रविवार, 19 फ़रवरी 2017

युवा भी हो रहे हैं हाइपरटेंशन के शिकार- डा. अनुजा भट्ट



य‌‌दि आप 20 साल से ऊपर के हैं, और आप का वजन ज्याद‌ है, आप परेशान रहते हैं, चिडचिड़ा स्वभाव हो गया है और जीवनशैली शारीरिक गतिविधियों से खाली है तो इस बात का जोखिम है कि आप को हाइपरटेंशन हो सकता है. शोर्धकत्ताओं ने पता लगाया है कि उच्च रक्त चाप का संबंधकेवल उम्र दराज लोगों से नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी विशेषकर तरूण भी इसका तेजी से शिकार बन रहे है.10 साल तक निरंतर हुए एक अध्ययन से पता चला है कि तरूणों में चिंताजनक स्तर तक रक्तचाप की समस्या बढ़ी है. पुराने वक्त में अब जीवन की गतिआज से कहीं कम थी तब इस समस्या का कहीं आता पाता नहीं था. इंसान कीबढ़ती तरक्की ने यह समस्या भी बढ़ाई है. विशेषज्ञों के अनुसार समस्यामानसिक व पर्यावरणीय कारणों और नये जमाने के जीने के तौर तरीकों सेबढ़ी है. यह भी पाया गया है की हाइपरटशेंन से और भी कई बीमारियां होतीहैं जैसे ह्रदय रोग जिनमें शामिल हैं इस्केमिया हार्ट डिसीज, पेरिफेरलवैस्कुलर डिसीज, ए.एम.आई आघात एवं मोतियाबिंद.भारत में समस्या गंभीर है. स्कूली बच्चों में ग्लूकोज स्तर का तीनवर्षों तक अध्ययन किया गया. इन बच्चों की उम्र 13 से 18 साल के बीच थीऔर ये सभी दिल्ली के अच्छे खाते पीते परिवारों के थे. परिणाम यह निकलाकी तीन में से एक बच्चा हाइपरटेंसिव होने की ओर बढ़ रहा था.दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टीटयूट के प्रो.डा. के के सेठी का कहना है,आज की पीढ़ी काम के तनाव, खानपान व नींद लेने की अनियमित आदतों,शारीरिक और मनोरंजक गतिविधियों की कमी का शिकार है और वंशानुगत तौर परभारतीयों को ह्रदय रोगों का अधिक खतरा रहता है.1990में ह्रदय रोगों से भारत में 23 लाख मौतें हुई. अनुमान है कि साल2020 में ह्रदय आघात से होने वाली 57 प्रतिशत मौतों और ह्रदय धमनी केरोगों से होने वाली 24 प्रतिशत मौतों के लिए हाइपरटेंशन सीधे तौर परजिम्मेदार हैं. इन अध्ययनों से प्राप्त आंकड़ों से मालूम चलता है किशहरों में 25 प्रतिशत और गांवों में 10 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन सेग्रस्त हैं. गांवों में करीब 3 करोड़ 15 लाख और शहरों में 3 करोड़ 40लाख हाइपरटेंसिव लोग मौजूद हैं.भारतीय संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संघ के दिशानिर्देश प्रोसेस्डखाद्य पदार्थ, अचार, परांठे, चिप्स, पापड़, चटनी से परहेज करने कोकहते हैं. इनके अनुसार घी का प्रयोग कम करना चाहिए और योग-ध्यान कोअपनाना चाहिए.डा. सेठी के मुताबिक, आजकल बच्चे चीज टपकाते जंक फूड बहुत खाते हैं जबकि इनमें मौजूद चीजें बड़ी मारक होती हैं. यह समस्या इस लिए भी बढ़जाती है कि हाइपरटेंशन कोई लक्षण प्रकट नहीं करती. इस लिए समय से इसकापता लगा कर उपचार करना संभव नहीं हो पाता.यह भी सलाह दी जाती है कि ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थों के परहेज केसाथ-साथ साबुत अनाज और फोर्टिफाइड सीरियल जैसे ओट्स खाने चाहिए औरजीवन शैली में बदलाव करके हाइपरटेंशन जैसी बीमारी को दूर रखा जा सकताहै.हाइपरटेंशन से ग्रस्त लोगों को अपनी बीमारी का पता नहीं चलता. उनकीसामाजिक व पेशेवर जिंदगी अप्रभावित रहती है, पर तब तक, जब तक की वेअपनी छाती में बेहद पीड़ा महसूस नहीं करते या फिर गिर नहीं पड़ते.हालांकि डॉक्टर कहते हैं कि हाइपरटेंशन के कोई खास लक्षण नहीं होतेकिंतु कुछ सामान्य लक्षण जैसे-सिरदर्द, सर व आंखों में भारीपन, आलस्य,चिड़चिड़ापन, सामान्य कमजोरी, चक्कर आना, स्पंदन, नकसरी, पेशाब मेंखून आना छाती में दर्द. लेकिन चूंकि इन लक्षणों को किसी और मर्ज कालक्षण भी समझा जा सकता है इस लिए हाई बीपी पता करने का सबसे सरलमाध्यम है नियमित जांच. जीवन शैली में परिवर्तन करने के साथ नियमितजांच से ही आप दवाओं की भारी खुराक से बच सकते हैं. यदि यह बीमारीबिना इलाज के रह गई तो यह आप के दिमाग, दिल व गुर्दों को भी क्षतिपहुंचा सकती है.यह बहुत गंभीर स्थिति है. बच्चों के रक्तचाप में बढ़ोत्तरी अशुभ संकेतहै. इसका संबंध बच्चों में बढ़ती मोटापे की समस्या से है. तो यदि अगलीबार आपके बच्चे के सिर में दर्द हो या दम फूलने लगे, धड़कनें बढ़नेलगें तो इस स्थिति को नजर अंदाज न करें, ऐसे में एक गोली दे देना हीकाफी नहीं है, बल्कि उसे डॉक्टर के पास ले जाएं और उसके रक्त चाप कीजांच कराएं.

फिट रहने के उपाय- 
  • भोजन पकाने के तरीके बदलें. नमक खाना खाते वक्तमिलाएं.डब्बा बंद उत्पाद प्रयोग करते समय खारे पानी को फेंक दें और ताजीपानी से धोएं।
  • उबला मांस, प्रोसेस्ड मांस व मछली को पहले कुछ देर पानी में रखें और फिर पानी फेंक दें. इन उत्पादों का फालतू सोडियम निकलजाएगा
  • .इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार एक सामान्य व्यक्ति कोएक दिन में 2 से 4 ग्राम ही नमक खान चाहिए, इससे ज्यादा नहीं.
  • हाइपरटेंशन के मरीज के लिए तो यह 2 ग्राम से अधिक होना ही नहीं चाहिए.कुछ मात्रा में वजन घटा कर भी बीपी कम किया जा सकता है. इस लिए हर रोज सुबह शाम सैर करें या कोई अन्य व्यायाम करें.शरीर में पानी की क⧭मी न होने दें. पर्याप्त पानी पीएं. इसके साथ100 प्रतिशत शुध्द फलों का जूस पीना भी अच्छा विकल्प है.
  • हमेशा शांत रहें और जीवन के तनाव से निजात पाने के उपाय करें।


रविवार, 12 फ़रवरी 2017

घर का आंगन दिखे सबसे सुंदर- डॉ. अनुजा भट्ट


 घर के आंगन में बैठते समयहमें अहसास होता है कि यह भी घर का एक खास हिस्सा है फिर क्यों हम इसकी साजसज्जा पर ध्यान नहीं देते। आस पास लगे पौधे, फूल इसकी सजावट को और ज्यादा बढ़ाते हैं। फिर अगर इसका फर्श भी आकर्षक हो तो कहना ही क्या? जब हम फर्श के डिजाइन देखते हैं तो हमेशा दुविधा में रहते हैं कि कौन सा डिजाइन चुनें। या  हमें लगता हैं कि यह हमारे बजट में भी है या नहीं तीसरी बात हमको नए डिजाइन के बारे में जानकारी भी नहीं होती। फिर जब हमने घर नया बनवाया है तो फिर उसके  सबसे महतवपूर्ण हिस्से की अनदेखी क्यों करें। अधिकांश घरों में तो यह प्रवेश द्रार ही होता है। पर यह जरूरी नहीं, पिछवाड़े भी घर का आंगन होता है।
 आज के दौर में घर के बाहरी हिस्से के फर्श  के लिए भी कई तरह के विकल्प हैं। कंकरीट फ्लोर, स्टोन फ्लोर, सीमेंट की टाइल्स, ईंट फ्लोर, स्लेेट फ्लोर आदि। फर्श के ये नए नमूने आज के मार्डन घरों में  देखे जा सकते हैं। ये ऐसे उहाहरण है जो घर के आंगन में प्रयोग किए जाते हैं।  लेकिन हमें यह निश्चित करना  पड़ेगा कि हम  किस तरह का फर्श चुनें। पहला यह जानने का कोशिश करें कि कौन सा फर्श ज्यादा समय तक टिका रहेगा। क्योंकि इस जगह पर बारिश- धूप का असर सबसे ज्यादा होता है। और इसके खराब होने का सबसे ज्यादा अंदेशा भी होता है।  यहां पर ऐसे फर्श की जरूरत है जिस पर मौसम का असर न पड़े और  जिसमेंं फिसलन न हो। अमूमन  बारीश के समय  फिसलने का डर बना रहता है। यह ध्यान देना जरूरी है कि आंगन   कितनी जगह में है? फर्श बनवाने  के खर्च  के लिए यह सबसे पहले जानना जरूरी है। इसका साइज जानने के बाद ही आप  प्लान बनाएं।  ईंट से बना फर्श देखने में सुंदर लगता  है बशर्ते वह बहुत सुंदरता और सलीके से लगाई गई हों। यह गर्मी- बारिश और फिसलन से दूर करता है। आप अपनी कल्पनाशक्ति से ईंट से बहुत  बेहतरीन डिजाइन बना सकते हैं। आजकल कई रंगों की ईंटे आ रही है जो देखने में बहुत सुंदर लगती हैं। पत्थर भी आउटडोर प्लोरिंग के लिए अच्छा विकल्प हैं। आप अपने मन पसंद पत्थर को चुन कर भी अपनी सृजनात्मकता का परिचय दे सकते हैं।  पत्थर में भी कई रंग हैं जैसे नीला पत्थर ,लाल पत्थर, इसके अलावा स्लेट।

स्लेट फर्श ज्यादा समय तक चलता है और इसमें दरारे नहीं आ पाती। इन सभी विकल्पों मे स्टोन फर्श ही सबसे अच्छा है। पेबली फ्लोर टाइल्स भी एक अच्छा विकल्प हैं यह कई रंगों और साइज में आसानी से मिल जाते हैं। जो कंपनियां टाइल्स बेचती हैं उनके पास कई तरह के डिजाइन रहते हैं। उनको देखकर भी मनपसंद चुन सकते हैं। पेबली फ्लोर की कीमत बाजर में सबसे कम है। कंकरीट फ्लोर भी ज्यादा लोकप्रिय हैं। यहां पर भी कई तरह के रंग आपको मिल सकते हैं। आंगन भी आपके घर के अन्य कमरों का तरह ही है इसीलिए इसकी अनदेखी न करें।

फिर से हाजिर हैं आपके लिए नई पाेस्ट के साथ

 मित्राें, नमस्कार
 आज बहुत  दिनाें के बाद आपसे फिर से रूबरू हाे रहे हैं।  इस बीच हमारा ध्यान पूरी तरह  वागीशा क्लब काे मजबूत बनाने में रहा। हमने मैं अपराजिता नाम से मासिक पत्रिका निकाली जिसे पाठकाें ने बहुत पसंद किया। यह पत्रिका ई मैग्जीन के रूप में आप मैजिस्टर और राक स्टेंड में ङी पढ़ सकते हैं।  डेस्क टाप के  लिए मैजिस्टर और माेबाइल के लिए राक स्टैंड में यह सुविधा है। हा़र्ड कापी के  लिए  सब्सिक्रप्शन लेना हाेगा।  आपके पते पर मैग्जीन भेज दी जाएगी। दिल्ली एन,सीआर में रहने वाले मात्र 100 रूपये का पेटीएम करके मैग्जीन के 3 अंक मंगवा सकते हैं।

शनिवार, 2 जनवरी 2016

किसी भी दवा से ज्यादा कारगर है - एक्ससाइज

एक्सरसाइज आपके मूड को खुश रखती है। आपको शेप में रखती है । इसके लिए फिटनेस प्रोग्रााम का चयन कीजिए। प्रोग्राम ऐसा चुनें जो आपकी पर्सनेलिटी और लाइफस्टाइल से मेल खाता हो। आप एक्ससाइज के जरिए क्या पाना चाहती हैं इसको एकदम क् िलयर कर लें। क्या आप अपनी बॉडी को टोनअप करना चाहती हैं या फिर कुछ वजन भी कम करना है। इन सबके लिए अलग अलग एक् सरसाइज हैं जैसे- कार्डियोवसकुलर, स्ट्रेंथ और    फ्लेसिबल ट्रेंिंनंग।    क्या है फंडा-   कार्डियोवसकुलर एक्ससराइज में कैलोरी बर्न होती हैं इसके लिए तेज चाल से चलना, स्विमिंग और साइक्लिंग की जा सकती है।  स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में वेट को कंट्रोल करने की एक्ससाइज की जाती है ताकि आगे चलकर हड्डियों की समस्या न आए। आपकी    बॉडी मजबूत रहे और ठीक से काम कर सके।     फ्लेसिबल ट्रेंिंनंग में यह बताया जाता है कि आपका खड़े होने बैठने का तरीका कैसा है उसे कैसे सुधारा जाए।    इसमें आपको  मांसपेशियों की एक्ससाइज के बारे में बताया जाता है ताकि आपकी बॉडी फ्  लेक्सेबल बनी रहे। योगा, पिलाटे, स्ट्रेचिंग, ताई ची इसी तरह की     एक्सरसाइज हैं।रिलेक्स होने के लिए फुट मसाज बहुत काम आती है इससे आप खुश  महसूस करते हैं।  प्राणायाम आपके दिल के लिए अच्छा है।   सप्ताह में १ दिन तेज चाल से चलें    यह भी आपको ताजगी  देगा। सही खाने-पीने की चीजों का चुनाव करें- ऐसा खाना खाएं जो  स्वाद के साथ आपकी सेहत का भी ख्याल रखें। आपकी डाइट में संतुलन होना  चाहिए। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फेट और पानी इनका तालमेल जरूरी है।  याद रखें    यदि आपने सेहत पर ध्यान नहीं दिया तो आपके शरीर की  ताकत तो कम होगी और आपके पचाने की शक्ति भी कम हो जाएगी।    स्किन की चमक के लिए खूब पानी पिएं। कम से कम ८-१० गिलास पानी   फल खाएं-    पानी वाले फल जैसे तरबूज, खरबूज, खीरानारियल    को    डाइट में शामिल करें।    अपने चेहरे को धूलऔर सूरज की तेज किरणों से बचाएं।  अपनी स्किन के बारे में जानें और उसी के हिसाब से क्रीम का  चयन करें। माश्चराइजर का प्रयोग करें।

अगर है डायबिटीज तो लीजिए ये डाइट- डॉ. शिखा शर्मा

संतुलित खान-पान का तरीका अपनाने से हम अपनी सेहत को सुधार सकते हैं और आने वाली बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। बैलेंस्ड डायट न सिर्फ बीमारियों से बचाती है , बल्कि बीमार होने के बाद रिकवरी भी जल्दी होती सकती है। न्यूट्रीहेल्थ की डॉ. शिखा शर्मा कहती हैं, सही खानपान , व्यायाम और तनाव मुक्त रहकर हम बीमारी को आने से रोक सकते हैं। इस लेख में वह बता रही हैं डायबिटीज के रोगियों के लिए कैसा होना चाहिए उनका खान-पान। शुगर के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे बैलेंस्ड डायट लें। ज्यादा न खाएं , लेकिन तीनों वक्त खाना खाएं और बीच में दो बार स्नैक्स भी लें। उन्हें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा कॉम्बिनेशन लेना चाहिए। मसलन , नाश्ते में दूधवाला दलिया लें या फिर ब्रेड के साथ अंडा लें। इसी तरह खाने में सब्जी के साथ दाल भी लें। इससे शुगर का लेवल सही रहता है। असल में , कार्बोहाइड्रेट से शुगर जल्दी बनती है , जबकि प्रोटीन से धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ होती है , जिससे ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ लगता है और ज्यादा खाने से बच जाते हैं। कुल खाने की फीसदी कैलरी कार्बोहाइड्रेट से , 15-20 फीसदी प्रोटीन से और 15-20 फीसदी फैट से मिलनी चाहिए। ज्यादा तला-भुना न खाएं। लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें यानी जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं , खानी चाहिए। इनमें हरी सब्जियां , सोया , मूंग दाल , काला चना , राजमा , ब्राउन राइस , अंडे का सफेद हिस्सा आदि शामिल हैं। खाने में करीब 20 फीसदी फाइबर जरूर होना चाहिए। गेहूं से चोकर न निकालें। लोबिया , राजमा , स्प्राउट्स आदि खाएं क्योंकि इनसे प्रोटीन और फाइबर दोनों मिलते हैं। स्प्राउट्स में ऐंटि-ऑक्सिडेंट भी काफी होते हैं। दिन भर में 4-5 बार फल और सब्जियां खाएं लेकिन एक ही बार में सब कुछ खाने की बजाय बार-बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। फलों में चेरी , स्ट्रॉबेरी , संतरा , पपीता , मौसमी आदि और सब्जियों में करेला, घीया , तोरी , सीताफल , खीरा , टमाटर आदि खाएं। रोजाना एक मु_ी ड्राइ-फ्रूट्स खाएं यानी 10-12 बादाम या 5-7 बादाम और 3-4 अखरोट खा सकते हैं। घीया , करेला , खीरा , टमाटर , अलोवेरा और आंवला का जूस खास फायदेमंद है। लो फैट दही और स्किम्ड/डबल टोंड दूध लेना चाहिए। ग्रीन टी पीना अच्छा है। चाय के साथ हाई फाइबर बिस्किट या फीके बिस्किट ले सकते हैं। बीपी नहीं है तो नमकीन बिस्किट भी खा सकते हैं। जौ (बारले) , काला चना , मूंग दाल और जामुन खासतौर पर फायदेमंद हैं। इनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स भी कम है और ये पित्त के इंबैलेंस को कम करने के साथ-साथ अगर अंदर सूजन हो गई है तो उसे भी कम करते हैं। काला नमक डालकर छाछ पिएं। नारियल पानी पिएं। घर में बने सूप पिएं। नीम-करेला पाउडर ले सकते हैं। हालांकि इसका कोई फौरी फायदा नहीं होता कि कोई उलटा-सीधा खाने के बाद सोचे कि दो चम्मच नीम-करेला पाउडर खा लेंगे तो ठीक हो जाएगा। यह गलत है। लेकिन लंबे वक्त में यह जरूर फायदा पहुंचाता है।परहेज करें चीनी , शक्कर , गुड़ , गन्ना , शहद , चॉकलेट , पेस्ट्री , केक , आइसक्रीम आदि मीठी चीजें न खाएं। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों से बचें क्योंकि ये जल्दी ग्लूकोज में बदल जाती हैं। इससे शरीर में शुगर एकदम से बढ़ जाता है। ऐसे में इंसुलिन को शुगर कंट्रोल करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इनमें प्रमुख हैं मैदा , सूजी , सफेद चावल , वाइट ब्रेड , नूडल्स , पिज़्ज़ा , बिस्किट , तरबूज , अंगूर , सिंघाड़ा , चीकू , केला, आम , लीची आदि। पूरी , पराठें , पकौड़े आदि न खाएं। इनसे वजन के साथ-साथ कॉलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है। जूस से बचना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। पैक्ड जूस बिल्कुल न लें। सीधे फल खाना ज्यादा फायदेमंद है। सब्जियों में आलू , अरबी , कटहल , जिमिकंद , शकरकंद , चुकंदर न खाएं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होता है , जो शुगर बढ़ा सकते हैं। वैसे , इन्हें उबाल कर कभी-कभी खाया जा सकता है लेकिन फ्राई करके कभी न खाएं। फलों में आम , चीकू , अंगूर , केला , पाइन ऐपल , शरीफा आदि से परहेज करें क्योंकि इनमें शुगर काफी ज्यादा होती है। मैदा और मक्के का आटा न खाएं। इनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है और ये रिफाइन भी होते हैं। वाइट राइस की बजाय ब्राउन राइस खाएं। चावलों का मांड निकालकर खाना सही नहीं है क्योंकि इससे सारे विटामिन और मिनरल निकल जाते हैं। ऐनिमल फैट (मक्खन , पनीर , मीट आदि) कम कर देना चाहिए। शराब न पीएं। इससे हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल का एकदम नीचे गिर जाना) हो सकता है। ज्यादा शराब पीने से यूरिक एसिड और ट्राइग्लाइसराइड बढ़ता है और शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल होता है।

शनिवार, 18 मई 2013

पिता से दूरी पर गुरू भी पिता ही


एक अजीब कशमकश से भरा रिश्ता जहां पिता- पुत्र के रिश्ते में एक दूरी है लेकिन मामा को गुरू के रूप में स्वीकार्य है तो वह नाना ही। वह नाना के शिष्य है एक ऐसे शिष्य जो अपने गुरू की कही बात टालता नहीं। अभ्यास का कोई भी क्षण वह गंवाता नहीं। लेकिन एक पुत्र की तरह कोई जिद वह करता नहीं। जो चाहिए उसके लिए मां है। मां तो सबकुछ है पर एक उम्र में आने के बाद मां से भी हिचकिचाहट है। मां समझती है और धीरे धीरे समझाती है। किशोर होते बच्चे के कई सारे सवालों के उत्तर भी मां ही देती है और साथ में बड़ा हो रहा छोटा भाई, जिसे चचेरा भाई उसने जाना ही नहीं, उसकी मदद करता है। वह जानने लगा है कि मैं बड़ा हो रहा हूं। त्रिलोकी की तरह मेरी भी दाड़ी मूंछ उग आई हैं। एक गौरव उसे महसूस होता है पर वह मदद तो नहीं कर सकता अपने भाई को पिटने से बचा नहीं सकता, फिर वह कैसा बड़ा भाई है? अकेले में वह सोचता त्रिलोकी कह रहा है हम बड़े हो रहे हैं, अब हम अकेले बाहर जा सकते हैं, सिनेमा देख सकते हैं।
क्या होता है सिनेमा? वह अचरज से पूछता है क्या तूने सिनेमा देखा है। त्रिलोकी उसे विश्वास में लेता है। वह उसका प्यारा भाई है वह ही उसे साइकिल से ले जाता है । उसके लिए सभी सामान ले आता है। उसने ही तो उसे सबसे पहले वह सब सिखाया जिसे मां करने में हिचकिचाती थी, नहाना धोना, पानी डालना..
त्रिलोकी के जरिए ही तो मैं दुनिया का वह हिस्सा देख पाता हूं जिसे मैं खुद नहीं देख पाता। इन छुट्टियों में पिता जी की ड्यूटी कॉपी जांचने के लिए लगेगी। वहां तो 6 बजे के बाद छुट्टी होती है। तब मुझे त्रिलोकी साइकिल में बिठाकर सिनेमा दिखाने ले जाएगा।
सिनेमा देखकर लौटा हूं। अद्भुत अनुभव है। गीत, संगीत, सौंदर्य, दृश्य का अद्भुत मेल है। मां से कहकर अन्नपूर्णा को संगीत सीखना चाहिए। मुन्नी भी नाटक में भाग ले सकती है। त्रिलोकी नाथ भी हीरो में खूब जमेगा। वैसे श्रीनिवास भी कम नहीं है पर अभी वह बच्चा है। सोचसोचकर वह आप ही हँसने लगा। पर क्या करें यह सारे रास्ते उसके लिए बंद है। पर संगीत वह महसूस कर सकता है।
जिस दोपहर उसने न जाने कितने ख्वाब बुने वह शाम इतनी खतरनाक होगी उसे नहीं पता था। उसे यह भी नहीं पता था कि जिस रिक्शेवाले से त्रिलोकी नाथ का झगड़ा हुआ था वह स्कूल में जाकर शिकायत कर देगा। नाना ने पहले तो त्रिलोकी नाथ को बुलाया तो उसने अपना सिर एकदम झुका लिया। अगर श्रीधर गिर जाता तो?
त्रिलोकी कोई उत्तर दे या न दे न जाने क्या हुआ कि वह किशोर श्रीधर एकदम सामने खड़ा हो गया। अगर ऐसा हो जाता तो बचाता भी वही। इतना यकीन है मुझे कि यह मुझे मरने नहीं देगा। हमने तय कर लिया है कि हम सिनेमा देखने जाएंगे। बस फर्क इतना है कि अब अम्मा, अन्नपूर्णा, मुन्नी भी साथ जाएंगे। इस बार सुना है धार्मिक फिल्म आने वाली है। अम्मा ने हां कर दी है।
चलो त्रिलोकी तुम्हारा बड़ा भाई बोल रहा है, चलो। एक किशोर किस तरह खुद को बड़ा महसूस करने लगता है यह उस उम्र में अपने पिता से मेरा पहला विद्रोह था।
नाना जानते थे। श्रीधर को महसूस हो रहा है कि वह बड़ा भाई है। शरीर से नहीं सही शब्दों के जरिए तो वह उसकी रक्षा कर सकता है आज श्रीधर ने त्रिलोकी को मार खाने से बचा लिया, उसने संरक्षण करना सीखा। नाना भीतर ही भीतर खुश थे पर यह उन्होंने जाहिर नहीं किया। बस खुद रात को जब अम्मा खाना खिला रही थी तो नाना ने कहा कि कोई धार्मिक फिल्म आए तो देख आना। इस सप्ताह रानी साहिबा आएंगी कुछ अच्छा सा बना लेना। तेरे बनाए खाने की तो वह बहुत तारीफ करती हैं और सुन श्रीधर को संभाल यह बड़ा हो रहा है। मुझे मालूम है त्रिलोकी नाथ उसकी बहुत मदद करता है।
रविवार है आज रानी साहिबा आई हैं इस बार बहुत सारी किताबे लेकर आई हैं लेकिन न जाने क्यों मुझे गुनाहों के देवता बहुत पसंद आ रही है।

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लंदन फोर्ट वैष्णव भक्तों और अन्यारी देवी का क्या है रिश्ता

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