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सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

पैसे से हासिल की जा रही है काेख

 जैसे जैसे हम तकनीकि और वैज्ञानिक रूप से समृद्ध होते जा रहे हैं हमारी सोच का दायरा उतना ही संकुचित होता जा रहा है। हम जिस इमेज रिफ्लेक्शन के चक्कर में पड़े हैंउसके लिए हम मंहगें कपड़े पहन रहे हैं बढिय़ा गाडिय़ों में घूम रहे हैं।हमारे सपने इस कदर भौतिकतावाद में उलझ रहे हैं कि अबहम बच्चा भी खुद का नहीं चाहते। उसे पैदा करना चाहते हैं।चाहते हैं कि वह हमारे नाम से जाना जाए पर हम उसे खुद सा नहीं देखना चाहते।आज से एक पहले पीढ़ी तक माता- पिता अपने बच्चे में अपना चेहरा देखतेथे। माता-पिता ही क्यों परिवार के अन्य सदस्य भी अपना चेहरा अपने निकटके रिश्ते में देखते थे और गौरवमहसूस करते थे। उसे अपना खूनकहते थे।पर अब जमाना बदल गया है। चिकित्सा विज्ञान में नई-नई तकनीकों नेजहां गंभीर बीमारियों का अब इलाज संभव बनाया वहीं संतानहीनताकाभी हल सुझाया। आईवीएफ व अन्य तकनीक की मदद से संतानहीन दंपतियों कीगोद अब सूनी नहीं रहती।सरोगेट मदर का विकल्प सिलेब्रिटी को भीभाया । आमिरखान जैसे चर्चित अभिनेताने किराए की कोख से बेटे कोजन्म दिया। वह रोल मॉडलके रूप में उभरे। इसकी वजह यह थी कि वहऔर उनकी पत्नी दोनो बहुत व्यस्त थे। सफलता की बुलंदियों को छूने का यहभी एक सच है कि आप अपनी संतान को जन्म तक नहीं दे पाते पर संतान चाहतेहैं।सवाल यह भी है कि फिर उस संतान के लिए समय कैसे निकालाजाएगा उसे बड़ा कैसे किया जाएगा। क्या यहां भी मां का विकल्प मौजूदहोगा? यह बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अब संतानहीन ही नहीं संतानचाहने वाले भी इस प्रयोग को आजमा रहे हैं।पैसे की खनक जहां हैंवहां हर चीज उम्दा चाहिए ना। पिर बच्चे भी उम्दा क्वालिटी के होनेचाहिए।</p><p>इनफर्टिलिटी सोल्यूशन्स सेंटर ट्रिवेक्टर के संस्थापक अध्यक्षदिलीप पाटिल की मानें तो मुंबई में ब्राह्मण डोनर्स की मांग ज्यादाहै। यहां तक कि मुसलमान दंपति भी पूछते हैं कि डोनर शिया है यासुन्नी। पाटिल के अनुसार, भारतीय चिकित्साशोध परिषद केदिशा-निर्देशों के अनुसार हम केवल डोनर के धर्म के बारे में खुलासाकरते हैं न कि जाति के बारे में। पाटिल जाति के बारे में तो नहींबताते लेकिन डोनर की शिक्षा व उसकी नौकरी,उसके व्यवसाय, भाषा वरूचियों संबंधी जानकारी देकर दंपती को संतुष्ट जरूर करते हैं।&nbsp;वह कहते हैं कि एक महिलामेरे पास आई और उसने अनोखी मांग करडाली। महिला केपास जॉन अब्राहम, इमरान हाशमी जैसे बॉलीवुडस्टार्स की लिस्ट थी। उसने स्टार्स को ए, ए प्लस, बी, बी प्लस ग्रेडदे रखे थे। उसने पूछा कि क्या उनके पास इनमें से कोई डोनरहै।एक अखबार के अनुसार भारत में तो नहीं लेकिन विदेशों में संभ्रांतवर्ग मेंडिजायनर बेबीस का चलन है। यहां वीर्य खरीदने के इच्छुकदंपती पूरी सूची केहिसाब से बात करते हैं। जहां तक भारत की बातहै तो यहां डोनर गोपीनीय रहता है। दंपती को केवल इतना बताया जाता हैकि डोनर युवा व स्वस्थ पुरूष है। फिरभी वे जिद करते हैं।महिलाएं डोनर की लंबाई, त्वचा व रंग का अपने पति सेमिलान करनाचाहती हैं। महिलाएं अपने पति से लंबे व गोरे डोनर की चाह रखतीहैं।>डा. पाई कहते हैं, जहां अघिकांश दंपती डोनरकी मेडिकलहिस्ट्री को लेकर सजग रहते हैं वहीं त्वचा के रंग को लेकर भी पसंदज्यादा है। कई समुदाय के लोग गोरी त्वचा वाले डोनर की मांग करतेहैं।प्रमुख सपर्म बैंक मेडिलैब्स में इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डा. अरूणपाटिल के अनुसारउनके 10 प्रतिशत ग्राहक उच्च वर्ग से आते हैं।वे डोनर की पृष्ठभूमि के बारे में जानना चाहते हैं। वे जानना चाहतेहैं कि डोनर किस कॉलेज में पढ़ा है। वेआईआईटी व आईआईएम मेंपढ़े डोनर को तरजीह देते हैं।अब अविवाहित महिलाएं भी बच्चे को जन्म देना चाहती हैं ।इसके लिए वह वीर्य तलाशती हैं। सरोगेट मदर के जरिए वह अपना बच्चा पैदाकरना चाहती हैं। फिछले दिनोंदिल्ली में एक लडक़ी ने ऐसा हीकिया। सरोगेसी का सहारा उसने इसलिए लिया ताकि उसके चरित्र पर समाज कोईसवाल न उठाए और उसके माता-पिता को लज्जित न होना पड़े।यह आने वाला समय ही बताएगा कि क्या डिजाइनर बेबी का यह नयामॉडल क्या हमारे देश में फिट बैठेगा? जहां अभी भी परिवार का परंपरागतढांचा बचा है।
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