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सोमवार, 27 मार्च 2017

बच सकते हैं तलाक से

  डा. अनुजा भट्ट

तलाक एक बहुत बड़ी त्रासदी है लेकिन यहां पर कुछ ऐसे रास्ते बताए जा रहे हैं जिससे इसके दर्द को कम किया जा सकता है और तलाक को रोका भी जा सकता है।
अनुष्का माथुर उम्र 29 साल। जब वह 8 माह की गर्भवती थी यह उनका पहला बच्चा था इसी दौरान उनको पता चला कि उनके पति का किसी और महिला के साथ अफेयर चल रहा है इस अफेयर की शुरूवात तब ही हो गई थी जब वह स्कूल में पढ़ते थे और अभी भी यह चल रहा है। वह नहीं समझ पा रही है कि वह क्या करे। ऐसी स्थिति में जब वह अपने पति के बच्चे की मांबनने वाली है उसका साथ कैसे छोड़ दे। उसको कोई रास्ता नहींसुझाई दे रहा है। वह अपने जीवन के प्रति जितना भी सोचती है उदास हो जाती है।  यह किसी एकपरिवार की घटना नहीं है बहुत सारे परिवारों में ऐसी या इससे मिलतीजुलती घटनाएं होती हैं। जिस कारण संबंध या तो टूट जाता है यादूटने के कगार पर होता है। अगर ऐसे समय में थोड़ी सी समझदारी औरसावधानी से काम लिया जाए तो रिश्ते को बनाये रखा जा सकताहै। बहुत बार जल्दी में लिया गया निर्णय अंतत दुखद प्रसंग बन जाता है और तब मलाल के सिवाय कुछ नहीं रहता। दो साल तक लगातार अनगिनत झगड़े और बहस के बाद उसने तलाक का रास्ता चुना। इसबीच उसने अपने भीतर की हिम्मत को बटोरा और जीवन के प्रतिसकारात्मक रवैया अपनाया। इससे पहले वह कई विपरीत स्थितियों से भी गुजरी। डिपरेशन , पेनिक अटेक 
मैंने अपने पति सेकहा कि जब मुझको तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब तुमने मुझ इग्नोर किया और एक दूसरा व्यक्ति हमारी जिंदगी के फैसले लेने लगा। यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती।मनोवैज्ञानिक  समीर पारिख के अनुसार भावनात्मक दबाव से तनाव पैदा होता है। लगभग हरजगह तनाव का यही मुख्य कारण है। इससे दोनो साथी प्रभावित होते हैं औरदोनों की भावनाएं प्रभावित होती हैं। यह ठीक है कि तलाक आपसी रजामंदी से होता है जहां साथ रहने के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। पारिख कहते है कि मैं ऐसे कई जोड़ों को जानता हूं जो तलाक लेना चाहते थे पर काउसलिंग के बाद वह साथ जीवन बिताने लगे और आजखुश हैं। शारीरिक और मानसिक कारण झगड़े और अनबन केबहुत बड़े कारण होते हैं ।तलाक बच्चों औरआंतरिक परिवार को भी प्रभावित करता है। यह जोड़े के स्वास्थ्य को भीप्रभावित करता है अगर आप भावनाओं नें बहने वाले नहीं हैं औरबहुत मजबूत हैं तब भी जिंदगी भर इस घाव को भर नहीं पाएंगे। भारत मेंतो सामाजिक जीवन भी इससे प्रभावित होता है और लोग सामाजिकगतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते या फिर निमंत्रित भी नहीं किएजाते या तो वह समाज से किनारा कर लेते है या फिर समाज ही उनकोबहिष्कृत कर देता है। एक तरह का निर्वासन है यह।
अगर आप तलाक केकगार पर हैं तो कई नकारात्मक विचार आपको प्रभावित करने लगतेहैं। अवसाद और बेचैनी जैसी बीमारियां तो आम हैं। वास्तवमें अस्तव्यस्त और अतिव्यस्त जिंदगी तलाक का पहला कारण बनता हैइसके लक्षण काफी कुछ सदमे से उत्पन्न तनाव से मिलते जुलतेहैं। आत्मसम्मान का नियम और असुरक्षा जैसे साधारण अभिव्यक्ति कोआघात पहुचाते हैं। यह बहुत बार गुस्से का परिणाम भी होता है। यहगुस्सा बेचैनी और अनिद्रा को जन्म देता है इससे आपकाआत्मविश्वास भी चकनाचूर हो जाता है। तनाव, हमेशा सिरदर्द जैसी मनोस्थिति आगे चलकर तलाक में बदल जाताहै। 
जब दिखाई दें ये लक्षण तो करें क्या 
पहले यह तय करें कि ये सारे अनुभव दोनों के समान हैं।
मैरिजकाउंसलर्स से संपर्क करें।
:अलगाव या फिर तलाक दोनों ही उच्चतम सीमा तक दबाब के बाद का परिणाम है। 
मन की खिन्नता और दोषपूर्ण जीवन का भावनात्मक पहलू है। 
विशेषज्ञ केसामने स्वीकारें कि आप खुश नहीं हैं आपके आपसी संबंध अच्छे नहींहैं। 
अगर सिर्फ एक व्यक्ति ही रिश्ते के बारे में सोच रहा है तो रिश्ते नहीं सुलझते।
आम शिकायत यहहै कि पति पत्नी एक दूसरे को समय नहीं दे पाते पति के पास समय है तो पत्नी के पास नहीं 
पत्नी के पास है को पति के पासनहीं।
जरूरी है एकदूसरे लिए समय निकालना ।
जीवन में खुशी तलाशना और सबसे ज्यादा जरूरी है खुश रहना। 
किसको किसमें मिलती है खुशी- घूमने में , फिल्म देखने में, बात करने में ।
सामाजिक जीवन से सरोकार रखें। सप्ताहांत में पत्नी और बच्चों के साथ घूमनेजाएं, दोस्त बनाए।

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