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सोमवार, 3 अप्रैल 2017

जिसके सिर पर ताज उसी का राज - डा. अनुजा भट्ट



फाेटाे साभार asianage
जब हम महिलाओं की खूबसूरती की बात करते हैं तो हमारा ध्यान सबसे पहले उसकी बाहरी सुंदरता पर टिकता है जिसमें तीखे नैननक्श, सुडौल देह, लंबे बाल, ऊँची नाक और अच्छी कद काठी है। समाज इन्हीं मानदंडो को मानता है और जब एक भी मानक खरा नहीं उतरता तो मान्यता बदल जाती है। लेकिन समाज को बदलते भी समाज के लोग ही हैं। चपटे पांव वाली लड़की एथलीट में परचम फैलाती है तो बिना बालों वाली एक महिला मिसेज इंडिया वर्डवाइड के लिए चुनी जाती है। चलिए मिलते हैं केतकी जनी से ‐‐‐
केतकी ने जब अपने बाल (।सवचमबपं)  गंजेपन की बीमारी की वजह सेे खो दिए तो उन्होंने सोचा कि ईश्वर ने मुझे इतना अच्छा कैनवास दिया है तो क्यों न उसका इस्तेमाल किया जाए।  फिर उन्होंने अपने सिर पर टैटू बनवाने का निश्चय किया।  हालांकि इसको बनवाने में उन्होंने बहुत दर्द झेला लेकिन इससे उनका खोया हुआ आत्मविश्वास भी वापिस मिल गया और लोगों का नजरिया बदल गया।  अब उनका गंजापन भी एक फैशन स्टेटमेंट है।
केतकी जनी को 40 वर्ष की आयु में लगा कि उनकी जिंदगी ही खत्म हो गई।  उन्होंने बहुत से तेल ट्राई किए, हेयर ट्रीटमेंट करवाए, बहुत सी दवाएं भी लीं लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ।  जिससे वह डिप्रेशन में भी चली गईं।  दवा छोड़ने के एक से दो माह के भीतर उनके सारे बाल झड़ गए।  केतकी को अपने इस दर्द से उभरने के लिए करीबन 5 साल का लंबा समय लगा।    फिर उन्होंने मिसेज इंडिया वर्डवाइड में हिस्सा लिया।
केतकी बताती हैं, ‘मेरे लिए वह समय अंधकार भरा था क्योंकि महिला की खूबसूरती को उसके बालों के साथ जोड़ा जाता है।‘  वह कहती हैं कि यह सिर्फ उन्हीं की सोच नहीं है बल्कि सोसाइटी की सोच ने भी उनकी लड़ाई मुश्किल कर दी। सच में मेरे पास लोग आए और मुझसे पूछने लगे कि क्या मुझे कैंसर हुआ है या फिर मुझे देखकर अफसोस जताते कि इसकी तो जिंदगी ही खत्म हो गई या फिर अब यह पब्लिक के बीच में कैसे आएगी।  मैने लोगों की नजरों का सामना किया है। मैं जहां भी जाती थी वहीं लोगों की बातों का विषय बन जाती थी।

तब मेरे पति और मेरी बेटी ने मेरा हौंसला बढ़ाया और मुझे कहा कि मैं स्टोराईड पिल्स न लूं इससे मेरी किडनी खराब हो जाएगी।  जैसे ही मैंने दवा लेनी बंद की मेरे सारे बाल झड़ गए। फिर मेरी बेटी एक दिन मेरे पास आकर बैठी और मुझसे कहा कि आपके पास अभी सारी जिंदगी पड़ी है। आप हैल्दी हो, स्मार्ट हो, ब्यूटीफुुल हो। फिर इतना निराश क्यों हो। जिंदगी प्रति आशावादी बनिए। यही समय मेरे लिए टर्निंग प्वाईंट था।  जब मैनेे मिसेज इंडिया पेगेंट का फेसबुक पेज देखा तो जल्दी से आवेदन कर दिया। खैर मुझे बुला यिा गया और तब मुझे अहसास हुआ कि आज फैशन इंडस्ट्री बदल चुकी है। जब मैं वहां पसर्नल इंटरव्यू देेने पहुंची तो पैनल में से एक जज ने मुझे मेरी हेयरस्टाईल की वजह सेे पसंद किया।  मुझे उम्मीद है कि मेरी जैसी एलोप्सिया से पीड़ित अन्य महिलाएं भी घर से बाहर निकलेंगी और कम बालों के कारण शर्मिदंगी महसूस नहीं करेंगी।


एलोपीसिया ऐरेटा एक आॅटोइम्यून डिसआॅडर बीमारी है जिसमें कि बाल अप्रत्याक्षित रूप से झड़ने लगते हैं।  यह बीमारी किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकती है।  इस बीमारी में बाॅडी बाहर से आने वाले नुकसानदायक सेल्स को अटैक करने की बजाय अपने अंदर के सेल्स पर ही अटैक करने लगती है। 
लक्षण 
स्कैल्प से बाल पैचिस में झड़ने लगते हैं।  इससे हेयर ग्रोथ पर भी फर्क पड़ता है।  
यह बीमारी वंशानुगत भी हो सकती है।
इसके लिए कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि यह बीमारी तनाव से संबधित है।
कई बार यह बीमारी अचानक होती है और कुछ समय बाद अपने आप ठीक भी हो जाती है।
बाल झड़ने से पहले उस जगह पर खारिश या जलन होती है।  यदि हेयर फौलिसल्स नष्ट न हुए हों और फौलिसल्स की जलन  खत्म हो जाती है तो बाल दोबारा आ सकते हैं।
एलोपेसिया एरिटा फिंगर नेल्स और टोनेल्स को भी प्रभावित करती है। कई तरह के लक्षण आते हैं जैसे कि
नाखून टूटने वाले होने लगते हैं
नेल्स पर सफेद दाग और लाइन्स नजर आने लगती हैं
नेल्स रफ लगने लगते हैं और वह अपनी चमक खो देते हैं।
नेल्स पतले होने लगते हैं और टूटने लगते हैं।
दुर्भाग्य से अभी तक इस बीमारी का कोई अचूक इलाज नहीं है।  फिर भी डाक्टर्स लगातार शोध कर रहे हैं। वह आपको बता सकते हैं जिससे कि बाल दोबारा उग सकते हैं।
एंटी इन्फलमेटरी ड्रग्स देकर, इंजेक्शन द्वारा, आयंटमेंट द्वारा या ओरली दवाएं देकर भी इसको रोकने की कोशिश की जा सकती है। इन दवाओं से हो सकता है कि बाल दोबारा उगने लगें लेकिन इनसे बाल झड़ने को नहीं रोका जा सकता।
जब आप धूूप में निकलें तो सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
घूप में निकलें तो गोल चश्मा पहनकर निकलें जिससे कि आईब्रो और आईलैशिस के बालों को बचाया जा सके।
सिर पर हैट, विग या स्कार्फ डालें जिससे कि सिर को धूूप से बचाया जा सके।
यह बीमारी सीधे तौर पर बीमार नहीं करती और न ही यह छूत का रोग है लेकिन यह आपको इमोशनल रूप से कमजोर कर सकती है क्योंकि बालों को खोना हर एक के लिए इमोशनल लाॅस ज्यादा होता है।









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