सोमवार, 17 सितंबर 2018

याेग करेगा आपकी हड्डियां मजबूत- याेग गुरू सुनील सिंह

हमारे शरीर काे हर उम्र में एक खास देखभाल की जरूरत हाेती है। आजकल बहुत सारे लाेग घुटनाें के दर्द के कारण परेशान हैं। अगर समय रहते हम  ध्यान दें ताे इस असाध्य दर्द से मुक्ति पा सकते हैं। याेग में इसका बहुत बेहतर उपाय बताया गया है। अमूमन 40 वर्ष पूरे होने के साथ साथ हमारे शरीर  की मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं और साथ ही हड्डियां कमजोर। इस उम्र में ऑस्टियोपोरेसिस होने का खतरा बढ़ जाता है और हल्की सी चोट से भी हड्डी टूटने का डर बना रहता है।  मगर घबराने की जरूरत नहीं यदि आप इन योगासानों को अपनी दिनचर्या में अपना लेंगे तो यह आपकी हड्डियों को कमजोर नहीं होने देंगे।
चक्रासन
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को घुटने से मोड़ें जिससे एड़ी हिप्स को छुए और पंजे जमीन पर हों। अब गहरी सांस लेते हुए कंधे, कमर और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इस प्रक्रिया के दौरान गहरी सांस लें और छोड़ें। फिर हिप्स से लेकर कंधे तक के भाग को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें। कुछ क्षण बाद नीचे आ जाएं और सांसे सामान्य कर लें।
वृक्षासन
पेड़ की तरह तनकर खड़े हो जाइए। शरीर का भार अपने पैरों पर डाल दीजिए और दाएं पैर को मोड़िये। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाकर बाएं पैर से लगाइये। दोनों हथेलियों को प्रार्थना मुद्रा में लाइये। अपने दाएं पैर के तलवे से बाएं पैर को दबाइये और बाएं पैर के तलवे को जमीन की ओर दबाइये। सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाइये। सिर को सीधा रखिए और सामने की ओर देखिये। 20 मिनट तक इस स्थिति में रुके रहें।
पद्मासन
जमीन पर बैठ जाएं। दायां पैर मोड़ें और दाएं पैर को बाईं जांघ के ऊपर कूल्हों के पास रखें। ध्यान रहे दाईं एड़ी से पेट के निचले बाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। बायां पैर मोड़ें तथा बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। यहां भी बाइंर् एड़ी से पेट के निचले दाएं हिस्से पर दबाव पड़ना चाहिए। हाथों को ज्ञानमुद्रा में घुटनों के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधी रखें। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़े। कम से कम 10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।
भुजंगासन
पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे रखें। दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। अब शरीर के ऊपरी हिस्से को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ पल इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।
उत्कटासन
सबसे पहले पंजों के सहारे जमीन पर बैठ जाएं। हाथों को आगे की तरफ फैलाएं और उंगलियों को सीधा रखें। गला एकदम सीधा होना चाहिए। अब आप कुर्सी की पोजीशन में आ चुके हैं। 10 मिनट कतक इस मुद्रा में बने रहें।
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रविवार, 16 सितंबर 2018

मिलिए इल्मा अफराेज से-शाकिर चाैधरी

कुंदरकी (मुरादाबाद) : इल्मा अफ़रोज़ से हमारी बातचीत के दौरान तेज़ आंधी आती है और एक लकड़ी का बोर्ड उड़कर उनके भाई अराफ़ात (24) के दाहिने हाथ पर गिर जाता है. इससे उनके हाथ से खून निकलने लगता है और हड्डी में गहरी चोट लगती है.

अचानक से इल्मा बेहद तनाव में आ जाती हैं. वहां मौजूद लोग उन्हें समझाते हैं कि घबराइए मत, हड्डी नहीं टूटी है. मगर वो बदहवास हैं और तेज़ आंधी-तूफ़ान के बीच ही मुरादाबाद (कुंदरकी में हड्डी का डॉक्टर नहीं है) जाने की ज़िद करती हैं. कमरे में दौड़कर जाती हैं. अपना पर्स लाती हैं. पैसे कम देखकर चाचा से मांगती हैं. तभी अराफ़ात अपनी उंगलियां चलाकर दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि हड्डी सलामत है.

इल्मा को सामान्य होने में वक़्त लगता है. उनकी आंखें लाल हो जाती हैं और आंसू बाहर आ जाते हैं.

इल्मा कहती हैं, अब इसके सिवा मेरा कौन है. आज पहली बार इसको चोट लगी है.

मुरादाबाद के कुंदरकी की इल्मा अफ़रोज़ हाल ही में आए यूपीएससी के परिणाम में 217 रैंक पाकर भारत की सिविल सर्विस का हक़दार बन चुकी हैं और उनका आईपीएस बनना तय है.

32 बीघा ज़मीन (5 एकड़) पर खुद खेती करने वाले इल्मा अफ़रोज़ के पिता अफ़रोज़ 14 साल पहले उनके परिवार को बेसहारा छोड़कर चले गए तो घर बड़ी बेटी होने के नाते इल्मा ने परिवार संभाल लिया.

इल्मा के घर में किचन एक तख्त के ऊपर चलता है. उसके ड्राइंग रूम की छत पर फूस का छप्पर है. उसका ड्रेसिंग टेबल उनकी अम्मी को दहेज़ में मिला था, जो गल चुका है.

इल्मा के घर के दो कमरों में कोई बेड नहीं है. चारपाई टूटी हुई है. कुर्सियां पड़ोस से मांगकर लाई गई है. इल्मा के पास बेहद सस्ता स्मार्ट फोन है, जिसकी स्क्रीन टूट चुकी है.

अब से पहले भले ही कोई इन्हें पूछने वाला न हो, मगर जबसे उनके आईपीएस बनने की आहट हुई है, अचानक से रिश्तेदारों की आमद बढ़ गई है, इसलिए कुछ दिन से घर में खाना अच्छा बन रहा है.

इल्मा की कहानी में इतना दर्द है कि आपका कलेजा बाहर उछाल मारने की यक़ीनन कोशिश करेगा. इल्मा पेरिस, लंदन, न्यूयॉर्क और जकार्ता तक में पढ़ाई कर चुकी हैं. इनकी पढ़ाई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक में हुई है. यूएन और क्लिंटन फॉउंडेशन के लिए भी काम किया है. बावजूद इसके इल्मा बिल्कुल साधारण कपड़े पहनती हैं और साधारण तरीक़े से ही रहती हैं.

अद्भुत प्रतिभा की मालकिन इल्मा हिम्मत न हारने की मिसाल हैं. अपने जीवन के संघर्षों को बताते हुए बिल्कुल हिचकती नहीं हैं.

वो कहती हैं, 9वीं में सबकुछ ठीक था. उसके बाद अब्बू नहीं रहे. मैं तब 14 साल की थी. भाई 12 का था. अब्बू मेरे बाल में कंघी करते थे. मैंने बाल ही कटवा दिए. उनकी जगह खेती संभाल ली. अब सवाल पढ़ाई का था. पहले 12वीं तक पढ़ाई स्कॉलरशिप के आधार पर हुई. फिर दिल्ली स्टीफ़न कॉलेज में दाख़िला मिल गया. वहां भी स्कॉलरशिप से पढ़ी. इसके बाद पेरिस, न्यूयॉर्क, ऑक्सफोर्ड सब जगह स्कॉलरशिप मिलती रही और मैं पढ़ती रही.

वो आगे कहती हैं कि, स्कॉलरशिप से मेरी पढ़ाई तो हो रही थी. लेकिन खुद का खर्च चलाना मुश्किल काम था. इसके लिए मैंने लोगों के घरों में काम किया. बर्तन साफ़ किए. झाड़ू-पोछा किया. बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया.

इल्मा कहती हैं कि, पिछले साल अपने भाई के कहने पर मैंने सिविल सर्विस का एक्ज़ाम दिया. पहले मैं आईएएस बनना चाहती थी, मगर मुझे लगा कि मेरे लिए आईपीएस होना ज़्यादा ज़रूरी है.

बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में हौसलों की मिसाल लिखने वाली इल्मा खेत में पानी चलाने, गेंहू काटने, जानवरों का चारा बनाने जैसे काम भी करती रही हैं.

इल्मा कहती हैं, लोग कहते थे लौंडिया है, क्या कर लेगी. अब कर दिया लौंडिया ने. मगर मेरी ज़िन्दगी में मुस्क़ान नाम की चीज़ अब आई है.

इल्मा के आईपीएस बनने के बाद स्थानीय लड़कियों में ज़बरदस्त क्रेज पैदा हो गया है. वो इल्मा से मिलने आती हैं. पिछले 3 दिन से उन्हें लगातार स्कूल कॉलेज में बोलने के लिए बुलाया जा रहा है.

इल्मा बताती हैं, डिबेट तो मेरी ज़िन्दगी का अहम हिस्सा रही है. दिल्ली में डिबेट में प्राईज मनी के तौर पर जो पैसा मिलता था, उसी से मेरा ख़र्च चलता था. उस पैसे के लिए मुझे हर हाल में जीतना होता था. लेकिन अब बोलने के पैसे नहीं मिल रहे हैं, तसल्ली मिल रही है.

कुंदरकी के नबील अहमद (45) इल्मा की कामयाबी को चमत्कार मानते हैं. वो हमसे कहते हैं, अब तक कुंदरकी को विश्वास ही नहीं हो रहा है, यह कैसे हो गया. जिस दिन इल्मा नीली बत्ती में वर्दी पहने गांव में आएगी, उस दिन कुंदरकी झूम उठेगी. इस लड़की ने वाक़ई कमाल कर दिया है.

मगर इल्मा की मां सुहेला अफ़रोज़ अभी से झूम रही हैं. वो कहती हैं, मेरी बेटी ने बहुत तकलीफ़ झेली है, उसका रब खुश हो गया है ।
साकिर चाैधरी की फेसबुक बॉल से साभार

शनिवार, 15 सितंबर 2018

कहानी -भूख- चित्रा मुद् गल



आहट सुन लक्ष्मा ने सूप से गरदन ऊपर उठाई। सावित्री अक्का झोंपड़ी के किवाड़ों से लगी भीतर झांकती दिखी। सूप फटकारना छोड़कर वह उठ खड़ी हुई, ‘‘आ, अंदर कू आ, अक्का।'' उसने साग्रह सावित्री को भीतर बुलाया। फिर झोंपड़ी के एक कोने से टिकी झिरझिरी चटाई कनस्तर के करीब बिछाते हुए उस पर बैठने का आग्रह करती स्वयं सूप के निकट पसर गई।सावित्री ने सूप में पड़ी ज्वार को अँजुरी में भरकर गौर से देखा, ‘‘राशन से लिया?''
‘‘कारड किदर मेरा!''
‘‘नईं?'' सावित्री को विश्वास नहीं हुआ।
‘‘नईं।''
‘‘अब्बी बना ले।''
‘‘मुश्किल न पन।''
‘‘कइसा? अरे, टरमपरेरी बनता न। अपना मुकादम है न परमेश्वरन्, उसका पास जाना। कागद पर नाम-वाम लिख के देने को होता। पिच्छू झोंपड़ी तेरा किसका? गनेसी का न! उसको बोलना कि वो पन तेरे को कागद पे लिख के देने का कि तू उसका भड़ोतरी...ताबड़तोड़ बनेगा तेरा कारड।''
उसने पास ही चीकट गुदड़ी पर पड़े कुनमुनाए छोटू को हाथ लंबा कर थपकी देते हुए गहरा निःश्वास भरा-‘‘जाएगी।''
‘‘जाएगी नईं, कलीच जाना!'' सावित्री ने सयानों-सी ताकीद की। फिर सूप में पड़ी गुलाबी ज्वार की ओर संकेत कर बोली, ‘‘ये दो बीस किल्लो खरीदा न! कारड पे एक साठ मिलता।''
छोटू फिर कुनमुनाया। पर अबकी थपकियाने के बावजूद चौंककर रोने लगा। उसने गोद में लेकर स्तन उसके मुंह में दे दिया। कुछ क्षण चुकरने के बाद बच्चा स्तन छोड़ बिरझाया-सा चीखने लगा-‘‘क्या होना, आताच नई।'' उसने असहाय दृष्टि सावित्री पर डाली।

शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

जानें क्या है.. पेंसिल वाला नेट आर्ट .. प्रिया कालरा, नेल आर्ट विशेषज्ञ


सोशल मीडिया के प्रभाव में ब्यूटी ट्रेंड्स तेजी से बदल रहे हैं। एक ट्रेंड के प्रति दीवानगी बढ़ती है तो दूसरा शुरू हो जाता है। दूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ते ही और अनूठे ट्रेंड की खोज शुरू हो जाती है। इसी तरह से अब एक से बढ़कर एक ट्रेंड सोशल मीडिया वॉल को घेरे रहते हैं। इन दिनों नेल आर्ट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रेनबो व जेल नेल आर्ट को छोड़कर युवतियां पेंसिल कलर नेल आर्ट को लेकर क्रेज दिखा रही हैं। इस तरह का नेल आर्ट कलरफुल टच देता है। ऐसे में माना जा रहा है कि फेस्टिव सीजन में यह नेल आर्ट काफी पसंद किया जाएगा।
 है क्या पेंसिल कलर नेल आर्ट
यह नेल आर्ट इस तरह से किया जाता है कि नाखून हूबहू पेंसिल कलर की तरह नजर आते हैं। नाखूनों पर इसी आकार में जेैल¨लग की जाती है और पेंसिल कलर से अलग अलग रंगों से इन्हें बाकायदा नोक देकर सजाया जाता है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के नेल आर्ट में कामकाज में असुविधा होती है लेकिन ट्रेंड परस्त लोग इसे खुशी खुशी अपना रहे हैं।
सोशल मीडिया से आया ट्रेंड इंस्टाग्राम पर आने वाला हर ट्रेंड कुछ ही पलों में लोगों को अपनी ओर आकर्षण में बांध लेता है। इस नेल आर्ट  ट्रेंड के साथ भी यही हुआ। रूस से आए इस ट्रेंड को लोगों ने हाथों हाथ लिया है। यहां पर भी इस तरह के नेल आर्ट की मांग बढ़ गई,  जिसके बाद नेल आर्ट आर्टिस्ट इसे सीख रहे हैं।
खूबसूरत नेल आ‌र्ट्स के साथ साथ अब अनूठे नेल आर्ट को भी उतनी ही तवज्जो मिल रही है। उनके मुताबिक अब युवतियां इस तरह के नेल आर्ट की मांग कर रही हैं। पेंसिल कलर नेल आर्ट हो या फिर ज्वेलरी नेल आर्ट। हर तरह के डिजाइंस इंस्टाग्राम व सोशल मीडिया से आ रहे हैं।
लोग इस तरह के डिजाइंस का डिमांड कर रहे हैं, क्योंकि युवा पूरी तरह से सोशल मीडिया के प्रभाव में जी रहे हैं और वहीं के डिजाइंस व ट्रेंड्स को पिक करते हैं। नेल आर्ट में भी लोग अनूठेपन की तलाश कर रहे हैं जिसको हम लोग पूरा करने की कोशिश भी कर रहे हैं।
मार्केट में सिंपल से लेकर, 4डी, 5डी हर तरह का नेल आर्ट है। इस साल ब्राइडल्स को नेल आर्ट अधिक पसंद रहा है। नेल एक्सटेंशन में एक्रेलिक जेल दो तरह से किए जाते हैं। इसे रेगुलर कराएं, ताकि नेचुरल नेल्स सही रहे। नेल एक्सटेंशन में एक्रेलिक की बजाए जेल को प्रेफर करें, क्योंकि इसे नेचुरल नेल्स को नुकसान नहीं होता।
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गुरुवार, 13 सितंबर 2018

कसरत के पहले भी खाए और बाद में भी- चयनिका शर्मा

पानी ही है असली दवा
सिर्फ कसरत करना सेहत को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। कसरत करने से पहले और बाद में शरीर को स्वस्थ रखने वाली चीजें खाना भी जरूरी है। डायटीशियन चयनिका शर्मा कहती हैं कि व्यायाम के बेहतर नतीजे पाने के लिए उससे पहले और बाद में लिए जाने वाले आहार की जानकारी होनी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि शरीर को छरहरा और त्वचा को मुलायम रखने के लिए व्यायाम से पहले कार्बोहाइड्रेट लेना सबसे अच्छा है। जबकि व्यायाम के बाद ताजी सब्जियों का रस पीना लाभदायक हो सकता है।
व्यायाम से पहले खाएं कुछ ऐसा, जिससे बनी रहे ऊर्जा
साबुत अनाज कामप्लैक्स कार्वाेहाइड्रेट संतुलित मात्रा में खाएं इसकी जगह केला या मेवे भी ले सकते हैं।  व्यायाम से  पहले  भरपूर मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है।
धावकों को व्यायाम के एक बार15 मिनट के अंदर हलकी लस्सी या छाछ लेनी चाहिए। 30 मिनट के बाद  नारीयल पानी पीने की सलाह दी जाती है। उसके बाद ताजा फल और सब्जियाें से बने जूस आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी है यह आपके शरीर से विषैले तत्वाें  काे बाहर निकालने में मदद करता है और आपकाे स्वस्थ रखता है।
 लेकिन याद रहे यह फल और सब्जियाें का चुनाव आप अपनी बॉडी टाइप काे देखकर ही करें। सभी काे यह फायदेमंद नहीं हाेता। बिना किसी की सलाह के जूस का सेवन आपके लिए नुकसानदायक हाे सकता है।
व्यायाम के बाद वो खाएं, जिनसे हो मांसपेशियों की मरम्मत
व्यायाम करने के 30 मिनट बाद ही खाने की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए। ऐसी चीजें खानी चाहिए, जो आपकी मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करें। अखरोट, फल, रसभरी और बादाम के साथ दही, जड़ वाली सब्जियां जैसे गाजर, चुकंदर, शकरकंद या उबले अंडे व्यायाम के बाद लिए जा सकते हैं। अगर आप वजन कम करने के लिए काेई याेजना बना रहे हैं ताे सबसे पहले डायटीशियन से राय अवश्य लें।
दौड़ने के बाद थोड़ा पानी या नारियल पानी और इसके बाद एक घंटे के भीतर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खानी चाहिए।
पूरे दिन भरपूर मात्रा में पानी और फल बहुत जरूरी है यह आपके मेटाबॉलिज्म काे सही रखते हैं साथ ही दूसरे दिन वर्कआउट के लिए भी तैयार करते हैं।

बुधवार, 12 सितंबर 2018

शुरू हाे गई गणेश उत्सव की तैयारी

 पेंटिंग- रिया राठाैड़
भाद्रपद मास की शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को शिवा कहते हैं. इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर स्नान दान व्रत जप आदि सत्कर्म करना चाहिए, जो व्यक्ति ऐसा करता है उसको गणपति जी का सौ गुना अभीष्ट फल प्राप्त होता है ऐसा भविष्य पुराण में दिया गया है. इस दिन गणेश जी के साथ शिव जी और पार्वती जी का भी पूजन करना चाहिए. भारत में कुछ त्यौहार धार्मिक पहचान के साथ-साथ क्षेत्र विशेष की संस्कृति के परिचायक भी हैं. इन त्यौहारों में किसी न किसी रूप में प्रत्येक धर्म के लोग शामिल रहते हैं. जिस तरह पश्चिम बंगाल की दूर्गा पूजा आज पूरे देश में प्रचलित हो चुकी है उसी प्रकार महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी का उत्सव भी पूरे देश में मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का यह उत्सव लगभग दस दिनों तक चलता है जिस कारण इसे गणेशोत्सव भी कहा जाता है.

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश का इसी दिन जन्म हुआ था. भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को सोमवार के दिन मध्याह्न काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था. इसलिए मध्याह्न काल में ही भगवान गणेश की पूजा की जाती है, इसे बेहद शुभ समय माना जाता है. भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी या सिद्धीविनायक चतुर्थी भी कहा जाता है. कुछ जगहों पर इसे पत्तर चौथ और कलंक चतुर्थी भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन चंद्र दर्शन नहीं किया जाता. मान्यता है कि चंद्र दर्शन करने से इस दिन कलंक लगता है.

गणेश चतुर्थी मुहूर्त: गणेश जी का दिन बुधवार को माना गया है. इसलिए बुधवार के दिन घर में गणेश जी की प्रतिमा लाना अत्यंत शुभ माना गया है.





चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: दिनांक 12 सितंबर दिन बुधवार को शाम 4:07 से चतुर्थी तिथि समाप्त: दिनांक 13 सितंबर दिन गुरूवार को दोपहर 2:51 बजे तक गणेश पूजन के लिए मुहूर्त: दिनांक 13 सितंबर दिन गुरूवार को सुबह 11:02 से 13:31तक गणेश जी की मूर्ति लाने का मुहूर्त: 1. दिनांक 12 सितम्बर दिन बुधवार को मध्याह्न 3:30 से सांयकाल 6:30 तक 2. दिनांक 13 सितम्बर दिन गुरुवार प्रातः 6:15- 8:05 तक तथा 10:50-11:30 तक

इस माह की चतुर्थी को गुड़, लवण (नमक) और घी का दान करना चाहिए. यह शुभ मान गया है और गुड़ के मालपुआ से ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए. इस दिन जो स्त्री अपने सास और ससुर को गुड़ के पूए खिलाती है वह गणेश जी के अनुग्रह से सौभाग्यवती होती है. पति की कामना करने वाली कन्या इस दिन विशेष रूप से व्रत करे और गणेश जी का पूजन करे. ऐसा शिवा चतुर्थी का विधान है.

शास्त्रों में भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करने का विधान बताया गया है. जो व्यक्ति हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करता उसको विशेष लाभ और साथ ही धन लाभ भी होता है. जो हर चतुर्थी नहीं कर सकता वह इस दिन करे तो उसको उसी के बराबर फल की प्राप्ति होती. इस दिन आप शुद्ध जल में सुगन्धित द्रव्य या इत्र मिला करके श्रीगणेश का अभिषेक करें. साथ में गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ भी करें. बाद में लड्डुओं का भोग लगाएं.

शिव- पार्वती का मंगलगान है हरितालिका तीज

शिवपार्वती-पेंटिंग अंजलि लांबा
साल में चार बड़ी तीज आती हैं, जिनमें से हरियाली, कजली और हरतालिका तीज का काफी महत्व है। लेकिन इन तीनों में भी हरतालिका तीज को सबसे बड़ी माना जाता है। यह सभी तीज मुख्य रूप से सावन और भादो के महीने में आती हैं। इन दिन शादीशुदा महिलाएं अपने सुहाग के सौभाग्य और कुंवारी लड़कियां मनचाहे वर के लिए कठिन व्रत रखती हैं।
हरतालिका तीज का महत्वःपंडित हरदेव के मुताबिक हरतालिका तीज को सभी तीजों में सबसे महत्वपूर्ण और लाभदायक माना जाता है। यह तीज भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। हरतालिका तीज को बड़ी तीज व्रत भी कहा जाता है। इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और बिहार के क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। यह व्रत एक सूर्योदय से लेकर दूसरे सूर्योदय तक चलता है और रात में महिलाएं जागकर गौरी माता के गीत गाती हैं।

तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। वास्तव में यह दिन माता पार्वती को समर्पित है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने तृतीया तिथि को ही भगवान शिव को पुनः प्राप्त किया था। मां पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लेकर माता सती ने घोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। इसलिए शादीशुदा महिलाएं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके पति की लंबी उम्र और सौभाग्य का वरदान मांगती हैं और कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए ये व्रत रखती हैं।

कुल्थी परांठा-गायित्री वर्धन

उत्तराखंड में एक पहाड़ी दाल काफी इस्तेमाल की जाती है जिसका नाम है गैथ या कुल्थी. इस दाल के भरवां पराठे भी बनाए जाते हैं जो खाने में बड़े ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भी होते हैं. इस दाल को लेकर एक गढ़वाली कहावत है : "पुटगी पीठ म लग जैली" याने इस दाल को खाने वाले का पेट पीठ में लग जाएगा ( चर्बी नहीं चढ़ेगी ) कुल्थी की दाल के और भी नाम हैं जैसे - कुरथी, कुलथी, खरथी, गैथ या गराहट. अंग्रेजी में इसे हॉर्स ग्राम कहते हैं और इसका वानस्पतिक नाम है Macrotyloma Uniflorum. ज्यादातर पथरीली जमीन पर पैदा होने के कारण कुल्थी के पौधे का एक नाम पत्थरचट्टा भी है. संस्कृत में इस दाल का नाम कुलत्थिक है. दाल के दाने देखने में गोल और चपटे हैं और हलके भूरे चितकबरे रंग में हैं. हाथ लगाने से दाने चिकने से महसूस होते हैं

परांठा बनाने की विधि : चार परांठे बनाने के लिए 250 ग्राम गैथ साफ़ कर के रात को भिगो दें. सुबह उसी पानी में उबाल लें. दाल को ठंडा होने के बाद छाननी में निकाल लें. पानी निथरने के बाद दाल को मसल लें. इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और थोडा सा अदरक कद्दूकस कर के मिला लें. नमक स्वाद अनुसार डाल कर अच्छी तरह से मिला लें. तैयार पीठी से भरवां परांठा बना लें और देसी घी से सेक लें. गरम परांठे को चटनी और घी या मक्खन के साथ सर्व करेंभिगोई दाल के बचे हुए पानी में निम्बू निचोड़ कर सूप बना लें. सूप टेस्टी भी होता है और फायदेमंद भी. इस दाल के साथ राजमा भी मिला कर बनाई जा सकती है.

कुल्थी के गुण : इस दाल में खनिजों के अलावा प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट प्रचुर मात्रा में होता है. इस दाल को पथरी- तोड़ माना जाता है. दाल का पानी लगातार सेवन करने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी घुल कर निकलने लग जाती है. इस का एक सरल सा उपाय है की 15-20 ग्राम दाल को एक पाव पानी में रात को भिगो दिया जाए और सुबह खाली पेट पानी पी लिया जाए. उसी दाल में फिर पानी डाल दिया जाए और दोपहर को और फिर रात को पी लिया जाए. ये दाल इसी तरह दो दिन इस्तेमाल की जा सकती है. अन्यथा भी यह किसी और दाल की तरह पकाई जा सकती है. चूँकि ये गलने में समय लेती है इसलिए रात को भिगो कर रख देना अच्छा रहेगा. कुल्थी की दाल का पानी पीलिया के रोगी के लिए भी अच्छा माना गया है. ये दाल उत्तराखंड के अलावा दक्षिण भारत और आस पास के देशों में भी पाई जाती है
साभार-हर्षवर्धन जाेग

मैं अपराजिता-कुकरी

मंगलवार, 11 सितंबर 2018

बच्चाें के दाेस्ताें पर भी रखें नजर- डॉ. अनुजा भट्ट


कई बार बच्चा मारपीटकर घर आता है
, तो उस पर भी अभिभावक गुस्सा करते हैं। 
हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे को अच्छी परवरिश मिले, वह कामयाब हों, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये सब किसी चुनौती से कम नहीं है।  अगर उनके व्यवहार मं कुछ गलत दिखाई दे रहा है ताे सावधान हाे जाएं। बच्चे घर से ही नहीं बाहर से भी बहुत कुछ सीखते हैं। यह अच्छा कम हाेता है बुरा ज्यादा हाेता है। देखने में आता है कि पैरेंट्स काम में बिजी रहते हैं, इस वजह से वह बच्चे को समय नहीं दे पाते। ऐसे में बच्चा काफी कुछ गलत करने लगता है। इससे मां-बाप बाद में परेशान होते हैं। बच्चे को सुधारने के लिए गुस्सा भी करते हैं, लेकिन ये सही नहीं है। गुस्से से आपका बच्चा सुधरने की जगह औऱ बिगड़ भी सकता है। आपके गुस्से का आपके बच्चे पर गलत असर भी पड़ सकता है। इसलिए अगर आप भी बच्चे पर गुस्सा करते हैं, तो इसे फौरन बंद कर दें। बच्चे को कई और तरीकों से भी समझाया जा सकता है।

इस तरह बच्चे को करें कंट्रोल

अगर बच्चा गलत व्यवहार कर रहा है, गलत बोल रहा है या गुस्सा कर रहा है, तो आप गुस्सा होने की जगह उससे प्यार से बात करें और उससे इन सबका कारण जानें। उसके परेशान होने का कारण जानने के बाद उस समस्या को दूर करने की कोशिश करें।
दिन भर की थकान के बाद पैरेंट्स खुद मानसिक रूप से इतने थक जाते हैं कि छोटी-छोटी बातों पर भी बच्चों पर गुस्सा करने लगते हैं। ये गलत है। आपको ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे जो देखते हैं, वहीं सीखते हैं। ऐसे में आपके गुस्से करने से बच्चे के दिमाग पर गलत असर पड़ेगा और वह भी गुस्सा करने लगेगा।
बच्चे को नजरअंदाज न करें, वह जो भी कहे उसकी हर बात सुनें ताकि वह आपसे हर बात शेयर करे और जिद न करे। बच्चे को ज्यादा से ज्यादा खेलकूद और बाहरी गतिविधियों में बिजी रखें। बच्चे को डांस व आर्ट क्लास में भेज सकते हैं। समय-समय पर उसे आउटडोर गेम्स खेलने के लिए बाहर भी भेज सकते हैं। इससे बच्चे की अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा व्यय होगी और आत्म अभिव्यक्ति व समाजिक व्यवहार की समझ भी आएगी।
गुस्से में बच्चों पर हाथ उठाने से भी बचें। बच्चे के साथ सहानुभूति रखिए। प्यार से बैठकर समझाइए। इसके अलावा हमेशा उसे डराना भी गलत है।
कई बार बच्चा मारपीटकर घर आता है, तो उस पर भी अभिभावक गुस्सा करते हैं। आप गुस्से की जगह बच्चे को बिठाकर समझाएं कि अगर मारपीट करोगे तो कोई भी आपसे दोस्ती व बात नहीं करेगा।
अक्सर ये भी देखने को मिलता है कि बच्चे के महंगी चीज मांगने पर पैरेंट्स गुस्सा हो जाते हैं और उसे डांट देते हैं। ये स्थिति भी ठीक नहीं है। आप बच्चे को पास में बैठाकर प्यार से बताएं कि आपके पास कितना पैसा है और उसे कहां खर्च करना है। इससे उसे आपकी इनकम का आइडिया रहेगा और बेकार की जिद नहीं करेगा।
इसके अलावा बच्चे के झूठ बोलने की स्थिति में भी उस पर गुस्सा न करें। उसे उदाहरण देकर झूठ बोलने के निगेटिव पक्ष बताएं। उसे सही-गलत के बारे में बताएं।

सोमवार, 10 सितंबर 2018

बुढ़ापे में बढ़ जाता है इन 5 बीमारियों का खतरा-साेनिया नारंग



हालांकि उम्र-संबंधी इन बदलाव और परेशानियों से बचना मुश्किल लग सकता है, लेकिन कुछ चीजों का ध्यान रखकर और कुछ स्टेप्स फॉलो कर उम्र संबंधी बीमारियों से दूरी बनाई जा सकती है. शारीरिक रूप से सक्रियता, स्वस्थ आहार और स्मार्ट जीवनशैली अपनाकर उम्र संबंधी स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सकता है.

हम यहां ऐसी ही कुछ बीमारियों और उससे बचने के उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिनका खतरा उम्र बढ़ने के साथ और बढ़ जाता है.
1. मोटापा
भारत में मोटापा स्वास्थ्य संबंधी एक गंभीर परेशानी है, जो लगातार बढ़ रही है. मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति मेटाबॉलिक सिंड्रोम, उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस, हृदय रोग, डायबिटीज, उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल, कैंसर और नींद विकार जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं.
कैसे बचें?
एक स्वस्थ जीवनशैली हृदय रोगों के जोखिम को 80 प्रतिशत तक कम कर सकती है.
इसलिए, सुनिश्चित करें कि आप प्रतिदिन एक्सरसाइज करें, कम वसा वाले खाद्य पदार्थ खाएं और नमक का सेवन सीमित करें ताकि शरीर के वजन को संतुलित रखा जा सके. साथ ही जई, मसूर और फ्लैक्ससीड जैसे फाइबर समृद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें.
फलिया फाइबर के अच्छे स्रोत हैं
दिल को स्वस्थ रखने के लिये प्रतिदिन ड्राईफ्रूट्स जैसे (पांच बादाम, एक अखरोट और एक अंजीर) खाएं, वेजीटेबल जूस, जामुन और मछली को अपनी डाइट में शामिल करें.
अगर आपको एल्कोहल और स्मोकिंग की आदत है, तो पहले इसके सेवन में कटौती करें और धीरे-धीरे पूरी तरह से छोड़ने की कोशिश करें.
आपके शरीर में ऑक्सीजन को प्रभावी ढंग से पंप करने की आपके शरीर की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ घट जाती है. इसलिए, नियमित रूप से एक्सरसाइज करना महत्वपूर्ण है. यह रक्तचाप, तनाव और वजन को मैनेज करने में मदद करता है.
2. गठिया
हमारे देश में बुजुर्गों की लगभग आधी आबादी इस बीमारी से प्रभावित है. इस बीमारी की वजह से जोड़ों और हड्डियों में दर्द रहता है. ऑस्टियोअर्थ्राइटिस गठिया का सबसे आम प्रकार है जो जोड़ों, आमतौर पर हाथ, घुटने, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है.
कैसे बचें?
सही तरह के इलाज और जीवनशैली में बदलाव करके इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है. गठिया को रोकने का सबसे अच्छा तरीका नियमित रूप से एक्सरसाइज करना है. संतुलित स्वास्थ्य के लिए वजन पर नजर रखना भी आवश्यक है.
फ्रेमिंगहम ऑस्टियोअर्थ्राइटिस अध्ययन के अनुसार, केवल 5 किलोग्राम वजन घटाने से घुटनों में ऑस्टियोअर्थ्राइटिस का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
3. ऑस्टियोपोरोसिस
ऑस्टियोपोरोसिस को 'साइलंट बीमारी' के तौर पर जाना जाता है. ऑस्टियोपोरोसिस 50 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के लगभग 4 करोड़ 40 लाख भारतीयों को प्रभावित करता है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं. ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित व्यक्तियों में गिरने पर हड्डी टूटने की संभावना ज्यादा होती है.
कैसे बचें?
हड्डियों के लिए विटामिन डी बेहद महत्वपूर्ण है
ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिये कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा का सेवन करना होगा, उच्च अम्लीय कंटेंट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को सीमित करना होगा और वाष्पित पेय से बचना होगा क्योंकि वे रक्त प्रवाह में पेट से कैल्शियम के अवशोषण को कम करते हैं.
विटामिन डी, हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, विटामिन डी प्राप्त करने के लिय सूर्य की रोशनी (धूप) एक बेहतरीन सोर्स है. सुनिश्चित करें कि आप कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें या इसकी जगह कोई सप्लीमेंट लें.
अपनी हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए वजन घटाने वाले एक्सरसाइज का अभ्यास करना शुरू करें.
4. कैंसर
उम्र बढ़ने के साथ-साथ कैंसर होने का खतरा बढ़ता है. 50 साल की उम्र के बाद ये खतरा और बढ़ जाता है. राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, कैंसर के नये मरीजों में एक-चौथाई हिस्सा ऐसे लोगों का हैं, जिनकी उम्र 65 से 70 वर्ष है.
कैसे बचें?
कैंसर से बचाव के लिए लाइफस्टाइल पर ध्यान दें
कैंसर से बचने के लिए, महिलाओं को नियमित रूप से स्त्री रोग संबंधी जांच करवानी चाहिए और प्रोस्टेट कैंसर को रोकने के लिए पुरुषों को डिजिटल रेक्टल जांच पर विचार करना चाहिए.
फेफड़ों के कैंसर को रोकने के लिए स्मोकिंग छोड़ना आवश्यक है. डाइट में, ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें, फल और हरी सब्जियों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं, फाइबर युक्त भोजन की मात्रा बढ़ाएं, अधिक मछली खाएं, पर्याप्त विटामिन डी प्राप्त करें, अपने भोजन में हल्दी का इस्तेमाल करें, लाल मांस खाने से बचें, शराब के सेवन को सीमित करें और ट्रांस फैट से दूर रहें.
5. डायबिटीज
सैचुरेटेड फैट और कम शुगर से युक्त स्वस्थ डाइट अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है.
देश में टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है. इस बीमारी से पीड़ित लोगों में युवा और बुजुर्ग दोनों समान रूप से शामिल हैं.
कैसे बचें?
सैचुरेटेड फैट और कम शुगर से युक्त स्वस्थ डाइट अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है.
सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट के लिए कार्डियो अभ्यास करने की आदत बनाएं. टहलना, तैराकी और साइकलिंग जैसी एक्सरसाइज ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित, वजन को संतुलित और शरीर को मजबूती देने में खासा मददगार हैं.
ऊपर दिये गये सभी तरीके उम्र बढ़ने के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए कारगर उपाय हैं. इन टिप्स को फॉलो कर आप स्वस्थ जीवन का सफर लंबे समय तक तय कर सकते हैं.
(सोनिया नारंग ओरिफ्लेम इंडिया में वेलनेस एक्सपर्ट हैं. )
 साभार.

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