यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलो- हिमानी शिवपुरी


अभिनय से लेकर राजनीति तक में सक्रिय हिमानी शिवपुरी मूलतः उत्तराखंड के देहरादून शहर से हैं।  उनका जन्म 24 अक्टूबर 1960 को देहरादून में हुआ। उनका पैतृक गांव रुद्रप्रयाग के भट्टवाड़ी में है।  उनका विवाह अभिनेता ज्ञान शिवपुरी से हुआ। उनके बेटे कात्यायन शिवपुरी फिल्म निर्माता हैं। पेश है हिमानी शिवपुरी के साथ मैं अपराजिता की एक विशेष बातचीत-

आर्गेनिक कैमेस्ट्री में एमएससी करने के बाद एनएसडी में एडमिशन की क्या वजह रही?
 मेरे पिता श्री हरिदत्त भट्ट जी दून स्कूल में हिंदी के टीचर थे। हमारे घर में बुद्धिजीवियों का आना जाना लगा रहता था। उनकी बातचीत में मुझे मजा आता था अाैर देश दुनिया के बारे में जानने का मौका मिलता था। पिताजी के वह सभी दोस्त मुझे प्रोत्साहित करते थे अाैर मैं कालेज की हर गतिविधि में हिस्सा लेती थी। नाटकों में मेरी विशेष रूचि थी। मैं पढ़ाई में भी अच्छी थी। एंमएससी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए यूएस जाने का अवसर मिला उसी समय मैंने एनएसडी की प्रवेश परीक्षा भी दी। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मैं अभिनय सीखना चाहती हूं। मेरे पिता ने कहा कि जरूर सीखो। अाैर मैं दिल्ली आ गई।
कैसा रहा अनुभव
बहुत ही मजेदार। मैंने शुरूआत में थियेटर ही किया। देहरादून अाैर दिल्ली में मेरी स्टेज परफार्मेंस देखकर मेरे घनिष्ठ मित्र मेघ मजीठिया ने मुझे फिल्मों में काम करने क¢ लिए कहा। मेघ एक जाने माने थियेटर आर्टिस्ट हैं। पर फिल्म में काम करने क¢ लिए मैं राजी नहीं थी। मुझे लगता था वहां हर अभिनेत्री को अंग प्रदर्शन करना होता है। इसके लिए मैं सहज नहीं थी।

 पर आपने फिल्मों में तो काम किया अाैर बहुत नाम भी कमाया यह कैसे हुआ?
 मेरे भीतर कई तरह के अाैर भी डर थे। मेरे पति ज्ञान शिवपुरी जो एक अभिनेता थे। उन्होंने मेरे मन क¢ भीतर की ऊहापोह को खत्म किया अाैर  उन्होंने फिल्मों में काम करने क¢ लिए राजी भी कर लिया। इसक¢ लिए वह लगातार मुझे प्रेरित करते रहे। हांलाकि उन्होंने कोई दबाव मुझपर नहीं डाला।

टीवी अाैर फिल्म में क्या अंतर है?
 एक अभिनेत्री होने के नाते मैंने महसूस  किया कि टीवी अ©र फिल्म में कोई अंतर नहीं है।
 देहरादून की युवा पीढ़ी को थियेटर से जोड़ने क¢ लिए कोई पहल आपकी ओर  से की गई है?
 हां क्यों नहीं। मैं हर साल देहरादून में थियेटर वर्कशाप करती हूं। इस वर्कशाप क¢ जरिए मैं अपने पिता को भी याद करती हूं।  मैं जो कुछ भी हूं वह उनकी ही बदौलत हूं।
अब आएगा मजा क¢ बाद आपकी रियल जिंदगी में मजा आया या नहीं?
 जिंदगी में सुख अ©र दुख आते जाते रहते हैं। पर हम कलाकार रील लाइफ दूर को रियल लाइफ से दूर रखते हैं। मुझे हिंदी सिनेमा में सबसे बड़ा ब्रेक वर्ष 1999 में सूरज बडजात्या की फिल्म हम आपके हैं कौन से मिला । उसक¢ बाद हिंदी की कई सुपरहिट फिल्मों जैसे कुछ कुछ होता है, परदेस, दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगें, अंजाम, कोयला में बतौर सहायक अभिनेत्री काम किया। मैं अब आपको फिल्म वेडिंग पुलाव में नजर आऊंगी।
 धारावाहिक हमराही की देवकी भौजाई से आपकी पहचान घर घर में हो गई। लेकिन आप अपने किस किरदार को अपनी जिंदगी के करीब पाती हैं।
 राजनीति में आने की क्या वजहें हैं।
उत्तराखंड की होने के कारण हमेशा से मेरे मन में इस राज्य के लिए कुछ करने की इच्छा है और मुंबई में रहने के बावजूद वह कला के माध्यम से प्रदेश में भी सक्रिय रहीं हूं। मैं चाहती हूं कि उत्तराखंड में भी ऐसी नीति बने, जिससे यहां के कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका मिले। बिना राजनीति में आए यह कर पाना संभव नहीं  है।
प्रसिद्ध फिल्में 
अब आएगा मजा, कुछ कुछ होता है, हम आपके हैं कौन, हम साथ साथ हैं, दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, हां मैंने भी प्यार किया है, मेहँदी, चोरी चोरी चुपके चुपके, किस्मत कनेक्शन, मैं प्रेम की दीवानी हूँ, कुछ न कहो, कोई मेरे दिल में है, कोयला, उमराव जान, आ अब लौट चले।



special post

'me too' (मैं भी)-खयालात- सदन झा

आजकल वैश्विक स्तर पर 'me too' (मैं भी) अभियान चल रहा है। लड़कियां, महिलाएं, यौन अल्पसंख्यक तथा यौनउत्पीड़ित पुरुष हर कोई अपने साथ...