए मैं हमेशा क्लीजिंग, टोनिंग और माश्चराइजिंग पर यकीन करती हूं। सोने से पहले मैं इनका प्रयोग करती हूं। मैं बिना सनस्क्रीन लगाए घर से बाहर नहींनिकलती। हैवी मेकअप करने से मैं हमेशा बचती हूं। जहां तक बात आंखों की है मैं आइलाइनर हमेशा लगाती हूं। मुझको एम.ए.सी के प्रोडक्ट पसंद हैं। लिक्वड आई लाइनर, लिपग्लास मेरी पहली पसंद हैंखासकर उसके कोरल और पिंक शेड्स। जैसा कि मैंने पहलेकहा स्वास्थयवर्धक खाना और व्यायाम जिंदगी को खूबसूरत बनाने कामूलमंत्र है। इसीलिए मैं हर चीज खाती हूं सिवाय रेडमीट और चावल के।हरी सब्जियां, चिकन, दाल रोटी मेरा नियमित आहार है। चमकदार त्वचा केलिए मैं नट्स, सीड्स, स्प्राउट, योगर्ट और फ्रूट्स लेती हूं। फिश और नट्स में ओमेगा 3 फेटी एसिड होता है जिससे त्वचा चमकदारबनी रहती है

सोमवार, 7 अगस्त 2017

बच्चों की पढ़ाई में संगीत नदारद क्यूं


 डा. अनुजा भट्ट
 क्या आप किसी आठवीं क्लास में पढऩे वाले विद्यार्थी से ये उम्मीद कर सकते हैं कि वह तबला वादन में अपनी प्रस्तुति से सबको चौंका दे। क्या छठी क्लास में पढऩे वाला बच्चा रवि वर्मा या अमृता शेरगिल की पेंटिंग में अंतर कर सकता है? क्या ये बच्चे कत्थक और भरतनाट्यम जैसे नृत्य के भेद को बता सकते हैं? इसकी वजह यह है कि बच्चे गणित ,विज्ञान, भूगोल  इतिहास, कंप्यूटर जैसे विषयों  में ही हर समय घिरे रहते हैं। स्कूली शिक्षा में फाइन आर्ट का विशेष महत्व नहीं है। शाीय गायिका शुभा मुद्लग इस विषय को बहुत गंभीरता से उठाती है कि आखिर क्यों कला के प्रति स्कूल बहुत गंभीरता से नहीं लेते और उसको पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करते।  वह सिके प्रति गंभीर क्यों नहीं है?  यह विचार एकदम सरल है। बच्चों को नर्सरी क्लास से ही कला की शिक्षा दी जाए  अन्य विषयों की तरह कला का भी मूल्यांकन किया जाए।  इस विषय को जबरदस्ती उन पर थोपा न जाए बल्कि उनकी रुचि विषय पर केंद्रित किया जाए। यह  भी उतने ही महत्व से पढ़ाया जाए जितना गणित और विज्ञान विषय पढ़ाए जाते हैं।   कला के अंतर्गत संगीत, नृत्य, पेंटिंग, रंगमंच, वाद्य यंत्र शामिल हो।  इस अध्य्यन के बाद हमारे सामने अच्छे कलाकार होगें।
 अभी तक कला की शिक्षा लेने वाले बच्च व्यक्गित स्तर पर ही सीखते हैं । फिर चाहे वह  नृत्य हो संगीत हो या फिर वाद्य यंत्र।  उनसे पूछने पर वह अपने स्कूल टीचर का नाम नहीं लेते यह आश्चर्य की बात है कि उनके आर्ट टीचर के रीप में स्कूल के आर्ट टीतर का नाम नहीं है। अधिकांश माता- पिता को भी कला की  विधिवत शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं है।  जबकि भारत में कला की परंपरागत शिक्षा का महत्व है लेकिन जबचक बच्चे खुद को एक कलाकार के रूप में नहीं देखना चाहेंगे तब तक वह गुरू परंपरा के बारे में जानने को क्यों उत्सुक होंगे? कला की कक्षा में बारी बारी से हर कला की हर विधा के शिक्षक को पढाने का अवसर मिले। फिर ताहे वह संगीत हो, कला हो रंगमंच हो या  कुछ और? शिक्षकों को प्रशिक्षण देते समय भी यह घ्यान में रखा जाए और कला शिक्षकों को भी प्रशिक्षण के लिए भेजा जबच्चों की पढ़ाई में संगीत नदारद क्यूं

रविवार, 4 जून 2017

मां से दिया कला का संस्कार- तनुश्री वर्मा

mainaparajita@gmail.com
तनुश्री वर्मा पेशे से साफ्टवेयर   इंजीनियर हैं लेकिन उनको पेंटिंग और क्ले मॉडलिंग से गहरा लगाव है। वह ग्लास पेंटिंग और ऑयल पेंटिंग दोनो बहुत खूबसूरती के साथ करती हैं जानते हैं  अपने बारे में क्या कहती हैं तनुश्री-- मैं सृजनात्मक वातावरण में बड़ी हुई। मैं जब बच्ची थी तो मां को क्राफ्ट की शिक्षा देते हुए देखा। वह चूडिय़ां को रखने के लिएबॉक्स बनाना सिखाती या फिर आडियो टेप रखने के लिए बॉक्स बनवाती। इसीतरह फोटोफ्रेम लैंपशेड्स बनाना सिखाती। यह सारी चीजें ऐसी चीजों सेबनाई जाती जो बहुत साधारण सी होती मसलन आइसक्रीम की डंडिया। मेरे पिता एक अच्छे कलाकार हैं। वह भी अपनी हॉबी को पूरा करने के लिए पेंटिंग करते। इस तरह अपने आप ही मैंने पेंटिंग, स्केचिंग और क्ले मॉडलिंग सीखा। मैंने इन तीन अलग अलग विधाओं में कला का स्वाद चखा लेकिन इनतीनों को पेटिंग में उपयोग कर पाना संभव नहीं है। मैं जब गिफ्ट शॉपमें जाती तो वहां कई छोटी छोटी कलात्मक चीजें देखती जो बहुत मंहगी होती। मैंने सोचा क्यों  मैं खुद इनको बनाऊं। और इस तरह मैंनेकलाकृतियां बनाना शुरू किया। जब मैंने बनाना शुरू किया तो मैंने कोईक्लास नहीं कि हां किताबें पढ़ी। मैं इसकी टेक्नीक से परिचित नहीं थी।इसको बनाने वाले औजार कहां मिलते हैं यह भी पता नहीं था। मैंने इसकेबारे में जानने केे लिए इंटरनेट का भी सहारा लिया। पिछले 8 साल से मैं इस काम को कर रही हूं। व्यस्त समय में क्ले के साथ कलाकृतियां बनानामुझे सुखद अनुभूति देता है। यह मुझे तनाव से मुक्त करता है औरआत्मसंतोष देता है। एक साफ्टवेयर इंजीनियर के सप्ताहांत एक कलाकार के रूप में बदल जाते हैं। मेरी बनाई कलाकृतियां मेरे घर में सजी हुईहैं।
  
   

शनिवार, 3 जून 2017

मेरा घर क्लासिक बुक की तरह है- अनुराधा वर्मा


 कहते हैं घर आपके व्यक्तित्व को दर्शाता है। घर की साजसज्जा से रुचि का पता चलता है। अनुराधा वर्मा कहती हैं कि मेरा घर मेरे लिए एक मेरी पसंदीदा कलात्मक किताब की तरह से है जिसके हर पन्ने में कला के रंग हों और जो सबका मन मोह ले।  यह मेरे परिवार के सदस्यों में खुशी के भाव पैदा करे। मैं घूमने की शौकीन हूं। जहां-जहां जाती हूं वहां की खास चीजें ले आती हूं। मेरे घर में हर तरह का क्राफ्ट है। कलकत्ता  दिल्ली से खरीदी गई तांबे की मूर्तियां मैंने एक स्पेशल कार्नर में सजाई हैं जहां बैठकर मैं सुबह की चाय पीती हूं।
मेरे घर की साजसज्जा में ओरिएंटल थीम दिखाई दे सकती है। यह जो कुर्सियां हैं वह चीन की परंपरागत कुर्सियां हैं जिसमें दूल्हा- दुल्हन बैठते हैं। मुझको इसकी बनावट बहुत पसंद है क्योंकि यह सादगी भरा प्रभाव छोड़ती है। मेरे पास मुरानो ग्लास का संग्रह भी है जिसे मैंने इटली से खरीदा। मैक्सिको और स्पैन की पोटरी मेरी पसंदीदा  है।  भारतीय एथेनिक मोटिफ मुझको पसंद हैं जिनका मैंने प्रयोग किया है। गणेश मुझे पसंद हैं। मैं जब भी भारत जाती हूं गणेश अवश्य लेकर आती हूं। मेरे घर के प्रवेशद्रार पर गणेश विराजे हैं। मैं हमेशा सादगी की तलाश में रहती हूं। अपने नए नए विचारों को मैं कला के रूप में सजाती संवारती हूं। मुझे घर सजाना, घूमना और फोटोग्राफी का शौक है यह तीनों चीजें मेरी रचनात्मकता को बढ़ाती हैं।



शुक्रवार, 2 जून 2017

नमन डॉ.आराधना चतुर्वेदी


जिसने मुझे
उँगली पकड़कर
चलना नहीं सिखाया
कहा कि खुद चलो
गिरो तो खुद उठो,
जिसने राह नहीं दिखाई मुझे
कहा कि चलती रहो
राह बनती जायेगी,
जिसने नहीं डाँटा कभी
मेरी ग़लती पर
लेकिन किया मजबूर
सोचने के लिये
कि मैंने ग़लत किया,
जिसने कभी नहीं फेरा
मेरे सिर पर हाथ
दुलार से
पर उसकी छाँव को मैंने
प्रतिपल महसूस किया,
जिसने खर्च कर दी
अपनी पूरी उम्र
और जमापूँजी सारी
मुझे पढ़ाने में
दहेज के लिये
कुछ भी नहीं बचाया,
आज नमन करता है मन
उस पिता को
जिसने मुझे
स्त्री या पुरुष नहीं
इन्सान बनकर
जीना सिखाया.



रविवार, 21 मई 2017

दिखावे की रस्म - धर्मेंन्द्र कुमार


आज घर में बड़ी चहल पहल थी  और हो भी क्यों न ! घर में मेहमान जो आने वाले थे, वो भी घर की बड़ी बेटी “तनु” को शादी के लिए दिखावे की रस्म अदायगी के लिए। साधारण परिवार में जन्मी तीन बच्चांे में सबसे बड़ी बेटी, एक कमरे का मकान जिसमे एक छोटा सा आँगन, पिता एक सामान्य सी नौकरी कर के घर का खर्च चलाते थे।
घर का माहौल खुशनुमा बना हुआ था। सब के मुख पर ताजगी देखते ही बनती थी। मम्मी खुश मगर सकुचाई जी नजर आती थी। पिता के चेहरे पर खुशी के मध्य में चिंता के भाव साफ नजर आते थे। उन सब के बीच कम बोलने और अपने संस्कारांे के प्रति सजग “तनु” के मन में रह रहकर हजारो सवाल उठ रहे थे। कुछ सूझ नही रहा था, मन बड़ा ही विचलित था ! तभी किसी ने बाहर से आकर खबर दी ३ मेहमान आ गए है ! छोटे से मकान में चहल कदमी बढ़ गई। सब इधर-उधर दौड़ने और व्यवस्था के सवारने में व्यस्त हो गए। जैसे ही मेहमानों ने घर के अंदर प्रवेश किया उनका जोरदार स्वागत किया गया !! बातचीत की रस्म अदायगी होने लगी।
कमरे के अंदर बैठी वो साधारण कन्या अभी भी खुद के सवालो में उलझी थी, मम्मी उसको समझा रही थी की मेहमानो के सामने कैसे व्यवहार करना चाहिए। जो जन्म से ही सुनती आ रही थी, मगर आज उससे मम्मी ने क्या-क्या कहा उसे कुछ मालूम नही था, वो तो खुद में ही उलझी थी।  अचानक दरवाजे से आवाज सुनाई दी ३..बेटी तनु३३३.!३. हाँ ,,,,, पापा सकुचाते हुए अचानक जबाब दिया ! तुम तैयार तो हो ना बेटी ! जी पापा ३..धीरे से बोली  पापा पास आकर बोले देखो बेटी  वो लोग आ गए है ! तुम्हे देखने और पसंद करने के लिए !!
मैंने अपनी तरफ से अच्छा धनी परिवार चुना हैै। लड़का सुशिक्षित और समझदार है। तेरा जीवन सदा खुशियांे से भरा हो। इससे ज्यादा और हमें क्या चाहिए, बाकि आखिरी फैसला अब तुम पर है जिसमें मेरा पूर्णतया समर्थन होगा .. कहते हुए पिता ने बेटी के सर पर दुलार से भरा हाथ फेरा .!!
पिता जी क्या मै कुछ पूछ सकती हूँ ?  सहसा तनु बोल पड़ी !
हाँ ३. हाँ बेटा पूछो सरल भाव से पिता ने जबाब दिया !
क्या धनवान लोग ही सुखी रह सकते है ! हम जैसे साधारण लोग सुखी जीवन नही जी सकते ! क्या धन दौलत का नाम ही खुशी है.?
पिता चुपचाप थे ! आज पहली बार बेटी ने उनसे खुलकर बात की थी .. वो अपनी बात कहते हुए बोलती जा रही थी !
ये देख दिखावे की रस्म का क्या अर्थ है ! क्या क्षण भर किसी को देख लेने से हम किसी के व्यक्तित्व को जान सकते है ?  मेरे कहने का तात्पर्य यह नही की मुझे इन लोगांे से या पैसे वालांे से शिकायत हैं मै तो बस यह कहना चाहती हूँ की मेरी खुशी धन दौलत में नहीं उन संस्कारो में है जो आज तक आप मुझे सिखाते आये हो ! मैंने आप ही से जाना हैं की व्यक्ति से ज्यादा अहम उसका व्यक्तित्व होता हैं।  अगर दो व्यक्तियों के विचारो में समानता हो तो इंसान हर हाल में खुश रह सकता है वरना अच्छा भला जीवन भी नरक की भेँट चढ़ जाता है।
पिता चुपचाप उसकी बातें सुन रहे थे। बातो में सच्चाई थी और हकीकत में जीवन का मूलमंत्र भी थी।
बेटी धारा प्रवाह बोलती जा रही थी  मानो उसके अंदर का सैलाब आज फूट पड़ा हो और वो उसमंे शब्दों के माध्यम से कतरा कतरा बह रही थी।
क्या दिखावे की रस्म का इतना बड़ा स्वांग रचकर ही हम एक दूजे के बारे में जान सकते है ! क्या इस तरह ही किसी के व्यक्तित्व, आचरण या जीवन शैली का आभास कर सकती हूँ ! मुझे स्वयं को लगता है, शायद नही !
आप यह न समझना की मेरे कहने का अर्थ इन सब का विरोध करना है, मै किसी भी सामाजिक क्रिया कलाप के विरोध में नही, और न ही मै प्रेम विवाह या, लिव-इन-रिलेशन में विश्वास रखती हूँ।
मेरे कहने का  आशय मात्र इतना है की किसी भी व्यवस्था को बदलने की नहीं उसमें समयानुसार परिवर्तन की आवश्यकता होती हैै।
जीवन कैसे जिया जाता है ये आपने मुझे अच्छे से सिखाया है। मै हर हाल में स्वंय को ढाल सकती हूँ। परिस्थिति सम हो या विषम दोनों से निपटना आपने अच्छे से सिखाया है।
इतना कहते हुए तनु रुंधे गले से अपने पिता से लिपट गयी। दोनों की आँखों में आंसुओ का सैलाब उमड़ पड़ा था। मम्मी मँुह पर हाथ रखे अपने स्वर को दबाये खड़ी थी, वो खुद को सँभालने में असहाय लग रही थी।
पिता ने रुआंसा होकर  बोले  बेटा आज मै कुछ नही कहूँगा !
मैं फैसला तुझ पर छोड़ता हूँ ! तेरी सहमति में हमारी सहमति है !
आँगन में बैठे मेहमान और परिवार गण शांत भाव से कान लगाकर उनकी बातंे सुन रहे थे। इतने में अचानक लड़का खड़ा होकर बोला ! माफ कीजियेगा  क्या मै कुछ बोल सकता हूँ ? इतना सुनकर सब सहम से गए  बेटी के पिता आवाज सुनकर बाहर आ गए और बोले  हाँ बेटा ! क्यों नहीं! कहिये आप क्या कहना चाहते है !
पिता जी! मुझे लड़की बिना देखे ही पसंद है ! अगर मै शादी करूँगा तो सिर्फ “तनु” से यदि वो अपनी सहमति प्रदान करेगी तब! वरना मैं आजीवन कुँवारा रहने की शपथ उठाता हूँ !! यह मेरा निजी फैसला हैं और मै समझता हूँ की इससे किसी को कोई आपत्ति नही होगी! यानि मेरे परिवार को भी मुझे इतनी आजादी देनी होगी!
लड़के का निर्भीक फैसला सुनकर सब अचंभित और अवाक थे। उसके माता पिता भी उसकी और ताकते रह गए ! किसी के भी तरकश में जैसे कोई शब्द बाण बचा ही नही था !
लड़के ने आगे बोला, मुझे जो देखना था वो देख लिया ..! मुझे धन दौलत या शारीरिक सुंदरता नही आत्मीय सुंदरता की आवश्यकता है। धन दौलत से तो मै बचपन से ही खेला हूँ, मगर जो सम्पत्ति आज मुझे तुन के विचारों से प्राप्त हुई है उस से मुझे आशा ही नही विश्वास हो उठा है की “एक तुम बदले दृ एक मै बदला” इसका मतलब “हम बदल गए” और जब हम बदले तो जग बदले या न बदले कम से कम अपनी आने वाली पीढ़ी को तो बदल ही सकते हैं! उसकी ये बाते सुनकर माहौल में हल्कापन आ गया !
अंदर ही अंदर कमरे में दीवार के सहारे खड़ी तनु ये सब सुनकर रोते-रोते मुस्कुरा रही थी ! और बाहर का शांत माहैेल फिर से खुशियांे की रफ्तार पकड़ चुका था !!


डरे नहीं, जब मां बनें


 सोसाईटी का एक बड़ा हिस्सा नैचुरल बर्थ के लिए जोर देता है लेकिन बहुत कम महिलाएं ही होती है  जोकि इसके लिए मानसिक और षारीरिक रूप से तैयार होती हैं।  बच्चे के जन्म के बारे में जानकारी की कमी होने के कारण भी महिलाएं नैचुरल बर्थ प्रक्रिया से डर जाती हैं।
गर्भवती महिलाएं अधिकतर बीमार महिला की तरह प्रतिक्रिया देती हैं जबकि गर्भवती होने का मतलब बीमार हो जाना नहीं हैं।  कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जिसमें प्रसवपीडा के दौरान गर्भवती महिला की मौत हो जाती है। इस तरह की घटनाओं का असर गर्भवती महिला पर होता है और वह डर जाती हैं। इसलिए वह नैचुरल बर्थ प्रकिया के बजाय सी सेक्शन की ओर चली जाती हैं।  सी सेक्शन प्रक्रिया में बच्चे को जन्म के समय कष्ट होता है और महिलाएं भी पूरी जिंदगी इसके होने साईड इफेक्ट्स को झेलती रहती हैं।
चाईल्डबर्थ अवेयरनेस क्लासिस अटेंड करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।  ऐसी अवेयरनेस क्लासिस होने वाली मां के लिए जितनी जरूरी हैं उतनी ही होने वाले पिता के लिए भी जरूरी हैं।  आज के पुरूष भी इस प्रक्रिया में योगदान देना चाहते हैं।  वह अपनी पत्नी के  सपोर्ट सिस्टम बनने की पूरी कोशिश करते हैं।  उसको समय-समय पर डाक्टर के पास ले जाते हैं।  उनके दिमाग में भी ढेरों  सवाल हैंे और इनके जवाब आॅनलाईन ढ़ूंढ़ने की कोशिश भी करते हैंें। प्रीनेटल क्लासिस अटंेड करने के बाद आप अपनी पत्नी की जरूरतों को अच्छे से समझ पाएंगें और यह भी जान पाएंगें कि एक पिता होने पर आपको क्या जिम्मेदारी निभानी है।
यदि आप प्रीनेटेल क्लासिस लेने की सोच रहे हैं तो अंत समय का इंतजार मत कीजिए।  इसके लिए सही समय पांचवें महीने से ही शुरू हो जाता है।
इन क्लासिस में आपको चाइल्ड बर्थ के बारे में ए टू जेड जानकारी दी जाती है। मसलन बेसिक व्यायाम, पेन रीलिफ थैरिपी, ब्रेस्ट फीडिंग जैसी जानकारियां।
इससे आप जानंेगें कि आपकी पत्नी की शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या है।
सही खानपान, व्यायाम और स्ट्रेचिंग उसकी दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए।
आप उसकी व्यायाम में और रिलेक्स करने में भी मदद कर पाएंगें।
इन क्लासिस को अटेंड करने से आप ज्यादा वक्त अपनी पत्नी के साथ गुजार पाऐंगें।
इससे आप दोनों की बांडिंग और गहरी होगी और वह अपने डर भी आपके साथ शेयर कर पाएगी।
आपको यह कैसे पता लगेगा कि आपकी पत्नी लेबर पेन में है। उसके दर्द को कम करने में कैसे मदद कर सकतेेेे हैं।  यहां आपको यह भी बताया जाएगा कि आप क्या न करें और न कहें जबकि आपकी पत्नी दर्द में हो।
जो स्त्री पहली बार मां बन रही होती है वह बहुत डरी हुई भी होती है कि वह दर्द को कैसे सह पाएगी।  उनके लिए यह सब बहुत डरावना अनुभव होता है। इस समय उसे अपने साथी की साथ की उसके हौंसले की बहुत जरूरत होती है।  लेबर पेन का समय लंबा और इंतजार कराने वाला होता है। ऐसे में अपनी पत्नी का दर्द से ध्यान हटाने के लिए उसको बिजी रखने की कोशिश करें।  उसे म्यूजिक और बातों में उसका ध्यान बटाएं।
यदि बच्चे के दूध फंस जाए तो क्या करना चाहिए। नैपी बदलने का सही तरीका, बच्चे को कैसे उठाना है,  बच्चों के बिहेवियर और उनसे जुड़ी बातों की जानकारी दी जाती है।
यह क्लासिस अटेंड करने से आपको यह भी फायदा होगा कि आप अपने जैसे अन्य होने वाले पिताओं से भी मिलेंगें।
सवाल पूछने से शरमाएं नहीं बल्कि इस बात पर गर्व महसूस करें कि आप अपनी पत्नी के सपोर्ट सिस्टम बन रहे हैं।
आप इसलिए भी इन क्लासिस को ज्वाॅइन कीजिए क्योंकि आपकी पत्नी यह चाहती हैं कि आप उसके साथ हर कदम पर रहें।





























शुक्रवार, 19 मई 2017

महादान है रक्तदान


 पूजा-पाठ के अवसर पर अक्सर हम कभी अन्नदान करते हैं तो कभी वस्त्रदान। मान्यता है दान करने से पुण्य मिलता है। ऐसा हे तो कभी रक्तदान कीजिए और महसूस कीजिए आत्मसंतुष्टि

कभी लंबी ड्राइव पर जाते समय सड़क किनारे आपको कई दुर्घटनाग्रास्त लोग मिलते हैं जो अनजान शहर में अपनों से दूर हैं और मदद मांग रहे हैं। ऐसे में अगर आप रक्तदान करते हैं तो वह जीवन भर आपको याद रखते हैं । रक्तदान से आपकी सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ता है और साथ ही यह एहसास भी होता है कि आप समाज के लिए कुछ कर रहे हैं।
थैलेसीमिया, कैंसर ,सड़क हादसे एवं बड़े ऑपरेशन जैसी कई परिस्थितियों में समय पर खून देकर मरीजों की जान बचायी जाती है।  डोनर के लिए  रक्तदान हृदयाघात और कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से बचाव और साथ ही मोटापे से भी मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार देश में कुल रक्तदान का केवल 59 फीसदी स्वैच्छिक होता है। ऐसे में आवश्यकता यह है कि स्वेच्छा से खून देने वालों की संख्या बढ़े और यह तभी संभव है जब रक्तदान करने के संबंध में व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया जाये।
कई लोग समय-समय पर रक्तदान करते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो  इच्छा होते हुए भी रक्तदान नहीं कर पाते। इसकी वजह उनके मन में पल रही गलतफहमियां हैं जो वास्तव में निराधार हैं। आइए जानते हैं रक्तदान से जुड़े कुछ भ्रम और कुछ अहम बातें।
रक्तदान को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि  शरीर में खून की कमी हो जाएगी। लेकिन बता दें कि खून देने के 48 घंटे बाद ही रक्त की क्षतिपूर्ति हो जाती है। यदि आप स्वस्थ हैं तो तीन महीने में एक बार आराम से रक्तदान कर सकते हैं।
लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने से कमजोरी आ जाती है और सेहत को नुकसान पहुंचता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। सच्चाई यह है कि ये दिल की बीमारियों की संभावना कम करता है और शरीर में फालतू आयरन जमने से रोकता है
 कुछ लोग इस वजह से रक्तदान नहीं कर पाते क्योंकि वह सोचते हैं कि ऐसा करने से दर्द होगा। लेकिन इसमें बस सुई चुभने भर का एहसास होता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
बड़ी उम्र के लोग भी रक्तदान कर सकते हैं लेकिन इसके लिए डॉक्टर पहलेे कुछ मेडिकल टेस्ट करते हैं और रिपोर्ट सामान्य आने पर ही रक्तदान कर सकते हैैंं।
यदि आप रक्तदान करने जा रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें जिससे कि आप सुरक्षित और आराम से रक्तदान कर सकें।
रक्तदान करने से पहले आयरन रिच हैल्दी फूड खाएं।
पूरी नींद लें।
खूब पानी पिएं।
रक्तदान से पहले  फ्राईड फूड और आइसक्रीम न खाएं।
रक्तदान के बाद दिन में खूब पानी पिएं। शराब तथा धूम्रपान से दूर रहें।  लॉन्ग ड्राइव और तेज धूप में न जाएं।
यदि आप प्लेटलेट डोनेट कर रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि आपने रक्तदान से दो दिन पहले तक एस्प्रिन टेबलेट का सेवन न किया हो।
अपना डोनर कार्ड और आईडी प्रूफ भी साथ लेकर चलें।
रक्तदान करते समय रिलेक्स रहें, म्यूजिक सुनें, दूसरे डोनर से बातचीत करते रहें।
रक्तदान के बाद रिफरेशमेंट एरिया में स्नैक और ड्रिंक का आनंद लें।

रक्तदान कौन नहीं कर सकता:-

अगर कोई एड्स से ग्रस्त है तो उस व्यक्ति को रक्तदान नहीं करना चाहिए।
कैंसर के मरीजों को रक्तदान नहीं करना चाहिए।
अगर टैटू या कोई कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई है तो रक्तदान करने के लिए कम से   कम चार महीने तक इंतजार करना होगा।
प्रेग्नेंट महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकती हैं।
17 साल से कम उम्र के लोग रक्तदान नहीं कर सकते।
अगर पिछले 12 महीने में हेपेटाइटिस या पीलिया से ग्रस्त हुए हैं तो भी आप रक्तदान नहीं कर सकते।

डॉक्टर बेहद अनिवार्य परिस्थितियों में किसी मरीज में खून चढ़ाते हैं। खून संक्रमण से लड़ता है और जख्मों को भरने में मदद करता है। इसकी कमी से जान जा सकती है। ऐसे में रक्तदान एक तरफ जहां मरते हुए व्यक्ति के लिए “संजीवनी” है वहीं दानकर्ताओं के लिए सबसे बहुमूल्य वस्तु जिसे देकर वह कई जिंदगियां बचा कर आत्मसंतुष्टि के साथ -साथ बेहतर स्वास्थ्य का ‘हकदार’ बन सकता है।


अब तक कई लीटर खून दान करने वाले दक्षिण अफ्रीका के क्रेसविक और अमेरिका के फ्लोरिडा के मेनडेनहाल आज भी तंदुरुस्त हैं तथा उन्हें एक भी दवा की जरूरत नहीं है।
दक्षिण अफ्रीका के क्रेसविक 18 साल की उम्र में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गये थे। किसी अजनबी के खून से नयी जिन्दगी पाने वाले क्रेसविक नेे कई जिंदगियों में खुशबू और रंग भरने का व्रत लिया।  क्रेसविक को नियमित रूप से सर्वाधिक खून देने वाले व्यक्ति के रूप में वर्ष 2010 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल किया गया। लंबे समय तक खुशमिजाज और स्वस्थ बने रहने का राज क्रेसविक इन शब्दों में व्यक्त करते हैं, “खून का कतरा-कतरा अहमियत रखता है।  मौके पर पहुंच कर मौत को मात देने वाले खून की यह खूबी मेरे स्वस्थ मन का राज है और धूम्रपान से दूरी मेरी सेहत का मंत्र।” 
कैंसर से पत्नी फ्रैनकी की मौत और अपने दो जवान बेटों को भी खोनेे के बाद भी मेनडेनहाल ने रक्तदान करने से मुंह नहीं मोड़ा।  उन्होंने तीन मौतों के गहरे सदमे से उबरने के लिए इस पुण्य काम को अपनी जीवन शैली में शामिल किया। वह प्लेटलेट्स के माध्यम से हर साल छह गैलन खून देकर कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई लोगों की मदद कर रहे हैं। मेनडेनहाल के शब्दों में “ईश्वर ने मुझे जो कुछ भी दिया है मैं उसका ऋणी हूं और खून दान देकर उसके प्रति अपना दायित्व निभाने का अदना-सा काम कर रहा हूं। 

गुरुवार, 18 मई 2017

तिल के रोल



सामग्री

सफेद तिल तीन चौथाई प्याला
  काजू चौथाई प्याला
  गुड तीन चौथाई प्याला
  पानी २ बड़े चम्मच
  घी डेढ़ छोटे चम्मच सजावट के लिए

 विधि 
कड़ाही को गरम करें। इसमें मध्यम आँच पर सफेद तिल को भूनें। भूनने से तिल चटकता है इसलिये ध्यान रखें कि चिटक कर तिल त्वचा पर न आ जाए। तिल भुनने में  लगभग ५ मिनट का समय लगता है।
काजू को भी मध्यम आँच पर हल्का सा भून लें।
तिल को मूसल सें कूट लें या फिर ग्राइंडर में मोटा पीस लें। ध्यान रखें कि हमें एकदम मोटा कुटा तिल चाहिए। एक चौथाई प्याला कुटा तिल अलग रख लें तिल रोल्स की रोलिंग के लिए।
काजू को भी मोटा-मोटा पीस लें।
एक नॉन-स्टिक कड़ाही में पानी और गुड़ को उबालें। जब गुड़ पानी में घुल जाए तब इसमें घी डालें और लगभग ३० सेकेंड के लिए और पकाएँ।
चाशनी में कुटा तिल और काजू डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। आधे मिनट के लिए लगातार चलाते हुए और पकाएँ। फिर आँच बंद कर दें।
एक ट्रे थाली को कुछ बूँद घी तेल लगाकर चिकना करें। चाहें तो बटर पेपर का प्रयोग भी कर सकते हैं।
इस मिश्रण को चिकनी थाली ट्रे पर डालें। बेलन की मदद से एकसार फैलाएँ और ठंडा होने दें। जब फैलाया हुआ तिल मिश्रण ठंडा हो जाए तो इसे लगभग डेढ़ इंच के चौकोर टुकड़ों में काट लें और मनचाहे आकार में रोल करें।
इस तिल रोल को कुटे तिल में रोल करें। तिल रोल तैयार हैं। इसका भोग लगाएँ, दान करें, मित्रों में बाँटे या फिर घर पर परिवार के साथ खाएँ।
नोट - काजू के स्थान पर इच्छानुसार बादाम का प्रयोग भी किया जा सकता है।

जानिए तिल के  अनमोल फायदे  

1. प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में इसके सेवन से  मानसिक समस्याओं से निजात पाई जा सकती हैं।
2. तिल के तेल का प्रयोग या प्रतिदिन थोड़ी मात्रा में तिल को खाने से, बालों का असमय पकना और झड़ना बंद हो जाता है।
3   तिल को दूध में भिगोकर उसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है, और रंग भी निखरता है।
4 तिल को कूटकर खाने से कब्ज की समस्या नहीं होती, साथ ही काले तिल को चबाकर खाने के बाद ठंडा पानी पीने से बवासीर में लाभ होता है।
5 त्वचा के जल जाने पर तिल को पीसकर घी और कपूर के साथ लगाने पर आराम मिलता है, और घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है।  
6 सर्दियों में तिल का सेवन शरीर में उर्जा का संचार करता है, और इसके तेल की मालिश से दर्द में राहत मिलती है।
7 तिल का तेल गर्म करके उसमें सेंधा नमक और मोम मिलाकर लगाने से एड़ियां  ठीक होने के साथ ही नर्म व मुलायम हो जाती है।
8 मुंह में छाले होने पर तिल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर लगाने पर छाले ठीक होने लगते हैं।  






बुधवार, 17 मई 2017

योग की युक्ति से पाएं दर्द से मुक्ति


 दिनभर घर का कामकाज करने के बाद एड़ी में आने वाली दरार और उसमें दर्द के कारण परेशानी बढ़ जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ घरेलू उपाय आजमाएं।
एड़ी में दर्द 
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कसरत करें -  पैरो की उंगलियो को पॉइंट करने की कसरत में आपको केवल अपनी टांग उठानी है और अपने पैरों को तब तक घुमाना है जब तक इनकी उँगलियाँ नीचे की और पॉइंट नहीं करने लगे फिर आप थोड़ी देर का ब्रेक लेकर एक बार फिर दूसरे पैर के साथ इस क्रिया को दोहराएं। इस से आपके पैर की मसल्स में खिंचाव बनता है और एड़ी में दर्द  से  राहत मिलती है।
गेंद वाला व्यायाम -  इसके अलावा पै
र केे नीचे गेंद को घुमाकर भी व्यायाम कर सकते है। यह एक मसाज की तरह आपके लिए काम करता ह।ै आप किसी हलकी या टेनिस वाली गेंद लेकर इसे अपने पैर के नीचे तीन मिनट तक घुमाएँ और फिर अपने दूसरे पैर के साथ भी ऐसा ही करें। इस से आपको आपके पैर और एड़ी के दर्द  में बड़ी राहत मिलेगी।
शोर्ट फुलिंग करें - शोर्ट फुलिंग कसरत को  आप बड़ी आसानी से कर सकते है इसके लिए आपको केवल जूते खोलकर अपने पैरो की उँगलियों को नीचे की और खींचकर अपने पैर के ऑर्च को सिकोड़ना होता है इस से भी आपके पेरों की मसल्स को आराम मिलता है और आपके एड़ी में दर्द को इस से  आराम मिलता है।
एक्युप्रेशर की मदद लें - एक्युप्रेशर तकनीक का उपयोग करते हुए भी आप अपने पैरो में रक्तसंचार को सामान्य कर सकते है और एड़ी में दर्द  से आराम पा सकते है
गर्म पानी से सिकाई - गर्म पानी से अपने पैरों को सेंकने से भी राहत मिल सकती है।
 “काफ स्ट्रेचेज”  करें -  दीवार के सामने सीधे खड़े हो जाएँ और अपने हाथों को दीवार पर रखें और एडियो को फर्श पर रखें फिर धीरे धीरे आगे की ओर स्ट्रेच करें और फिर शुरुआती स्थिति में वापिस आ जाएँ।
आराम फरमाएं -किसी ऊँची जगह पर बैठकर आराम फरमाएं और कोई अपनी पसंद का गाना सुनते हुए अपने पैरो को लटका कर गोल गोल घुमाएँ और अपने पैरो की उंगलियो को अपनी तरफ खीचे और बाद में उसकी विपरीत दिशा में घुमाएँ।
चेहरे की चर्बी दूर करने और  डबल चिन से निजात के लिए आसान क्रियाएं
डा दीपिका शर्मा कहती हैं कुछ लोग चेहरे की चर्बी से बहुत परेशान रहते हैं। उनकी इस समस्या का निदान योगासनों से भी किया जा सकता है।  
लॉयन फेस एक्सरसाइज करने के लिए मुंह जितना खोल सकते हैं खोलें, सांस बाहर छोड़ें। आंखें जितनी खोल सकें खोलें। दो से तीन मिनट तक इसी अवस्था में रहें। इसके बाद सामान्य मुद्रा में आकर गहरी लंबी सांस लें। जीभ बाहर निकालें। गर्दन को नीचे झुकाते हुए जीभ को अपने सीने से लगाने की कोशिश करें।
च्वगिंम, लौंग, इलायची, सौंफ में से किसी भी एक चीज को मुंह में डालकर 5 से 10 मिनट तक चबाते रहें। यह बहुत अच्छा व्यायाम है।ऽ गर्दन को क्लॉकवाइज और फिर एंटी क्लॉकवाइज घुमाएं। इस एक्सरसाइज को करने से फैशियल फैट से छुटकारा मिलता है। इसे रोज 10 बार करें।
गहरी सांस लें और मुंह में इतनी हवा भरे, जैसे गुब्बारा फुलाने के लिए मुंह में हवा भरते हैं। पांच सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें। अब पांच सेकंड तक दाएं गाल को दबाएं और फिर बाएं गाल को। फिर सामान्य मुद्रा में आ जाएं। इस प्रक्रिया को पांच से आठ बार दोहराएं।
अपने होठों को मछली के आकार का बनाते हुए दोनो दिशाओं पर अपने होठो को घुमायें और इस प्रक्रिया को 10 सेकेंड तक यूं ही रहने दें। इससे भी डबल चिन और चेहरे की चर्बी से निजात मिलती है।

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