सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

कपड़ों के हैं रंग निराले, कुछ चमकीले कुछ है सादे

 डा. अनुजा भट्ट

 जब भी हम कपड़ा खरीदने का मन बनाएं तो उससे पहले उसके बारे में जानकारी ले लें। आनलाइन शापिंग में आपके लिए यह बहुत जरूरी है।  क्योंकि यहां आप कपड़े को छूकर नहीं देख सकते। आपके पास फोटो का आप्शन है।

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आज आपके लिए पेश कर रहा है फेब्रिक के बारे में जानकारियां...

आज हम फ्रेबिक के बारे में बात करेंगे।

बात की शुरूआत कॉटन से..

·            कॉटन( Cotton)

 जिसे हिंदी में सूती कहते हैं। यह कपास से बनाया जाता है। इस पौधें में रूई निकलती है जिससे सूत काता जाता है और इससे धागा बनता है । सूत से ही सूती शब्द बना है। यह हजारों सालों से उपयोग में लाया जा रहा है . सूती कपड़ा बहुत आरामदायक होता है .यह दुनिया भर में सबसे अधिक पसंद किये जाने वाला कपड़ा है . इसमें किसी केमिकल का उपयोग नहीं होता अतः स्किन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता है . एलर्जी या रेशेज होने की संभावना बहुत कम होती है .

कई प्रकार के कपड़े जैसे कैलिको , डेनिम , ड्रिल , टेरी टोवलिंग . कैम्ब्रिक , गेबरडीन , पापलीन , वेलवेट आदि कॉटन से बनाये जाते हैं . इसके अलावा कॉटन के साथ अन्य फेब्रिक को मिलकर कॉटन ब्लेंड फेब्रिक जैसे कॉटन लिनन , कॉटन ट्वील , कॉटन जर्सी , कॉटन साटिन आदि कपड़े बनाये जाते हैं .

·          पोलीकॉटन ( Policotton)

यह प्राकृतिक कॉटन तथा सिंथेटिक पोलिस्टर यार्न को मिलाकर बनाया जाता है . कपड़े के उपयोग किये जाने के अनुसार कॉटन और पोलिस्टर की मात्रा में भारी फेरबदल हो सकता है . पोली कॉटन कपड़ा पतला और वजन में हल्का होता है और बहुत मजबूत होता है . ये लम्बे समय तक ख़राब नही होता .इस कपड़े में सूती कपड़े का आराम और सिंथेटिक कपड़े की मजबूती दोनों का लाभ मिल जाता है . इसके कुछ उदहारण में लिमा कॉटन , पोपलिन , मुस्लिन , पनामा , कैनवास आदि शामिल हैं ये कपड़े मजबूत होने के साथ ही इनमे जल्दी सिलवट नहीं पड़ती , हवा लगती है , इस पर इस्त्री करना आसान होता है , यह सिकुड़ता नहीं है , कॉटन से सस्ता होता है , ज्यादा बार धोया जा सकता है .

·          लिनन – Linen

अलसी के पौधे से मिलने वाला रेशा Fiber लिनन कहलाता है . इस फाइबर से बने कपड़े बहुत आरामदायक और मजबूत होते हैं . लचीलापन कम होने के कारण तह लगाकर बार बार इस्त्री करने से इसके रेशे टूट सकते है . लिनन से पहनने के कपड़ों के अलावा , कई प्रकार के उत्पाद बनाये जाते हैं जैसे परदे , सोफा कवर , जैकेट , टेबल क्लॉथ , बिस्तर और उसके कवर , तौलिये आदि .  इसका उपयोग जैकेट की आंतरिक परत के लिए भी किया जाता है, इसलिए नाम "अस्तर" है।

 

·         रेशम , सिल्क – Silk

सिल्क दुनिया का सबसे ज्यादा चमकीला और सुन्दर प्राकृतिक रेशा है . यह रेशम के कीड़े द्वारा बनाया जाता है . रेशम के धागे से कपड़े बनाना आसन नहीं है इसमें बहुत मेहनत लगती है इसलिए सिल्क से बने कपड़े बहुत महंगे होते हैं .सिल्क से बने कपड़े बहुत मुलायम , चमकदार और शाही होते हैं. रेशन का प्राकृतिक धागा हाइपो एलेर्जेनिक होता है यानि इसे पहनने से एलर्जी नहीं होती .सिल्क से बने कई फेब्रिक जैसे शिफोन , जोर्जट , ओर्गेन्जा , टसर , क्रेप , साटिन आदि दुनिया भर में बहुत पसंद किये जाते हैं . सिल्क से कपड़े दिखने में मुलायम भले ही हों लेकिन मजबूती मे कम नहीं होते हैं .

 

·         क्रेप – Crep

क्रेप शब्द फ्रेंच भाषा में क्रीपर से बना है जिसका मतलब सिलवट वाला होता है . क्रेप कपड़ा की विशेषता यही होती है कि इसकी सतह खुरदरी होती है . छूने पर यह कपड़ा दानेदार महसूस होता है ।यह किसी भी फाइबर से बना हों सकता है  अगर सिल्क से बना हो तो इसे क्रेप सिल्क कहते हैं और यदि कॉटन से बना हो तो इसे कॉटन क्रेप कहते है . सिल्क से बना क्रेप चमकदार होता है . क्रेप प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह के धागों से बनाया जा सकता है . पोलिस्टर क्रेप बहुत कॉमन है और बहुत किफायती भी है .सिंथेटिक क्रेप की देखभाल अपेक्षाकृत आसान होती है . इसमें जल्दी से सिलवटें नहीं पड़ती इसलिए पहनना आसान होता है वजन में यह हल्का होता है इससे बने कपडे बहुत पसंद किये जाते हैं . क्रेप कपड़े का उपयोग कपड़े बनाने के लिए किया जा सकता है, जैसे  सूट, ब्लाउज, पैंट, और बहुत कुछ। Crêpe घर की सजावट में  जैसे पर्दे और तकिए के कवर के लिए भी इसका उपयोग होता है ।

 

·         लाईक्रा – Licra

यह कपड़ा इलास्टेन नामक मेटेरिअल से बना होता है जो इन्सान द्वारा विकसित किया गया कृत्रिम फाइबर है . इलास्टेन को spandx के नाम से भी जाना जाता है . इससे स्पोर्ट्स वेयर , स्विम वेयर . अंडर गारमेंट्स आदि बनाये जाते हैं .

इसे कितनी भी बार खींचें यह लौटकर पुनः अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाता है . यह वजन में हल्का , मुलायम और चिकनी सतह वाला होता है . इसे किसी अन्य रेशे के साथ मिलाकर कपड़ा बनाया जा सकता है . यह धूप , पसीने या डीटरजेंट से ख़राब नहीं होता है

उपयोग के हिसाब से लाईक्रा की मात्रा कम या ज्यादा करके कपडे बनाये जाते हैं . बाजार में लाइक्रा के नाम से बिकने वाले फैशनेबल कपड़ों में लाइक्रा की मात्रा सिर्फ 2 – 3 % ही होती है . स्पोर्ट्स वेयर बनाने के लिए लाईक्रा की मात्रा 25 – 30 % तक रखी जाती है

·            पोलिस्टर – Polyester

पोलिस्टर एक मानव निर्मित सिंथेटिक फाइबर है जो कोयला और पेट्रोलियम जैसे पेट्रोकेमिकल से बनाया जाता है ।यह कपड़ा बहुत मजबूत और नर्म होता है . इसमें जल्दी सिलवटें नहीं पड़ती . इसे दूसरे रेशे के साथ बुना जा सकता है. इन कपड़ों में ना तो हवा लगती है और ना ही इनमे सोखने की ताकत होती है . ये कपड़े पहनने से असहज और चिपचिपा महसूस होता है . जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती है उन्हें यह कपड़ा पहनने से एलर्जी हो सकती है . इसके अलावा यह कपड़ा तुरंत आग पकड़ लेता है . रसोई घर में ये कपड़े पहनना सुरक्षित नहीं होता है .

 

 

·          रेयोन या विस्कोस – Reyon Viscose

रेयान को ही विस्कोस भी कहते हैं . यह फेब्रिक सेल्युलोस फाइबर से बनता है जो लकड़ी में पाया जाता है . रेयान सस्ता , नर्म , हवा पास होने वाला , किसी दूसरे रेशे के साथ बुना जा सकने वाला , और आसानी से रंग चढ़ाये जा सकने वाला फेब्रिक है . इसे ड्राई क्लीन करवाना पड़ता है क्योकि धोने से यह ख़राब हो जाता है .

यह खिंच कर ढीला हो जाता है और वापस अपनी अवस्था में नहीं आता कपड़ा बहुत मजबूत नहीं होता और गीला होने से कमजोर हो जाता है . परदे या होम फर्निशिंग में काम नहीं आता . दाग धब्बे जल्दी लग जाते हैं .

दूसरे रेशे के साथ मिलाकर बनाया कपड़ा सस्ता पड़ने के कारण इसका  बहुत  उपयोग होता है .विस्कोस(Viscose) विस्कोस एक अर्ध-सिंथेटिक प्रकार का रेयान फैब्रिक है जो लकड़ी के गूदे से बना होता है, जो रेशम के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। यह रेशम जैसा कपड़ा है और यह आकर्षक है इसका उपयोग कपड़ों की वस्तुओं जैसे कि ब्लाउज, कपड़े और जैकेट के लिए किया जाता है, और कालीन बनाने के लिए भी।

 

·          वेलवेट – Velvet

यह विशेष प्रकार की बुनाई से बनाया गया कपडा होता है जिसमे एक विशेष प्रकार का शाही लुक आता है . यह किसी विशेष रेशे से नहीं बनता बल्कि यह कपड़ा बनाने का एक तरीका है . अलग कपड़े के उपयोग किये जाने से इसे अलग नाम से पुकारा जाता है जैसे मार्बल वेलवेट , शिमर , प्लश , कॉटन वेलवेट , ब्रोकेड वेलवेट , क्रश्ड वेलवेट आदि

यह प्राकृतिक रेशे जैसे कॉटन , वूल , लिनन , रेशम तथा कृत्रिम रेशे जैसे रेयोन , पोलिस्टर आदि किसी से भी बनाया जा सकता है . यह सर्दी के मौसम में अच्छा रहता है क्योकि इसकी मोटाई अधिक होती है .पहनने के कपड़ों के अलावा वेलवेट से तकिया कवर , सोफा कवर , पर्दे आदि भी बनाये जाते हैं जो बहुत अच्छा look देते हैं . इसलिए दुनिया भर में बहुत पसंद किये जाते हैं . वेलवेट के गुण उसे बनाने में प्रयुक्त रेशे पर निर्भर होते है .

 

·          जोर्जट – Georgette

यह नायलॉन और पोलिस्टर को मिलाकर बनाया जाता है . महिलाओं को यह बहुत पसंद आता है क्योंकि यह हल्का , नर्म होता है और शानदार दीखता है . पहले इसे सिल्क से बनाया जाता था लेकिन अब सभी प्रकार के रेशे से बनाया जाता है . यह कम चमकीला होता है सामान्यतया चटक रंग में नहीं होता है , थोड़ा खिंच सकता है . यह यार्न में ट्विस्ट डालकर बनाया जाता है . यह एक प्रकार का क्रेप है ।

 

·          शिफोन – Chiffon

पहले शिफोन सिल्क से बनाया जाता था अब नायलोन तथा पॉलिस्टर से भी बनाया जाता है . पोलिस्टर शिफोन आने के बाद यह किफायती और मजबूत होने से बहुत लोकप्रिय हो गया है . यह कपडा पारदर्शक होता है . डेलिकेट होने के कारण इसे धोते वक्त ध्यान रखना पड़ता है . इसे ड्राई क्लीन करवाना अच्छा रहता है . यह नाजुक होने के कारण जल्दी उघड़ सकता है , यह जोर्जट से ज्यादा नर्म और चमकदार होता है .शिफॉन इतना फिसलता है कि सिलाई करना मुश्किल हो जाता है। कुछ टेलर कपड़ा सिलने के लिए कागज लगाते हैं ताकि सिलाई सही तरीके से हो सके . बाद में ध्यान से कागज निकाल दिया जाता है

 

·          कैनवस canvas

एक सादा-बुना कपड़ा है जो आमतौर पर भारी सूती धागे से बना होता है और कुछ हद तक, लिनन यार्न से। कैनवस कपड़े टिकाऊ, मजबूत होते हैं। सिंथेटिक फाइबर के साथ कपास सम्मिश्रण करके, कैनवास पानी प्रतिरोधी या यहां तक कि जलरोधी बन सकता है, जिससे यह एक आउटडोर कपड़े बन सकता है।  कैनवस एक अत्यंत टिकाऊ सादा-बुना कपड़ा है जिसका उपयोग नाव की पाल, टेंट, मार्के, बैकपैक्स, शेल्टर बनाने के लिए किया जाता है, तेल चित्रकला के लिए एक सहायक के रूप में और अन्य वस्तुओं के लिए, जिसके लिए एबंट की आवश्यकता होती है, साथ ही हैंडबैग, जैकेट और जूते।

 

·          कश्मीरी kasmeri / मेरिनो ऊन(Merino Wool)

एक प्रकार का ऊन का कपड़ा है जिसे कश्मीरी बकरियों और पश्मीना बकरियों से बनाया जाता है। कश्मीरी एक प्राकृतिक फाइबर है जो अपने अत्यंत नरम अहसास के लिए जाना जाता है। तंतु बहुत महीन और नाजुक होते हैं, स्पर्श करने पर एक रेशमी कपड़े की तरह महसूस होता है।  अक्सर कश्मीरी को ऊन के मिश्रण में बनाया जाता है और अन्य प्रकार के ऊन के साथ मिलाया जाता है, जैसे मेरिनो। मेरिनो ऊन एक प्रकार का ऊन है जो मेरिनो भेड़ के कोट से इकट्ठा किया जाता है। मेरिनो ऊन को एक शानदार फाइबर माना जाता है और इसका उपयोग अक्सर मोजे और बाहरी कपड़ों के लिए किया जाता है।

·           जर्सी (Jersey)

एक नरम स्ट्रेचबल बुना हुआ कपड़ा है जो मूल रूप से ऊन से बनाया गया था। आज कपास, कपास मिश्रणों और सिंथेटिक फाइबर से भी जर्सी बनाई जाती है। स्वेटशर्ट या बेड शीट  बनाने में इसका उपयोग होता है।

 

·          शनील sanel

शनील का कपड़ा नरम  होता है। यह भी एक बुना हुआ कपड़ा है जो विभिन्न प्रकार के विभिन्न रेशों से बनाया जा सकता है, जिसमें कपास, रेशम, ऊन और रेयान शामिल हैं।

 

·          दमस्क(Damask)

एक प्रतिवर्ती, जेकक्वार्ड-पैटर्न वाला कपड़ा है, जिसका अर्थ है कि पैटर्न कपड़े पर बुना हुआ है,  यह प्रिंट में भी बनता है । कपड़े का डिज़ाइन बुनाई के माध्यम से बनाया गया है, जो दो अलग-अलग बुनाई तकनीकों का एक संयोजन है। दमस्क पैटर्न या तो बहु-रंगीन या एकल रंग का हो सकता है। रेशम, लिनन, कपास, ऊन, या सिंथेटिक फाइबर, जैसे रेयान जैसे विभिन्न वस्त्रों से कई प्रकार के दमस्क बनाए जा सकते हैं।

·          गिंगहम(Gingham)

एक सूती कपड़ा है, जिसे एक चेक पैटर्न बनाने के लिए एक सादी बुनाई का उपयोग किया जाता है। गिंगहैम आमतौर पर दो-रंग का पैटर्न है,  लाल और सफेद या नीला और सफेद ।  पैटर्न विभिन्न आकारों में आ सकते हैं। Gingham पैटर्न प्रतिवर्ती है और दोनों तरफ समान दिखाई देता है। इसकी कम लागत और उत्पादन में आसानी के कारण गिंघम एक लोकप्रिय कपड़ा है।

 

·          साटन(Satin)

साटन बुनाई एक लोचदार, चमकदार, मुलायम कपड़ा  है। साटन कपड़ा एक तरफ नरम, चमकदार और दूसकी तरफ सादा। यह साटन बुनाई तकनीक का एक परिणाम है।

 

·          स्वेड(Suede)

एक प्रकार का चमड़ा है जिसे जानवरों की खाल के नीचे से बनाया जाता है, जो इसे नरम सतह देता है। स्वेड आमतौर पर भेड़ के बच्चे से बनाया जाता है, लेकिन यह अन्य प्रकार के जानवरों से भी बनाया जाता है, जिसमें बकरी, सुअर, बछड़े, और हिरण शामिल हैं। इसका उपयोग जूते, जैकेट और सहायक उपकरण के लिए किया जाता है, जैसे बेल्ट और बैग।

 

·         तफ़ता(Taffeta)

एक  सादा बुना हुआ कपड़ा है, जो रेशम के अलावा पॉलिएस्टर, नायलॉन, एसीटेट या अन्य सिंथेटिक फाइबर के साथ भी बुना जा सकता है। तफ़ता कपड़े में आमतौर पर चमक होती है।  तफ़ता वजन में हल्का है इससे अस्तर कपड़ा बनता है।

 

·         (Toile) टॉइल

यह शब्द फ्रेंच का है। जिसका मलब है फ्रैब्रिक। यह  एक विशिष्ट प्रकार का लिनन है जो एक एक रंग में  बनता है आमतौर पर काले, नीले, या लाल रंग में। यद्यपि शब्द टॉइल का मतलब फ्रेंच में फैब्रिक है,  1700 के दशक में फ्रांस में इसने लोकप्रियता हासिल की। टॉयल डिज़ाइन गैर-फैब्रिक आइटम जैसे वॉलपेपर और फाइन चाइना के लिए लोकप्रिय हैं।  सका उपयोग भी घर की सजावट के लिए होता है।

 

·          ट्वीड(Tweed)

एक मोटा बुना हुआ कपड़ा होता है जिसे आमतौर पर ऊन से बनाया जाता है। एक सादे बुनाई या टवील बुनाई का उपयोग करके इसे बुना जा सकता है। यह एक अत्यंत गर्म,  मोटा और सख्त होता है। ऊन के ट्वीड को अक्सर  विभिन्न रंगों के धागों का उपयोग करके बुना जाता है। ट्वीड सूट और जैकेट के लिए बहुत लोकप्रिय है,  शिकारी लोग इस तरह के कपड़े को बहुत पसंद करते थे।

 

·          टवील(Twill)

टवील तीन प्रमुख प्रकार के कपड़ा बुना जाता है। कपड़े अपारदर्शी, मोटा और टिकाऊ है। ट्विल कपड़े शायद ही कभी  प्रिंट होते हैं, हालांकि कई रंगों के यार्न का उपयोग ट्वीड और हाउंडस्टूथ जैसे डिजाइनों को प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।  इसका उपयोग डेनिम,  और बेड लिनेन के लिए किया जाता है।

 

 

·          मलमल(Muslin)

मलमल एक ढीला-ढाला सूती कपड़ा है। यह सादे बुनाई तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है, जिसका अर्थ है कि एक एकल यार्न यार्न बारी-बारी से और एक ही ताना यार्न के नीचे।

 

·         25) ऑर्गेज़ा Organza

मूल रूप से रेशम से बनाया गया था।  सिंथेटिक फाइबर, मुख्य रूप से पॉलिएस्टर और नायलॉन से भी बनाया जा सकता है। ऑर्गेना को पूरे कपड़े में बहुत छोटे छेद ही उसकी विशेषता है,  ऑर्गेज़ा शादी के गाउन बनाने के लिए बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि  इसमें एक झिलमिलाहट का अहसास होता है।

 

·         26) लेस(Lace)

फीता यार्न या धागे से बना एक नाजुक कपड़ा है, जो विभिन्न तरीकों  से बनाया जाता है मूल रूप से रेशम और लिनन से बनाया गया था, लेकिन आज सूती धागे और सिंथेटिक फाइबर दोनों का उपयोग किया जाता है। फीता एक सजावटी कपड़ा है जिसका उपयोग घर की सजावट की वस्तुओं को उभारने के लिए किया जाता है।

 

·         27) चमड़ा(Leather)

जिसे जानवरों की खाल या खाल से बनाया जाता है और अलग-अलग तरह के जानवरों और विभिन्न उपचार तकनीकों के परिणामस्वरूप अलग-अलग चमड़े निकलते हैं। जबकि काउहेड चमड़े के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे लोकप्रिय पशु त्वचा है, जिसमें लगभग 65 प्रतिशत चमड़े का उत्पादन होता है, लगभग किसी भी जानवर को चमड़े में बनाया जा सकता है, मगरमच्छ से लेकर सूअर तक। चमड़ा एक टिकाऊ, शिकन प्रतिरोधी कपड़े है, और यह जानवरों के प्रकार, ग्रेड और उपचार के आधार पर कई अलग-अलग लग रहा है और महसूस कर सकता है।

·         28) मॉडल(Modal)

मोडल फैब्रिक एक अर्ध-सिंथेटिक फैब्रिक है जो पेड़ के गूदे से बना होता है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कपड़ों के लिए किया जाता है, जैसे अंडरवियर और पजामा, और घरेलू सामान, जैसे चादर और तौलिया। मोडल रेयान का एक रूप है, हालांकि यह रेयॉन की तुलना में थोड़ा अधिक टिकाऊ और लचीला है। मोडल को अक्सर कपास और स्पैन्डेक्स जैसे अन्य फाइबर के साथ मिश्रित किया जाता है। मोडल को एक नरम कपड़ा माना जाता है जो विस्कोस की तुलना में अधिक महंगा है।

·          शान्तांग (Shantung)

चीन के शेडोंग प्रांत में बनने वाला यह कपड़ा ऐतिहासिक रूप से रेशमी है। यह डुपियोनी के समान है। शान्तांग का उपयोग अक्सर दुल्हन के गाउन के लिए किया जाता है।

मंगलवार, 5 मई 2020

विकास की चिंताओं के साथ महिला सशक्तिकरण भी जरूरी



सामाजिक सरोकार,मानवीय मुद्दों की जब जब बात होती है रुचिका का नाम अनायास ही जेहन में आ जाता है। खासकर जब मैं ऐसे युवाओं से मिलती हूं जिनमें समाज के लिए कुछ अभिनव करने की चाह होती है पर मैं उनकी व्यवहारिक तैयारी से संतुष्ट नहीं हो पाती। जब हम यह तय करते हैं कि हमें यह काम करना है तो उसके लिए हमें यह भी जानना जरूरी है कि उस काम को करते वक्त क्या क्या मुश्किलें आएंगी और हमको किस तरह से अपना धैर्य बनाकर रखना होगा। समाजसेवा में अपना करियर देखने वालों के लिए रूचिका से मिलना दिलचस्प होगा।
 रुचिका उन चंद लोगों में रही हैं, जिन्होंने बहुत पहले यह तय कर लिया था कि वह सामाजिक विकास के क्षेत्र में ही काम करेंगी। अपने स्कूल के दिनों में वह दक्षिण दिल्ली के स्लम एरिया में छोटे बच्चों को पढ़ाया करती थीं। घर में आर्यसमाज संस्कृति में मौजूद दान की परंपरा ने उन्हें शुरु से आकर्षित किया। इस संस्कृति ने उन्हें लोगों की जरुरतों के प्रति संवेदनशील बनाया। यही वजह है कि जब लेडी श्रीराम कॉलेज में वाणिज्य  (कॉमर्स) और मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) के बीच चुनाव करने का मौका आया तो उन्होंने मनोविज्ञान को तरजीह दी। वह कहती हैं, मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने मनोविज्ञान का चुनाव किया क्योंकि इसने मुझे सामाजिक क्षेत्र से एक पेशेवर के तौर पर जोडऩे में मदद की।
   रुचिका बार बार अपने संकल्प को याद करती रही इससे उनका आत्मविश्वास भी बना रहा और वह खुद के इसके लिए तैयार भी करती रही। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइसेंज में पहले दिन को याद करती हुईं रुचिका बताती हैं कि उन्हें उस दिन मुंबई के स्लम एरिया धारावी ले जाया गया। मानसून की बारिश में मुझे धारावी इलाके में तैरते मानव मल-मूत्र के बीच चलना पड़ा। उस समय वास्तविकता का अहसास हुआ। मैंने खुद से पूछा कि क्या मैं इसके लिए तैयार हूं? हर तरह से। मेरा मन हमेशा की तरह मेरे साथ था और भीतर से आवाज आती हां तुमको यही करना है। फिर भी दिल और दिमाग दोनो को बराबर महत्व देते हुए मैंने सामाजिक विकास के क्षेत्र में जाने के अपने फैसले के बारे में पुनर्विचार करने के लिए एक सप्ताह की छुट्टी ली। जीत दिल की हुई और इस बीच मेरा  इरादा मजबूत ही हुआ। मैं लौटी और फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा।  

रुचिका सामाजिक परिवर्तन में अपनी छाप छोडऩे के इच्छुक सामाजिक उद्यमियों को उनकी ही तरह सोचने और विचार रखने वालों से लोगों से मिलवाती हैं। रुचिका का काम पूरी दुनिया से ऐसे लोगों को एक साथ लाकर उन्हें साझीदारी और सहभागिता को बढ़ावा देना है ताकि वे मिलकर सामाजिक बेहतरी के एक समान उद्देश्य को हासिल कर सकें। वह आपसी समन्वय और साझीदारी वाली इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में अहम रोल अदा करती हैं। वह फंड इकट्ठा करने के लिए अशोका नेटवर्क से जुड़े लोगों की मदद भी लेती हैं। यह इसलिए कि परिवर्तन से जुड़े अभियानों और विचारों को मूर्त रूप दिया जा सके।
 रुचिका वकील भी हैं। उनका कहना है, जब आप परिवर्तन के कारोबार से जुड़े हों कानून का ज्ञान आपके लिए जरूरी हो जाता है। वह वकीलों को इस बात के लिए सहमत करती हैं, वह सामाजिक परिवर्तन में रुचि लेने वाले सामाजिक उद्यमियों को अपनी सेवा निशुल्क मुहैया कराएं।
चेवनिंग स्कॉलरशिप पर वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिक्स में जेंडर एंड सोशल पॉलिसी के अध्ययन के लिए गईं। विकास कार्यों से जुड़े 13 साल के अपने अनुभव में रुचिका ने मानवाधिकार से लेकर महिलाओं और उनके कानूनी अधिकारों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में वित्तीय सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों के तहत कई काम किए। वह वल्र्ड बैंक और जीटीजेड जैसे संगठनों से भी जुड़ी रहीं। उनके काम की प्रकृति उन्हें विभिन्न देशों में ले जाती है।
 अपनी बात को जारी रखते हुए वह कहती हैं, सामाजिक विकास के क्षेत्र ने उन्हें अपनी क्षमताओं को जानने और निखारने का पूरा मौका दिया। बदलाव में सक्रिय भूमिका निभाना ज्यादा अहम है। हालांकि मेरे काम का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है परिवर्तनकामी लोगों की पहचान करना और उन्हें साथ जुड़ कर काम करने के लिए राजी करना।

बुधवार, 29 अप्रैल 2020

आनंद और उदासी भरे चक्र


लॉकडाउन से जब सब घर के अंदर है और बाहर आवाजाही के रास्ते बंद तो ऐसे में बारिश और बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू जैसे मन भर को तृप्त कर देती है। अभी 1 या 2 रोज पहले झमाझम बारिश हुई तो जैसे पेड़ पौधें सब नृत्य करने लगे। प्रकृति का इतना सुंदर और मनोरम रूप मैंने कई साल बाद देखा। सूर्यास्त के दृश्य ने कई मानवीय और मानवेतर कथाओं के मानस से जैसे मेरे पोर पोर को भिगो दिया। एकतरफ प्रकृति का इतना सुंदर दृश्य और दूसरी तरफ गमलों में चहकते फूल जैसे गले मिलने के आतुर हो। वाह कितना सुंदर सामिप्य। और दूसरी तरफ सामिप्य की प्यास में नन्हें पौधें की अकुलाहट. जैसे वह भी हाथ बढ़ाकर कह रहे हो मुझे भी ले लो अपने साथ अपने साहचर्य में .... पर आनंद और उदासी भरे चक्र में बारिश की बूंदों के साथ लहरों की कीर्तन सुनने का अभ्यास भी तो नहीं। तभी एक गमले का टुकड़ा जैसे मेरे हाथ में आकर कुछकहना चाहता हो मेरी तंद्रा तोड़ना चाहता हो जो मिट्टी को हाथ में लेकर कई न जाने किस लोक में चली गई हो।

अरे अब न तो बारिश है और रात में आसमान में तारे में टिमटिमा रहे हैं। दूर पहाड़ों में घरों की रोशनी टिमटिमाते तारे जैसी लग रही है। फिर मेरी हथेली में जो यह मिट्टी है वह कैसे गीली है। और यह गमले का नन्हा सा टुकड़ा क्यों चाहता है कि मैं आज उसके बारे में भी बात करूं।

मिथक कहते हैं कि भगवान ब्रहमा ही पहले कुम्हार थे जिन्होंने भगवान विष्णु का चक्र बनाने के लिए मिट्टी का प्रयोग किया था। आगे चलकर यह कला का आधार बन गया। सेरामिक्स जी हां इसका वास्तविक नाम प्राचीन ग्रीक भाषा में केरामिकोस है। केरामिकोस शब्द केरामोस से आया है जिसका अर्थ है कुम्हार की मिट्टी। यह कला सर्वप्रथम चीनी लोगों ने सीखी। उसके बाद क्रेतान, ग्रीक, रोमन,पर्शियन, मयान जैसे देशों से विकसित होती हुई भारत में पहुंची। तब से मिट्टी के बर्तनों के साथ ही साथ मूर्तियों के कई और डिजाइन भी बनाए गए। हर कोई चाहता है कि उसके घर में समृद्धि आए और शांति रहे। इसके लिए वह भारतीय पद्धति के साथ ही साथ चीनी, बौद्ध, जापानी कई तरह की कला पद्धतियों का सहारा लेते हैं। मिट्टी से कलाकृतियों का निर्माण सिर्फ भारत में ही नहीं होता बल्कि हर देश में यह कला अपनी जीवनशैली के अनुरूप विकसित होती है। कला के साथ साथ वहां की पौराणिक मान्यताएं उजागर होती हैं। यह प्रतीकों के रूप में संवारे जाते हैं। वास्तु शास्त्र, फैंग्शुई के साथ कला अपना विस्तार कर रही है और मिट्टी की सौंधी सुगंध को पूरे परिवेश में रचाबसा रही है।

हर कलाकृति सिर्फ कलाकार की भावनाओं को ही संप्रेषित नहीं करती बल्कि वह कला के कद्रदान के मन के पट भी खोलती है।

गमले का यह टुकड़ा और भी बहुत कुछ कहता है जैसे कोई कहानी कहता है।

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

क्या ऐसा ही आपका बच्चा


 मेरा बच्चा ऐसा क्यों करता है. पता नहीं किस पर गया है हममें से कोई भी ऐसा नहीं.
 यह सब बातें हम अक्सर करते हैं। कभी कभी सामने वाला भी करता है. आपका बच्चा आपका जैसा नहीं है। तब मन में यह सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। आखिर स्वभाव क्या है।
स्वभाव कुछ ऐसा है जिसके साथ हम पैदा हुए हैं - यह उन लक्षणों का एक समूह है जो हममें से प्रत्येक को अद्वितीय बनाता है, और यह निर्धारित करने में एक शक्तिशाली कारक है कि हम दुनिया में आने के बाद कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। जब बच्चा घर से बाहर निकलकर एक नई स्थिति से संपर्क करता है तब उसके वास्तविक स्वभाव के बारे में पता चलता है।
उदाहरण  के लिए,  मैं आपको दो से तीन-वर्षीय बच्चों को डेकेयर की पहली सुबह और उनकी कक्षा में प्रवेश करने की प्रतिक्रिया के बारे में बताती हूं।
 रहीम और उसकी माँ ने दरवाजा खोला और कुछ पल के लिए कमरे को निहारा। कुछ ही मिनटों में, रहीम ने अपने कोट और टोपी को उतार दिया और अन्य बच्चों के साथ ब्लाक खेलने के लिए बैठ गया। अब उसने अपनी मां का साथ छोड़ दिया और बच्चों के साथ मशगूल हो गया।
 थोड़ी देर में एक दूसरा बच्चा आया जिसका नाम था फ्रेंक वह अपने पापा के साथ आया था। कमरे के अंदर आने के बाद भी वह अपने पापा के साथ लिपटा रहा उसने अपने पापा के पांव को और जोर से पकड़ लिया। उसने अपना कोट और टोपी उतारने से भी मना कर दिया।  थोड़ी देर बाद उसने चंद कदमों पर ऱखी मेज  को  देखा जिसमें बच्चे पजल्स खेल रहे थे। फ्रेंच  अपने पापा का  हाथ थामे उस मेज तक पहुंचा और वह धीरे से उस टेबल के पास गया और फिर बच्चों के साथ खेलने लग गया।
 कार्लोस अपनी दादी के साथ वहां गया। उसने बिलकुल भी समय नहीं गंवाया और उसने अपने जैसे दो बच्चों का भी उत्साह बढाया जो तब तक बेमन से खेल रहे थे। इस खेल में प्लास्टिक की गाड़ियों की रेस चल रही थी । इतना ही नहीं उसने यह रेस जीत भी ली और जोर से चिल्लाया यह मेरी है।
 बच्चे एक ही स्थिति पर इतने अलग तरीके से प्रतिक्रिया क्यों करते हैं? इसका कारण यह  है कि हर बच्चा अपने स्वभाव के साथ पैदा हुआ था।
आपका बच्चा हर रोज़ दिनचर्या, संक्रमण, अपरिचित स्थितियों के बारे में अपनी तरह से प्रतिक्रिया करता है, और नए लोग उसके स्वभाव से प्रभावित या अप्रभावित होते हैं।
 क्या किसी के स्वभाव को परिभाषित किया जा सकता है। जी हां  ऐसे कई तरीके हैं जिनसे स्वभाव को परिभाषित किया जा सकता है। हम यहाँ पाँच लक्षणों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो जन्मजात विशेषताओं जैसे  प्रतिक्रिया की तीव्रता, गतिविधि का स्तर, हताशा, सहनशीलता, परिवर्तन की प्रतिक्रिया, और नए लोगों से मेलमिलाप की प्रतिक्रिया के आधार पर तय की गई हैं।

यह सब गुण हर बच्चे में मौजूद हैं - पर व्यक्त करने का तरीका अलग अलग है। उदाहरण के लिए, जब नए लोगों की प्रतिक्रिया की बात आती है, तो एक बच्चा जो ऐसे किसी अन्य बच्चे से जिससे वह पहले कभी नहीं मिला हो वह खुशी के साथ मिलता है जबकि दूसरा बच्चा ऐसी स्थिति में आंख उठाकर भी नहीं देखता।
 6 और 9 महीनों के बीच, अधिकांश माता-पिता अपने बच्चे के व्यवहार में पैटर्न देखना शुरू करते हैं जो उन्हें यह सुनिश्चत करने में मदद करते हैं कि बच्चे का स्वभाव कैसा होगा लेकिन बच्चे का स्वभाव 1 वर्ष के बाद ही पता चलता है।  क्योंकि तब आपका बच्चा बोलना सीख जाता है और वह लोगों से मिलना भी शुरू कर देता है।
 प्रतिक्रिया की गहनता
 जैसा कि आप इन विशेषताओं के बारे में पढ़ते हैं,  आपको हर बच्चे की एक अलग तस्वीर दिखाई देती है।
 प्रतिक्रिया की तीव्रता
कार्लोस जैसे बच्चे दुनिया को जोर से और स्पष्ट बताते हैं कि वे कैसा महसूस करते हैं। इनको हम बड़ा रिएक्टर कह सकते हैं। जब वे खुश होते हैं, तो सारी दुनिया को पता चलता है इसी तरह जब वह गुस्से में होते हैं तो भी सारी दुनिया को पता चल जाता है। उनकी हँसी और चिल्लाहट में बहुत त्तीव्रता होती है।
 तीव्रता की कम सीमा पर बच्चे शांत और शायद ही कभी उपद्रव करते हैं, औसत से अधिक सोते हैं, और चेहरे की अभिव्यक्ति हो या गले की आवाज, मामूली बदलाव के साथ अपनी भावनाओं को दिखाते हैं।
विशेषताएं: "मैं सिर्फ चिल करना चाहता हूं" से "मैं चाहता हूं कि हर कोई यह जाने कि मैं कैसा महसूस करता हूं"
कुछ बच्चे अपने में खोए रहते  हैं। एक अपनी ही दुनिया में । उनकी इस दुनिया के बारे में कुछ जानना चाहते हैं कुछ नहीं भी। लेकिन ऐसे बच्चे सक्रिय नहीं होते है। उनको बार बार याद दिलाना पड़ता है। वह घंटों एक ही जगह पर बैठे रह सकते हैं। 
  सामाजिकता से जोड़ने के लिए जरूरी है कि आप उनकी दुनिया में शामिल  होने की कोशिश करें। उनके साथ संगीत सुनें। पढ़ते समय नाटकीय आवाज का प्रयोग करें।गतिविधियों को शामिल करें।
 कुछ बच्चे जो अपने शरीर के किसी हिस्से को लगातार हिलाते रहते हैं। इसका मतलब यह है कि वह जो कर रहे हैं उसके साथ उनके दिमाग में कुछ और भी साथ साथ चल रहा है।
 कम तीव्रता वाले बच्चे अक्सर अधिक उत्तरदायी होते हैं।
यदि  वह इसी तरह के हैं और मोबाइल टीवी से चिपके रहते हैं तो आप बड़े रिएक्टर के लिए  इन बातें पर गौर करें। संगीत और प्रकाश व्यवस्था नरम होनी चाहिए। बच्चे को संभावित विस्फोटक स्थितियों से धीरे से हटा दें। पुनर्निर्देशन की कोशिश करें- उसे एक अलग गतिविधि में शामिल करें। हां यह जरूर याद रखें कि आपके बच्चे का व्यवहार कुछ बच्चों से अलग हो सकता है पर यह मानने की भूल न करें कि वह मानसिक रूप से बीमार है।
 यदि कार्लोस जैसा बच्चा रहीम या फ्रेंक के पास जाए और गुस्सा करें तो उलझें नहीं अपने बच्चे को गले लगा लें उसे उससे कमजोर न समझें।
सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे को वह नींद मिलती है जो उसे चाहिए।
 गतिविधि स्तर
यदि आपका बच्चा एक्शन ओरिएंटेड है, तो आप शायद अब तक जान गए होंगे कि उसे दौड़ना, चढ़ाई करना और अपने आसपास की दुनिया को खोजना पसंद है। ये मूवर्स और शेकर्स उन स्थानों को पसंद करते हैं जो उनको अपनी ऊर्जा को खर्च करने के बहुत सारे अवसर प्रदान करते हैं।
 दूसरे छोर पर वे बच्चे हैं जो चुपचाप बैठने और खेलने की सामग्री को पाकर खुश हैं।  जो अपने पैरों के बजाय अपने हाथों की उर्जा खर्च करना चाहते हैं उनको उसी तरह के खेल की तलाश है। वे दुनिया को देखना और सुनना चाहते हैं। उनके आस-पास की चीजों में उनकी रुचि सक्रिय बच्चे की तरह की मजबूत हो सकती है, लेकिन उसके लिए उनको दोड़ना भागना पसंद नहीं।
 विशेषताएं: "मैं बैठकर खेलना चाहता हूं और इसी तरह खुश हूं"
कम सक्रिय बच्चे के लिए:
अपने बच्चे को एक दिलचस्प खिलौना रखकर आगे बढ़ने के लिए लुभाएँ, जहाँ वह आसानी से पहुँच सके। इसे धीरे धीरे करें। उसे जिम में बच्चों को देखने दें। एक साथ संगीत सुनें। यदि संगीत से ज्यादा आपके बच्चे को नृत्य पसंद है तो उसे नृत्य के लिए प्रेरित करें।
सुरक्षित, सक्रिय अन्वेषण के लिए बहुत सारे अवसर प्रदान करें। लुका-छिपी, फ्रीज टैग और अन्य सक्रिय गेम खेलें। अपने बच्चे से लंबे समय तक बैठने की उम्मीद न करें।
 इस तरह हम निष्कर्ष के तौर पर कह सकते हैं कि आपका बच्चा अपने आप में सबसे अलग है उसका स्वभाव अलग है। जो जन्मजात है। इसलिए उससे कभी भी अपनेआप से या किसी से भी जोड़कर न देखें। शक्ल मिल सकती है पर स्वभाव नहीं।

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