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रविवार, 30 अप्रैल 2017

जब बच्चा जाए पहली बार स्कूल



 बच्चों को जब पहली बार स्कूल जाना होता है तो बच्चों क¢ साथ-साथ उनक¢ पेरेंट्स भी बहुत डरे हुए होते हैं। ऐसे में क्या करना चाहिए। बता रही हैं षेमफोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल्स की संस्थापक निदेषक श्रीमती मीनल अरोड़ा
जन्म से 5 वर्ष के दौरान बच्चों का दिमाग एक स्पाॅन्ज की तरह होता है और इन्हीं वर्षों में दिमाग का 90 फीसदी विकास भी हो जाता है।  इसलिए इन वर्षों में बच्चे की परवरिश प्रेम और ध्यान से की जानी चाहिए।  घर की शिक्षा के साथ साथ यह भी जरूरी है कि उसकी शिक्षा और जीवन के मजबूत आधार के लिए उचित प्रीस्कूल का चयन किया जाए।
हर दिन कुछ देर के लिए अपने बच्चे को अन्य करीबी रिश्तेदारों या दोस्तों की देखरेख में छोड़ें और धीरे धीरे समयावधि को बढ़ाएं।
बच्चे के मन में प्लेस्कूल के बारे में उत्सुकता पैदा करें।  उनका रूख सकारात्मक करने के लिए उन्हें प्लेस्कूल में मिलने वाले नए दोस्तों और उसके शिक्षकों के बारे में बताएं ताकि उन्हें स्कूल जाने के लिए वह प्रोत्साहित हों।
अपने बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उसे हमउम्र अन्य बच्चों के साथ खेलने, मस्ती करने का मौका दें।
बच्चे को सिखाएं और भरोसा दिलाएं कि शिक्षक उनके मार्गदर्शक हैं और वह उन्हें अपने बच्चों की तरह ही मानेंगें।
स्कूल व्यवस्था से परिचित कराने के लिए बच्चे को प्रीस्कूल परिसर की यात्रा पर ले जाएं।
बच्चे से बात करके उसके उत्साह, परेशानी और स्कूल शुरू होने को लेकर चिंताओं के बारे में उसकी भावनाएं जानने की कोशिश करें।
स्कूल शुरू होने से पहले बच्चे के सोने, खेलने, खाने आदि की एक दिनचर्या बनाने की कोशिश करें और बच्चे को उसका पालन करने के लिए प्रोत्साहित करें।
आप शिक्षकों को बच्चे केे व्यवहार, प्रतिभाओं और कमजोरियों से अवगत करा सकते हैं।  इन बातों की जानकरी होने से शिक्षक भी बच्चे के संपूर्ण विकास में योगदान दे सकते हैं।

याद रखें कि प्रीस्कूल में जाने से पहले आपके बच्चे का परेशान होना सामान्य है।  लेकिन यह आपका कर्तव्य है कि आप उसके जीवन के इस बदलाव को सरल, मजेदार और उत्साहवर्धक बनाएं।  धैर्य रखें, अपने बच्चे को प्यार और समर्थन देें, उसे स्कूल जाना धीरे-धीरे पसंद आने लगेगा।
हैप्पी पेरेंटिंग !!

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