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शनिवार, 21 अप्रैल 2018

बच्चों की दुनिया में विज्ञापन का दखल- अनुजा भट्ट

विज्ञापन के  जरिए बच्चों के मन पर जो असर पड़ रहा है उस पर किसीका ध्यान नहीं है। सीरियल, विज्ञापन उनके दिलोदिमाग में घुस गए हैं।एक स्त्री के कई रूप हैं। वह पत्नी और प्रेमिका से पहलेे किसी की बहिन और मां है। यह हम कैसे भूल सकते हैं । लेकिन उसकी जो तस्वीर दिलो-दिमाग में केंद्रित की जा रही है वह सेक्स इमेज है। बच्चे भी मां की इस इमेज से घिरे हैं। वह वात्सल्यमयी मां कीअपेक्षाकृत ग्लैमरस मां को खोजते हैं। इनर वियर के विज्ञापन देखकरसवाल करते हैं। फिटनेस और गोरेपन की क्रीम खरीदने की सलाह देते हैं।यह खुद उनकी सोच नहीं है। विज्ञापनों के जरिए हमने उनके भीतर इस तरहके कई सवाल भर दिए हैं जो खुद उनकी क्रिएटिविटी पर हमला कर रहे हैं।वह भटक रहे हैं इसीलिए अपराध बढ़ता जा रहा है। छोटे छोटे बच्चों केहाथ में जो बॉबी डॉेल हैं उसके साथ पूरी किट हैं। बच्चे उसके कपड़ेबदलते हैं। और उसके शरीर को छूते हैं। भले ही वह गुडिय़ा है पर उसका शरीर एक विकसित किशोरी का है। बच्चे साथ में खेलते हैं। और ऐसे कई सवाल आपस में करते हैं। क्या आप उनके सवालों का उत्तर देने के लिएहमेशा उनके साथ हैं?पिछले दिनों क्रिसमस के अवसर पर टीवी मे बार्बी डाल का इतनाविज्ञापन दिखाई दिया कि हर लडक़ी ने बार्बी डॉल की ही मांग की। बच्चोंको पढ़ाई की गंभीरता समझ में आए या नहींलेकिन टीवी में जोदिखाई दे रहा है वह ही उनको सच लगता है। बच्चे सिर्फ कार्टून ही नहींदेखते वह अपने अभिभावकों के साथ फिल्में और सीरियल भी देखते हैं औरइसके साथ ही विज्ञापन भी। मैग्जीन और समाचार पत्र में छपे चित्रों कोदेखकर भी उनके मन में सवाल उठते हैं। आप मैंग्जीन तो छिपाकर नहीं रखसकते।  हम लोकप्रियता के लिए ऐसे प्रयोग करते हैं लेकिन इसका संदेश बच्चों पर क्या जाता है इसकी चिंता नहीं। अब बच्चों कोएडल्ट विज्ञापनों से बचाने की कवायद शुरू हुई है। यह भी सिर्फ टीवीपर। पत्रिकाओं और समाचारपत्र का क्या होगा?विज्ञापनों पर नजर रखने वाली संस्था एडवरटाइजिंग स्टैंडर्डकाउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) ने ऐसे कई टीवी विज्ञापनों का प्रसारणरात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच करने की सिफारिश की है।सूचनाव प्रसारण मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। काउंसिल की यहसिफारिश विशेषकर फास्ट ट्रैक (इसमें एक पुरुष और स्त्री को एक कार मेंआपत्तिजनक अवस्था में दिखाया गया था), वाइल्ड स्टोन डिओ (कार मेंपुरुष और स्त्री आपत्तिजनक अवस्था में), टाटा डोकोमो जैसे विज्ञापनोंके संदर्भ में दी गई। इन विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को हालांकिकाउंसिल ने सही नहीं ठहराया।रात 11 बजे के बाद का स्लॉटए सर्टिफिकेट प्राप्त फिल्मों के लिए माना जाता है। पुरुषों केपरफ्यूम हों या फिर मोबाइल फोन, बच्चों के कपड़े हों या साबुन, टीवीपर इन उत्पादों के कई विज्ञापनों को अश्लील मानते हुए पिछले एक सालमें कई शिकायतें हुई हैं। एएससीआई (विज्ञापन इंडस्ट्री द्वारा गठितआत्म नियंत्रण से जुड़ी संस्था) ने संबंधित विज्ञापनदाताओं कोविज्ञापन हटाने की अपनी सलाह दी  और सूचना व प्रसारण मंत्रालय नेऐसे विज्ञापनों के प्रसारण करने वाले चैनलों को कारण बताओ नोटिस भेजे। टीवी पर सबसे अधिक दिखने वाले डियोडरेंट के विज्ञापनों को सबसे अधिक अश्लील मानते हुए देश भर से व्यक्तियों और समूहों या संगठनों ने सरकार और एएस सीआई के सामने एक्स इफैक्ट, जटक,सेट वेट, किलर डिओ, वाइल्ड स्टोन डिओ, एक्स्ट्रा स्ट्रांग एक्स जैसेकई उत्पादों के टेलीविजन विज्ञापनों को बंद करने से जुड़ी शिकायतें भेजी  जिनमें महिलाओं को आपत्तिजनक तरीके से पेश करने के कारण इन्हें अश्लील माना गया ।एएससीआई ने कई विज्ञापनदाताओं को इन विज्ञापनों में संशोधन करने या इन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं लेकिन इनमें से कई विज्ञापनहर चैनल पर बाकायदा जारी हैं।



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